पवित्र क़ुरआन मजीद की 114वीं और अंतिम सूरह सूरह नास (Surah An-Nas) है। यह क़ुरआन करीम के 30वें पारे (अम्मा पारा) में मौजूद है। इस्लामी तालीमात में सूरह नास को अल-मुअव्विज़तैन (Al-Mu’awwidhatayn) यानी अल्लाह की पनाह हासिल करने वाली सूरह कहा जाता है। जब इंसान के दिल में शैतानी वसवसे, नकारात्मक ख़यालात, डर, घबराहट, बुरी नज़र या किसी भी तरह की रूहानी परेशानी पैदा होती है, तो यह सूरह मोमिन के लिए एक मज़बूत रूहानी ढाल का काम करती है।
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि ऐसी कोई दूसरी सूरतें नाज़िल नहीं हुईं जो सूरह फलक और सूरह नास की तरह इंसान को हर किस्म की ज़ाहिरी व बातिनी बुराइयों से महफ़ूज़ रख सकें। इस लेख में सूरह नास का सही अरबी मतन, आसान हिंदी उच्चारण, शब्द-दर-शब्द हिंदी तर्जुमा, शान-ए-नुज़ूल, सहीह अहादीस के हवाले, पढ़ने के रूहानी फ़ायदे और सुन्नत तरीक़ा पूरी तफ़्सील के साथ पेश किया गया है।
मुख़्तसर ख़ुलासा: सूरह नास में कुल 6 आयतें हैं। इसमें बंदा अपने परवरदिगार की तीन बड़ी सिफ़ात—इंसानों का रब (रब्बुन्नास), इंसानों का सच्चा बादशाह (मलिकुन्नास) और इंसानों का सच्चा माबूद (इलाहुन्नास)—का वास्ता देकर छुपकर हमला करने वाले शैतान और बुरे इंसानों व जिन्नों के वसवसों से अल्लाह की हिफ़ाज़त तलब करता है।
सूरह नास का संक्षिप्त परिचय (Surah Naas Overview)
सूरह नास के बुनियादी मालूमात को आसानी से समझने के लिए नीचे दी गई तालिका का अवलोकन करें:
| विवरण (Aspect) | प्रामाणिक जानकारी (Details) |
|---|---|
| सूरह संख्या (Surah Number) | 114 (क़ुरआन मजीद की आख़िरी सूरह) |
| पारा (Juz) | पारा नंबर 30 (अम्मा पारा) |
| कुल आयतें (Total Verses) | 6 आयतें (Six Verses) |
| कुल रुकूअ (Ruku) | 1 रुकूअ |
| कुल शब्द (Words) व अक्षर (Letters) | 20 कलिमात (शब्द) और 79 हुरूफ़ (अक्षर) |
| स्थान (Classification) | मक्की सूरह (कुछ मुफ़स्सरीन के नज़दीक मदनी) |
| विशेष उपाधि | अल-मुअव्विज़तैन (सूरह फलक के साथ जोड़ीदार पनाहगाह) |
| मुख्य विषय (Core Theme) | शैतानी वसवसों, बुरी नज़र, डर व इंसानी व जिन्नाती शर से हिफ़ाज़त |
सूरह नास अरबी मतन, हिंदी उच्चारण व तर्जुमा (आयत दर आयत)
जो लोग अरबी पढ़ना नहीं जानते, वे शुद्ध हिंदी उच्चारण (Transliteration) के ज़रिए इस सूरह को आसानी से याद कर सकते हैं। हर आयत का हिंदी तर्जुमा भी साथ दिया गया है ताकि पढ़ते वक़्त आयत का मफ़हूम ज़हन में रहे।
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
हिंदी उच्चारण: बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
तर्जुमा: अल्लाह के नाम से शुरू जो निहायत मेहरबान और हमेशा रहम फ़रमाने वाला है।
आयत 1
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ النَّاسِ ﴿١﴾
हिंदी उच्चारण: क़ुल अऊज़ु बिरब्बिन्-नास।
हिंदी तर्जुमा: (ऐ नबी!) आप कह दीजिए कि मैं इंसानों के रब (पालने वाले और हिफ़ाज़त फ़रमाने वाले) की पनाह में आता हूँ।
आयत 2
مَلِكِ النَّاسِ ﴿٢﴾
हिंदी उच्चारण: मलिकिन्-नास।
हिंदी तर्जुमा: जो इंसानों का हक़ीक़ी बादशाह और मालिक है।
आयत 3
إِلَٰهِ النَّاسِ ﴿٣﴾
हिंदी उच्चारण: इलाहिन्-नास।
हिंदी तर्जुमा: जो इंसानों का सच्चा माबूद (पूज्य) है।
आयत 4
مِن شَرِّ الْوَسْوَاسِ الْخَنَّاسِ ﴿٤﴾
हिंदी उच्चारण: मिन् शर्रिल्-वस्वासिल्-ख़न्नास।
हिंदी तर्जुमा: वसवसा डालने वाले और (अल्लाह के ज़िक्र पर) पीछे हट जाने वाले शैतान की बुराई से।
आयत 5
الَّذِي يُوَسْوِسُ فِي صُدُورِ النَّاسِ ﴿٥﴾
हिंदी उच्चारण: अल्लज़ी युवस्विसु फ़ी सुदूरिन्-नास।
हिंदी तर्जुमा: जो इंसानों के दिलों और सीनों में बुरे ख़यालात और वसवसे डालता है।
आयत 6
مِنَ الْجِنَّةِ وَالنَّاسِ ﴿٦﴾
हिंदी उच्चारण: मिनल्-जिन्नति वन्-नास।
हिंदी तर्जुमा: चाहे वह (वसवसा डालने और बहकाने वाला) जिन्नों में से हो या इंसानों में से।
सूरह नास का शब्द-दर-शब्द अर्थ (Word-by-Word Meaning)
अरबी भाषा की गहराई को समझने के लिए प्रत्येक शब्द का शाब्दिक अर्थ जानना बहुत लाभदायक होता है। इससे तिलावत करते समय दिल में तदब्बुर (गहराई से विचार) पैदा होता है:
| अरबी शब्द (Arabic) | हिंदी उच्चारण | शाब्दिक अर्थ (Hindi Meaning) |
|---|---|---|
| قُلْ | क़ुल | कह दीजिए / आप फ़रमा दीजिए |
| أَعُوذُ | अऊज़ु | मैं पनाह में आता हूँ / शरण लेता हूँ |
| بِرَبِّ | बिरब्बि | रब की / पालने वाले की |
| النَّاسِ | अन्-नास | तमाम इंसानों की / मनुष्य जाति की |
| مَلِكِ | मलिकि | सच्चा बादशाह / वास्तविक स्वामी |
| إِلَٰهِ | इलाहि | सच्चा माबूद / जिसकी इबादत की जाए |
| مِن شَرِّ | मिन् शर्रि | बुराई से / नुक़सान से |
| الْوَسْوَاسِ | अल्-वस्वासि | वसवसा डालने वाला / बुरे ख़याल भड़काने वाला |
| الْخَنَّاسِ | अल्-ख़न्नासि | छुप जाने वाला / अल्लाह के ज़िक्र से पीछे हटने वाला |
| الَّذِي يُوَسْوِسُ | अल्लज़ी युवस्विसु | जो वसवसा डालता है |
| فِي صُدُورِ | फ़ी सुदूरि | सीनों में / दिलों के अंदर |
| مِنَ الْجِنَّةِ | मिनल्-जिन्नति | जिन्नात में से |
| وَالنَّاسِ | वन्-नास | और इंसानों में से |
सूरह नास का शान-ए-नुज़ूल (पृष्ठभूमि व अवतरण का कारण)
तफ़्सीर इब्ने कसीर और सहीह हदीसों के मुताबिक़, सूरह नास और सूरह फलक दोनों एक साथ एक विशेष ऐतिहासिक घटना के समय नाज़िल हुई थीं। मदीना मुनव्वरा में लबीद बिन आसम नामक एक यहूदी जादूगर ने नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की ज़ुल्फ़-ए-मुबारक के कुछ बालों और कंघी के टूटे हुए दांतों पर जादू करके ग्यारह (11) गिरहें (गांठें) बांधी थीं और उसे ज़रवान नामक एक गहरे कुएं के अंदर भारी पत्थर के नीचे दबा दिया था।
इस जादू के असर से आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को भारीपन और तकलीफ़ महसूस होने लगी। तब अल्लाह तआला ने हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम को भेजा जिन्होंने पूरे मामले से आगाह किया। जिब्रील अलैहिस्सलाम दोनों सूरतों—सूरह फलक (5 आयतें) और सूरह नास (6 आयतें), कुल मिलाकर 11 आयतें लेकर नाज़िल हुए। हज़रत अली रज़ियल्लाहु अन्हु ने कुएं से वह चीज़ निकाली। जैसे-जैसे आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम एक-एक आयत की तिलावत फ़रमाते गए, जादू की एक-एक गांठ खुलती चली गई और आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम पूरी तरह सेहतमंद हो गए।

सूरह नास की फ़ज़ीलत पर प्रामाणिक सहीह अहादीस
हदीस की मोतबर किताबों में सूरह नास और सूरह फलक की बेहद बुलंद फ़ज़ीलतें बयान की गई हैं:
1. सहीह बुख़ारी की रिवायत (रात को सोते वक़्त का सुन्नत अमल)
उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा सिद्दीक़ा रज़ियल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम जब हर रात अपने बिस्तर पर तशरीफ़ ले जाते, तो अपनी दोनों हथेलियों को मिलाकर उनमें फूंकते और उन पर क़ुल हुवल्लाहु अहद (सूरह इख़्लास), क़ुल अऊज़ु बिरब्बिल फ़लक़ (सूरह फलक) और क़ुल अऊज़ु बिरब्बिन्नास (सूरह नास) पढ़ते। फिर अपने दोनों हाथों को अपने जिस्म के जितने हिस्से पर फेर सकते फेरते—शुरुआत अपने सर, चेहरे और बदन के सामने के हिस्से से करते। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ऐसा तीन बार करते थे। (सहीह बुख़ारी, हदीस 5017)
2. सहीह मुस्लिम की रिवायत (ऐसी बेमिसाल आयतें जो कभी नहीं देखी गईं)
हज़रत उक़्बा बिन आमिर रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “क्या तुमने नहीं देखा कि आज रात मुझ पर ऐसी आयतें नाज़िल हुई हैं जिनकी कोई मिसाल पहले कभी नहीं देखी गई? वे हैं—क़ुल अऊज़ु बिरब्बिल फ़लक़ (सूरह फलक) और क़ुल अऊज़ु बिरब्बिन्नास (सूरह नास)।” (सहीह मुस्लिम, हदीस 814)
3. जामेअ तिर्मिज़ी व अबू दाऊद की रिवायत (हर चीज़ से हिफ़ाज़त के लिए काफ़ी)
हज़रत अब्दुल्लाह बिन खुबैब रज़ियल्लाहु अन्हु रिवायत करते हैं कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “तुम सुबह और शाम के वक़्त तीन-तीन मर्तबा क़ुल हुवल्लाहु अहद और दोनों मुअव्विज़तैन (सूरह फलक और सूरह नास) पढ़ लिया करो, यह तुम्हें हर तरह के नुक़सान, मुसीबत और बुराई से बचाने के लिए काफ़ी हो जाएंगी।” (सुनन अबी दाऊद 5082, जामेअ तिर्मिज़ी 3575)
सूरह नास पढ़ने के रूहानी व मानसिक फ़ायदे
दैनिक जीवन में सूरह नास की तिलावत से हासिल होने वाले प्रमुख रूहानी व मानसिक लाभ निम्नलिखित हैं:
- शैतानी वसवसों और Overthinking से निजात: जो लोग अनचाहे बुरे ख़यालात, शक, वहम या अत्यधिक सोच (Overthinking) से परेशान रहते हैं, उनके लिए सूरह नास एक आज़मूदा इलाज है। यह शैतानी ख़यालों की जड़ पर वार करती है।
- बुरी नज़र (Evil Eye) और हसद से सुरक्षा: समाज में मौजूद ईर्ष्यालु और हसद करने वाले लोगों की बुरी नज़र से बचने के लिए सूरह फलक के साथ सूरह नास पढ़ना सबसे मज़बूत क़ुरआनी तावीज़ है।
- नींद में डरने और बुरे सपनों से हिफ़ाज़त: छोटे बच्चे या बड़े जो रात को अचानक डर कर उठ जाते हैं या डरावने ख़्वाब देखते हैं, उन्हें सोने से पहले यह सूरह पढ़कर अपने सीने और तकिए पर दम करना चाहिए।
- घबराहट, बेचैनी और डिप्रेशन में दिल का सुकून: जब दिल किसी अज्ञात डर या घबराहट से धड़कने लगे, तो सूरह नास की तिलावत क़ल्ब को तुरंत इत्मीनान और सुकून बख्शती है।
- बुरे इंसानों और छुपे हुए दुश्मनों की साज़िशों से बचाव: आयत 6 में स्पष्ट किया गया है कि बहकाने वाले केवल जिन्नात नहीं बल्कि कपटी इंसान भी होते हैं। यह सूरह दोनों के शर से हिफ़ाज़त दिलाती है।
अल्लाह की तीन अज़ीम सिफ़ात का गहरा तफ़्सीरी विश्लेषण
सूरह नास की शुरुआती तीन आयतों में अल्लाह तआला ने अपने तीन पवित्र नामों का ज़िक्र फ़रमाया है, जिसके पीछे गहरा आध्यात्मिक हिकमत है:
- रब्बुन्-नास (इंसानों का रब): ‘रब’ उस ज़ात को कहते हैं जो किसी चीज़ को उसकी पैदाइश से लेकर मुकम्मल दर्जा पाने तक पालती है, ज़रूरतें पूरी करती है और ख़तरों से बचाती है। जब हम अल्लाह को इंसानों का रब मानकर पनाह मांगते हैं, तो इसका अर्थ है कि केवल वही हमारा सच्चा मुहाफ़िज़ (रक्षक) है।
- मलिकुन्-नास (इंसानों का हक़ीक़ी बादशाह): दुनिया के राजा या हुक्मरान केवल ज़ाहिरी हुकूमत रखते हैं, लेकिन दिलों और रूहों पर केवल अल्लाह की हुकूमत है। शैतान जब इंसान को गुमराह करने की कोशिश करता है, तो इंसान सब बादशाहों के बादशाह (अहकमुल हाकिमीन) के दरबार में शरण लेता है।
- इलाहुन्-नास (इंसानों का सच्चा माबूद): जब अल्लाह ही रब है और वही बादशाह है, तो इबादत और झुकने का हक़दार भी सिर्फ़ वही है। यह तौहीद का सबसे बड़ा इज़हार है कि बंदा अपनी हर कमज़ोरी और डर को अल्लाह के हवाले कर देता है।
अल-वस्वास अल-ख़न्नास का सही अर्थ और शैतान का तरीक़ा-ए-वारदात
आयत नंबर 4 में शैतान को अल-वस्वास (Al-Waswas) और अल-ख़न्नास (Al-Khannas) कहा गया है। अरबी भाषा में वस्वास का अर्थ है बार-बार छुपकर धीमे से दिल में ख़याल डालना। वहीं ‘ख़न्नास’ का अर्थ होता है पीछे हटने वाला या दुबक जाने वाला।
हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा फ़रमाते हैं: “शैतान इंसान के दिल पर अपना पंजा जमाए बैठा रहता है। जब इंसान अल्लाह का ज़िक्र करता है, तो वह दुबक कर पीछे हट (ख़न्नास हो) जाता है; और जब इंसान अल्लाह के ज़िक्र से ग़ाफ़िल होता है, तो वह दिल में बुरे वसवसे डालने लगता है।”
यही कारण है कि जब भी मन में किसी गुनाह का ख़याल आए, शक पैदा हो या नमाज़ व वज़ू में वहम सताए, तुरंत “अऊज़ु बिल्लाहि मिनश-शैतानिर्रजीम” और सूरह नास पढ़नी चाहिए।
सूरह फलक और सूरह नास में क्या अंतर है? (तुलनात्मक अध्ययन)
क़ुरआन मजीद की इन दोनों अंतिम सूरतों को मिलाकर ‘अल-मुअव्विज़तैन’ कहा जाता है, लेकिन दोनों के विषय में बहुत बारीक और गहरा फ़र्क़ है:
| तुलना का आधार (Criteria) | सूरह फलक (Surah Al-Falaq) | सूरह नास (Surah An-Nas) |
|---|---|---|
| बुराई का प्रकार (Nature of Harm) | बाहरी बुराइयां (External Evils) जैसे रात का अंधेरा, जादू-टोना, और हसद करने वाले की नज़र। | आंतरिक बुराइयां (Internal Evils) जैसे दिल के वसवसे, वहम, शक और रूहानी गुमराही। |
| अल्लाह की सिफ़ात (Attributes Invoked) | एक सिफ़त: रब्बिल फ़लक़ (सुबह के उजाले का रब)। | तीन सिफ़ात: रब्बुन्नास, मलिकुन्नास, इलाहुन्नास। |
| हमले का निशाना | इंसान का जिस्म, सेहत और माल। | इंसान का ईमान, अक़ीदा और नीयत। |
| गंभीरता (Severity) | दुनियावी नुक़सान की भरपाई मुमकिन है। | ईमान के नुक़सान से आख़िरत बर्बाद होती है, इसलिए इसमें तीन सिफ़ात से पनाह मांगी गई। |
सूरह नास पढ़ने का सही मसनून तरीक़ा व औक़ात
सुन्नत के मुताबिक़ सूरह नास को अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में शामिल करने के सबसे अफ़ज़ल तरीक़े ये हैं:
- सुबह और शाम के अज़कार में: फ़ज्र की नमाज़ के बाद और मग़रिब की नमाज़ के बाद 3-3 बार सूरह इख़्लास, सूरह फलक और सूरह नास पढ़ें।
- हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद: पाँचों वक़्त की फ़र्ज़ नमाज़ का सलाम फेरने और दुआ करने के बाद एक बार सूरह फलक और एक बार सूरह नास पढ़ना सुन्नत से साबित है।
- बिस्तर पर सोने से पहले: दोनों हथेलियां जोड़कर तीनों क़ुल (इख़्लास, फलक, नास) पढ़ें, हथेलियों पर हल्की फूंक (दम) मारें और पूरे जिस्म पर फेरें। यह अमल 3 बार दोहराएं।
- बीमारी या घबराहट की हालत में: जब भी कोई बीमारी, सरदर्द, बदन दर्द या दिल में बेचैनी महसूस हो, तो सूरह नास पढ़कर तकलीफ़ वाली जगह पर हाथ रखकर दम करें।
क़ुरआन मजीद व मसनून दुआओं के महत्वपूर्ण लेख
- सूरह फलक इन हिंदी (Surah Falaq in Hindi) – अरबी मतन, तर्जुमा व फ़ज़ीलत
- आयतुल कुर्सी हिंदी में (Ayatul Kursi in Hindi) – तर्जुमा व हिफ़ाज़त की बरकत
- नज़र से बचने की दुआ हिंदी में (Nazar Se Bachne Ki Dua)
- बेचैनी और घबराहट दूर करने की दुआ (Bechaini Ki Dua in Hindi)
- सोने की दुआ और सोकर उठने की मसनून दुआएं
- हर दर्द से निजात की मसनून दुआ (Dard Ki Dua in Hindi)
Frequently Asked Questions (FAQs)
1. सूरह नास क़ुरआन मजीद की कौन सी सूरह है और इसमें कितनी आयतें हैं?
सूरह नास पवित्र क़ुरआन मजीद की 114वीं और अंतिम सूरह है। यह क़ुरआन के 30वें पारे (अम्मा पारा) में स्थित है और इसमें कुल 6 आयतें, 1 रुकूअ, 20 शब्द और 79 अक्षर हैं।
2. सूरह नास का बुनियादी पैग़ाम और केंद्रीय विषय क्या है?
सूरह नास का मुख्य विषय अल्लाह तआला की पनाह हासिल करना है। इसमें इंसान अपने परवरदिगार से शैतान के छुपे हुए हमलों, दिल के वसवसों, वहम, बुरी संगति और जिन्नातों व इंसानों के बुरे षड्यंत्रों से हिफ़ाज़त की दुआ करता है।
3. अल-मुअव्विज़तैन का क्या अर्थ है और इसमें कौन सी सूरहें शामिल हैं?
अल-मुअव्विज़तैन (Al-Mu’awwidhatayn) एक अरबी शब्द है जिसका अर्थ है ‘पनाह मांगने वाली दो सूरहें’। क़ुरआन मजीद की अंतिम दो सूरहें—सूरह फलक (Surah 113) और सूरह नास (Surah 114)—को संयुक्त रूप से अल-मुअव्विज़तैन कहा जाता है।
4. नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रात को सोते समय सूरह नास कैसे पढ़ते थे?
सहीह बुख़ारी (हदीस 5017) के अनुसार, आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम रात को बिस्तर पर जाते समय अपनी दोनों हथेलियों को मिलाकर सूरह इख़्लास, सूरह फलक और सूरह नास पढ़ते थे। फिर हथेलियों पर दम करके अपने सर, चेहरे और पूरे शरीर पर जहां तक हाथ पहुँच सके फेरते थे। यह अमल आप 3 बार करते थे।
5. क्या वसवसों और घबराहट से बचने के लिए सूरह नास पढ़ना काफ़ी है?
हाँ, हदीस के मुताबिक़ सुबह और शाम 3-3 बार सूरह फलक और सूरह नास पढ़ना हर तरह की मुसीबत और वसवसे से बचने के लिए काफ़ी है। इसके साथ ही अऊज़ु बिल्लाहि मिनश-शैतानिर्रजीम पढ़ने से भी शैतान दूर भागता है।
6. क्या सूरह नास को नमाज़ में सूरह फ़ातिहा के बाद पढ़ा जा सकता है?
हाँ, फ़र्ज़, सुन्नत या नफ़्ल नमाज़ की किसी भी रकात में सूरह फ़ातिहा के बाद सूरह नास पढ़ी जा सकती है। यदि पहली रकात में सूरह फलक पढ़ी जाए और दूसरी रकात में सूरह नास पढ़ी जाए, तो यह मुस्तहब और तरतीब के मुताबिक़ उत्तम है।