सूरह फलक पवित्र क़ुरआन की 113वीं सूरह है। यह छोटी लेकिन बेहद महत्वपूर्ण सूरह है, जिसमें अल्लाह तआला से हर प्रकार की बुराई, अंधकार, जादू और हसद (ईर्ष्या) से पनाह मांगी जाती है। इसी वजह से इसे मुसलमान अपनी रोज़मर्रा की दुआओं और नमाज़ में भी पढ़ते हैं। अगर आप Surah Falaq in Hindi, उसका हिंदी तर्जुमा, मतलब और फ़ज़ीलत जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है।
☪ Surah: Surah: Al-Falaq [113]
قُلْ أَعُوذُ بِرَبِّ الْفَلَقِ
مِن شَرِّ مَا خَلَقَ
وَمِن شَرِّ غَاسِقٍ إِذَا وَقَبَ
ِوَمِن شَرِّ النَّفَّاثَاتِ فِي الْعُقَدِ
وَمِن شَرِّ حَاسِدٍ إِذَا حَسَدَ
कुल अऊजु बिरब्बिल फलक, मिन शर रिमा ख़लक़, वामिन शर रिग़ासिकिन इज़ा वकब, वमिन शर रिन, नफ़फ़ासाति फ़िल उक़द, वमिन शर रि हासिदिन इज़ा हसद
Surah Al-Falaq (English Translation):
"Say, 'I seek refuge in the Lord of the daybreak, from the evil of what He has created, and from the evil of the darkness when it settles, and from the evil of those who blow on knots, and from the evil of an envier when he envies.'" (Qur'an 113:1-5)
सूरह फलक की फ़ज़ीलत
सूरह फलक की बहुत बड़ी फ़ज़ीलत बयान की गई है। इसे पढ़ने से अल्लाह की हिफाज़त और रहमत हासिल होती है।
इस सूरह की कुछ अहम फ़ज़ीलतें:
- हर प्रकार की बुराई से अल्लाह की पनाह मिलती है।
- बुरी नज़र और हसद से हिफाज़त होती है।
- जादू और शैतानी असर से बचाव की दुआ है।
- सुबह और शाम की अज़कार में इसे पढ़ना मस्नून है।
- सोने से पहले सूरह इख़लास और सूरह नास के साथ पढ़ना सुन्नत है।
सूरह फलक कब पढ़नी चाहिए?
आप सूरह फलक इन मौकों पर पढ़ सकते हैं:
- सुबह और शाम की दुआओं में।
- सोने से पहले।
- किसी डर, परेशानी या चिंता के समय।
- बुरी नज़र या हसद से बचने की दुआ के रूप में।
- नमाज़ में सूरह फ़ातिहा के बाद।
अगर आप नमाज़ में पढ़ी जाने वाली दूसरी छोटी सूरह भी सीखना चाहते हैं, तो सूरह इख़लास, सूरह नास, सूरह काफ़िरून और सूरह कद्र भी ज़रूर पढ़ें।
सूरह फलक से क्या सीख मिलती है?
सूरह फलक हमें कई महत्वपूर्ण बातें सिखाती है:
- हर हाल में अल्लाह पर भरोसा करना।
- बुराई से बचने के लिए अल्लाह से दुआ करना।
- हसद और ईर्ष्या से खुद भी बचना।
- केवल अल्लाह ही असली हिफाज़त करने वाला है।
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