इस्लाम एक मुकम्मल ज़ाब्ता-ए-हयात (Complete Code of Life) है जो इंसान को 24 घंटे अल्लाह तआला की याद और हिफ़ाज़त के साए में रहने की तालीम देता है। नींद अल्लाह तआला की अज़ीम नेमतों में से एक है, जिसे क़ुरआन मजीद में मौत की एक शक्ल (मौत-ए-सुग़रा) क़रार दिया गया है। जब इंसान सोता है तो उसकी रूह जिस्म के इख़्तियार से बाहर हो जाती है, और जब सुबह बेदार होता है तो अल्लाह तआला उसे एक नई ज़िंदगी अता फ़रमाता है। इसी वजह से रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने रात को सोने से पहले और सुबह सोकर उठने के बाद ख़ास मसनून दुआएं तालीम फ़रमाई हैं, जिन्हें सोने की दुआ (Sone Ki Dua In Hindi) और सोकर उठने की दुआ (Sokar Uthne Ki Dua) कहा जाता है।
अक्सर लोग बुरे ख़्वाबों, बेचैनी और नींद न आने की शिकायत करते हैं। अगर रात को सुन्नत तरीक़े के मुताबिक बिस्तर झाड़कर, बा-वज़ू होकर और मसनून दुआ पढ़कर सोया जाए तो पूरी रात अल्लाह के फ़रिश्ते इंसान की हिफ़ाज़त करते हैं। इस गाइड में हम सोने से पहले की दुआ, सुबह सोकर उठने की दुआ, नींद न आने की दुआ, अरबी मतन, आसान हिंदी उच्चारण, लफ़्ज़-ब-लफ़्ज़ हिंदी तर्जुमा और सोने के तमाम सुन्नत आदाब जानेंगे।
हदीस-ए-मुबारका: हज़रत हुज़ैफ़ा (रज़ि.) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) जब रात को अपने बिस्तर पर आराम फ़रमाने के लिए तशरीफ़ ले जाते, तो अपना दायाँ हाथ अपने रुख़सार (गाल) के नीचे रखते और यह दुआ पढ़ते: “अल्लाहुम्मा बि-इस्मका अमूतु व अहया।” और जब बेदार होते तो फ़रमाते: “अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अहयाना बा’दा मा अमाताना व इलैहिन्-नुशूर।” (सहीह बुख़ारी: 6312)
सोने से पहले की दुआ (Sone Se Pehle Ki Dua)
बिस्तर पर लेटते वक़्त दायाँ हाथ अपने दाएं रुख़सार के नीचे रखकर यह मसनून दुआ पढ़नी चाहिए:
अरबी मतन:
اللّٰهُمَّ بِاسْمِكَ أَمُوتُ وَأَحْيَا
हिंदी उच्चारण:
“अल्लाहुम्मा बि-इस्मका अमूतु व अहया।”
हिंदी तर्जुमा:
“ऐ अल्लाह! मैं तेरे ही नाम के साथ मरता हूँ (यानी सोता हूँ) और तेरे ही नाम के साथ जीता हूँ (यानी जागता हूँ)।”
सोकर उठने की दुआ (Sokar Uthne Ki Dua)
जब सुबह नींद खुले तो सबसे पहले अल्लाह तआला का शुक्र अदा करते हुए यह दुआ पढ़ें:
अरबी मतन:
الْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذِي أَحْيَانَا بَعْدَ مَا أَمَاتَنَا وَإِلَيْهِ النُّشُورُ
हिंदी उच्चारण:
“अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अहयाना बा’दा मा अमाताना व इलैहिन्-नुशूर।”
हिंदी तर्जुमा:
“तमाम तारीफ़ें उस अल्लाह के लिए हैं जिसने हमें मौत (नींद) के बाद दोबारा ज़िंदगी बख़्शी, और उसी की तरफ़ हमें जी कर दोबारा उठना है।”
सोने के सुन्नत आदाब और हिफ़ाज़त के आमाल
रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) के सुन्नत तरीक़े के मुताबिक सोने के आदाब नीचे दिए गए हैं:
| सुन्नत अमल | तरीक़ा व शरई हुक्म | फ़ज़ीलत व फ़ायदा |
|---|---|---|
| 1. बा-वज़ू होकर सोना | सोने से पहले नमाज़ जैसा मुकम्मल वज़ू करना | फ़रिश्ता रात भर उसके लिए मग़फ़िरत की दुआ करता रहता है। |
| 2. बिस्तर झाड़ना | बिस्तर पर लेटने से पहले चादर को 3 बार झाड़ना | कीड़े-मकोड़ों और नुक़सानदेह चीज़ों से हिफ़ाज़त होती है। |
| 3. दाएँ करवट लेटना | दाहिनी करवट पर लेटकर दायाँ हाथ गाल के नीचे रखना | नबी करीम (सल्ल.) की पसंदीदा सुन्नत और सेहत के लिए मुफ़ीद है। |
| 4. आयतल कुर्सी व तीन क़ुल | आयतल कुर्सी और सूरह इख़्लास, फ़लक़, नास पढ़कर हाथों पर दम करके बदन पर फेरना | शैतान, जिन्नात, जादू और बुरे ख़्वाबों से सुबह तक हिफ़ाज़त रहती है। |
| 5. तस्बीह-ए-फ़ातिमी | 33 बार सुब्हानअल्लाह, 33 बार अल्हम्दुलिल्लाह, 34 बार अल्लाहु अकबर | दिन भर की थकान दूर होती है और जिस्मानी ताक़त नसीब होती है। |
रात को नींद न आने पर पढ़ने की दुआ
अगर किसी को बेचैनी या वहम की वजह से नींद न आ रही हो, तो हज़रत ज़ैद बिन साबित (रज़ि.) की रिवायत की गई यह मुबारका दुआ पढ़ें:
اللَّهُمَّ غَارَتِ النُّجُومُ، وَهَدَأَتِ الْعُيُونُ، وَأَنْتَ حَيٌّ قَيُّومٌ، لَا تَأْخُذُكَ سِنَةٌ وَلَا نَوْمٌ، يَا حَيُّ يَا قَيُّومُ، أَهْدِئْ لَيْلِي، وَأَنِمْ عَيْنِي
हिंदी उच्चारण: “अल्लाहुम्मा ग़ारतिन्-नुजूमु व ह-दअतिल-उयूनु, व अन्ता हय्युन क़य्यूम, ला तअख़ुजुका सिनतुंव-वला नौम, या हय्यु या क़य्यूमु अहदिअ लैली व अनिम ऐनी।”
तर्जुमा: “ऐ अल्लाह! सितारे डूब गए और आंखें सो गईं, और तू हमेशा ज़िंदा और सब का थामने वाला है, तुझे न ऊंघ आती है और न नींद। ऐ हमेशा ज़िंदा रहने वाले! मेरी रात को पुरसुकून बना दे और मेरी आंख को सुला दे।”
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. सोने की दुआ किस वक़्त पढ़नी चाहिए?
सोने की दुआ बिल्कुल बिस्तर पर लेटते वक़्त दाहिनी करवट होकर पढ़नी चाहिए जब आप बात-चीत बंद करके सोने का पक्का इरादा कर चुके हों।
2. क्या पेट के बल (उल्टा) सोना इस्लाम में मना है?
हाँ, पेट के बल औंधा सोना हदीस में मना फ़रमाया गया है। रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया कि इस तरह लेटना अल्लाह तआला को नापसंद है।
3. अगर रात को बुरा ख़्वाब आए तो क्या करना चाहिए?
अगर डरावना ख़्वाब दिखे तो बाईं तरफ़ 3 बार थुथकारें, “अऊजु बिल्लाहि मिनश-शैतानिर-रजीम” पढ़ें, अपनी करवट बदल लें और वह ख़्वाब किसी से ज़िक्र न करें।
4. क्या बिना वज़ू सोने की दुआ पढ़ सकते हैं?
हाँ, ज़बानी दुआ पढ़ने के लिए वज़ू होना फ़र्ज़ नहीं है, लेकिन वज़ू करके सोना अफ़ज़ल और सुन्नत-ए-मुस्तहब्बा है।