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सूरह माऊन इन हिंदी (Surah Maun in Hindi) | अरबी मतन, हिंदी तर्जुमा, यतीमों के हक़ व नमाज़ की ग़फ़लत

By Mariya Ansari •

पवित्र क़ुरआन मजीद की 107वीं सूरह सूरह माऊन (Surah Al-Ma’un) है। यह क़ुरआन करीम के 30 (अम्मा पारा) में स्थित है और इसमें कुल 7 आयतें हैं। सूरह माऊन इस्लामी समाज के नैतिक और सामाजिक मूल्यों का आईना है। इसमें उन लोगों की सख्त निंदा की गई है जो आख़िरत के बदले को झुठलाते हैं, यतीमों को धक्के देते हैं, ग़रीबों को खाना खिलाने की तरग़ीब नहीं देते, अपनी नमाज़ों से ग़ाफ़िल रहते हैं, दिखावा (रियाकारी) करते हैं और आम ज़रूरत की छोटी-छोटी चीज़ें (माऊन) भी किसी को देने से रोकते हैं।

मुसलमानों के लिए इस सूरह को सही उच्चारण और तर्जुमे के साथ समझना बेहद ज़रूरी है क्योंकि यह रोज़मर्रा की पाँचों वक़्त की नमाज़ों में कसरत से पढ़ी जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण सूरतों में से एक है। इस विस्तृत लेख में सूरह माऊन का शुद्ध अरबी मतन, आसान हिंदी उच्चारण, शब्द-दर-शब्द तर्जुमा, शान-ए-नुज़ूल, सहीह हदीस के हवाले, फ़ज़ीलत व नमाज़ में पढ़ने का सुन्नत तरीक़ा पूरी तफ़्सील के साथ पेश किया गया है।

मुख़्तसर ख़ुलासा: सूरह माऊन इस्लामी समाज के नैतिक और सामाजिक मूल्यों का आईना है। इसमें उन लोगों की सख्त निंदा की गई है जो आख़िरत के बदले को झुठलाते हैं, यतीमों को धक्के देते हैं, ग़रीबों को खाना खिलाने की तरग़ीब नहीं देते, अपनी नमाज़ों से ग़ाफ़िल रहते हैं, दिखावा (रियाकारी) करते हैं और आम ज़रूरत की छोटी-छोटी चीज़ें (माऊन) भी किसी को देने से रोकते हैं।

सूरह माऊन का संक्षिप्त परिचय (Overview Table)

विवरण (Aspect) प्रामाणिक जानकारी (Details)
सूरह संख्या (Surah Number) 107
पारा (Juz) 30 (अम्मा पारा)
कुल आयतें (Total Verses) 7 आयतें
कुल रुकूअ (Ruku) 1 रुकूअ
शब्द व अक्षर संख्या 25 कलिमात और 114 हुरूफ़
मक़ाम-ए-नुज़ूल (Classification) मक्की सूरह (बाज़ के नज़दीक मदनी)

सूरह माऊन अरबी मतन, हिंदी उच्चारण व तर्जुमा (आयत दर आयत)

नीचे सूरह माऊन की सभी आयतों का स्पष्ट अरबी मतन, आसान हिंदी उच्चारण (Transliteration) और अर्थ दिया गया है ताकि आप इसे सही तरीक़े से याद कर सकें:

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

हिंदी उच्चारण: बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

तर्जुमा: अल्लाह के नाम से शुरू जो निहायत मेहरबान और हमेशा रहम फ़रमाने वाला है।

आयत 1

أَرَأَيْتَ الَّذِي يُكَذِّبُ بِالدِّينِ ﴿١﴾

हिंदी उच्चारण: अ-र-अय्तल्लज़ी युकज़्ज़िबु बिद्दीन।

हिंदी तर्जुमा: क्या आपने उस शख़्स को देखा जो जज़ा व सज़ा (आख़िरत के बदले) को झुठलाता है?

आयत 2

فَذَٰلِكَ الَّذِي يَدُعُّ الْيَتِيمَ ﴿٢﴾

हिंदी उच्चारण: फ़ज़ालिकल-लज़ी यदुअ़्उल-यतीम।

हिंदी तर्जुमा: तो यही वह शख़्स है जो यतीम को धक्के देता है (उसका हक़ मारता है)।

आयत 3

وَلَا يَحُضُّ عَلَىٰ طَعَامِ الْمِسْكِينِ ﴿٣﴾

हिंदी उच्चारण: वला यहुद्दु अला त़आमिल-मिस्कीन।

हिंदी तर्जुमा: और न मिस्कीन (ग़रीब) को खाना खिलाने की तरग़ीब देता है।

आयत 4

فَوَيْلٌ لِّلْمُصَلِّينَ ﴿٤﴾

हिंदी उच्चारण: फ़-वैलुल-लिल-मुस़ल्लीन।

हिंदी तर्जुमा: अतः बर्बादी (हलाकत) है उन नमाज़ियों के लिए।

आयत 5

الَّذِينَ هُمْ عَن صَلَاتِهِمْ سَاهُونَ ﴿٥﴾

हिंदी उच्चारण: अल्लज़ी-न हुम अन सलातिहिम् साहून।

हिंदी तर्जुमा: जो अपनी नमाज़ से ग़ाफ़िल (लापरवाह) हैं।

आयत 6

الَّذِينَ هُمْ يُرَاءُونَ ﴿٦﴾

हिंदी उच्चारण: अल्लज़ी-न हुम युरा-ऊन।

हिंदी तर्जुमा: जो (सिर्फ़ लोगों को दिखाने के लिए) दिखावा (रियाकारी) करते हैं।

आयत 7

وَيَمْنَعُونَ الْمَاعُونَ ﴿٧﴾

हिंदी उच्चारण: व यम्नऊनल-माऊन।

हिंदी तर्जुमा: और बरतने की आम छोटी-मोटी चीज़ें (माऊन) भी दूसरों को देने से रोकते हैं।

सूरह माऊन का शब्द-दर-शब्द अर्थ (Word-by-Word Meaning)

अरबी भाषा की गहराई और क़ुरआनी अल्फ़ाज़ के सही मफ़हूम को समझने के लिए प्रत्येक शब्द का अर्थ नीचे दी गई तालिका में देखें:

अरबी शब्द (Arabic) हिंदी उच्चारण शाब्दिक अर्थ (Hindi Meaning)
أَرَأَيْتَ अ-र-अय्त क्या आपने देखा
الَّذِي अल्लज़ी उस शख़्स को जो
يُكَذِّبُ युकज़्ज़िबु झुठलाता है
بِالدِّينِ बिद्दीन क़यामत के दिन / दीन को
فَذَٰلِكَ फ़ज़ालिका तो वही है
يَدُعُّ यदुअ़्उ धक्के देता है / सताता है
الْيَتِيمَ अल्-यतीम अनाथ / यतीम को
وَلَا يَحُضُّ वला यहुद्दु और नहीं उभारता
عَلَىٰ طَعَامِ अला त़आमि खाना खिलाने पर
الْمِسْكِينِ अल्-मिस्कीन लाचार / ग़रीब को
فَوَيْلٌ फ़-वैलुन तो बर्बादी व हलाकत है
لِّلْمُصَلِّينَ लिल-मुस़ल्लीन नमाज़ पढ़ने वालों के लिए
عَن صَلَاتِهِمْ अन सलातिहिम् अपनी नमाज़ से
سَاهُونَ साहून ग़ाफ़िल / बेपरवाह
يُرَاءُونَ युरा-ऊन दिखावा करते हैं
وَيَمْنَعُونَ व यम्नऊन और रोकते हैं
الْمَاعُونَ अल्-माऊन आम ज़रूरत की मामूली चीज़ें

सूरह माऊन का शान-ए-नुज़ूल (पृष्ठभूमि व अवतरण का कारण)

यह सूरह मक्का के उन दौलतमंद सरदारों (जैसे आस बिन वाइल, वलीद बिन मुग़ीरा या अबू जहल) के बारे में नाज़िल हुई जो यतीमों का माल हड़प लेते थे। एक यतीम बच्चा जब अपने बाप के छोड़े हुए माल में से अपनी ज़रूरत के लिए कुछ माँगने आया, तो अबू जहल ने उसे धक्के मारकर भगा दिया। वहीं मदीना के मुनाफ़िक़ों की आदत थी कि जब मुसलमानों के साथ होते तो दिखावे के लिए नमाज़ पढ़ते, और जब अकेले होते तो नमाज़ छोड़ देते थे। अल्लाह ने इस सूरह में ऐसे पाखंडियों की पोल खोल दी।

सूरह माऊन की फ़ज़ीलत व रूहानी बरकत
सूरह माऊन की तिलावत से मोमिन के दिल में ईमान की ताज़गी और रूहानी सुकून हासिल होता है।

सूरह माऊन की फ़ज़ीलत पर प्रामाणिक सहीह अहादीस

हदीस की किताबों में सूरह माऊन की असीम फ़ज़ीलतें दर्ज हैं:

सहीह बुख़ारी (हदीस 5304) – यतीम की कफ़ालत

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने अपनी शहादत की उंगली और दरमियानी उंगली को मिलाकर फ़रमाया: ‘मैं और यतीम की परवरिश व कफ़ालत करने वाला जन्नत में इस तरह साथ होंगे।’ सूरह माऊन यतीमों के साथ हुस्ने सुलूक की सबसे बड़ी ताकीद करती है।

मुसनद अहमद – नमाज़ में दिखावे (रिया) की सज़ा

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: ‘मुझे अपनी उम्मत पर जिस चीज़ का सबसे ज़्यादा ख़ौफ़ है, वह छोटा शिर्क (शिर्क-ए-असग़र) यानी रियाकारी (दिखावा) है।’

सहीह मुस्लिम (हदीस 622) – नमाज़ को टालने वाले

हज़रत अनस रज़ियल्लाहु अन्हु फ़रमाते हैं कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: ‘यह मुनाफ़िक़ की नमाज़ है कि वह बैठा सूरज का इंतज़ार करता रहता है, यहाँ तक कि जब वह डूबने लगता है तो उठकर चार ठोंगें मार लेता है जिसमें अल्लाह का ज़िक्र बहुत कम करता है।’

सूरह माऊन पढ़ने के रूहानी व व्यावहारिक फ़ायदे

इस पवित्र सूरह की नियमित तिलावत से हासिल होने वाले प्रमुख आध्यात्मिक लाभ निम्नलिखित हैं:

  • दिल में यतीमों, ग़रीबों और बेबसों के प्रति दया और मदद का जज़्बा पैदा होना।
  • नमाज़ को वक़्त पर ख़ुशूअ व ख़ुज़ूअ के साथ पढ़ने की तौफ़ीक़ मिलना।
  • दिखावे (रियाकारी) की बीमारी से क़ल्ब की हिफ़ाज़त और इख़्लास की प्राप्ति।
  • पड़ोसियों और ज़रूरतमंदों के साथ छोटी-मोटी चीज़ों में सहयोग करने की आदत बनना।

नमाज़ में सूरह माऊन पढ़ने का मसनून तरीक़ा व नियम

सूरह माऊन नमाज़ की किसी भी रकात में पढ़ी जा सकती है। इसे पढ़ते समय नमाज़ी को अपने दिल का जायज़ा लेना चाहिए कि उसकी अपनी नमाज़ दिखावे से पाक और वक़्त पर है या नहीं।

क़ुरआन मजीद की प्रमुख सूरतों के विस्तृत लेख

Frequently Asked Questions (FAQs)

1. माऊन (الْمَاعُونَ) का क्या अर्थ है?

‘माऊन’ उस छोटी-मोटी और मामूली इस्तेमाल की चीज़ को कहते हैं जो पड़ोसी अक्सर एक-दूसरे से माँगते हैं, जैसे नमक, माचिस, सुई-धागा, कुल्हाड़ी या बरतन। सूरह में ऐसे लोगों की निंदा है जो इतनी छोटी चीज़ भी दूसरों को नहीं देते।

2. सूरह माऊन में किन नमाज़ियों की बर्बादी की बात कही गई है?

उन नमाज़ियों की जो अपनी नमाज़ से ग़ाफ़िल रहते हैं (वक़्त टालकर पढ़ते हैं या छोड़ देते हैं) और जब पढ़ते हैं तो केवल लोगों को दिखाने (रियाकारी) के लिए पढ़ते हैं।

3. सूरह माऊन में कुल कितनी आयतें हैं?

सूरह माऊन में कुल 7 आयतें, 25 शब्द और 114 अक्षर हैं। यह 30वें पारे में मौजूद है।

4. यतीम को धक्के देने का क्या मतलब है?

यतीम को धक्के देने का मतलब है अनाथ बच्चों के साथ बदसलूकी करना, उनके हक़ और जायदाद को हड़प लेना और उनके रोने पर ज़रा भी रहम न खाना।

5. रियाकारी (युरा-ऊन) किसे कहते हैं?

रियाकारी का मतलब है कोई भी नेक अमल या इबादत अल्लाह की रज़ा के बजाए दुनिया के लोगों की वाह-वाही और तारीफ़ हासिल करने के लिए करना। यह गुनाह-ए-कबीरा है।

6. सूरह माऊन हमें समाज में रहने का क्या सबक देती है?

सूरह माऊन सिखाती है कि केवल इबादत का दिखावा काफ़ी नहीं है, बल्कि जब तक इंसान समाज के कमज़ोरों (यतीमों व ग़रीबों) से मुहब्बत और पड़ोसियों से भलाई नहीं करता, उसका दीन मुकम्मल नहीं हो सकता।

Mariya Ansari
लेखक के बारे में

Mariya Ansari

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