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सलातुल तस्बीह की नमाज़ का तरीक़ा | Salatul Tasbeeh in Hindi (दुआ, नीयत, 300 तस्बीह का चार्ट व फ़ज़ीलत)

By Mariya Ansari •

इस्लामी इबादात में नफ़्ल नमाज़ों को बंदे और उसके रब के बीच क़ुर्बत (नज़दीकी) का सबसे बेहतरीन ज़रिया माना गया है। इन तमाम नफ़्ल नमाज़ों में सलातुल तस्बीह (Salatul Tasbeeh) को एक ख़ास और बेमिसाल मक़ाम हासिल है। यह वह मुबारक़ नमाज़ है जिसे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने अपने प्यारे चचा हज़रत अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हु) को गुनाहों की मुकम्मल बख़्शिश और मग़फ़िरत के एक अज़ीम तोहफ़े के तौर पर सिखाया था। इस 4 रकअत नमाज़ की सबसे बड़ी ख़ासियत यह है कि इसमें नमाज़ के विभिन्न अरकान के दौरान कुल 300 मर्तबा तीसरा कलमा यानी अज़ीम तस्बीह पढ़ी जाती है। इस विस्तृत गाइड में आप जानेंगे कि Salatul Tasbeeh in Hindi क्या है, सलातुल तस्बीह की नीयत, तस्बीह पढ़ने का आसान स्टेप-बाय-स्टेप चार्ट, सही समय और इसकी अज़ीम फ़ज़ीलत क्या है।

हदीस-ए-रसूल: रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हज़रत अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हु) से फ़रमाया: “ऐ चचा जान! अगर आप यह नमाज़ पढ़ेंगे तो अल्लाह तआला आपके तमाम गुनाह माफ़ फ़रमा देगा—अगल-बगल के, पुराने और नए, अनजाने में हुए और जानबूझकर किए गए, छोटे और बड़े, छिपे और खुले हुए।” (सुनन अबू दाऊद: 1297 / सुनन इब्न माजा: 1387)

विषय (Category) संक्षिप्त विवरण (Summary Details)
नमाज़ का प्रकार नफ़्ल नमाज़ (कुल 4 रकअत, एक सलाम के साथ)
तस्बीह की कुल संख्या कुल 300 मर्तबा (हर रकअत में 75 मर्तबा × 4 रकअत)
पढ़ी जाने वाली तस्बीह तीसरा कलमा (सुब्हानल्लाहि वल हम्दु लिल्लाहि व ला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर)
पढ़ने की अवधि रोज़ाना एक बार, या हफ़्ते में एक बार (जुमा), या महीने में एक बार, या साल में एक बार, या ज़िंदगी में कम से कम एक बार
सबसे उत्तम समय चाश्त का वक़्त, ज़ुहर से पहले, या रात को तहज्जुद व शब-ए-क़द्र में (मकरूह वक़्त छोड़कर)

सलातुल तस्बीह में पढ़ी जाने वाली ख़ास दुआ

सलातुल तस्बीह की नमाज़ में जिस तस्बीह को 300 बार पढ़ा जाता है, वह तीसरा कलमा है। इसे अरबी, हिंदी और तर्जुमे के साथ अच्छी तरह समझें:

سُبْحَانَ اللَّهِ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ وَلاَ إِلَهَ إِلاَّ اللَّهُ وَاللَّهُ أَكْبَرُ

हिंदी उच्चारण (Hindi Pronunciation):

सुब्हानल्लाहि वल हम्दु लिल्लाहि व ला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर।

हिंदी तर्जुमा: “अल्लाह हर ऐब और कमी से पाक है, तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं, अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, और अल्लाह सबसे बड़ा है।”

बाज रिवायतों में इसके साथ “व ला ह़ौला व ला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाहिल ‘अलिय्यिल ‘अज़ीम” जोड़ने का भी ज़िक्र आया है, जो बहुत बेहतर है।

सलातुल तस्बीह की नीयत कैसे करें? (Niyat in Hindi)

नमाज़ में नीयत दिल के पक्के इरादे का नाम है। ज़बान से भी कहना चाहें तो इस तरह कह सकते हैं:

“मैं नीयत करता/करती हूँ 4 रकअत नफ़्ल नमाज़ सलातुल तस्बीह की, वास्ते अल्लाह तआला के, अपने गुनाहों की माफ़ी के लिए, मुंह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”

एक रकअत में 75 मर्तबा तस्बीह का आसान चार्ट (300 Tasbeeh Chart)

सलातुल तस्बीह में हर रकअत के अंदर कुल 75 मर्तबा तस्बीह पढ़ी जाती है। इसे सही तरीक़े से याद रखने के लिए यह चार्ट देखें:

नमाज़ का रुक्न (Position) कब और क्या पढ़ना है तस्बीह संख्या (Count)
1. क़ियाम (खड़े होकर) सूरह फ़ातिहा और कोई सूरह पढ़ने के बाद (या सना के बाद 15 बार) 15 बार
2. रुकूअ में ‘सुब्हाना रब्बियल ‘अज़ीम’ (3 बार) पढ़ने के बाद 10 बार
3. क़ौमा (रुकूअ से सीधा खड़े होकर) ‘समिअल्लाहु लिमन हमिदह, रब्बना लकल हम्द’ कहने के बाद 10 बार
4. पहला सज्दा ‘सुब्हाना रब्बियल आला’ (3 बार) पढ़ने के बाद 10 बार
5. जलसा (दोनों सज्दों के बीच बैठना) पहले सज्दे से उठकर इत्मीनान से बैठकर 10 बार
6. दूसरा सज्दा ‘सुब्हाना रब्बियल आला’ (3 बार) पढ़ने के बाद 10 बार
7. जलसा-ए-इस्तिराहत (अगली रकअत के लिए उठने से पहले) दूसरे सज्दे से उठकर थोड़ा बैठकर (या दूसरी रकअत में क़ियाम पर) 10 बार
एक रकअत में कुल तस्बीह: 75 बार

इसी प्रकार चारों रकअतों में 75-75 तस्बीह पढ़ने से कुल 300 मर्तबा (75 × 4 = 300) तस्बीह मुकम्मल हो जाती है। दूसरी रकअत में अत्तहियात पढ़ने से पहले या बाद में 10 बार तस्बीह जोड़ ली जाती है।

सलातुल तस्बीह पढ़ने का सही तरीक़ा स्टेप बाय स्टेप (Step by Step Guide)

  1. तकबीर-ए-तहरीमा व सना: वज़ू करके क़िबला रुख़ खड़े हों, नीयत करके ‘अल्लाहु अकबर’ कहें और हाथ बांध लें। सना (सुब्हानकल्लाहुम्मा…) पढ़ें।
  2. क़ियाम की 15 तस्बीह: सना के बाद सूरह फ़ातिहा और कोई सूरह पढ़ें, फिर 15 मर्तबा यह तस्बीह पढ़ें: “सुब्हानल्लाहि वल हम्दु लिल्लाहि व ला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर”।
  3. रुकूअ में 10 तस्बीह: ‘अल्लाहु अकबर’ कहकर रुकूअ में जाएं, 3 बार ‘सुब्हाना रब्बियल ‘अज़ीम’ कहें, फिर 10 बार तस्बीह पढ़ें।
  4. क़ौमा में 10 तस्बीह: ‘समिअल्लाहु लिमन हमिदह, रब्बना लकल हम्द’ कहकर बिल्कुल सीधे खड़े हों और 10 बार तस्बीह पढ़ें।
  5. पहले सज्दे में 10 तस्बीह: ‘अल्लाहु अकबर’ कहकर सज्दे में जाएं, 3 बार ‘सुब्हाना रब्बियल आला’ कहें, फिर 10 बार तस्बीह पढ़ें।
  6. जलसे में 10 तस्बीह: सज्दे से उठकर सीधे बैठें और 10 बार तस्बीह पढ़ें।
  7. दूसरे सज्दे में 10 तस्बीह: दोबारा सज्दे में जाएं, 3 बार तस्बीह-ए-सज्दा कहें, फिर 10 बार तस्बीह पढ़ें।
  8. बैठकर 10 तस्बीह (या अगली रकअत): सज्दे से उठकर थोड़ा बैठें और 10 बार तस्बीह पढ़कर दूसरी रकअत के लिए खड़े हों। (इस तरह पहली रकअत के 75 पूरे हुए)।
  9. बाक़ी 3 रकअतें: इसी तरह दूसरी, तीसरी और चौथी रकअत मुकम्मल करें। चौथी रकअत के दूसरे सज्दे के बाद कायदे में बैठकर अत्तहियात, दुरूद-ए-इब्राहीमी और दुआ-ए-मासूरा पढ़कर दोनों तरफ़ सलाम फेर दें।

तस्बीह गिनने के नियम (गिनती भूलने पर क्या करें?)

नमाज़ के दौरान तस्बीह गिनते समय इन बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है:

  • उंगलियों को हिलाए बिना गिनें: नमाज़ में उंगलियों के पोरों को गिनने के लिए हाथों को हिलाना या ज़बान से गिनती बोलना मकरूह है। सबसे अच्छा तरीक़ा यह है कि दिल ही दिल में गिनती रखें, या उंगलियों को अपनी जगह पर रखे-रखे हल्का सा दबाकर गिन लें।
  • अगर किसी रुक्न में तस्बीह छूट जाए: मान लीजिए आप रुकूअ में 10 तस्बीह पढ़ना भूल गए और सीधे क़ौमे में चले गए, तो क़ौमे की 10 तस्बीह के साथ रुकूअ की छूटी हुई 10 तस्बीह भी जोड़कर कुल 20 पढ़ लें। लेकिन रुकूअ से उठने के बाद क़ौमे में और दोनों सज्दों के बीच जलसे में देर तक रुकना भारी लगे तो छूटे हुए अदद को अगले सज्दे में पूरा किया जा सकता है।

नमाज़ और दुआओं से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण लेख

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)

1. सलातुल तस्बीह की नमाज़ कब पढ़नी चाहिए?

सलातुल तस्बीह मकरूह औक़ात (सूरज निकलते, ठीक दोपहर ज़वाल के वक़्त, और सूरज डूबते समय) को छोड़कर दिन या रात के किसी भी वक़्त पढ़ी जा सकती है। चाश्त का समय और रात को तहज्जुद व शब-ए-क़द्र का समय इसके लिए सबसे अफ़ज़ल है।

2. क्या सलातुल तस्बीह जमाअत से पढ़ सकते हैं?

सलातुल तस्बीह नफ़्ल नमाज़ है और नफ़्ल नमाज़ों को अकेले (तन्हा) पढ़ना ही सुन्नत और अफ़ज़ल है। आम दिनों में इसकी जमाअत कराना हनाफ़ी फ़िक़्ह में मकरूह-ए-तंज़ीही माना गया है।

3. क्या औरतें भी सलातुल तस्बीह पढ़ सकती हैं?

जी हाँ, औरतें भी मर्दों की तरह अपने घर में पूरे एहतमाम के साथ सलातुल तस्बीह पढ़ सकती हैं। उनके लिए भी गुनाहों की माफ़ी और सवाब बिल्कुल बराबर है।

4. अगर तस्बीह की गिनती में शक हो जाए तो क्या करें?

अगर गिनती में शक हो जाए कि 8 बार पढ़ी या 10 बार, तो कम वाली संख्या (8) मानकर गिनती पूरी कर लें। इससे नमाज़ नहीं टूटती और न ही सज्दा-ए-सहव वाजिब होता है।

5. क्या सलातुल तस्बीह में कोई ख़ास सूरह पढ़ना ज़रूरी है?

कोई ख़ास सूरह मुक़र्रर नहीं है। सूरह फ़ातिहा के बाद क़ुरआन मजीद की जो भी सूरह याद हो (जैसे सूरह तक़ासुर, अस्र, काफ़िरून, इख़लास आदि) पढ़ी जा सकती है।

Mariya Ansari
लेखक के बारे में

Mariya Ansari

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