Quran Guide Quran Guide
QuranGuide.in

4 Kalma in Hindi | चौथा कलमा (कलिमा तौहीद) हिंदी तर्जुमा, उच्चारण और फ़ज़ीलत

By Mariya Ansari •

4 Kalma in Hindi: इस्लाम में चौथा कलमा, जिसे कलिमा तौहीद (Kalima Tauheed) कहा जाता है, अल्लाह तआला के एक होने, उसकी बादशाही, हयात (सदा जीवित रहने) और हर चीज़ पर कुदरत का मुकम्मल इकरार है। ‘तौहीद’ का अर्थ है अल्लाह को उसकी ज़ात, सिफ़ात और इबादत में अकेला और ला-शरीक मानना। चौथे कलमे को बाज़ार में दाख़िले की दुआ और सुबह-शाम के अज़कार में बहुत बड़ा मक़ाम हासिल है। इस लेख में चौथे कलमे की सही अरबी इबारत (एराब सहित), हिंदी उच्चारण, शब्द-दर-शब्द तर्जुमा और 10 लाख नेकियाँ हासिल होने वाली मशहूर हदीस का पूरा विवरण दिया गया है।

चौथा कलमा (कलिमा तौहीद)
ऑडियो सुनें (Listen Audio)

चौथा कलमा: अरबी इबारत, हिंदी उच्चारण और तर्जुमा

कलिमा तौहीद अल्लाह की अज़मत और कुदरत की ऐसी गवाही है जो दिल को शिर्क और वहम से पाक करती है:

चौथा कलमा (कलिमा तौहीद) – अरबी टेक्स्ट
لَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ، لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ يُحْيِي وَيُمِيتُ وَهُوَ حَيٌّ لَّا يَمُوتُ أَبَدًا أَبَدًا، ذُو الْجَلَالِ وَالْإِكْرَامِ، بِيَدِهِ الْخَيْرُ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ

हिंदी उच्चारण (Transliteration): ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीका लहू, लहुल मुल्कु व लहुल हम्दु युहयी व युमीतु वहुवा हय्युल ला यमूतु अबदन अबदा, ज़ुल जलालि वल इकराम, बियदिहिल खैरु वहुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर।

अंग्रेज़ी उच्चारण (English): Laa ilaaha illal-laahu wahdahoo laa shareeka lahoo, lahul-mulku wa lahul-hamdu yuhyee wa yumeetu wa huwa hayyul-laa yamootu abadan abadaa, Zul-Jalaali wal-Ikraam, biyadihil-khayr, wa huwa ‘alaa kulli shay-in Qadeer.

हिंदी तर्जुमा (Meaning): अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं, उसी की सल्तनत है और उसी के लिए तमाम तारीफ़ें हैं। वही ज़िंदा करता है और वही मारता है, और वह हमेशा ज़िंदा रहने वाला है, जिसे कभी मौत नहीं आएगी। वह बड़े जलाल और इज़्ज़त वाला है, सारी भलाई उसी के हाथ में है और वह हर चीज़ पर क़ादिर (सर्वशक्तिमान) है।

चौथे कलमे का शब्द-दर-शब्द अर्थ (Word by Word)

अरबी शब्द हिंदी उच्चारण हिंदी अर्थ
لَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू… अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है उसका कोई शरीक नहीं
لَهُ الْمُلْكُ وَلَهُ الْحَمْدُ लहुल मुल्कु व लहुल हम्द उसी की पूरी सल्तनत है और उसी के लिए सारी तारीफ़ें हैं
يُحْيِي وَيُمِيتُ युहयी व युमीत वही ज़िंदगी बख्शता है और वही मौत देता है
وَهُوَ حَيٌّ لَّا يَمُوتُ أَبَدًا أَبَدًا वहुवा हय्युल ला यमूतु अबदन अबदा और वह हमेशा ज़िंदा रहने वाला है जिसे कभी मौत नहीं आनी
بِيَدِهِ الْخَيْرُ وَهُوَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ बियदिहिल खैरु वहुवा अला कुल्लि… सारी भलाई उसी के हाथ में है और वह हर चीज़ पर पूरी तरह क़ादिर है

हदीस शरीफ में चौथे कलमे की बेमिसाल फ़ज़ीलत

हदीस की किताबों में चौथे कलमे के कई अज़ीम फ़ायदे आए हैं:

  • बाज़ार में दाख़िले पर 10 लाख नेकियाँ: जामे तिर्मिज़ी (3428) की हदीस में रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: “जो शख़्स बाज़ार में दाखिल होते वक़्त यह कलिमा (चौथा कलमा) पढ़ता है, अल्लाह तआला उसके लिए 10 लाख नेकियाँ लिखता है, उसके 10 लाख गुनाह माफ़ करता है और उसके 10 लाख दर्जे बुलंद फ़रमाता है।”
  • रोज़ाना 100 मर्तबा पढ़ने की फ़ज़ीलत: सहीह बुखारी (3293) व मुस्लिम में है कि जो शख़्स दिन में 100 बार “ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीका लहू, लहुल मुल्कु व लहुल हम्दु वहुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर” पढ़ता है, उसे 10 गुलाम आज़ाद करने का सवाब मिलता है, 100 नेकियाँ मिलती हैं, 100 गुनाह मिटाए जाते हैं और वह दिन भर शैतान के शर से महफ़ूज़ रहता है।
  • अराफ़ात के दिन की बेहतरीन दुआ: तिर्मिज़ी की रिवायत है कि नबी ﷺ ने फ़रमाया: “सबसे बेहतरीन दुआ अरफ़ा के दिन की है, और सबसे बेहतरीन बात जो मैंने और मुझसे पहले नबियों ने कही वह यही कलिमा तौहीद है।”

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. चौथा कलमा कौन सा है और इसे क्या कहते हैं?

चौथे कलमे को ‘कलिमा तौहीद’ कहा जाता है। इसमें अल्लाह तआला के एक होने, उसकी बादशाही, हमेशा ज़िंदा रहने और सर्वशक्तिमान होने का इकरार किया जाता है।

2. बाज़ार में दाखिल होते समय चौथा कलमा क्यों पढ़ना चाहिए?

हदीस शरीफ (तिर्मिज़ी 3428) के अनुसार, बाज़ार में ग़फ़लत और दुनियादारी का माहौल होता है। वहाँ अल्लाह को याद करके चौथा कलमा पढ़ने पर 10 लाख नेकियाँ मिलती हैं, 10 लाख गुनाह मिटते हैं और 10 लाख दर्जे बुलंद होते हैं।

3. ‘तौहीद’ शब्द का क्या अर्थ होता है?

‘तौहीद’ का अर्थ है अल्लाह को अकेला, बेमिसाल और बेसाझीदार मानना। यानी यह यकीन रखना कि अल्लाह के सिवा न कोई खालिक है, न मालिक और न ही कोई इबादत के लायक।

4. क्या चौथा कलमा रोज़ाना 100 बार पढ़ना सुन्नत है?

हाँ, सहीह बुखारी और मुस्लिम की हदीस के मुताबिक़ रोज़ाना सुबह 100 मर्तबा इसका विर्द करने से 10 गुलाम आज़ाद करने जितना सवाब मिलता है और पूरे दिन शैतान के हमलों से हिफ़ाज़त रहती है।

5. क्या ‘युहयी व युमीतु’ चौथे कलमे का हिस्सा है?

हाँ, ‘युहयी व युमीतु’ (वही ज़िंदा करता है और वही मारता है) चौथे कलमे का अहम हिस्सा है जो अल्लाह की जीवन और मृत्यु पर मुकम्मल हुकूमत को दर्शाता है।

Mariya Ansari
लेखक के बारे में

Mariya Ansari

Assalamu Alaikum – I am Mariya Ansari, founder of QuranGuide.in, sharing authentic Islamic knowledge in a simple and clear way. My mission is to help people understand the Qur’an, Hadith, duas, and Islamic teachings with easy-to-read and reliable content. Through QuranGuide.in, I hope to create a helpful platform for anyone looking to learn more about Islam and strengthen their connection with the Qur’an.

लेखक के सभी लेख देखें →