Quran Guide Quran Guide
QuranGuide.in

सूरह क़ुरैश इन हिंदी (Surah Quraish in Hindi) | अरबी मतन, हिंदी तर्जुमा, अमन-ओ-अमान व रिज़्क़ की फ़ज़ीलत

By Mariya Ansari •

पवित्र क़ुरआन मजीद की 106वीं सूरह सूरह क़ुरैश (Surah Quraysh) है। यह क़ुरआन करीम के 30 (अम्मा पारा) में स्थित है और इसमें कुल 4 आयतें हैं। सूरह क़ुरैश में अल्लाह तआला ने क़बीला-ए-क़ुरैश पर अपनी अज़ीम नेमतों का ज़िक्र फ़रमाया है। जाड़े और गर्मी के तिजारती सफ़रों में हिफ़ाज़त, भूख के वक़्त भरपूर रिज़्क़ और ख़ौफ़ के आलम में अमन व शांति अता करने का एहसान जताते हुए काबा के रब की इबादत करने की दावत दी गई है।

मुसलमानों के लिए इस सूरह को सही उच्चारण और तर्जुमे के साथ समझना बेहद ज़रूरी है क्योंकि यह रोज़मर्रा की पाँचों वक़्त की नमाज़ों में कसरत से पढ़ी जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण सूरतों में से एक है। इस विस्तृत लेख में सूरह क़ुरैश का शुद्ध अरबी मतन, आसान हिंदी उच्चारण, शब्द-दर-शब्द तर्जुमा, शान-ए-नुज़ूल, सहीह हदीस के हवाले, फ़ज़ीलत व नमाज़ में पढ़ने का सुन्नत तरीक़ा पूरी तफ़्सील के साथ पेश किया गया है।

मुख़्तसर ख़ुलासा: सूरह क़ुरैश में अल्लाह तआला ने क़बीला-ए-क़ुरैश पर अपनी अज़ीम नेमतों का ज़िक्र फ़रमाया है। जाड़े और गर्मी के तिजारती सफ़रों में हिफ़ाज़त, भूख के वक़्त भरपूर रिज़्क़ और ख़ौफ़ के आलम में अमन व शांति अता करने का एहसान जताते हुए काबा के रब की इबादत करने की दावत दी गई है।

सूरह क़ुरैश का संक्षिप्त परिचय (Overview Table)

विवरण (Aspect) प्रामाणिक जानकारी (Details)
सूरह संख्या (Surah Number) 106
पारा (Juz) 30 (अम्मा पारा)
कुल आयतें (Total Verses) 4 आयतें
कुल रुकूअ (Ruku) 1 रुकूअ
शब्द व अक्षर संख्या 17 कलिमात और 73 हुरूफ़
मक़ाम-ए-नुज़ूल (Classification) मक्की सूरह

सूरह क़ुरैश अरबी मतन, हिंदी उच्चारण व तर्जुमा (आयत दर आयत)

नीचे सूरह क़ुरैश की सभी आयतों का स्पष्ट अरबी मतन, आसान हिंदी उच्चारण (Transliteration) और अर्थ दिया गया है ताकि आप इसे सही तरीक़े से याद कर सकें:

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

हिंदी उच्चारण: बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

तर्जुमा: अल्लाह के नाम से शुरू जो निहायत मेहरबान और हमेशा रहम फ़रमाने वाला है।

आयत 1

لِإِيلَافِ قُرَيْشٍ ﴿١﴾

हिंदी उच्चारण: लि-ईलाफ़ि क़ुरैश।

हिंदी तर्जुमा: क़ुरैश को मानूस (अभ्यस्त व प्रेम) करने की वजह से।

आयत 2

إِيلَافِهِمْ رِحْلَةَ الشِّتَاءِ وَالصَّيْفِ ﴿٢﴾

हिंदी उच्चारण: ईलाफ़िहिम् रिह्लतश्-शिता-इ वस-सैफ़।

हिंदी तर्जुमा: उन्हें जाड़े (सर्दियों) और गर्मी के (व्यापारिक) सफ़र से मानूस करने की ख़ातिर।

आयत 3

فَلْيَعْبُدُوا رَبَّ هَٰذَا الْبَيْتِ ﴿٣﴾

हिंदी उच्चारण: फ़ल-यअ’बुदू रब्बा हाज़ल-बैत।

हिंदी तर्जुमा: लिहाज़ा उन्हें चाहिए कि वे इस घर (ख़ाना-ए-काबा) के रब की इबादत करें।

आयत 4

الَّذِي أَطْعَمَهُم مِّن جُوعٍ وَآمَنَهُم مِّنْ خَوْفٍ ﴿٤﴾

हिंदी उच्चारण: अल्लज़ी अत़-अ-महुम् मिन् जू-इंव-व आम-नहुम् मिन् ख़ौफ़।

हिंदी तर्जुमा: जिसने उन्हें भूख में खाना दिया (रोटी अता की) और ख़ौफ़ (डर व असुरक्षा) से अमन अता फ़रमाया।

सूरह क़ुरैश का शब्द-दर-शब्द अर्थ (Word-by-Word Meaning)

अरबी भाषा की गहराई और क़ुरआनी अल्फ़ाज़ के सही मफ़हूम को समझने के लिए प्रत्येक शब्द का अर्थ नीचे दी गई तालिका में देखें:

अरबी शब्द (Arabic) हिंदी उच्चारण शाब्दिक अर्थ (Hindi Meaning)
لِإِيلَافِ लि-ईलाफ़ि मानूस करने की वजह से
قُرَيْشٍ क़ुरैश क़ुरैश को
إِيلَافِهِمْ ईलाफ़िहिम् उनका अभ्यस्त होना
رِحْلَةَ रिह्लता सफ़र / यात्रा
الشِّتَاءِ अश्-शिता-इ सर्दियों (जाड़े) का
وَالصَّيْفِ वस-सैफ़ और गर्मियों का
فَلْيَعْبُدُوا फ़ल-यअ’बुदू अतः वे इबादत करें
رَبَّ रब्बा रब की
هَٰذَا हाज़ा इस
الْبَيْتِ अल्-बैत घर की (काबा की)
الَّذِي अल्लज़ी जिसने
أَطْعَمَهُم अत़-अ-महुम खाना खिलाया उन्हें
مِّن جُوعٍ मिन् जू-इन् भूख में
وَآمَنَهُم व आम-नहुम और अमन (सुरक्षा) दिया उन्हें
مِّنْ خَوْفٍ मिन् ख़ौफ़ डर / भय से

सूरह क़ुरैश का शान-ए-नुज़ूल (पृष्ठभूमि व अवतरण का कारण)

अहले मक्का के पास खेतीबाड़ी या पानी के साधन नहीं थे। वे व्यापार पर निर्भर थे। अल्लाह तआला ने काबा के सम्मान के कारण पूरे अरब में क़ुरैश का ऐसा दबदबा क़ायम किया था कि लुटेरे और डाकू अन्य क़ाफ़िलों को लूट लेते थे, लेकिन क़ुरैश के व्यापारिक क़ाफ़िलों को सम्मान के साथ जाने देते थे। सर्दियों में वे यमन और गर्मियों में सीरिया (शाम) का सुरक्षित व्यापारिक सफ़र करते थे। अल्लाह ने इस सूरह में याद दिलाया कि यह सुरक्षा और रिज़्क़ तुम्हें सिर्फ़ ‘रब्बल बैत’ (काबा के मालिक) की वजह से मिला है, इसलिए बुतों को छोड़कर केवल उसी रब की इबादत करो।

सूरह क़ुरैश की फ़ज़ीलत व रूहानी बरकत
सूरह क़ुरैश की तिलावत से मोमिन के दिल में ईमान की ताज़गी और रूहानी सुकून हासिल होता है।

सूरह क़ुरैश की फ़ज़ीलत पर प्रामाणिक सहीह अहादीस

हदीस की किताबों में सूरह क़ुरैश की असीम फ़ज़ीलतें दर्ज हैं:

बैहक़ी व तिर्मिज़ी – क़ुरैश की 7 विशेषताएं

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: ‘अल्लाह तआला ने क़ुरैश को सात ऐसी फ़ज़ीलतें अता फ़रमाई हैं जो उनसे पहले किसी को नहीं दी गईं… उनमें से एक यह भी है कि अल्लाह तआला ने क़ुरआन में एक पूरी सूरह विशेष रूप से उनके नाम पर नाज़िल फ़रमाई जिसमें किसी दूसरे का ज़िक्र नहीं।’

मुहद्दिसीन का मामूल – रिज़्क़ व खाने में बरकत

उलेमा और बुज़ुर्गाने दीन फ़रमाते हैं कि जो शख़्स खाने से पहले या सफ़र पर निकलते समय सूरह क़ुरैश पढ़ता है, अल्लाह तआला उसके खाने में बरकत अता फ़रमाता है, खाना नुक़सानदेह नहीं होता और सफ़र में हर तरह के ख़ौफ़ व हादसे से सुरक्षा मिलती है।

तफ़्सीर कुर्तुबी – भूख और ख़ौफ़ से नजात

हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम ने मक्का के लिए दुआ की थी: ‘रब्बिजअल हाज़ा बलदन आमिनन वरज़ुक़ अह लहू मिनस समरात’ (ऐ रब! इसे अमन का शहर बना और इसके बाशिंदों को फलों का रिज़्क़ दे)। सूरह क़ुरैश उसी दुआ की क़ुबूलियत का मंज़र है।

सूरह क़ुरैश पढ़ने के रूहानी व व्यावहारिक फ़ायदे

इस पवित्र सूरह की नियमित तिलावत से हासिल होने वाले प्रमुख आध्यात्मिक लाभ निम्नलिखित हैं:

  • रिज़्क़ की तंगी, बेरोज़गारी और भूखमरी से नजात तथा कारोबार में बरकत।
  • सफ़र में चोरी, डकैती, दुर्घटना और भय से मुकम्मल इलाही सुरक्षा।
  • दिल की घबराहट और किसी अज्ञात अनहोनी के ख़ौफ़ से दिली सुकून व अमन।
  • खाने पर दम करके खाने से ज़हर या बदहज़मी के नुक़सान से हिफ़ाज़त।

नमाज़ में सूरह क़ुरैश पढ़ने का मसनून तरीक़ा व नियम

सूरह फ़ील के बाद दूसरी रकात में सूरह क़ुरैश पढ़ना नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम और सहाबा का पसंदीदा तरीक़ा था। मग़रिब और इशा की नमाज़ों में इसे पढ़ना बेहद मुस्तहब है।

क़ुरआन मजीद की प्रमुख सूरतों के विस्तृत लेख

Frequently Asked Questions (FAQs)

1. जाड़े और गर्मी के सफ़र से क्या मुराद है?

क़बीला-ए-क़ुरैश सर्दियों (जाड़े) में गर्म मुल्क यमन की तरफ़ व्यापार के लिए जाता था, और गर्मियों में ठंडे मुल्क शाम (सीरिया) की तरफ़ जाता था। ये दोनों सफ़र उनके जीवन की रीढ़ थे।

2. ‘रब्बा हाज़ल बैत’ किसे कहा गया है?

‘रब्बा हाज़ल बैत’ का अर्थ है ‘इस घर (ख़ाना-ए-काबा) का मालिक व पालने वाला’ यानी अल्लाह तआला।

3. सफ़र में सूरह क़ुरैश पढ़ने की क्या अहमियत है?

हदीस और बुज़ुर्गों के तजुर्बे के अनुसार जो व्यक्ति सफ़र पर निकलते समय सूरह क़ुरैश पढ़ता है, अल्लाह तआला उसे रास्ते के तमाम ख़तरों, हादसों और डर से महफ़ूज़ रखता है।

4. सूरह क़ुरैश में कुल कितनी आयतें हैं?

सूरह क़ुरैश में कुल 4 आयतें, 17 शब्द और 73 अक्षर हैं। यह 30वें पारे में मौजूद है।

5. क्या सूरह क़ुरैश पढ़ने से रिज़्क़ बढ़ता है?

हाँ, सूरह क़ुरैश की चौथी आयत में भूख से रिज़्क़ और ख़ौफ़ से अमन का वादा है। रोज़ाना इसकी तिलावत करने वाले के घर में कभी फ़ाक़ा नहीं आता।

6. सूरह क़ुरैश और सूरह फ़ील का क्या संबंध है?

सूरह फ़ील में काबा के दुश्मनों की हलाकत का बयान है और सूरह क़ुरैश में काबा के पड़ोसियों (क़ुरैश) पर अमन व रिज़्क़ की नेमत का बयान है। इसलिए दोनों एक-दूसरे से गहराई से जुड़ी हैं।

Mariya Ansari
लेखक के बारे में

Mariya Ansari

Assalamu Alaikum – I am Mariya Ansari, founder of QuranGuide.in, sharing authentic Islamic knowledge in a simple and clear way. My mission is to help people understand the Qur’an, Hadith, duas, and Islamic teachings with easy-to-read and reliable content. Through QuranGuide.in, I hope to create a helpful platform for anyone looking to learn more about Islam and strengthen their connection with the Qur’an.

लेखक के सभी लेख देखें →