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क़ुरआन की 40 रब्बना दुआएं | List of 40 Rabbana Dua in Hindi (अरबी, तर्जुमा व फ़ज़ीलत)

By Mariya Ansari •

क़ुरआने मजीद अल्लाह तआला का वह मुकद्दस कलाम है जिसमें बंदों के लिए हर मुश्किल, बीमारी और परेशानी का हल मौजूद है। क़ुरआन करीम में ऐसी 40 ख़ास दुआएं नाज़िल हुई हैं जो लफ़्ज़ "रब्बना" (رَبَّنَا – ऐ हमारे रब!) से शुरू होती हैं। इन पाकीज़ा दुआओं को इस्लामी शब्दावली में 40 Rabbana Duas कहा जाता है। ये दुआएं विभिन्न अंबिया-ए-किराम (जैसे हज़रत आदम, हज़रत इब्राहीम, हज़रत मूसा, हज़रत ईसा अलैहिमुस्सलाम) और सच्चे मोमिनों ने अपनी आजिज़-ओ-इन्केसारी में रब्बे ज़ुलजलाल की बारगाह में की थीं। इंटरनेट पर लाखों लोग list of 40 rabbana dua, what is 40 rabbana, और 40 rabbana benefits सर्च करते हैं। इस विस्तृत और शोधपरक गाइड में आप क़ुरआन की सभी 40 रब्बना दुआएं अरबी तशकील, आसान हिंदी उच्चारण (तलफ़्फ़ुज़), सरल हिंदी व अंग्रेज़ी तर्जुमे (Meaning), और उनके पढ़ने की असीम फ़ज़ीलत व फ़ायदों के साथ जानेंगे।

क़ुरआने मजीद का फ़रमान: "और तुम्हारे रब ने फ़रमाया: तुम मुझसे दुआ मांगो, मैं तुम्हारी दुआ क़बूल करूँगा।" (सूरह ग़ाफ़िर: 60)

हदीस-ए-रसूल (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम): हज़रत अनस (रज़ि.) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सबसे ज़्यादा जो दुआ पढ़ा करते थे वह क़ुरआन की रब्बना दुआ थी: ‘अल्लाहुम्मा रब्बना आतिना फ़िद्दुन्या ह़सनतंव-वफ़िल-आखिरति ह़सनतंव-वक़िना अज़ाबन्नार।’ (सहीह बुख़ारी: 6389 / सहीह मुस्लिम: 2690)

पहलू (Attribute) प्रमाणिक विवरण व तथ्य
दुआओं की कुल संख्या कुल 40 दुआएं (40 Rabbana Duas)
आरंभिक शब्द رَبَّنَا (रब्बना – यानी ‘ऐ हमारे रब / Our Lord’)
क़ुरआनी स्रोत (Sources) सूरह अल-बक़रह, आले इमरान, अल-आराफ़, इब्राहीम, अल-कहफ़, अल-फ़ुरक़ान, ग़ाफ़िर आदि
प्रमुख विषय (Key Themes) मग़फ़िरत (माफ़ी), दुनिया व आख़िरत की भलाई, जहन्नम से नजात, सब्र, नेक औलाद व हिदायत
पढ़ने का सर्वोत्तम समय फ़र्ज़ नमाज़ों के बाद, तहज्जुद, सजदे की हालत में, रमज़ान, जुमा और इफ़्तार के समय

1. 40 रब्बना दुआ क्या है और इसकी क्या अहमियत है? (What is 40 Rabbana Dua)

अक्सर लोग यह जानना चाहते हैं कि what is rabbana dua और what is 40 rabbana। अरबी भाषा में ‘रब्ब’ (رَبّ) का अर्थ है पालनहार, सृष्टिकर्ता और परवरिश करने वाला, तथा ‘ना’ (نَا) का अर्थ है ‘हमारा’। जब कोई बंदा ‘रब्बना’ कहता है, तो वह अल्लाह की संपूर्ण प्रभुसत्ता, दया और अपनी बेबसी का इज़हार करता है।

इन 40 दुआओं की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये किसी इंसान के गढ़े हुए शब्द नहीं हैं, बल्कि स्वयं अल्लाह तआला ने अपने कलाम (क़ुरआन शरीफ़) में नाज़िल फ़रमाए हैं। जब हम इन दुआओं के ज़रिए अल्लाह को पुकारते हैं, तो हम उन्हीं शब्दों को दोहराते हैं जिन्हें अल्लाह ने क़ुरआन में हमेशा के लिए महफ़ूज़ कर दिया है। इसी कारण इन दुआओं की क़बूलियत की उम्मीद सबसे अधिक होती है।

2. 40 रब्बना दुआएं पढ़ने की फ़ज़ीलत व फ़ायदे (40 Rabbana Benefits)

इस्लामी विद्वानों और हदीसों के मुताबिक़, क़ुरआनी रब्बना दुआओं के नियमित पाठ से बंदे को निम्नलिखित असीम रूहानी व दुनियावी लाभ प्राप्त होते हैं:

  • दुनिया और आख़िरत दोनों की कामियाबी: रब्बना दुआओं में केवल सांसारिक सुख नहीं मांगा जाता, बल्कि आख़िरत की भलाई और जहन्नम की आग से सुरक्षा की प्रार्थना की जाती है।
  • गुनाहों की मुकम्मल माफ़ी व मग़फ़िरत: हज़रत आदम (अ.स.) और अन्य नबियों की तौबा वाली रब्बना दुआएं पढ़ने से बड़े से बड़ा गुनाह माफ़ होने की उम्मीद होती है।
  • ईमान और हिदायत पर साबितक़दमी: ‘रब्बना ला तुज़िग़ क़ुलूबना’ जैसी दुआएं दिल को गुमराह होने और शैतानी बहकावे से महफ़ूज़ रखती हैं।
  • नेक औलाद और घरेलू सुकून: सूरह अल-फ़ुरक़ान की रब्बना दुआ परिवार में प्रेम, आंखों की ठंडक और नेक नस्ल के लिए रामबाण मानी जाती है।
  • मुसीबतों व ज़ुल्म से हिफ़ाज़त: जब इंसान चारों तरफ़ से विरोधियों या कर्ज़ से घिर जाए, तो हज़रत मूसा और असहाब-ए-कहफ़ की रब्बना दुआएं दिल को सब्र और नजात अता करती हैं।

3. क़ुरआन की मुकम्मल 40 रब्बना दुआएं (Complete List of 40 Rabbana Duas)

नीचे क़ुरआने मजीद की सभी 40 रब्बना दुआएं क्रमबद्ध रूप से अरबी इबारत, हिंदी उच्चारण, हिंदी व अंग्रेज़ी तर्जुमे तथा उनके संदर्भ (सूरह व आयत) के साथ दी गई हैं:

रब्बना दुआ 1: इबादत व ख़िदमत की क़बूलियत की दुआ (सूरह अल-बक़रह: 127)

رَبَّنَا تَقَبَّلْ مِنَّا ۖ إِنَّكَ أَنتَ السَّمِيعُ الْعَلِيمُ

हिंदी उच्चारण: रब्बना तक़ब्बल मिन्ना, इन्नका अन्तस-समी’उल ‘अलीम।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हमारी यह ख़िदमत क़बूल फ़रमा, बेशक तू ही सब कुछ सुनने वाला और जानने वाला है।
English: Our Lord, accept this from us. Indeed You are the Hearing, the Knowing.

रब्बना दुआ 2: आज्ञाकारी बनने और तौबा की दुआ (सूरह अल-बक़रह: 128)

رَبَّنَا وَاجْعَلْنَا مُسْلِمَيْنِ لَكَ وَمِن ذُرِّيَّتِنَا أُمَّةً مُّسْلِمَةً لَّكَ وَأَرِنَا مَنَاسِكَنَا وَتُبْ عَلَيْنَا ۖ إِنَّكَ أَنتَ التَّوَّابُ الرَّحِيمُ

हिंदी उच्चारण: रब्बना वज्’अल्ना मुस्लिमैनी लका वमिन ज़ुर्रिय्यतिना उम्मतम-मुस्लिमतल-लक, व अरिना मनासिकना वतुब ‘अलैना, इन्नका अन्तत-तव्वाबुर-रहीम।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हम दोनों को अपना फ़रमाबरदार बना और हमारी औलाद में से भी एक उम्मत को अपना आज्ञाकारी रख, और हमें हमारी इबादत के तरीक़े सिखा और हमारी तौबा क़बूल फ़रमा, बेशक तू बड़ा तौबा क़बूल करने वाला और रहम करने वाला है।

रब्बना दुआ 3: दुनिया व आख़िरत की भलाई की जामेअ दुआ (सूरह अल-बक़रह: 201)

رَبَّنَا آتِنَا فِي الدُّنْيَا حَسَنَةً وَفِي الآخِرَةِ حَسَنَةً وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ

हिंदी उच्चारण: रब्बना आतिना फ़िद्दुन्या ह़सनतंव-वफ़िल-आखिरति ह़सनतंव-वक़िना अज़ाबन्नार।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भी भलाई अता फ़रमा और आख़िरत में भी भलाई अता फ़रमा और हमें दोज़ख़ की आग के अज़ाब से बचा ले।
English: Our Lord, give us in this world that which is good and in the Hereafter that which is good and protect us from the punishment of the Fire.

रब्बना दुआ 4: सब्र, साबितक़दमी और फ़तह की दुआ (सूरह अल-बक़रह: 250)

رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ

हिंदी उच्चारण: रब्बना अफ़्रिग़ ‘अलैना सब्रंव-वसब्वित अक़्दामना वन्सुरना ‘अलल-क़ौमिल-काफ़िरीन।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हम पर सब्र उंडेल दे, हमारे क़दमों को जमाए रख और काफ़िर क़ौम के मुक़ाबले में हमारी मदद फ़रमा।

रब्बना दुआ 5: भूल-चूक पर पकड़ न होने की दुआ (सूरह अल-बक़रह: 286)

رَبَّنَا لَا تُؤَاخِذْنَا إِن نَّسِينَا أَوْ أَخْطَأْنَا

हिंदी उच्चारण: रब्बना ला तुआख़िज़ना इन-नसीना औ अख़्तअना।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! अगर हम भूल जाएं या हमसे कोई ख़ता हो जाए तो हमारी पकड़ न फ़रमाना।

रब्बना दुआ 6: भारी बोझ से बचने की दुआ (सूरह अल-बक़रह: 286)

رَبَّنَا وَلَا تَحْمِلْ عَلَيْنَا إِصْرًا كَمَا حَمَلْتَهُ عَلَى الَّذِينَ مِن قَبْلِنَا

हिंदी उच्चारण: रब्बना वला तह़मिल ‘अलैना इस्रन कमा ह़मल्तहू ‘अलल्लज़ीना मिन क़ब्लिना।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हम पर ऐसा भारी बोझ न डाल जैसा तूने हमसे पहले के लोगों पर डाला था।

रब्बना दुआ 7: माफ़ी, रहमत और ताक़त से बढ़कर बोझ न डालने की दुआ (सूरह अल-बक़रह: 286)

رَبَّنَا وَلَا تُحَمِّلْنَا مَا لَا طَاقَةَ لَنَا بِهِ ۖ وَاعْفُ عَنَّا وَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا ۚ أَنتَ مَوْلَانَا فَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ

हिंदी उच्चारण: रब्बना वला तुह़म्मिल्ना मा ला ताक़ता लना बिह, व’फ़ु ‘अन्ना वग़्फ़िर लना वरह़म्ना, अन्ता मौलाना फ़न्सुरना ‘अलल-क़ौमिल-काफ़िरीन।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हम पर वह बोझ न डाल जिसकी हममें ताक़त नहीं, हमें माफ़ फ़रमा दे, हमें बख़्श दे और हम पर रहम फ़रमा, तू ही हमारा कारसाज़ है, पस काफ़िरों के मुक़ाबले में हमारी मदद फ़रमा।

रब्बना दुआ 8: हिदायत के बाद दिल के न भटकने की दुआ (सूरह आले इमरान: 8)

رَبَّنَا لَا تُزِغْ قُلُوبَنَا بَعْدَ إِذْ هَدَيْتَنَا وَهَبْ لَنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً ۚ إِنَّكَ أَنتَ الْوَهَّابُ

हिंदी उच्चारण: रब्बना ला तुज़िग़ क़ुलूबना ब’दा इज़ हदैतना वहब लना मिल-लदुन्का रह़मह, इन्नका अन्तल्-वह्हाब।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हमारे दिलों को टेढ़ा न होने देना इसके बाद कि तूने हमें हिदायत अता फ़रमाई, और हमें अपनी तरफ़ से रहमत अता कर, बेशक तू ही बहुत देने वाला है।

रब्बना दुआ 9: क़यामत के दिन पर यक़ीन की दुआ (सूरह आले इमरान: 9)

رَبَّنَا إِنَّكَ جَامِعُ النَّاسِ لِيَوْمٍ لَّا رَيْبَ فِيهِ ۚ إِنَّ اللَّهَ لَا يُخْلِفُ الْمِيعَادَ

हिंदी उच्चारण: रब्बना इन्नका जामि’उन्-नासि लियौमिल-ला रैबा फ़ीह, इन्नल्लाहा ला युख़्लिफुल-मी’आद।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! बेशक तू तमाम इंसानों को उस दिन जमा करने वाला है जिसमें कोई शक नहीं, बेशक अल्लाह अपने वादे के ख़िलाफ़ नहीं करता।

रब्बना दुआ 10: ईमान का इक़रार और मग़फ़िरत (सूरह आले इमरान: 16)

رَبَّنَا إِنَّنَا آمَنَّا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَقِنَا عَذَابَ النَّارِ

हिंदी उच्चारण: रब्बना इन्नना आमन्ना फ़ग़्फ़िर लना ज़ुनूबना वक़िना अज़ाबन्नार।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हम ईमान ले आए, पस हमारे गुनाह बख़्श दे और हमें आग के अज़ाब से बचा ले।

रब्बना दुआ 11: गवाहों में शामिल होने की दुआ (सूरह आले इमरान: 53)

رَبَّنَا آمَنَّا بِمَا أَنزَلْتَ وَاتَّبَعْنَا الرَّسُولَ فَاكْتُبْنَا مَعَ الشَّاهِدِينَ

हिंदी उच्चारण: रब्बना आमन्ना बिमा अन्ज़ल्ता वत्तब’नर-रसूला फ़क्तुब्ना म’अश-शाहिदीन।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! जो कुछ तूने नाज़िल किया हम उस पर ईमान लाए और हमने रसूल की पैरवी की, पस हमें गवाही देने वालों में लिख ले।

रब्बना दुआ 12: ज़्यादतियों की माफ़ी और सब्र (सूरह आले इमरान: 147)

رَبَّنَا اغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَإِسْرَافَنَا فِي أَمْرِنَا وَثَبِّتْ أَقْدَامَنَا وَانصُرْنَا عَلَى الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ

हिंदी उच्चारण: रब्बनाग़्फ़िर लना ज़ुनूबना व इस्राफ़ना फ़ी अम्रिना व सब्वित अक़्दामना वन्सुरना ‘अलल-क़ौमिल-काफ़िरीन।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हमारे गुनाह बख़्श दे और हमारे कामों में जो ज़्यादती हुई उसे माफ़ फ़रमा और हमारे क़दम जमाए रख और काफ़िरों पर हमें फ़तह अता कर।

रब्बना दुआ 13: कायनात की रचना पर चिंतन व जहन्नम से पनाह (सूरह आले इमरान: 191)

رَبَّنَا مَا خَلَقْتَ هَٰذَا بَاطِلًا سُبْحَانَكَ فَقِنَا عَذَابَ النَّارِ

हिंदी उच्चारण: रब्बना मा ख़लक़्ता हाज़ा बातिला, सुब्ह़ानका फ़क़िना ‘अज़ाबन्नार।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! तूने यह सब कुछ बेकार पैदा नहीं किया, तू पाक है, पस हमें आग के अज़ाब से बचा ले।

रब्बना दुआ 14: रुसवाई से बचने की दुआ (सूरह आले इमरान: 192)

رَبَّنَا إِنَّكَ مَن تُدْخِلِ النَّارَ فَقَدْ أَخْزَيْتَهُ ۖ وَمَا لِلظَّالِمِينَ مِنْ أَنصَارٍ

हिंदी उच्चारण: रब्बना इन्नका मन तुद्ख़िलिन-नारा फ़क़द अख़ज़ैतह, वमा लिज़्ज़ालिमीना मिन अन्सार।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! बेशक तूने जिसे आग में डाला उसे रुसवा कर दिया, और ज़ालिमों का कोई मददगार न होगा।

रब्बना दुआ 15: गुनाहों की माफ़ी और नेकों के साथ ख़ात्मा (सूरह आले इमरान: 193)

رَّبَّنَا إِنَّنَا سَمِعْنَا مُنَادِيًا يُنَادِي لِلْإِيمَانِ أَنْ آمِنُوا بِرَبِّكُمْ فَآمَنَّا ۚ رَبَّنَا فَاغْفِرْ لَنَا ذُنُوبَنَا وَكَفِّرْ عَنَّا سَيِّئَاتِنَا وَتَوَفَّنَا مَعَ الْأَبْرَارِ

हिंदी उच्चारण: रब्बना इन्नना समि’ना मुनादियं-युनादी लिल-ईमानि अन आमिनू बिरब्बिकुम फ़-आमन्ना, रब्बना फ़ग़्फ़िर लना ज़ुनूबना वकफ़्फ़िर ‘अन्ना सय्यिआतिना वतवफ़्फ़ना म’अल-अबरार।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हमने एक पुकारने वाले (रसूल) को सुना जो ईमान की दावत दे रहा था कि अपने रब पर ईमान लाओ, तो हम ईमान ले आए। ऐ हमारे रब! हमारे गुनाह माफ़ फ़रमा, हमारी बुराइयाँ दूर कर दे और हमें नेकों के साथ मौत अता फ़रमा।

रब्बना दुआ 16: रसूलों के वादे और क़यामत की रुसवाई से नजात (सूरह आले इमरान: 194)

رَبَّنَا وَآتِنَا مَا وَعَدتَّنَا عَلَىٰ رُسُلِكَ وَلَا تُخْزِنَا يَوْمَ الْقِيَامَةِ ۖ إِنَّكَ لَا تُخْلِفُ الْمِيعَادَ

हिंदी उच्चारण: रब्बना व आतिना मा व’अत्तना ‘अला रुसुलिका वला तुख़्ज़िना यौमल-क़ियामह, इन्नका ला तुख़्लिफुल-मी’आद।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हमें वह सब कुछ अता फ़रमा जिसका तूने अपने रसूलों के ज़रिए हमसे वादा किया है और क़यामत के दिन हमें रुसवा न करना, बेशक तू वादे के ख़िलाफ़ नहीं करता।

रब्बना दुआ 17: हक़ की गवाही देने वालों में शामिल होना (सूरह अल-माइदा: 83)

رَبَّنَا آمَنَّا فَاكْتُبْنَا مَعَ الشَّاهِدِينَ

हिंदी उच्चारण: रब्बना आमन्ना फ़क्तुब्ना म’अश-शाहिदीन।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हम ईमान लाए, पस हमें गवाही देने वालों में लिख ले।

रब्बना दुआ 18: आसमान से दस्तरख़्वान (रिज़्क़) उतरने की दुआ (सूरह अल-माइदा: 114)

رَبَّنَا أَنزِلْ عَلَيْنَا مَائِدَةً مِّنَ السَّمَاءِ تَكُونُ لَنَا عِيدًا لِّأَوَّلِنَا وَآخِرِنَا وَآيَةً مِّنكَ ۖ وَارْزُقْنَا وَأَنتَ خَيْرُ الرَّازِقِينَ

हिंदी उच्चारण: रब्बना अन्ज़िल ‘अलैना माइदतम-मिनस-समा-इ तकूनु लना ‘ईदल-लिअव्वलिना व आखिरिना व आयतम-मिन्क, वरज़ुक़्ना व अन्ता ख़ैरुर-राज़िक़ीन।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हम पर आसमान से एक ख़ास नेअमत (दस्तरख़्वान) नाज़िल फ़रमा जो हमारे पहले और बाद वालों के लिए ईद और तेरी तरफ़ से निशानी बन जाए, और हमें रिज़्क़ अता कर और तू सबसे बेहतर रिज़्क़ देने वाला है।

रब्बना दुआ 19: हज़रत आदम (अ.स.) की तौबा व मग़फ़िरत (सूरह अल-आराफ़: 23)

رَبَّنَا ظَلَمْنَا أَنفُسَنَا وَإِن لَّمْ تَغْفِرْ لَنَا وَتَرْحَمْنَا لَنَكُونَنَّ مِنَ الْخَاسِرِينَ

हिंदी उच्चारण: रब्बना ज़लम्ना अन्फ़ुसना वइल-लम तग़्फ़िर लना वतरह़म्ना लनकूनन्ना मिनल-ख़ासिरीन।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हमने अपनी जानों पर ज़ुल्म किया, और अगर तूने हमें न बख़्शा और हम पर रहम न फ़रमाया तो यक़ीनन हम नुक़सान उठाने वालों में से हो जाएंगे।

रब्बना दुआ 20: ज़ालिमों के साथ न ठहराए जाने की दुआ (सूरह अल-आराफ़: 47)

رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا مَعَ الْقَوْمِ الظَّالِمِينَ

हिंदी उच्चारण: रब्बना ला तज्’अल्ना म’अल-क़ौमिज़-ज़ालिमीन।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हमें ज़ालिम लोगों के साथ न कर देना।

रब्बना दुआ 21: सच्चाई के साथ फ़ैसले की दुआ (सूरह अल-आराफ़: 89)

رَبَّنَا افْتَحْ بَيْنَنَا وَبَيْنَ قَوْمِنَا بِالْحَقِّ وَأَنتَ خَيْرُ الْفَاتِحِينَ

हिंदी उच्चारण: रब्बनाफ़्तह़ बैनना व बैना क़ौमिना बिल-ह़क़्क़ि व अन्ता ख़ैरुल-फ़ातिह़ीन।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हमारे और हमारी क़ौम के बीच हक़ के साथ फ़ैसला कर दे, और तू सबसे बेहतर फ़ैसला करने वाला है।

रब्बना दुआ 22: सब्र और इस्लाम पर मौत की दुआ (सूरह अल-आराफ़: 126)

رَبَّنَا أَفْرِغْ عَلَيْنَا صَبْرًا وَتَوَفَّنَا مُسْلِمِينَ

हिंदी उच्चारण: रब्बना अफ़्रिग़ ‘अलैना सब्रंव-वतवफ़्फ़ना मुस्लिमीन।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हम पर सब्र उंडेल दे और हमें इस हाल में मौत दे कि हम तेरे फ़रमाबरदार (मुसलमान) हों।

रब्बना दुआ 23: ज़ालिमों के फ़ित्ने से पनाह (सूरह यूनुस: 85-86)

رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلْقَوْمِ الظَّالِمِينَ ۝ وَنَجِّنَا بِرَحْمَتِكَ مِنَ الْقَوْمِ الْكَافِرِينَ

हिंदी उच्चारण: रब्बना ला तज्’अल्ना फ़ित्नाताल-लिल-क़ौमिज़-ज़ालिमीन, व नज्‍जिना बिरह़मतिका मिनल-क़ौमिल-काफ़िरीन।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हमें ज़ालिम लोगों के लिए आज़माइश (फ़ित्ना) न बना, और हमें अपनी रहमत से काफ़िर क़ौम से नजात अता फ़रमा।

रब्बना दुआ 24: छुपे व खुले को जानने वाले रब से दुआ (सूरह इब्राहीम: 38)

رَبَّنَا إِنَّكَ تَعْلَمُ مَا نُخْفِي وَمَا نُعْلِنُ ۗ وَمَا يَخْفَىٰ عَلَى اللَّهِ مِن شَيْءٍ فِي الْأَرْضِ وَلَا فِي السَّمَاءِ

हिंदी उच्चारण: रब्बना इन्नका त’लमु मा नुख़्फ़ी वमा नु’लिन, वमा यख़्फ़ा ‘अलल्लाहि मिन शै-इन फ़िल-अर्दि वला फ़िस-समा-इ।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! बेशक तू जानता है जो कुछ हम छुपाते हैं और जो ज़ाहिर करते हैं, और अल्लाह पर ज़मीन और आसमान की कोई चीज़ छुपी नहीं है।

रब्बना दुआ 25: वालदैन (माता-पिता) और मोमिनों की मग़फ़िरत (सूरह इब्राहीम: 40-41)

رَبَّنَا وَتَقَبَّلْ دُعَاءِ ۝ رَبَّنَا اغْفِرْ لِي وَلِوَالِدَيَّ وَلِلْمُؤْمِنِينَ يَوْمَ يَقُومُ الْحِسَابُ

हिंदी उच्चारण: रब्बना व तक़ब्बल दुआ-इ, रब्बनाग़्फ़िर ली वलि-वालिदय्या वलिल-मु’मिनीना यौमा यक़ूमुल-ह़िसाब।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! मेरी दुआ क़बूल फ़रमा। ऐ हमारे रब! मुझे, मेरे वालदैन (माता-पिता) को और तमाम मोमिनों को उस दिन बख़्श देना जिस दिन हिसाब क़ायम होगा।

रब्बना दुआ 26: असहाब-ए-कहफ़ की रहमत व आसानी की दुआ (सूरह अल-कहफ़: 10)

رَبَّنَا آتِنَا مِن لَّدُنكَ رَحْمَةً وَهَيِّئْ لَنَا مِنْ أَمْرِنَا رَشَدًا

हिंदी उच्चारण: रब्बना आतिना मिल-लदुन्का रह़मतंव-वहय्यिअ लना मिन अम्रिना रशदा।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हमें अपने पास से ख़ास रहमत अता फ़रमा और हमारे मामले में हमारे लिए भलाई व दुरुस्ती का रास्ता आसान कर दे।

रब्बना दुआ 27: ज़ालिमों की ज़्यादती से बचाव की दुआ (सूरह ता-हा: 45)

رَبَّنَا إِنَّنَا نَخَافُ أَن يَفْرُطَ عَلَيْنَا أَوْ أَن يَطْغَىٰ

हिंदी उच्चारण: रब्बना इन्नना नख़ाफ़ु अय-यफ़्रुता ‘अलैना औ अय-यतग़ा।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हमें अंदेशा है कि वह (फ़िरऔन) हम पर ज़्यादती करेगा या सरकशी करेगा।

रब्बना दुआ 28: मोमिनों की मग़फ़िरत व रहमत की तलब (सूरह अल-मोमिनून: 109)

رَبَّنَا آمَنَّا فَاغْفِرْ لَنَا وَارْحَمْنَا وَأَنتَ خَيْرُ الرَّاحِمِينَ

हिंदी उच्चारण: रब्बना आमन्ना फ़ग़्फ़िर लना वरह़म्ना व अन्ता ख़ैरुर-राहिमीन।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हम ईमान ले आए, पस हमें बख़्श दे और हम पर रहम फ़रमा, और तू सबसे बेहतर रहम करने वाला है।

रब्बना दुआ 29: जहन्नम के अज़ाब को फेर देने की दुआ (सूरह अल-फ़ुरक़ान: 65)

رَبَّنَا اصْرِفْ عَنَّا عَذَابَ جَهَنَّمَ ۖ إِنَّ عَذَابَهَا كَانَ غَرَامًا

हिंदी उच्चारण: रब्बनस्रिफ़ ‘अन्ना अज़ाबा जहन्नम, इन्ना अज़ाबहा काना ग़रामा।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हमसे दोज़ख़ (जहन्नम) का अज़ाब दूर कर दे, बेशक उसका अज़ाब चिमट जाने वाली आफ़त है।

रब्बना दुआ 30: जीवनसाथी, औलाद और घरेलू सुकून की दुआ (सूरह अल-फ़ुरक़ान: 74)

رَبَّنَا هَبْ لَنَا مِنْ أَزْوَاجِنَا وَذُرِّيَّاتِنَا قُرَّةَ أَعْيُنٍ وَاجْعَلْنَا لِلْمُتَّقِينَ إِمَامًا

हिंदी उच्चारण: रब्बना हब लना मिन अज़्वाजिना व ज़ुर्रिय्यातिना क़ुर्रता अ’युनिंव-वज्’अल्ना लिल-मुत्तक़ीना इमामा।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हमें हमारे जीवनसाथियों और हमारी औलाद से आंखों की ठंडक अता फ़रमा और हमें परहेज़गारों (मुत्तक़ियों) का इमाम व रहनुमा बना।

रब्बना दुआ 31: ग़म दूर होने और शुक्रगुज़ारी की दुआ (सूरह फ़ातिर: 34)

الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَذْهَبَ عَنَّا الْحَزَنَ ۖ إِنَّ رَبَّنَا لَغَفُورٌ شَكُورٌ

हिंदी उच्चारण: अलहम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अज़्हबा ‘अन्नल-ह़ज़न, इन्ना रब्बना लग़फ़ूरुन शकूर।

तर्जुमा: तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं जिसने हमारा ग़म दूर कर दिया, बेशक हमारा रब बड़ा बख़्शने वाला और क़द्रदान है।

रब्बना दुआ 32: फ़रिश्तों की मोमिनों के लिए इस्तिग़फ़ार (सूरह ग़ाफ़िर: 7)

رَبَّنَا وَسِعْتَ كُلَّ شَيْءٍ رَّحْمَةً وَعِلْمًا فَاغْفِرْ لِلَّذِينَ تَابُوا وَاتَّبَعُوا سَبِيلَكَ وَقِهِمْ عَذَابَ الْجَحِيمِ

हिंदी उच्चारण: रब्बना वसि’ता कुल्ला शै-इर-रह़मतंव-व ‘इल्मन फ़ग़्फ़िर लिल्लज़ीना ताबूं वत्तब’ऊ सबीलका वक़िहिम ‘अज़ाबल-जह़ीम।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! तेरी रहमत और तेरा इल्म हर चीज़ को घेरे हुए है, पस उन लोगों को बख़्श दे जिन्होंने तौबा की और तेरे रास्ते की पैरवी की, और उन्हें दोज़ख़ की आग से बचा ले।

रब्बना दुआ 33: जन्नत-ए-अदन और नेक खानदान का मिलाप (सूरह ग़ाफ़िर: 8)

رَبَّنَا وَأَدْخِلْهُمْ جَنَّاتِ عَدْنٍ الَّتِي وَعَدتَّهُمْ وَمَن صَلَحَ مِنْ آبَائِهِمْ وَأَزْوَاجِهِمْ وَذُرِّيَّاتِهِمْ ۚ إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ

हिंदी उच्चारण: रब्बना व अदख़िल्हुम जन्नाति ‘अद्निनिल्लती व’अत्तहुम वमन सलह़ा मिन आबा-इहिम व अज़्वाजिहिम व ज़ुर्रिय्यातिहिम, इन्नका अन्तल्-‘अज़ीज़ुल-ह़कीम।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! और उन्हें हमेशा रहने वाले बाग़ों (जन्नत-ए-अदन) में दाख़िल फ़रमा जिसका तूने उनसे वादा किया है, और उनके बाप-दादा, जीवनसाथियों और औलाद में से जो नेक हों उन्हें भी, बेशक तू ज़बरदस्त और हिकमत वाला है।

रब्बना दुआ 34: अज़ाब दूर करने और ईमान की पुकार (सूरह अद-दुख़ान: 12)

رَّبَّنَا اكْشِفْ عَنَّا الْعَذَابَ إِنَّا مُؤْمِنُونَ

हिंदी उच्चारण: रब्बनाकशिफ़ ‘अन्नल-‘अज़ाबा इन्ना मु’मिनून।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हमसे इस अज़ाब (तकलीफ़) को दूर कर दे, बेशक हम ईमान लाने वाले हैं।

रब्बना दुआ 35: मोमिन भाइयों के लिए मग़फ़िरत और दिल में कीने से हिफ़ाज़त (सूरह अल-हश्र: 10)

رَبَّنَا اغْفِرْ لَنَا وَلِإِخْوَانِنَا الَّذِينَ سَبَقُونَا بِالْإِيمَانِ وَلَا تَجْعَلْ فِي قُلُوبِنَا غِلًّا لِّلَّذِينَ آمَنُوا رَبَّنَا إِنَّكَ رَءُوفٌ رَّحِيمٌ

हिंदी उच्चारण: रब्बनाग़्फ़िर लना वलि-इख़्त्वानिनल्लज़ीना सबक़ूना बिल-ईमानि वला तज्’अल फ़ी क़ुलूबिना ग़िल्लल-लिल्लज़ीना आमनू रब्बना इन्नका रऊफ़ुर-रहीम।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हमें और हमारे उन भाइयों को बख़्श दे जो हमसे पहले ईमान लाए, और ईमान वालों के लिए हमारे दिलों में कोई बुग़्ज़ या कीना न रख, ऐ हमारे रब! बेशक तू बड़ा शफ़ीक़ और निहायत रहम फ़रमाने वाला है।

रब्बना दुआ 36: अल्लाह पर तवक्कुल और रुजूअ की दुआ (सूरह अल-मुमतहना: 4)

رَّبَّنَا عَلَيْكَ تَوَكَّلْنَا وَإِلَيْكَ أَنَبْنَا وَإِلَيْكَ الْمَصِيرُ

हिंदी उच्चारण: रब्बना ‘अलैका तवक्कल्ना व इलैका अनब्ना व इलैक्ल-मसीर।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हमने तुझी पर भरोसा किया और तेरी ही तरफ़ रुजूअ किया और तेरी ही तरफ़ लौट कर जाना है।

रब्बना दुआ 37: काफ़िरों की आज़माइश न बनने और मग़फ़िरत (सूरह अल-मुमतहना: 5)

رَبَّنَا لَا تَجْعَلْنَا فِتْنَةً لِّلَّذِينَ كَفَرُوا وَاغْفِرْ لَنَا رَبَّنَا ۖ إِنَّكَ أَنتَ الْعَزِيزُ الْحَكِيمُ

हिंदी उच्चारण: रब्बना ला तज्’अल्ना फ़ित्नाताल-लिल्लज़ीना कफ़रू वग़्फ़िर लना रब्बना, इन्नका अन्तल्-‘अज़ीज़ुल-ह़कीम।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हमें काफ़िरों के लिए आज़माइश (फ़ित्ना) न बना और हमें बख़्श दे ऐ हमारे रब! बेशक तू ही ज़बरदस्त और हिकमत वाला है।

रब्बना दुआ 38: नूर की मुकम्मल पूर्ति और मग़फ़िरत (सूरह अत-तहरीम: 8)

رَبَّنَا أَتْمِمْ لَنَا نُورَنَا وَاغْفِرْ لَنَا ۖ إِنَّكَ عَلَىٰ كُلِّ شَيْءٍ قَدِيرٌ

हिंदी उच्चारण: रब्बना अत्मिम लना नूरना वग़्फ़िर लना, इन्नका ‘अला कुल्लि शै-इन क़दीर।

तर्जुमा: ऐ हमारे रब! हमारे लिए हमारे नूर (रोशनी) को मुकम्मल फ़रमा दे और हमें बख़्श दे, बेशक तू हर चीज़ पर क़ादिर है।

रब्बना दुआ 39: हज़रत नूह (अ.स.) की कश्ती पर सवार होने की दुआ (सूरह अल-मोमिनून: 28-29)

فَقُلِ الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي نَجَّانَا مِنَ الْقَوْمِ الظَّالِمِينَ ۝ وَقُل رَّبِّ أَنزِلْنِي مُنزَلًا مُّبَارَكًا وَأَنتَ خَيْرُ الْمُنزِلِينَ

हिंदी उच्चारण: फ़क़ुलिल-ह़म्दु लिल्लाहिल्लज़ी नज्जाना मिनल-क़ौमिज़-ज़ालिमीन, वक़ुर-रब्बि अन्ज़िल्नी मुन्ज़लम-मुबारकांव-व अन्ता ख़ैरुल-मुन्ज़िलीन।

तर्जुमा: तमाम तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं जिसने हमें ज़ालिम लोगों से नजात दी। और दुआ करो: ऐ मेरे रब! मुझे बरकत वाली जगह उतार और तू सबसे बेहतर उतारने वाला है।

रब्बना दुआ 40: नमाज़ क़ायम रखने और औलाद की सलामती (सूरह इब्राहीम: 40)

رَبِّ اجْعَلْنِي مُقِيمَ الصَّلَاةِ وَمِن ذُرِّيَّتِي ۚ رَبَّنَا وَتَقَبَّلْ دُعَاءِ

हिंदी उच्चारण: रब्बिज्’अल्नी मुक़ीमस-सलाति वमिन ज़ुर्रिय्यती, रब्बना व तक़ब्बल दुआ-इ।

तर्जुमा: ऐ मेरे रब! मुझे और मेरी औलाद को नमाज़ क़ायम करने वाला बना, ऐ हमारे रब! और मेरी दुआ क़बूल फ़रमा।

4. रब्बना दुआएं मांगने के मसनून आदाब व तरीक़ा

दुआ की क़बूलियत के लिए सुन्नत के मुताबिक़ कुछ ख़ास आदाब का ख़याल रखना ज़रूरी है:

  1. बा-वज़ू होकर क़िबला-रुख़ बैठना: पाक-साफ़ होकर आजिज़-ओ-इन्केसारी के साथ दोनों हाथ सीने के सामने उठाएं।
  2. अल्लाह की हम्द व दुरूद शरीफ़ से शुरुआत: दुआ की शुरुआत में अल्लाह की तारीफ़ (सुब्हानल्लाह, अलहम्दुलिल्लाह) और नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर दुरूद शरीफ़ पढ़ें।
  3. दिल की हाज़िरी और यक़ीन: इस कामिल यक़ीन के साथ मांगें कि मेरा रब मेरी आवाज़ सुन रहा है और वह अता करने वाला है।
  4. आहिस्ता और गिड़गिड़ा कर मांगना: चीख़ कर या दिखावे से बचें, बल्कि दिल की गहराई से गिड़गिड़ाएं।
  5. दुआ का ख़ात्मा भी दुरूद शरीफ़ पर करें: हदीस में आता है कि जो दुआ दोनों तरफ़ दुरूद से घिरी हो, वह बारगाहे इलाही में ज़रूर क़बूल होती है।

क़ुरआन गाइड पर अन्य मसनून दुआएं व आर्टिकल्स पढ़ें:

Frequently Asked Questions (FAQs) – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. 40 रब्बना दुआ क्या है (What is 40 Rabbana)?

40 रब्बना दुआएं क़ुरआने मजीद की वे 40 पाकीज़ा आयतें हैं जो शब्द ‘रब्बना’ (رَبَّنَا – ऐ हमारे रब) से शुरू होती हैं। इनमें दुनिया, आख़िरत, मग़फ़िरत, हिदायत, नेक औलाद और जहन्नम से नजात की संपूर्ण याचना शामिल है।

2. सबसे ज़्यादा पढ़ी जाने वाली रब्बना दुआ कौन सी है?

सबसे प्रसिद्ध और जामेअ दुआ सूरह अल-बक़रह (आयत 201) की है: ‘रब्बना आतिना फ़िद्दुन्या ह़सनतंव-वफ़िल-आखिरति ह़सनतंव-वक़िना अज़ाबन्नार’। रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) इस दुआ को सबसे अधिक पढ़ा करते थे।

3. क्या इन 40 दुआओं को नमाज़ में पढ़ा जा सकता है?

हाँ, नफ़्ल नमाज़ के सजदों में और फ़र्ज़ या नफ़्ल नमाज़ के अंतिम क़ाअदा में ‘तशहहुद’ (अत्तहिय्यात) व ‘दुरूद-ए-इब्राहीम’ के बाद क़ुरआनी रब्बना दुआएं पढ़ना सुन्नत और मुस्तहब है।

4. 40 रब्बना दुआएं पढ़ने के क्या मुख्य फ़ायदे हैं (40 Rabbana Benefits)?

इन दुआओं के नियमित पाठ से दिल को सुकून मिलता है, पिछले गुनाह माफ़ होते हैं, परिवार में बरकत और प्रेम बढ़ता है, तथा बंदा हर प्रकार के शैतानी बहकावे और मुसीबतों से महफ़ूज़ रहता है।

5. क्या जिन्हें अरबी नहीं आती वे हिंदी में इन दुआओं को पढ़ सकते हैं?

जी हाँ, जिन्हें अरबी पढ़ने में कठिनाई हो वे इस आर्टिकल में दिए गए हिंदी उच्चारण (Transliteration) को पढ़कर दुआ मांग सकते हैं और उसका अर्थ समझ सकते हैं। अल्लाह नीयतों और दिलों के हाल को भली-भांति जानता है।

Mariya Ansari
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