पवित्र क़ुरआन मजीद की 110वीं सूरह सूरह नस्र (Surah An-Nasr) है। यह क़ुरआन करीम के 30 (अम्मा पारा) में स्थित है और इसमें कुल 3 आयतें हैं। सूरह नस्र पवित्र क़ुरआन मजीद की वह मुबारक सूरह है जो मुकम्मल तौर पर सबसे आख़िर में नाज़िल हुई। इसमें अल्लाह तआला की ग़ैबी मदद, मक्का मुकर्रमा की ऐतिहासिक विजय (फ़तह-ए-मक्का), लोगों के फ़ौज दर फ़ौज इस्लाम में दाख़िल होने की बशारत और अल्लाह की हम्द, तस्बीह व इस्तिग़फ़ार करने का पाकीज़ा हुक्म दिया गया है।
मुसलमानों के लिए इस सूरह को सही उच्चारण और तर्जुमे के साथ समझना बेहद ज़रूरी है क्योंकि यह रोज़मर्रा की पाँचों वक़्त की नमाज़ों में कसरत से पढ़ी जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण सूरतों में से एक है। इस विस्तृत लेख में सूरह नस्र का शुद्ध अरबी मतन, आसान हिंदी उच्चारण, शब्द-दर-शब्द तर्जुमा, शान-ए-नुज़ूल, सहीह हदीस के हवाले, फ़ज़ीलत व नमाज़ में पढ़ने का सुन्नत तरीक़ा पूरी तफ़्सील के साथ पेश किया गया है।
मुख़्तसर ख़ुलासा: सूरह नस्र पवित्र क़ुरआन मजीद की वह मुबारक सूरह है जो मुकम्मल तौर पर सबसे आख़िर में नाज़िल हुई। इसमें अल्लाह तआला की ग़ैबी मदद, मक्का मुकर्रमा की ऐतिहासिक विजय (फ़तह-ए-मक्का), लोगों के फ़ौज दर फ़ौज इस्लाम में दाख़िल होने की बशारत और अल्लाह की हम्द, तस्बीह व इस्तिग़फ़ार करने का पाकीज़ा हुक्म दिया गया है।
सूरह नस्र का संक्षिप्त परिचय (Overview Table)
| विवरण (Aspect) | प्रामाणिक जानकारी (Details) |
|---|---|
| सूरह संख्या (Surah Number) | 110 |
| पारा (Juz) | 30 (अम्मा पारा) |
| कुल आयतें (Total Verses) | 3 आयतें |
| कुल रुकूअ (Ruku) | 1 रुकूअ |
| शब्द व अक्षर संख्या | 19 कलिमात और 80 हुरूफ़ |
| मक़ाम-ए-नुज़ूल (Classification) | मदनी सूरह (क़ुरआन की अंतिम मुकम्मल सूरह) |
सूरह नस्र अरबी मतन, हिंदी उच्चारण व तर्जुमा (आयत दर आयत)
नीचे सूरह नस्र की सभी आयतों का स्पष्ट अरबी मतन, आसान हिंदी उच्चारण (Transliteration) और अर्थ दिया गया है ताकि आप इसे सही तरीक़े से याद कर सकें:
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
हिंदी उच्चारण: बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
तर्जुमा: अल्लाह के नाम से शुरू जो निहायत मेहरबान और हमेशा रहम फ़रमाने वाला है।
आयत 1
إِذَا جَاءَ نَصْرُ اللَّهِ وَالْفَتْحُ ﴿١﴾
हिंदी उच्चारण: इज़ा जा-अ नस्रुल्लाहि वल-फ़त्ह।
हिंदी तर्जुमा: जब अल्लाह की मदद और (मक्का की) विजय आ पहुँचे।
आयत 2
وَرَأَيْتَ النَّاسَ يَدْخُلُونَ فِي دِينِ اللَّهِ أَفْوَاجًا ﴿٢﴾
हिंदी उच्चारण: व र-अय्तन्-ना-स यदख़ुलू-न फ़ी दीनिहिल्लाहि अफ़वाजा।
हिंदी तर्जुमा: और आप लोगों को देख लें कि वे अल्लाह के दीन (इस्लाम) में फ़ौज दर फ़ौज (झुंड के झुंड) दाख़िल हो रहे हैं।
आयत 3
فَسَبِّحْ بِحَمْدِ رَبِّكَ وَاسْتَغْفِرْهُ ۚ إِنَّهُ كَانَ تَوَّابًا ﴿٣﴾
हिंदी उच्चारण: फ़-सब्बिह बि-हम्दि रब्बिका वस्तग़्फ़िर्ह, इन्नहू का-न तव्वाबा।
हिंदी तर्जुमा: तो अपने रब की हम्द (प्रशंसा) के साथ उसकी तस्बीह (महिमा) बयान कीजिए और उससे मग़फ़िरत (माफ़ी) माँगिए; बेशक वह बड़ा तौबा क़ुबूल फ़रमाने वाला है।
सूरह नस्र का शब्द-दर-शब्द अर्थ (Word-by-Word Meaning)
अरबी भाषा की गहराई और क़ुरआनी अल्फ़ाज़ के सही मफ़हूम को समझने के लिए प्रत्येक शब्द का अर्थ नीचे दी गई तालिका में देखें:
| अरबी शब्द (Arabic) | हिंदी उच्चारण | शाब्दिक अर्थ (Hindi Meaning) |
|---|---|---|
| إِذَا | इज़ा | जब |
| جَاءَ | जा-अ | आ जाए / पहुँचे |
| نَصْرُ | नस्रु | मदद |
| اللَّهِ | अल्लाहि | अल्लाह की |
| وَالْفَتْحُ | वल-फ़त्हु | और विजय (फ़तह) |
| وَرَأَيْتَ | व र-अय्त | और आप देख लें |
| النَّاسَ | अन्-नास | लोगों को |
| يَدْخُلُونَ | यदख़ुलून | वे दाख़िल हो रहे हैं |
| فِي دِينِ | फ़ी दीनि | दीन (धर्म) में |
| اللَّهِ | अल्लाहि | अल्लाह के |
| أَفْوَاجًا | अफ़वाजा | फ़ौज दर फ़ौज / गिरोह दर गिरोह |
| فَسَبِّحْ | फ़-सब्बिह | अतः तस्बीह कीजिए |
| بِحَمْدِ | बि-हम्दि | प्रशंसा (हम्द) के साथ |
| رَبِّكَ | रब्बिका | अपने रब की |
| وَاسْتَغْفِرْهُ | वस्तग़्फ़िर्ह | और उससे माफ़ी माँगिए |
| إِنَّهُ | इन्नहू | बेशक वह |
| كَانَ | कान | है |
| تَوَّابًا | तव्वाबा | तौबा क़ुबूल करने वाला |
सूरह नस्र का शान-ए-नुज़ूल (पृष्ठभूमि व अवतरण का कारण)
यह सूरह मिना में हुज्जतुल विदाअ (अंतिम हज) के मौक़े पर तशरीक़ के दिनों में नाज़िल हुई थी। जब यह सूरह नाज़िल हुई, तो अक्सर सहाबा ख़ुश हुए कि इस्लाम को विजय मिल गई और लोग बड़ी संख्या में मुसलमान हो रहे हैं। लेकिन हज़रत अबू बक्र सिद्दीक़ और हज़रत अब्दुल्लाह बिन अब्बास रज़ियल्लाहु अन्हुमा रोने लगे। जब उनसे रोने की वजह पूछी गई, तो उन्होंने फ़रमाया कि इसमें रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की दुनिया से विदाई और वफ़ात की तरफ़ इशारा है, क्योंकि जब नबी का मिशन पूरा हो जाता है तो अल्लाह उन्हें अपने पास बुला लेता है।

सूरह नस्र की फ़ज़ीलत पर प्रामाणिक सहीह अहादीस
हदीस की किताबों में सूरह नस्र की असीम फ़ज़ीलतें दर्ज हैं:
जामेअ तिर्मिज़ी (हदीस 2895) – एक-चौथाई क़ुरआन का सवाब
रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: ‘इज़ा जा-अ नस्रुल्लाहि वल फ़त्ह (सूरह नस्र) एक-चौथाई क़ुरआन (1/4 Quran) के बराबर है।’
सहीह बुख़ारी (हदीस 4967) – रुकूअ व सजदे की ख़ास दुआ
हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा से रिवायत है कि सूरह नस्र के नाज़िल होने के बाद रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम अपने रुकूअ और सजदे में कसरत से यह दुआ पढ़ते थे: ‘सुब्हानकल्लाहुम्मा रब्बना व बिहम्दिका अल्लाहुम्मग़्फ़िर ली’ (ऐ हमारे रब अल्लाह! तेरी पाकी बयान करते हैं तेरी तारीफ़ के साथ, ऐ अल्लाह मुझे बख्श दे)।
सहीह बुख़ारी (हदीस 4294) – हज़रत इब्ने अब्बास का इल्म
हज़रत उमर रज़ियल्लाहु अन्हु बद्र के बड़े सहाबा के साथ नौजवान अब्दुल्लाह बिन अब्बास को बिठाते थे। जब कुछ सहाबा ने एतराज़ किया, तो उमर रज़ि. ने सूरह नस्र का मफ़हूम पूछा। इब्ने अब्बास ने जवाब दिया: ‘यह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की वफ़ात की ख़बर है।’ उमर रज़ि. ने फ़रमाया: ‘मैं भी इस सूरह से वही समझता हूँ जो तुम समझते हो।’
सूरह नस्र पढ़ने के रूहानी व व्यावहारिक फ़ायदे
इस पवित्र सूरह की नियमित तिलावत से हासिल होने वाले प्रमुख आध्यात्मिक लाभ निम्नलिखित हैं:
- हर काम और मुहिम में अल्लाह की ग़ैबी मदद और कामयाबी हासिल होना।
- अल्लाह की हम्द व इस्तिग़फ़ार की आदत बनना जिससे गुनाह माफ़ होते हैं।
- दैनिक जीवन में 4 बार पढ़ने से पूरे क़ुरआन मजीद की तिलावत का सवाब।
- कामयाबी मिलने पर घमंड के बजाए आजिज़ व शुक्रगुज़ार बनने की प्रेरणा।
नमाज़ में सूरह नस्र पढ़ने का मसनून तरीक़ा व नियम
नमाज़ में सूरह फ़ातिहा के बाद सूरह नस्र पढ़ना सुन्नत से साबित है। इसके अलावा इसके नाज़िल होने के बाद नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने नमाज़ के रुकूअ और सुजूद में इस्तिग़फ़ार की कसरत फ़रमाई थी।
क़ुरआन मजीद की प्रमुख सूरतों के विस्तृत लेख
- सूरह इख़्लास इन हिंदी (Surah Ikhlas in Hindi) – अरबी मतन, तर्जुमा व 1/3 क़ुरआन का सवाब
- सूरह कौसर इन हिंदी (Surah Kausar in Hindi) – अरबी मतन, हौज़-ए-कौसर व तर्जुमा
- सूरह काफ़िरून इन हिंदी (Surah Kafirun in Hindi) – 1/4 क़ुरआन व शिर्क से बेज़ारी
- सूरह क़द्र इन हिंदी (Surah Qadr in Hindi) – शब-ए-क़द्र की अज़मत व तर्जुमा
- सूरह अस्र इन हिंदी (Surah Asr in Hindi) – ज़माने की क़सम व नुक़सान से बचाव
- सूरह नास इन हिंदी (Surah Naas in Hindi) – वस्वसों से हिफ़ाज़त
- सूरह फलक इन हिंदी (Surah Falaq in Hindi) – जादू व बुरी नज़र से बचाव
Frequently Asked Questions (FAQs)
1. क़ुरआन की सबसे आख़िर में नाज़िल होने वाली मुकम्मल सूरह कौन सी है?
क़ुरआन मजीद की अंतिम मुकम्मल सूरह ‘सूरह नस्र’ (Surah An-Nasr) है, जो हुज्जतुल विदाअ के समय नाज़िल हुई थी।
2. सूरह नस्र में किस विजय (फ़तह) की बात कही गई है?
सूरह नस्र में ‘फ़तह-ए-मक्का’ (8 हिजरी में मक्का की ऐतिहासिक शांतिपूर्ण विजय) की बात कही गई है।
3. सूरह नस्र नाज़िल होने पर हज़रत अबू बक्र क्यों रोए थे?
क्योंकि हज़रत अबू बक्र समझ गए थे कि दीन मुकम्मल हो चुका है और अब रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की मुबारक ज़िंदगी का मिशन पूरा हो गया है और आपकी वफ़ात का वक़्त क़रीब आ गया है।
4. सूरह नस्र में कुल कितनी आयतें हैं?
सूरह नस्र में कुल 3 आयतें, 19 शब्द और 80 अक्षर हैं। यह 30वें पारे में स्थित है।
5. कामयाबी मिलने पर सूरह नस्र हमें क्या सिखाती है?
सूरह नस्र सिखाती है कि जब भी इंसान को कोई बड़ी कामयाबी या जीत हासिल हो, तो घमंड करने के बजाए अल्लाह की तस्बीह करे और अपनी कमियों के लिए इस्तिग़फ़ार (माफ़ी) माँगे।
6. सूरह नस्र को कितनी बार पढ़ना चाहिए?
इसे रोज़ाना की नमाज़ों और अज़कार में पढ़ना बेहद मुस्तहब है। 4 बार पढ़ने से पूरे क़ुरआन के बराबर सवाब मिलता है।