3 Kalma in Hindi: इस्लाम में तीसरा कलमा, जिसे कलिमा तमजीद (Kalima Tamjeed) कहा जाता है, अल्लाह तआला की हम्द-ओ-सना, पाकीज़गी और बुज़ुर्गी बयान करने का सबसे अफ़ज़ल और पसंदीदा कलाम है। ‘तमजीद’ का अरबी में अर्थ ‘बुज़ुर्गी बयान करना’ या ‘महिमा गान करना’ होता है। इस कलमे में तस्बीह (सुब्हानल्लाह), तहमीद (अलहम्दुलिल्लाह), तहलील (ला इलाहा इल्लल्लाह), तकबीर (अल्लाहु अकबर) और हवकला (ला हवला वला कुव्वता) जैसे पाँच अज़ीम अज़कार एक साथ शामिल हैं। इस विस्तृत लेख में तीसरे कलमे की शुद्ध अरबी इबारत (एराब सहित), हिंदी उच्चारण, शब्द-दर-शब्द तर्जुमा और हदीस के मुताबिक़ नमाज़े तस्बीह में इसकी अज़ीम अहमियत बयान की गई है।
तीसरा कलमा: अरबी इबारत, हिंदी उच्चारण और तर्जुमा
कलिमा तमजीद अल्लाह के पसंदीदा कलिमात का खूबसूरत गुलदस्ता है:
हिंदी उच्चारण (Transliteration): सुब्हानल्लाहि वल हम्दु लिल्लाहि वला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर, वला हवला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यिल अज़ीम।
अंग्रेज़ी उच्चारण (English): Subhaan-Allaahi wal-hamdu lil-laahi wa laa ilaaha illal-laahu wal-laahu Akbar, wa laa hawla wa laa quwwata illaa bil-laahil ‘Aliyyil ‘Azeem.
हिंदी तर्जुमा (Meaning): अल्लाह पाक है (हर ऐब व कमज़ोरी से), और तमाम तारीफ़ें अल्लाह ही के लिए हैं, और अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, और अल्लाह सबसे बड़ा है; और गुनाहों से बचने और नेकियाँ करने की कोई ताक़त नहीं मगर अल्लाह ही की तौफ़ीक़ से, जो बहुत बुलंद और अज़मत वाला है।
तीसरे कलमे के 5 बुनियादी हिस्से और उनका अर्थ
| कलमे का हिस्सा | हिंदी उच्चारण | हिंदी तर्जुमा | इस्लामी महत्व |
|---|---|---|---|
| سُبْحَانَ اللّٰهِ | सुब्हानल्लाह | अल्लाह पाक है | तस्बीह (अल्लाह की पाकीज़गी) |
| وَالْحَمْدُ لِلّٰهِ | वल हम्दु लिल्लाह | सब तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं | तहमीद (शुक्रगुज़ारी) |
| وَلَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ | वला इलाहा इल्लल्लाह | अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं | तहलील (तौहीद का इकरार) |
| وَاللّٰهُ أَكْبَرُ | वल्लाहु अकबर | और अल्लाह सबसे बड़ा है | तकबीर (अल्लाह की बड़ाई) |
| وَلَا حَوْلَ وَلَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللّٰهِ | वला हवला वला क़ुव्वता… | अल्लाह के सिवा कोई ताक़त नहीं | हवकला (जन्नत के खज़ानों में से एक खज़ाना) |
हदीस शरीफ में तीसरे कलमे की फ़ज़ीलत व बरकात
हदीस-ए-नबवी में इस कलमे के अनेक बेमिसाल फ़ायदे बताए गए हैं:
- जन्नत में दरख़्त लगना: सहीह तिर्मिज़ी (3464) की हदीस में है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: “मेराज की रात मेरी मुलाक़ात हज़रत इब्राहीम अलैहिस्सलाम से हुई, उन्होंने फ़रमाया: ऐ मुहम्मद! अपनी उम्मत को मेरा सलाम कहें और बताएँ कि जन्नत की मिट्टी बहुत उम्दा और पानी मीठा है, और उसका पौधारोपण ‘सुब्हानल्लाहि वल हम्दु लिल्लाहि वला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर’ है।”
- नमाज़े तस्बीह की रूह: सलातुत तस्बीह (Salatul Tasbeeh) की चार रकातों में कुल 300 मर्तबा यही तीसरा कलमा पढ़ा जाता है, जिससे ज़िंदगी भर के सारे छोटे-बड़े गुनाह मुआफ़ हो जाते हैं।
- जन्नत का खज़ाना: सहीह बुखारी (4205) में हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया: “ला हवला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाह जन्नत के खज़ानों में से एक खज़ाना है।”
- सूरज की हर चीज़ से बेहतर: सहीह मुस्लिम (2695) के मुताबिक़, नबी ﷺ ने फ़रमाया: “मुझे इन चार कलिमात का कहना उन तमाम चीज़ों से ज़्यादा महबूब है जिन पर सूरज तुलू (उदय) होता है।”
इस्लाम के अन्य कलिमे और ज़रूरी दुआएं:
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. तीसरा कलमा कौन सा है और इसे क्या कहते हैं?
तीसरे कलमे को ‘कलिमा तमजीद’ कहा जाता है। इसके बोल हैं: “सुब्हानल्लाहि वल हम्दु लिल्लाहि वला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर, वला हवला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यिल अज़ीम।”
2. ‘तमजीद’ शब्द का क्या अर्थ होता है?
‘तमजीद’ का अर्थ बुज़ुर्गी, महानता और प्रशंसा बयान करना होता है। चूंकि इस कलमे में अल्लाह की बड़ाई और महानता का गुणगान किया जाता है, इसलिए इसे कलिमा तमजीद कहते हैं।
3. क्या सलातुत तस्बीह में तीसरा कलमा ही पढ़ा जाता है?
हाँ, सलातुत तस्बीह की नमाज़ में कुल 300 मर्तबा यही तीसरा कलमा (या कम से कम ‘सुब्हानल्लाहि वल हम्दु लिल्लाहि वला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर’) पढ़ा जाता है।
4. तीसरा कलमा रोज़ाना कितनी बार पढ़ना चाहिए?
रोज़ाना सुबह या शाम कम से कम 100 बार इसका विर्द करना अफ़ज़ल है। इससे दिल को सुकून मिलता है और जन्नत में नेकियों के दरख़्त लगाए जाते हैं।
5. क्या ‘वला हवला वला क़ुव्वता’ तीसरे कलमे का हिस्सा है?
हाँ, तीसरे कलमे के अंत में ‘वला हवला वला क़ुव्वता इल्ला बिल्लाहिल अलिय्यिल अज़ीम’ शामिल होता है, जिसे हदीस में जन्नत के खज़ानों में से एक खज़ाना बताया गया है।