पवित्र क़ुरआन मजीद की 105वीं सूरह सूरह फ़ील (Surah Al-Fil) है। यह क़ुरआन करीम के 30 (अम्मा पारा) में स्थित है और इसमें कुल 5 आयतें हैं। सूरह फ़ील में यमन के ईसाई गवर्नर अबराहा की हाथियों वाली विशाल फ़ौज द्वारा ख़ाना-ए-काबा को ढाने की नापाक साज़िश और अल्लाह तआला द्वारा नन्हे अबाबील परिंदों के ज़रिए पत्थरों की बारिश करके उस फ़ौज को चबाए हुए भूसे की तरह बर्बाद करने का ऐतिहासिक चमत्कार बयान किया गया है।
मुसलमानों के लिए इस सूरह को सही उच्चारण और तर्जुमे के साथ समझना बेहद ज़रूरी है क्योंकि यह रोज़मर्रा की पाँचों वक़्त की नमाज़ों में कसरत से पढ़ी जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण सूरतों में से एक है। इस विस्तृत लेख में सूरह फ़ील का शुद्ध अरबी मतन, आसान हिंदी उच्चारण, शब्द-दर-शब्द तर्जुमा, शान-ए-नुज़ूल, सहीह हदीस के हवाले, फ़ज़ीलत व नमाज़ में पढ़ने का सुन्नत तरीक़ा पूरी तफ़्सील के साथ पेश किया गया है।
मुख़्तसर ख़ुलासा: सूरह फ़ील में यमन के ईसाई गवर्नर अबराहा की हाथियों वाली विशाल फ़ौज द्वारा ख़ाना-ए-काबा को ढाने की नापाक साज़िश और अल्लाह तआला द्वारा नन्हे अबाबील परिंदों के ज़रिए पत्थरों की बारिश करके उस फ़ौज को चबाए हुए भूसे की तरह बर्बाद करने का ऐतिहासिक चमत्कार बयान किया गया है।
सूरह फ़ील का संक्षिप्त परिचय (Overview Table)
| विवरण (Aspect) | प्रामाणिक जानकारी (Details) |
|---|---|
| सूरह संख्या (Surah Number) | 105 |
| पारा (Juz) | 30 (अम्मा पारा) |
| कुल आयतें (Total Verses) | 5 आयतें |
| कुल रुकूअ (Ruku) | 1 रुकूअ |
| शब्द व अक्षर संख्या | 23 कलिमात और 96 हुरूफ़ |
| मक़ाम-ए-नुज़ूल (Classification) | मक्की सूरह |
सूरह फ़ील अरबी मतन, हिंदी उच्चारण व तर्जुमा (आयत दर आयत)
नीचे सूरह फ़ील की सभी आयतों का स्पष्ट अरबी मतन, आसान हिंदी उच्चारण (Transliteration) और अर्थ दिया गया है ताकि आप इसे सही तरीक़े से याद कर सकें:
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
हिंदी उच्चारण: बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम
तर्जुमा: अल्लाह के नाम से शुरू जो निहायत मेहरबान और हमेशा रहम फ़रमाने वाला है।
आयत 1
أَلَمْ تَرَ كَيْفَ فَعَلَ رَبُّكَ بِأَصْحَابِ الْفِيلِ ﴿١﴾
हिंदी उच्चारण: अलम तरह कैफ़ फ़-अ-ल रब्बुका बि-अस्हाबिल-फ़ील।
हिंदी तर्जुमा: क्या आपने नहीं देखा कि आपके रब ने हाथियों वालों (असहाब-ए-फ़ील) के साथ क्या किया?
आयत 2
أَلَمْ يَجْعَلْ كَيْدَهُمْ فِي تَضْلِيلٍ ﴿٢﴾
हिंदी उच्चारण: अलम यजअल कै-दहुम फ़ी तज़लील।
हिंदी तर्जुमा: क्या उसने उनकी चाल (साज़िश) को बेकार (नाकाम) नहीं कर दिया?
आयत 3
وَأَرْسَلَ عَلَيْهِمْ طَيْرًا أَبَابِيلَ ﴿٣﴾
हिंदी उच्चारण: व अर्स-ल अलैहिम् तैरन अबाबील।
हिंदी तर्जुमा: और उसने उन पर झुंड के झुंड (अबाबील) परिंदे भेज दिए।
आयत 4
تَرْمِيهِم بِحِجَارَةٍ مِّن سِجِّيلٍ ﴿٤﴾
हिंदी उच्चारण: तर्मीहिम् बि-हिजारतिम्-मिन् सिज्जील।
हिंदी तर्जुमा: जो उन पर पकी हुई मिट्टी (कंकड़) के पत्थर फेंक रहे थे।
आयत 5
فَجَعَلَهُمْ كَعَصْفٍ مَّأْكُولٍ ﴿٥﴾
हिंदी उच्चारण: फ़-ज-अ-लहुम क-अस्फ़िम्-मअकूल।
हिंदी तर्जुमा: फिर (अल्लाह ने) उनको खाए हुए (जानवरों के चबाए हुए) भूसे जैसा बना दिया।
सूरह फ़ील का शब्द-दर-शब्द अर्थ (Word-by-Word Meaning)
अरबी भाषा की गहराई और क़ुरआनी अल्फ़ाज़ के सही मफ़हूम को समझने के लिए प्रत्येक शब्द का अर्थ नीचे दी गई तालिका में देखें:
| अरबी शब्द (Arabic) | हिंदी उच्चारण | शाब्दिक अर्थ (Hindi Meaning) |
|---|---|---|
| أَلَمْ تَرَ | अलम तरह | क्या आपने नहीं देखा |
| كَيْفَ | कैफ़ | कैसा / क्या |
| فَعَلَ | फ़-अ-ल | किया |
| رَبُّكَ | रब्बुका | आपके रब ने |
| بِأَصْحَابِ | बि-अस्हाबि | वालों के साथ |
| الْفِيلِ | अल्-फ़ील | हाथी |
| أَلَمْ يَجْعَلْ | अलम यजअल | क्या नहीं बना दिया |
| كَيْدَهُمْ | कै-दहुम | उनकी चाल / साज़िश को |
| فِي تَضْلِيلٍ | फ़ी तज़लील | नाकाम / अकारथ |
| وَأَرْسَلَ | व अर्स-ल | और भेजे |
| عَلَيْهِمْ | अलैहिम् | उन पर |
| طَيْرًا | तैरन | परिंदे |
| أَبَابِيلَ | अबाबील | झुंड दर झुंड |
| تَرْمِيهِم | तर्मीहिम् | वे फेंकते थे उन पर |
| بِحِجَارَةٍ | बि-हिजारत | पत्थर |
| مِّن سِجِّيلٍ | मिन् सिज्जील | पकी हुई मिट्टी के |
| فَجَعَلَهُمْ | फ़-ज-अ-लहुम | फिर कर दिया उनको |
| كَعَصْفٍ | क-अस्फ़िन | भूसे की तरह |
| مَّأْكُولٍ | मअकूल | खाया हुआ / चबाया हुआ |
सूरह फ़ील का शान-ए-नुज़ूल (पृष्ठभूमि व अवतरण का कारण)
यह घटना नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की पैदाइश के वर्ष (570 ईस्वी) में हुई थी, जिसे अरब में ‘आमुल फ़ील’ (हाथियों का साल) कहा जाता है। यमन के गवर्नर अबराहा ने सनआ में एक भव्य गिरजाघर बनाया था ताकि लोग काबा छोड़कर वहाँ आएं। जब अरबों ने इसका विरोध किया, तो अबराहा महमूद नामक सबसे बड़े हाथी और एक विशाल सेना के साथ काबा को गिराने मक्का की ओर बढ़ा। जब वे मुज़दलिफ़ा के पास वादी-ए-मुहस्सिर पहुँचे, तो हाथी आगे बढ़ने से रुक गया। तभी समुद्र की ओर से छोटे-छोटे परिंदों (अबाबील) के झुंड आए, जिनके पंजों और चोंच में चने बराबर पकी मिट्टी के कंकर थे। वे कंकर जिस सैनिक पर गिरते, वह छलनी होकर ज़मीन पर ढेर हो जाता और पूरी सेना चबाए हुए भूसे की तरह तबाह हो गई।

सूरह फ़ील की फ़ज़ीलत पर प्रामाणिक सहीह अहादीस
हदीस की किताबों में सूरह फ़ील की असीम फ़ज़ीलतें दर्ज हैं:
सहीह बुख़ारी (हदीस 4347) – मक्का का हरम होना
फ़तह-ए-मक्का के दिन रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: ‘अल्लाह तआला ने मक्का को हाथियों (अबराहा की फ़ौज) से महफ़ूज़ रखा और अब अपने रसूल और मोमिनों को इस पर ग़लबा अता फ़रमाया है।’
तफ़्सीर इब्ने कसीर – क़ुरैश पर एहसान
अल्लाह तआला ने इस सूरह के ज़रिए अहले मक्का को याद दिलाया कि जब तुम्हारी अपनी कोई ताक़त नहीं थी, तब अल्लाह ने अपनी गै़बी ताक़त से तुम्हारे घर (काबा) की हिफ़ाज़त फ़रमाई। इसलिए तुम्हें केवल उसी अल्लाह की इबादत करनी चाहिए।
मुसनद अहमद – ज़ालिमों की नाकामी
सूरह फ़ील इस बात की सबसे बड़ी गवाही है कि जो कोई भी अल्लाह के घर और दीन को नुक़सान पहुँचाने की साज़िश करेगा, अल्लाह तआला उसकी चाल को उसी पर उलट देगा।
सूरह फ़ील पढ़ने के रूहानी व व्यावहारिक फ़ायदे
इस पवित्र सूरह की नियमित तिलावत से हासिल होने वाले प्रमुख आध्यात्मिक लाभ निम्नलिखित हैं:
- ज़ालिम दुश्मनों के ज़ुल्म, साज़िशों और घमंड से अल्लाह की ग़ैबी हिफ़ाज़त हासिल होना।
- अल्लाह की क़ुदरत और अज़मत पर ईमान ताज़ा और मज़बूत होना।
- मुश्किल वक़्त में जब कोई सहारा नज़र न आए, तो अल्लाह की ग़ैबी मदद पर तवक्कुल बढ़ना।
- अहंकार और घमंड का बुरा अंजाम समझकर आजिज़ी व विनम्रता का गुण पैदा होना।
नमाज़ में सूरह फ़ील पढ़ने का मसनून तरीक़ा व नियम
सूरह फ़ील नमाज़ की किसी भी रकात में सूरह फ़ातिहा के बाद पढ़ी जा सकती है। इसके बाद दूसरी रकात में सूरह क़ुरैश पढ़ना तरतीब के लिहाज़ से बहुत मुस्तहब है।
क़ुरआन मजीद की प्रमुख सूरतों के विस्तृत लेख
- सूरह इख़्लास इन हिंदी (Surah Ikhlas in Hindi) – अरबी मतन, तर्जुमा व 1/3 क़ुरआन का सवाब
- सूरह कौसर इन हिंदी (Surah Kausar in Hindi) – अरबी मतन, हौज़-ए-कौसर व तर्जुमा
- सूरह काफ़िरून इन हिंदी (Surah Kafirun in Hindi) – 1/4 क़ुरआन व शिर्क से बेज़ारी
- सूरह क़द्र इन हिंदी (Surah Qadr in Hindi) – शब-ए-क़द्र की अज़मत व तर्जुमा
- सूरह अस्र इन हिंदी (Surah Asr in Hindi) – ज़माने की क़सम व नुक़सान से बचाव
- सूरह नास इन हिंदी (Surah Naas in Hindi) – वस्वसों से हिफ़ाज़त
- सूरह फलक इन हिंदी (Surah Falaq in Hindi) – जादू व बुरी नज़र से बचाव
Frequently Asked Questions (FAQs)
1. असहाब-ए-फ़ील कौन थे?
असहाब-ए-फ़ील यमन के ईसाई बादशाह अबराहा और उसकी सेना के सिपाही थे, जो हाथियों पर सवार होकर पवित्र ख़ाना-ए-काबा को गिराने के इरादे से मक्का आए थे।
2. अबाबील क्या है?
अबाबील किसी एक विशेष चिड़िया का नाम नहीं है, बल्कि अरबी में ‘तैरन अबाबील’ का अर्थ है ‘झुंड के झुंड परिंदे’। अल्लाह ने विशेष रूप से इन छोटे पक्षियों को पकी मिट्टी के कंकरों के साथ भेजा था।
3. आमुल फ़ील (Year of the Elephant) किसे कहते हैं?
जिस वर्ष अबराहा की हाथियों वाली सेना नष्ट हुई, उसी वर्ष नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की विलादत (जन्म) हुई। अरब उस वर्ष को इतिहास की एक प्रमुख घटना मानकर ‘आमुल फ़ील’ कहते थे।
4. सिज्जील (سِجِّيلٍ) का क्या अर्थ है?
सिज्जील का अर्थ है पकी हुई सख्त मिट्टी (कंकर) जिसे आग में तपाया गया हो। यह इतने शक्तिशाली थे कि जिस सैनिक पर गिरते, उसे आर-पार छलनी कर देते थे।
5. सूरह फ़ील में कितनी आयतें हैं?
सूरह फ़ील में कुल 5 आयतें, 23 शब्द और 96 अक्षर हैं। यह 30वें पारे (अम्मा पारा) में स्थित है।
6. सूरह फ़ील पढ़ने से क्या सबक मिलता है?
सबक यह मिलता है कि चाहे दुश्मन कितना भी ताक़तवर क्यों न हो, अल्लाह की ताक़त के आगे वह एक नन्हे परिंदे की चोंच के कंकर के बराबर भी नहीं ठहर सकता।