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चाँद देखने की दुआ | Chand Dekhne Ki Dua in Hindi, Arabic, Urdu & English (तर्जुमा व सुन्नत तरीक़ा)

By Mariya Ansari •

इस्लामी हिजरी कैलेंडर (Islamic Hijri Calendar) का प्रत्येक नया महीना चाँद यानी हिलाल (New Crescent Moon) के तुलू होने से आरंभ होता है। जब भी पश्चिम के आसमान पर नए माह का बारीक चाँद दिखाई देता है, तो नबी-ए-करीम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (ﷺ) अल्लाह तआला की बारगाह में हाथ उठाकर एक बेहद बरकत भरी मसनून दुआ पढ़ा करते थे। चाहे वह मुकद्दस रमज़ानुल मुबारक का चाँद हो, ईद-उल-फ़ितर (Shawwal) का मुबारक चाँद हो, ईद-उल-अज़हा (Zul Hijjah) का चाँद हो या साल के बाकी महीनों का नया चाँद—चाँद देखकर अल्लाह की हम्द-ओ-सना करना और बरकत व सलामती की दुआ मांगना नबी-ए-करीम (ﷺ) की अज़ीम सुन्नत है।

इस संपूर्ण लेख में आप चाँद देखने की दुआ (Chand Dekhne Ki Dua in Hindi) को शुद्ध अरबी मतन (اعراب सहित), हिंदी उच्चारण (Transliteration), हिंदी तर्जुमा (Tarjuma), उर्दू अनुवाद और इंग्लिश मीनिंग के साथ विस्तार से सीखेंगे। इसके साथ ही चाँद देखने के इस्लामी आदाब और हदीस के प्रमाण भी जानेंगे ताकि आने वाले हर नए महीने का स्वागत आप सुन्नत के मुताबिक कर सकें।

चाँद देखने की दुआ क्या है? (What is Chand Dekhne Ki Dua?)

चाँद देखने की दुआ वह मसनून दुआ है जिसे नया चाँद (Hilal) नज़र आने पर रसूलुल्लाह (ﷺ) ने उम्मत को पढ़ने की तालीम दी है। जामेअ अत-तिर्मिज़ी (हदीस: 3451) और मुसनद अहमद में हज़रत तल्हा बिन उबैदुल्लाह (रज़ि.) से रिवायत है कि जब नबी करीम (ﷺ) नया चाँद देखते, तो अल्लाह से पूरे महीने के लिए ईमान, सलामती, खैर और बरकत की इल्तिजा करते थे।

इस्लाम में चाँद सिर्फ दिन और तारीख गिनने का ज़रिया नहीं है, बल्कि यह अल्लाह तआला की अज़ीम कुदरत की निशानी है। इस दुआ के ज़रिए मोमिन बंदा यह इकरार करता है कि चाँद खुद कोई नफ़ा या नुकसान नहीं पहुंचा सकता, बल्कि चाँद का पैदा करने वाला और हम इंसानों का पैदा करने वाला सिर्फ और सिर्फ एक अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त है।

हदीस का हवाला (Reference): हज़रत तल्हा बिन उबैदुल्लाह (रज़ि.) फ़रमाते हैं कि रसूलुल्लाह (ﷺ) जब नया चाँद देखते तो यह दुआ पढ़ते थे: “अल्लाहुम्म अह्लिल्हु अलैना बिल युम्नि वल ईमानी वस्सलामति वल इस्लामि रब्बी व रब्बुकल्लाह।” (जामेअ अत-तिर्मिज़ी, हदीस 3451, हसन सहीह)

चाँद देखने की दुआ अरबी में (Chand Dekhne Ki Dua in Arabic Text)

चाँद देखने की सबसे मशहूर और प्रामाणिक दुआ का अरबी मतन एराब (ज़ेर, ज़बर, पेश) के साथ नीचे दिया गया है:

اللَّهُمَّ أَهْلِلْهُ عَلَيْنَا بِالْيُمْنِ وَالإِيمَانِ وَالسَّلاَمَةِ وَالإِسْلاَمِ رَبِّي وَرَبُّكَ اللَّهُ

(जामेअ अत-तिर्मिज़ी: 3451 | सुनन अद-दारिमी: 1687)

चाँद देखने की दुआ हिंदी में (Chand Dekhne Ki Dua in Hindi)

जो लोग अरबी पढ़ने में असहज महसूस करते हैं, उनके लिए चाँद देखने की दुआ का शुद्ध हिंदी लिप्यंतरण (Hindi Transliteration) यहाँ दिया गया है:

“अल्लाहुम्म अह्लिल्हु अलैना बिल युम्नि वल ईमानी वस्सलामति वल इस्लामि, रब्बी व रब्बुकल्लाह।”

लफ़्ज़ ब लफ़्ज़ (Word by Word) मानी व विश्लेषण:

  • अल्लाहुम्म (اللَّهُمَّ): ऐ अल्लाह!
  • अह्लिल्हु अलैना (أَهْلِلْهُ عَلَيْنَا): इस नए चाँद को हमारे ऊपर तुलू (उदित) फ़रमा।
  • बिल युम्नि (بِالْيُمْنِ): बरकत, भलाई और खुशहाली के साथ।
  • वल ईमानी (وَالإِيمَانِ): और मज़बूत ईमान के साथ।
  • वस्सलामति (وَالسَّلاَمَةِ): और हर तरह की बला, आफ़त व बीमारी से सलामती के साथ।
  • वल इस्लामि (وَالإِسْلاَمِ): और दीन-ए-इस्लाम पर क़ायम रहने के साथ।
  • रब्बी व रब्बुकल्लाह (رَبِّي وَرَبُّكَ اللَّهُ): (ऐ चाँद!) मेरा रब और तेरा रब सिर्फ अल्लाह ही है।

चाँद देखने की दुआ का हिंदी तर्जुमा (Chand Dekhne Ki Dua with Tarjuma)

दुआ मांगते समय यदि उसके अर्थ का ज्ञान दिल में मौजूद हो, तो दुआ में आजिज़ी और रूहानियत कई गुना बढ़ जाती है। इसका हिंदी तर्जुमा इस प्रकार है:

“ऐ अल्लाह! इस चाँद को हमारे ऊपर बरकत, ईमान, सलामती और इस्लाम के साथ तुलू फ़रमा। (ऐ चाँद!) मेरा और तेरा रब अल्लाह है।”

चाँद देखने की दुआ उर्दू में (Chand Dekhne Ki Dua in Urdu Translation)

उर्दू भाषा में इस मुबारक मसनून दुआ का तर्जुमा नीचे नस्तअ़लीक़ खत में मुलाहिज़ा फ़रमाएं:

“اے اللہ! اس چاند کو ہم پر برکت، ایمان، سلامتی اور اسلام کے ساتھ طلوع فرما۔ (اے چاند!) میرا اور تیرا رب اللہ ہے۔”

चाँद देखने की दुआ इंग्लिश में (Chand Dekhne Ki Dua in English Translation)

For English readers and international learners, the complete Roman transliteration and authentic English translation are as follows:

Transliteration: “Allahumma ahlilhu ‘alayna bil-yumni wal-iman, was-salamati wal-islam, Rabbi wa Rabbukallah.”

English Meaning: “O Allah, bring this crescent moon upon us with blessing and faith, safety and Islam. (O Moon!) My Lord and your Lord is Allah.” (Jami` at-Tirmidhi: 3451)

नया चाँद देखकर दुआ मांगते मोमिन
मगरिब के बाद नया चाँद (हिलाल) देखकर हाथ उठाकर मसनून दुआ मांगते हुए मोमिन (इलस्ट्रेशन)

हज़रत इब्ने उमर (रज़ि.) की दूसरी मसनून दुआ (Sunan Abi Dawud)

सुनन अबी दाऊद (हदीस: 5092) और सुनन अद-दारिमी में हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर (रज़ि.) से एक और अज़ीम रिवायत मिलती है। इसमें रसूलुल्लाह (ﷺ) चाँद देखने पर ‘अल्लाहु अकबर’ के साथ दुआ का आग़ाज़ फ़रमाते थे:

اللَّهُ أَكْبَرُ، اللَّهُمَّ أَهِلَّهُ عَلَيْنَا بِالأَمْنِ وَالإِيمَانِ، وَالسَّلاَمَةِ وَالإِسْلاَمِ، وَالتَّوْفِيقِ لِمَا تُحِبُّ وَتَرْضَى، رَبُّنَا وَرَبُّكَ اللَّهُ

हिंदी उच्चारण: “अल्लाहु अकबर, अल्लाहुम्म अहिल्लहू अलैना बिल अम्नि वल ईमानी, वस्सलामति वल इस्लामि, वत्तौफ़ीक़ि लिमा तुहिब्बु व तरज़ा, रब्बुना व रब्बुकल्लाह।”

हिंदी तर्जुमा: “अल्लाह सबसे बड़ा है। ऐ अल्लाह! इस चाँद को हमारे ऊपर अम्न व सलामती, ईमान व इस्लाम और उस अमल की तौफ़ीक़ के साथ निकाल जिसे तू पसन्द फ़रमाए और जिससे तू राज़ी हो। हमारा और तेरा रब अल्लाह है।”

रमज़ान और ईद का चाँद देखने की दुआ (Ramzan & Eid Ka Chand Dekhne Ki Dua)

अक्सर लोग यह सवाल पूछते हैं कि “क्या रमज़ान का चाँद देखने की दुआ और ईद का चाँद देखने की दुआ अलग-अलग होती है?”

हदीस शरीफ़ के मुताले से यह बिल्कुल स्पष्ट है कि नबी-ए-करीम (ﷺ) साल के सभी 12 महीनों के नए चाँद के लिए यही मसनून दुआ पढ़ते थे। अतः रमज़ानुल मुबारक का चाँद देखने पर, ईद-उल-फ़ितर (शव्वाल) का चाँद देखने पर, ईद-उल-अज़हा (ज़ुल हिज्जाह) का चाँद देखने पर और मुहर्रमुल हराम (नए इस्लामी साल) का चाँद देखने पर यही दुआ पढ़ी जाएगी।

अलबत्ता, रमज़ान का चाँद देखने के बाद मोमिन बंदे को अपने दिल से यह भी इल्तिजा करनी चाहिए कि: “ऐ अल्लाह! मुझे इस रमज़ान में पूरे रोज़े रखने, तरावीह पढ़ने, क़ुरआन की तिलावत करने और मग़फ़िरत हासिल करने की तौफ़ीक़ नसीब फ़रमा।” इसी तरह ईद का चाँद देखकर अल्लाह का शुक्र अदा करना चाहिए कि उसने हमें रमज़ान के रोज़े रखने की तौफ़ीक़ बख्शी।

चाँद देखने के सुन्नत आदाब और तरीक़ा (Sunnah Rules of Moon Sighting)

नया चाँद देखने के संबंध में शरीअत और सुन्नत के कुछ ख़ास आदाब हैं जिनका ख्याल रखना हर मुसलमान के लिए ज़रूरी है:

  1. 29 तारीख को मगरिब के वक्त तलाश करना: इस्लामी महीने की 29 तारीख को सूरज ढलने (मगरिब) के बाद पश्चिम (पश्चिम दिशा) के उफ़ुक पर चाँद तलाश करना सुन्नत-ए-किफ़ाया है।
  2. किब्ला रुख होना या चाँद की तरफ देखना: चाँद देखने के बाद किब्ला रुख होकर या चाँद की ओर मुंह करके हाथ उठाकर आजिज़ी के साथ दुआ मांगे।
  3. उंगली से इशारा करने से बचना: बाज़ रिवायतों और फुक़हा के मुताबिक चाँद की तरफ मुसलसल उंगली से इशारा करना या आँखें गड़ाकर घूरना मुनासिब नहीं है। सादगी और एहतराम के साथ देखें।
  4. अल्लाह की बड़ाई बयान करना: चाँद देखने पर ‘अल्लाहु अकबर’ और ‘अल्हम्दुलिल्लाह’ कहें, क्योंकि यह अल्लाह की कारीगरी का नूरानी नमूना है।
  5. मसनून दुआ पढ़ना: ऊपर बताई गई हदीस की दुआ पढ़ें और फिर अपने घर-परिवार, मुल्क और पूरी उम्मत-ए-मुस्लिमा के अमन, सलामती व ईमान की दुआ करें।
  6. दूसरों को मुबारकबाद देना: नए महीने का चाँद देखकर अपने अज़ीज़ों, रिश्तेदारों और पड़ोसियों को खैर व बरकत की मुबारकबाद दें।

Frequently Asked Questions (FAQs)

1. चाँद देखने की सबसे प्रामाणिक दुआ कौन सी है?

चाँद देखने की सबसे प्रामाणिक दुआ जामेअ अत-तिर्मिज़ी (हदीस: 3451) में हज़रत तल्हा बिन उबैदुल्लाह (रज़ि.) से वर्णित है: “अल्लाहुम्म अह्लिल्हु अलैना बिल युम्नि वल ईमानी वस्सलामति वल इस्लामि रब्बी व रब्बुकल्लाह।”

2. क्या रमज़ान और ईद के चाँद के लिए कोई अलग दुआ है?

नहीं, नबी-ए-करीम (ﷺ) से साल के सभी 12 महीनों के नए चाँद के लिए यही एक मसनून दुआ साबित है। रमज़ानुल मुबारक और ईद के चाँद पर भी यही दुआ पढ़ी जाती है, और इसके साथ अपनी भाषा में नेक आमाल व मग़फ़िरत की दुआएं मांगी जा सकती हैं।

3. अगर खुद चाँद न दिखे लेकिन चाँद होने की खबर या ऐलान हो जाए तो क्या दुआ पढ़ सकते हैं?

हदीस के शब्द “इज़ा रअल हिलाल” (जब चाँद देखे) हैं, यानी यह दुआ मुख्य रूप से चाँद देखने पर मसनून है। हालांकि, अगर बादलों की वजह से खुद चाँद नज़र न आए लेकिन रुयत-ए-हिलाल कमेटी या मस्जिद से चाँद होने की पुष्टि हो जाए, तो नए महीने की बरकत और हिफाज़त के लिए यह दुआ ज़बानी पढ़ लेना बाइस-ए-सवाब व बरकत है।

4. क्या औरतें हैज़ (माहवारी/पीरियड्स) की हालत में चाँद देखने की दुआ पढ़ सकती हैं?

हाँ, बिल्कुल पढ़ सकती हैं। चाँद देखने की दुआ एक ज़िक्रो-अज़कार और मसनून दुआ है। ख्वातीन हैज़ व निफ़ास की हालत में भी ज़बानी अल्लाह का ज़िक्र, दुरूद शरीफ़ और मसनून दुआएं आसानी से पढ़ सकती हैं।

5. चाँद की तरफ देखकर “रब्बी व रब्बुकल्लाह” कहने की क्या हिकमत है?

जाहिलियत के ज़माने में लोग चाँद-सूरज को पूजते थे या उन पर अंधविश्वास रखते थे। नबी करीम (ﷺ) ने चाँद को मुखातिब करके फ़रमाया कि “मेरा और तेरा रब अल्लाह है”, ताकि तौहीद (अल्लाह का एक होना) का ऐलान हो जाए कि चाँद भी अल्लाह की मखलूक है और हर चीज़ का मालिक केवल अल्लाह तआला है।

Mariya Ansari
लेखक के बारे में

Mariya Ansari

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