खाना खाने के बाद अल्लाह का शुक्र अदा करना एक अच्छी इस्लामी आदत है। खाने के बाद पढ़ी जाने वाली यह दुआ अल्लाह की दी हुई नेमत और रोज़ी के लिए उसका शुक्र अदा करने से जुड़ी है। हदीस में इस दुआ को खाना खाने के बाद पढ़ने का ज़िक्र मिलता है। अगर आप khana khane ke baad ki dua, khana khane ki dua या khane ke baad ki dua ढूंढ रहे हैं, तो नीचे यह दुआ अरबी, हिंदी उच्चारण और अंग्रेज़ी उच्चारण के साथ दी गई है।
Khana Khane Ke Baad Ki Dua in Arabic
الْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَطْعَمَنِي هَذَا وَرَزَقَنِيهِ مِنْ غَيْرِ حَوْلٍ مِنِّي وَلَا قُوَّةٍ
Khana Khane Ke Baad Ki Dua in Hindi
अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अत्अमनी हाज़ा व रज़क़नीहि मिन ग़ैरि हौलिन मिन्नी व ला क़ुव्वतिन।
इसे आसान तरीके से इस तरह भी पढ़ सकते हैं:
अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अत्अमनी हाज़ा व रज़क़नीहि मिन ग़ैरि हौलिन मिन्नी व ला क़ुव्वतिन।
Khana Khane Ke Baad Ki Dua in English
Alhamdu lillahil-ladhi at’amani hadha wa razaqanihi min ghayri hawlin minni wa la quwwatin.
Khana Khane Ke Baad Ki Dua Ka Meaning
इस दुआ का अर्थ है:
“सारी तारीफ़ अल्लाह के लिए है, जिसने मुझे यह खाना खिलाया और मुझे यह रोज़ी दी, बिना मेरी किसी ताक़त और शक्ति के।”
इस दुआ में इंसान अल्लाह की दी हुई रोज़ी के लिए उसका शुक्र अदा करता है और यह मानता है कि खाने की नेमत और उसे हासिल करने की क्षमता दोनों अल्लाह की तरफ से हैं।
Khana Khane Ke Baad Ki Dua Kab Padhein?
यह दुआ खाना खाने के बाद पढ़ी जाती है। खाना खत्म करने के बाद इसे पढ़कर अल्लाह का शुक्र अदा किया जा सकता है।
हदीस में आता है कि जो व्यक्ति खाना खाने के बाद यह दुआ पढ़ता है, उसके पिछले गुनाह माफ़ किए जाने का ज़िक्र आया है। इस रिवायत को जामिअ अत-तिर्मिज़ी में हसन दर्ज किया गया है।
Khana Khane Ki Dua Aur Khana Khane Ke Baad Ki Dua
Khana khane ki dua और khana khane ke baad ki dua एक ही चीज़ नहीं हैं। खाना शुरू करने से पहले अल्लाह का नाम लेना इस्लामी आदाब में शामिल है, जबकि खाना खत्म करने के बाद अल्लाह की हम्द और शुक्र के लिए अलग दुआएं पढ़ी जाती हैं।
इसलिए अगर आप khana khane ke baad ki dua in hindi खोज रहे हैं, तो ऊपर दी गई दुआ को अरबी के साथ हिंदी उच्चारण में पढ़ सकते हैं।
Khane Ke Baad Allah Ka Shukr Kaise Karein?
खाना खत्म करने के बाद अल्लाह का शुक्र अदा करना बहुत आसान है। आप ऊपर दी गई दुआ पढ़ सकते हैं और दिल से अल्लाह की दी हुई रोज़ी के लिए उसका शुक्र अदा कर सकते हैं।
खाने की छोटी-बड़ी नेमतों को याद करना इंसान को शुक्रगुज़ार बनने की आदत डालता है। रोज़मर्रा की जिंदगी में इस तरह की छोटी-छोटी सुन्नतों और इस्लामी आदाब पर अमल करने से इंसान अपने खाने और दूसरी नेमतों की क़द्र करना सीखता है।
Khana Khane Ke Baad Ki Dua Ka Matlab
इस दुआ में सबसे पहले अल्लाह की तारीफ़ की गई है कि उसी ने खाना दिया और रोज़ी पहुंचाई। साथ ही इसमें यह स्वीकार किया गया है कि इंसान अपनी ताक़त के भरोसे पर नहीं, बल्कि अल्लाह की दी हुई नेमत और मदद से खाना हासिल करता है।
इसका मतलब समझकर दुआ पढ़ने से इंसान केवल शब्दों को दोहराने के बजाय उनके पीछे की भावना को भी समझ पाता है।
Khana Khane Ke Baad Ki Dua – FAQs
Khana khane ke baad ki dua kya hai?
खाना खाने के बाद पढ़ी जाने वाली दुआ है:
अल्हम्दु लिल्लाहिल्लज़ी अत्अमनी हाज़ा व रज़क़नीहि मिन ग़ैरि हौलिन मिन्नी व ला क़ुव्वतिन।
Khana khane ke baad kaunsi dua padhni chahiye?
खाना खत्म करने के बाद अल्लाह की हम्द और शुक्र के लिए ऊपर दी गई दुआ पढ़ी जा सकती है। यह दुआ जामिअ अत-तिर्मिज़ी में भी वर्णित है।
Khana khane ke baad ki dua ka meaning kya hai?
इसका अर्थ है कि सारी तारीफ़ अल्लाह के लिए है, जिसने इंसान को खाना खिलाया और उसे रोज़ी दी, बिना उसकी अपनी ताक़त और शक्ति के।
Kya khana khane ke baad ki dua Hindi mein padh sakte hain?
हिंदी उच्चारण की मदद से दुआ को याद किया जा सकता है। बेहतर है कि दुआ के मूल अरबी शब्दों को सही तरीके से सीखकर पढ़ा जाए और साथ में उसका अर्थ भी समझा जाए।
Khana khane ke baad dua padhna kaisa hai?
खाना खाने के बाद अल्लाह की हम्द और शुक्र अदा करना अच्छी इस्लामी आदत है। इस संबंध में नबी ﷺ से दुआएं वर्णित हैं।
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