नमाज़ (सलाह) इस्लाम का दूसरा सबसे अहम और बुनियादी अरकान (स्तंभ) है। ईमान लाने के बाद हर आकिल और बालिग़ मुसलमान मर्द और औरत पर दिन-रात में 5 वक़्त की नमाज़ फ़र्ज़ की गई है। हदीस शरीफ़ में नमाज़ को ‘दीन का सुतून (स्तंभ)’ और ‘जन्नत की कुंजी’ फ़रमाया गया है। क़यामत के दिन बंदे से सबसे पहला सवाल नमाज़ ही के बारे में होगा। अगर किसी मुसलमान की नमाज़ सही और दुरुस्त निकली, तो उसके बाक़ी तमाम आमाल भी आसान हो जाएंगे।
यदि आप पहली बार नमाज़ सीख रहे हैं, या अपनी नमाज़ के अरकान, सना, रुकू, सजदा और तशह्हुद को सुन्नत के मुताबिक़ दुरुस्त करना चाहते हैं, तो यह मुकम्मल गाइड Namaz Padhne Ka Tarika In Hindi Step by Step आपके लिए बेहद मददगार साबित होगी। इसमें नियत से लेकर सलाम फेरने तक, 5 वक़्त की नमाज़ों की रकात, और मर्द व औरत की नमाज़ के फ़र्क़ को आसान भाषा में समझाया गया है।
नमाज़ की 6 बुनियादी शर्तें (शराइत-ए-नमाज़)
नमाज़ शुरू करने से पहले इन 6 चीज़ों का पूरा होना ज़रूरी है: 1. तहारत: बदन, कपड़े और जगह का नापाकी से पाक होना (वुज़ू या ग़ुस्ल)। 2. सत्र-ए-औरत: मर्द का नाफ़ से घुटने तक और औरत का चेहरा, हथेलियों व कदमों को छोड़कर पूरा बदन ढका होना। 3. इस्तिक़बाल-ए-क़िबला: काबा शरीफ़ (पश्चिम दिशा) की तरफ रुख़ करना। 4. वक़्त: नमाज़ का मुक़र्ररा वक़्त होना। 5. नीयत: दिल में उस वक़्त की नमाज़ का पक्का इरादा होना। 6. तकबीर-ए-तहरीमा: ‘अल्लाहु अकबर’ कहकर नमाज़ बाँधना।
5 वक़्त की नमाज़ की मुकम्मल रकात तालिका (Rakat Chart)
एक दिन-रात (24 घंटे) में कुल 17 रकात फ़र्ज़ नमाज़ें अदा की जाती हैं। सुन्नत और वित्र मिलाकर कुल 48 रकात बनती हैं:
| नमाज़ का नाम | सुन्नत मुअक्कदा | फ़र्ज़ (Farz) | सुन्नत / नफ़िल | वित्र वाजिब | कुल रकात |
|---|---|---|---|---|---|
| 1. फज्र (Fajr) | 2 सुन्नत | 2 फ़र्ज़ | — | — | 4 रकात |
| 2. ज़ुहर (Zuhr) | 4 सुन्नत | 4 फ़र्ज़ | 2 सुन्नत + 2 नफ़िल | — | 12 रकात |
| 3. अस्र (Asr) | 4 सुन्नत (ग़ैर मुअक्कदा) | 4 फ़र्ज़ | — | — | 8 रकात |
| 4. मग़रिब (Maghrib) | — | 3 फ़र्ज़ | 2 सुन्नत + 2 नफ़िल | — | 7 रकात |
| 5. इशा (Isha) | 4 सुन्नत (ग़ैर मुअक्कदा) | 4 फ़र्ज़ | 2 सुन्नत + 2 नफ़िल + 2 नफ़िल | 3 वित्र वाजिब | 17 रकात |
नमाज़ पढ़ने का मुकम्मल स्टेप-बाय-स्टेप तरीका (2 रकात का मुकम्मल तरीका)
बुनियादी तौर पर हर नमाज़ 2-2 रकात करके ही पढ़ी जाती है। 2 रकात नमाज़ का पूरा तरीका इस प्रकार है:
स्टेप 1: नीयत और तकबीर-ए-तहरीमा
क़िबला रुख़ सीधे खड़े हों। दोनों पैरों के बीच 4 उंगलियों का फ़ासला रखें। दिल में नीयत करें (जैसे: “नियत की मैंने 2 रकात नमाज़ फ़ज्र की, फ़र्ज़ वास्ते अल्लाह तआला के, मुंह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ”)। इसके बाद दोनों हाथ कानों की लौ तक उठाएं (हथेलियां क़िबला की तरफ हों) और ‘अल्लाहु अकबर’ कहते हुए हाथ नाफ़ के नीचे बाँध लें (दायां हाथ बाएं हाथ की कलाई पर रखें)।
स्टेप 2: क़ियाम में सना (दुआ-ए-इस्तिफ़्तात) पढ़ना
हाथ बाँधने के बाद नज़र सजदे की जगह रखें और धीमी आवाज़ में सना पढ़ें:
سُبْحَانَكَ اللَّهُمَّ وَبِحَمْدِكَ، وَتَبَارَكَ اسْمُكَ، وَتَعَالَىٰ جَدُّكَ، وَلَا إِلَٰهَ غَيْرُكَ
उच्चारण: सुब्हान-कल्लाहुम्मा व बि-हम्दिका, व तबार कस्मुका, व तआला जद्दुका, व ला इलाहा गैरुक।
तर्जुमा: “ऐ अल्लाह! हम तेरी पाकी बयान करते हैं और तेरी तारीफ़ करते हैं, तेरा नाम बड़ी बरकत वाला है, तेरी शान बहुत बुलंद है, और तेरे सिवा कोई माबूद नहीं।”
स्टेप 3: ताअव्वुज़, तस्मिया और सूरह फ़ातिहा
सना के बाद पढ़ें: ‘अऊज़ु बिल्लाहि मिनश-शैतानिर्रजीम’ फिर ‘बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम’। इसके बाद मुकम्मल सूरह अल-फ़ातिहा (अल्हम्दुलिल्लाहि रब्बिल आलमीन…) पढ़ें। सूरह फ़ातिहा ख़त्म होने पर आहिस्ता से ‘आमीन’ कहें। इसके बाद कुरआन की कोई भी सूरह (जैसे सूरह इख़्लास, सूरह कौसर या सूरह फलक़) पढ़ें।
स्टेप 4: रुकू (Ruku) और उसकी तस्बीह
सूरह ख़त्म करके ‘अल्लाहु अकबर’ कहते हुए रुकू में झुकें। दोनों हाथों से घुटनों को पकड़ें, उंगलियां फैली हुई हों। पीठ बिल्कुल सीधी रखें कि अगर उस पर पानी का प्याला रख दिया जाए तो न छलके। नज़र दोनों पंजों पर रखें और कम से कम 3 बार पढ़ें:
سُبْحَانَ رَبِّيَ الْعَظِيمِ
उच्चारण: सुब्हाना रब्बियल अज़ीम (3, 5 या 7 बार)
तर्जुमा: “पाक है मेरा रब जो बड़ी अज़मत (महानता) वाला है।”
स्टेप 5: क़ौमा (रुकू से सीधा खड़ा होना)
रुकू से सीधे खड़े होते हुए कहें: ‘समिअल्लाहु लिमन हमिदह’ (अल्लाह ने सुन ली उसकी जिसने उसकी तारीफ़ की)। सीधे खड़े होकर दोनों हाथ छोड़ दें और कहें: ‘रब्बना लकल हम्द’ (ऐ हमारे रब! तमाम तारीफ़ें तेरे ही लिए हैं)।
स्टेप 6: सजदा (Sajdah) और उसकी तस्बीह
‘अल्लाहु अकबर’ कहते हुए सजदे में जाएं। सबसे पहले घुटने ज़मीन पर रखें, फिर दोनों हाथ, फिर नाक और फिर पेशानी (माथा)। दोनों हाथों की उंगलियां मिली हुई क़िबला रुख़ हों। कोहनियों को ज़मीन से और पसलियों से अलग रखें। सजदे में कम से कम 3 बार पढ़ें:
سُبْحَانَ رَبِّيَ الْأَعْلَىٰ
उच्चारण: सुब्हाना रब्बियल आला (3, 5 या 7 बार)
तर्जुमा: “पाक है मेरा रब जो सबसे आला और बुलंद मर्तबे वाला है।”
स्टेप 7: जलसा और दूसरा सजदा
‘अल्लाहु अकबर’ कहकर उठें और सीधा इत्मीनान से बैठ जाएं (इसे जलसा कहते हैं)। यहां चाहें तो ‘रब्बिग़्फ़िर ली’ (ऐ मेरे रब मुझे माफ़ फरमा) कहें। इसके बाद फिर ‘अल्लाहु अकबर’ कहते हुए दूसरा सजदा करें और 3 बार ‘सुब्हाना रब्बियल आला’ पढ़ें। इस तरह आपकी 1 रकात मुकम्मल हो गई।
स्टेप 8: दूसरी रकात और क़ादा (तशह्हुद में बैठना)
दूसरे सजदे के बाद ‘अल्लाहु अकबर’ कहते हुए दूसरी रकात के लिए सीधे खड़े हो जाएं। दूसरी रकात में सना नहीं पढ़ी जाती। सीधे बिस्मिल्लाह पढ़कर सूरह फ़ातिहा और कोई सूरह पढ़ें। फिर रुकू, क़ौमा और दोनों सजदे पहली रकात की तरह अदा करें। दूसरे सजदे के बाद खड़े होने के बजाय बायां पैर बिछाकर उस पर बैठ जाएं और दायां पैर खड़ा रखें (औरतें दोनों पैर दाईं तरफ निकालकर ज़मीन पर बैठें)।
बैठकर सबसे पहले अत्तहियात (तशह्हुद) पढ़ें:
التَّحِيَّاتُ لِلَّهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ، السَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللَّهِ وَبَرَكَاتُهُ، السَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَىٰ عِبَادِ اللَّهِ الصَّالِحِينَ، أَشْهَدُ أَن لَّا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
उच्चारण: अत्तहियातु लिल्लाहि वस-सलवातु वत-तय्यिबातु, अस्सलामु अलैका अय्युहन-नबिय्यु व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू, अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस-सालिहीन, अशहदु अल-ला इलाहा इल्लल्लाहु व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुह।
(नोट: जब ‘अशहदु अल-ला इलाहा’ कहें तो शहादत की उंगली उठाएं और ‘इल्लल्लाहु’ पर गिरा दें)।
अत्तहियात के बाद दुरूद-ए-इब्राहिम पढ़ें:
اللَّهُمَّ صَلِّ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا صَلَّيْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ، اللَّهُمَّ بَارِكْ عَلَىٰ مُحَمَّدٍ وَعَلَىٰ آلِ مُحَمَّدٍ كَمَا بَارَكْتَ عَلَىٰ إِبْرَاهِيمَ وَعَلَىٰ آلِ إِبْرَاهِيمَ إِنَّكَ حَمِيدٌ مَجِيدٌ
उच्चारण: अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मदिंव-व अला आलि मुहम्मदिन कमा सल्लैता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीमा इन्नका हमीदुम-मजीद। अल्लाहुम्मा बारिक अला मुहम्मदिंव-व अला आलि मुहम्मदिन कमा बारक्ता अला इब्राहीमा व अला आलि इब्राहीमा इन्नका हमीदुम-मजीद।
दुरूद शरीफ़ के बाद दुआ-ए-मासूरा पढ़ें:
اللَّهُمَّ إِنِّي ظَلَمْتُ نَفْسِي ظُلْمًا كَثِيرًا، وَلَا يَغْفِرُ الذُّنُوبَ إِلَّا أَنتَ، فَاغْفِرْ لِي مَغْفِرَةً مِّنْ عِندِكَ وَارْحَمْنِي إِنَّكَ أَنتَ الْغَفُورُ الرَّحِيمُ
उच्चारण: अल्लाहुम्मा इन्नी ज़लम्तु नफ़्सी ज़ुल्मन कसीरा, व ला यग़्फ़िरुज़्-ज़ुनूबा इल्ला अन्ता, फ़ग़्फ़िर ली मग़्फ़िरतम-मिन इंदिका वरहम्नी, इन्नका अन्तल्-ग़फ़ूरुर-रहीम।
स्टेप 9: सलाम फेरना (नमाज़ मुकम्मल)
दुआ-ए-मासूरा के बाद अपना चेहरा दाईं तरफ फेरें और कहें: ‘अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह’। फिर बाईं तरफ चेहरा फेरें और कहें: ‘अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह’। सलाम फेरने के साथ ही आपकी 2 रकात नमाज़ मुकम्मल हो गई।
मर्द और औरत की नमाज़ में क्या अंतर (फ़र्क़) है?
हदीस और फ़िक़्ह के मुताबिक़ पर्दा और हिजाब की वजह से मर्दों और औरतों के नमाज़ अदा करने के तरीक़े में कुछ फ़र्क़ रखे गए हैं:
| अरकान (Step) | मर्द का तरीका | औरत का तरीका |
|---|---|---|
| तकबीर में हाथ उठाना | दोनों हाथ कानों की लौ तक उठाते हैं। | दोनों हाथ सिर्फ कंधों तक (दुपट्टे के अंदर से) उठाती हैं। |
| हाथ बाँधने की जगह | नाफ़ के नीचे हाथ बाँधते हैं। | सीने (छाती) पर हाथ रखती हैं। |
| रुकू की हालत | पीठ बिल्कुल सीधी रखते हैं और कोहनियां खुली रहती हैं। | सिर्फ इतना झुकती हैं कि हाथ घुटनों पर पहुंच जाएं, कोहनियां पसलियों से मिली होती हैं। |
| सजदे की हालत | पेट जांघों से और कोहनियां ज़मीन से अलग रहती हैं। | बिल्कुल सिमट कर सजदा करती हैं, पेट जांघों से और कोहनियां ज़मीन से मिली होती हैं। |
| बैठने की हालत (क़ादा) | बायां पैर बिछाकर उस पर बैठते हैं और दायां पैर खड़ा रखते हैं। | दोनों पैर दाईं तरफ निकालकर सीधे ज़मीन पर बैठती हैं। |
संबंधित महत्वपूर्ण नमाज़ गाइड (Internal Links)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. नमाज़ पढ़ने से पहले क्या तैयारी करनी चाहिए?
नमाज़ से पहले बदन, कपड़े और नमाज़ की जगह का पाक होना ज़रूरी है। अच्छी तरह सुन्नत के मुताबिक़ वुज़ू करें, साफ़ कपड़े पहनें और काबा शरीफ़ की तरफ रुख़ करके नमाज़ की नीयत करें।
2. 1 दिन में कुल कितनी रकात नमाज़ फ़र्ज़ होती है?
एक दिन और रात में 5 वक़्त मिलाकर कुल 17 रकात फ़र्ज़ नमाज़ होती है: फ़ज्र में 2, ज़ुहर में 4, अस्र में 4, मग़रिब में 3, और इशा में 4 फ़र्ज़। इसके अलावा 3 रकात वित्र वाजिब होती है।
3. अगर नमाज़ में सूरह या दुआ भूल जाएं तो क्या करें?
अगर कोई वाजिब चीज़ भूल से छूट जाए (जैसे क़ादा-ए-ऊला में अत्तहियात पढ़ना भूल जाना), तो नमाज़ के आख़िर में दाईं तरफ एक सलाम फेरकर 2 सजदे (सजदा-ए-सह्व) करें, फिर दोबारा अत्तहियात, दुरूद और सलाम फेरें। इससे नमाज़ दुरुस्त हो जाती है।
4. क्या औरतें घर पर अकेले नमाज़ पढ़ सकती हैं?
हाँ, औरतों के लिए अपने घर के अंदर नमाज़ पढ़ना मस्जिद की नमाज़ से भी अफ़ज़ल और ज़्यादा सवाब का बाइस है। औरतें घर पर तन्हा 5 वक़्त की नमाज़ अदा कर सकती हैं।
5. नमाज़ मुकम्मल होने के बाद कौन सी दुआ पढ़नी चाहिए?
सलाम फेरने के बाद 3 बार ‘अस्तग़्फ़िरुल्लाह’, फिर आयतल कुर्सी, और तस्बीह-ए-फ़ातिमी (33 बार सुब्हानअल्लाह, 33 बार अल्हम्दुलिल्लाह, 34 बार अल्लाहु अकबर) पढ़ना बेहद अफ़ज़ल है।