इस्लाम में पाकीज़गी और तहारत को ईमान का आधा हिस्सा (अल-तहूरु शतरुल ईमान) करार दिया गया है। जब इंसान पर कोई बड़ी नापाकी (हदस-ए-अकबर) आ जाती है, तो नमाज़, क़ुरआन मजीद की तिलावत और दीगर इबादतों के लिए केवल वज़ू काफ़ी नहीं होता, बल्कि पूरे जिस्म को शरई तरीके से धोना यानी ग़ुस्ल करना फ़र्ज़ हो जाता है। अक्सर लोगों के ज़हन में यह सवाल आता है कि ग़ुस्ल की दुआ (Ghusl Ki Dua In Hindi) क्या है, ग़ुस्ल की नियत कैसे की जाती है, और जनाबत या माहवारी के बाद ग़ुस्ल का सही तरीका क्या है।
अगर ग़ुस्ल के फ़राइज़ में से कोई एक फ़र्ज़ भी छूट जाए या जिस्म का एक बाल बराबर हिस्सा भी सूखा रह जाए, तो ग़ुस्ल नहीं होता और इंसान नापाक ही रहता है। इस तफ़सीली मक़ाले में हम ग़ुस्ल की दुआ, नियत के सही अलफ़ाज़, ग़ुस्ल के 3 लाज़मी फ़र्ज़, जनाबत व हैज़ (Periods) के बाद पाकी हासिल करने का मुकम्मल सुन्नत तरीका और इससे मुताल्लिक़ अहम शरई मसाइल को आसान हिंदी में समझेंगे।
अहम शरई नुक्ता: ग़ुस्ल के लिए दिल में पाकी हासिल करने का पक्का इरादा होना ही असल नियत है। बाथरूम या गुसलखाने में कपड़े उतारने के बाद ज़बान से अल्लाह का नाम या दुआ नहीं पढ़ना चाहिए, बल्कि गुसलखाने में दाखिल होने से पहले ही बिस्मिल्लाह और नियत कह लें, या अंदर सिर्फ दिल में इरादा करें।
ग़ुस्ल की नियत और दुआ (Ghusl Ki Dua In Hindi & Arabic)
ग़ुस्ल शुरू करते वक़्त बिस्मिल्लाह शरीफ़ पढ़ना सुन्नत है। इसके साथ ही पाकीज़गी हासिल करने के लिए नियत के अलफ़ाज़ दोहराना मुस्तहब (पसंदीदा) है:
ग़ुस्ल की नियत हिंदी में (Hindi Niyat):
“नियत की मैंने ग़ुस्ल करने की नापाकी दूर करने के लिए, नमाज़ को जायज़ करने के लिए और अल्लाह तआला का कुर्ब हासिल करने के लिए, बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम।”
ग़ुस्ल की नियत रोमन इंग्लिश में (Transliteration):
“Nawaytu an aghtasila li-raf’il hadasi wa-stibahatan lis-salati wa taqarruban ilallahi Ta’ala, Bismillahir Rahmanir Raheem.”
ग़ुस्ल की नियत अरबी में (Arabic Text):
نَوَيْتُ أَنْ أَغْتَسِلَ لِرَفْعِ الْحَدَثِ وَاسْتِبَاحَةً لِلصَّلَاةِ وَتَقَرُّبًا إِلَى اللّٰهِ تَعَالَى، بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ
ग़ुस्ल के 3 फ़र्ज़ (Ghusl Ke 3 Farz In Hindi)
हनफ़ी फ़िक़्ह के मुताबिक़ ग़ुस्ल में कुल 3 फ़र्ज़ हैं। अगर इनमें से कोई एक फ़र्ज़ भी छूट जाए तो ग़ुस्ल बातिल (अधूरा) रहेगा और नमाज़ दुरुस्त नहीं होगी:
| क्रम संख्या | ग़ुस्ल का फ़र्ज़ | अदा करने का सही तरीका | सावधानी व मसला |
|---|---|---|---|
| 1 | कुल्ली करना | मुँह भरकर इस तरह पानी डालना कि हलक़ की जड़ और दांतों की खिड़कियों तक पानी पहुंचे। | अगर रोज़ा न हो तो गरगरा करना सुन्नत है। रोज़ेदार गरगरा न करे ताकि हलक़ में पानी न जाए। |
| 2 | नाक में पानी डालना | नाक के दोनों नथुनों में जहां तक नरम हड्डी है, वहां तक अच्छी तरह पानी चढ़ाना। | नाक के अंदर जमी सूखी रींट को साफ़ करना ज़रूरी है ताकि कोई हिस्सा सूखा न रहे। |
| 3 | पूरे बदन पर पानी बहाना | सिर के बालों से लेकर पैर के तलवों तक पूरे जिस्म पर कम से कम एक बार पानी बहाना। | जिस्म का एक बाल बराबर हिस्सा भी सूखा नहीं रहना चाहिए (नाभि, कानों की सिलवटें, बग़लें)। |

सुन्नत के मुताबिक़ ग़ुस्ल का मुकम्मल तरीका (Step-by-Step)
रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) जिस पाकीज़ा अंदाज़ में ग़ुस्ल फ़रमाया करते थे, हदीस शरीफ़ के मुताबिक़ उसका सुन्नत तरीका इस प्रकार है:
- कदम 1 (हाथ धोना): सबसे पहले दोनों हाथों को गट्टों (कलाई) तक तीन बार धोएं।
- कदम 2 (नजासत धोना): फिर अपने दोनों शर्मगाह (गुप्तांग) को अच्छी तरह धोएं और अगर बदन पर कहीं नापाकी लगी हो तो उसे साफ़ करें (चाहे नापाकी लगी हो या न लगी हो, इस्तिंजा करना सुन्नत है)।
- कदम 3 (साबुन से हाथ धोना): इसके बाद बाएं हाथ को साबुन या मिट्टी से अच्छी तरह धोकर साफ़ कर लें।
- कदम 4 (मुकम्मल वज़ू): नमाज़ जैसा पूरा वज़ू करें। तीन बार कुल्ली करें (गरगरा करें), तीन बार नाक में पानी चढ़ाएं, चेहरा और हाथ धोएं। अगर ऐसी जगह नहा रहे हैं जहां पैर के नीचे पानी जमा होता है, तो पैर आख़िर में धोएं।
- कदम 5 (सिर पर पानी डालना): तीन बार अपने सिर पर पानी इस तरह बहाएं कि तमाम बालों की जड़ों तक पानी अच्छी तरह पहुंच जाए।
- कदम 6 (दाएं और बाएं बदन पर पानी): पहले तीन बार दाहिने कंधे पर और फिर तीन बार बाएं कंधे पर पानी बहाएं।
- कदम 7 (पूरे बदन पर पानी बहाना व मलना): पूरे जिस्म पर पानी बहाएं और हाथों से बदन को मलें ताकि कोई हिस्सा सूखा न रहे। नाभि, बग़लों, कानों की सिलवटों और उंगलियों के दरमियान पानी पहुंचाना न भूलें।
- कदम 8 (पैर धोना): अगर वज़ू के दौरान पैर नहीं धोए थे, तो अब पाकीज़ा जगह पर थोड़ा हटकर दोनों पैर टखनों तक धो लें।
जनाबत का ग़ुस्ल (Janabat Ghusl Ki Dua In Hindi)
शौहर व बीवी के मिलने (हमबिस्तरी/इंतिसाम) के बाद या मर्द व औरत को सोते में एहतलाम (Nightfall) होने की सूरत में जो ग़ुस्ल फ़र्ज़ होता है, उसे जनाबत का ग़ुस्ल (Janabat Ghusl) कहते हैं:
- जनाबत की नियत: दिल में इरादा करें कि मैं जनाबत की नापाकी दूर करने और नमाज़ के लिए पाक होने की नियत करती/करता हूँ।
- फ़ौरन पाकी हासिल करना: जनाबत की हालत में बिला-वजह देर करना मकरूह है। नमाज़ का वक़्त गुज़रने से पहले ग़ुस्ल करना फ़र्ज़-ए-ऐन है।
- तरीका: ऊपर ज़िक्र किए गए ग़ुस्ल के 3 फ़र्ज़ (कुल्ली, नाक में पानी, पूरे बदन पर पानी) अदा करने से जनाबत का ग़ुस्ल मुकम्मल हो जाता है।
औरतों के लिए पीरियड्स (हैज़ व निफ़ास) के बाद ग़ुस्ल का तरीका
ख़वातीन के लिए माहवारी (Periods/Haidh) का ख़ून बंद होने के बाद या बच्चे की पैदाइश के बाद निफ़ास ख़त्म होने पर ग़ुस्ल करना फ़र्ज़ होता है। इसके मख़सूस शरई मसाइल इस प्रकार हैं:
- पीरियड्स के ग़ुस्ल की नियत: “नियत की मैंने हैज़ (माहवारी) की नापाकी से पाक होने के लिए ग़ुस्ल करने की, अल्लाह के वास्ते, बिस्मिल्लाह।”
- बालों की चोटी खोलने का मसला: अगर किसी ख़ातून के सिर के बाल गूंथे हुए (चोटी बंधी हुई) हों, तो ग़ुस्ल में चोटी खोलना ज़रूरी नहीं है, बशर्ते कि पानी बालों की तमाम जड़ों और खोपड़ी की खाल तक पहुंच जाए। लेकिन अगर बाल खुले हों तो पूरे बालों को सिरे तक भिगोना फ़र्ज़ है।
- नेल पॉलिश और मेकअप: अगर नाखूनों पर नेल पॉलिश या ऐसा पेंट लगा हो जो पानी को नाखून तक पहुंचने से रोकता हो, तो ग़ुस्ल से पहले उसे छुड़ाना फ़र्ज़ है। उसके बिना ग़ुस्ल नहीं होगा।
ग़ुस्ल के बाद पढ़ने की मसनून दुआ
गुसलखाने से बाहर निकलकर कपड़े पहनने के बाद क़िबला रुख होकर कलिमा-ए-शहादत और यह मसनून दुआ पढ़ना अज़ीम सवाब का बाइस है:
ग़ुस्ल के बाद की दुआ (अरबी):
أَشْهَدُ أَنْ لَّا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيْكَ لَهُ، وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُوْلُهُ، اَللّٰهُمَّ اجْعَلْنِيْ مِنَ التَّوَّابِيْنَ وَاجْعَلْنِيْ مِنَ الْمُتَطَهِّرِيْنَ۔
हिंदी उच्चारण:
“अशहदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु वह्दहू ला शरीका लहू, व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहु, अल्लाहुम्मज-अलनी मिनत-तव्वाबीना वज-अलनी मिनल-मुततह्हेरीन।”
हिंदी तर्जुमा:
“मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है उसका कोई शरीक नहीं, और मैं गवाही देता हूँ कि हज़रत मुहम्मद उसके बंदे और रसूल हैं। ऐ अल्लाह! मुझे बहुत तौबा करने वालों में शामिल फ़रमा और मुझे खूब पाकीज़ा रहने वालों में बना दे।”
तहारत व नमाज़ से जुड़े दीगर मुफ़ीद मक़ालात:
- तहियतुल वज़ू की नमाज़ का सही तरीका, नियत और फ़ज़ीलत
- औरतों के लिए तरावीह की नमाज़ की नियत और तरीका (20 रकात)
- औरतों के लिए जुमा की नमाज़ का तरीका, नियत और रकात
- आयत ए खमसा हिंदी में तर्जुमा सहित (क़ुरआन मजीद की 5 मुबारका आयतें)
- नज़र की दुआ और नज़र उतारने का सही शरई तरीका
- सलातुत तस्बीह की नमाज़ का तरीका और तस्बीह के कलिमात
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या ग़ुस्ल करने के बाद नमाज़ के लिए अलग से वज़ू करना ज़रूरी है?
नहीं, ग़ुस्ल करने से वज़ू खुद-ब-खुद हो जाता है। हदीस शरीफ़ के मुताबिक़ रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ग़ुस्ल के बाद अलग से वज़ू नहीं फ़रमाते थे, बशर्ते कि ग़ुस्ल के दौरान या बाद में कोई वज़ू तोड़ने वाली चीज़ (जैसे पेशाब, हवा ख़ारिज होना) पेश न आई हो।
2. क्या बाथरूम के अंदर ज़बान से ग़ुस्ल की दुआ पढ़ सकते हैं?
अगर बाथरूम में टॉयलेट सीट (W.C.) अटैच है या इंसान कपड़े उतार चुका हो, तो ज़बान से अल्लाह का नाम या दुआ पढ़ना मकरूह है। ऐसी सूरत में गुसलखाने में दाखिल होने से पहले बाहर ही दुआ और बिस्मिल्लाह पढ़ लें, या अंदर सिर्फ दिल में इरादा करें।
3. अगर ग़ुस्ल में कुल्ली करना या नाक में पानी डालना भूल जाएं तो क्या करें?
कुल्ली करना और नाक में पानी डालना ग़ुस्ल के फ़र्ज़ हैं। अगर बाद में याद आए, तो दोबारा पूरा नहाने की ज़रूरत नहीं है, बल्कि सिर्फ कुल्ली कर लें और नाक में पानी चढ़ा लें, आपका ग़ुस्ल मुकम्मल हो जाएगा।
4. क्या पीरियड्स के बाद ग़ुस्ल में औरतों को बाल खोलना ज़रूरी है?
अगर बाल गूंथे हुए हों तो चोटी खोलना ज़रूरी नहीं, सिर्फ तमाम बालों की जड़ों तक पानी पहुंचाना फ़र्ज़ है। लेकिन अगर बाल खुले हों या बिना चोटी खोले जड़ों तक पानी न पहुंच सकता हो, तो पूरा बाल भिगोना लाज़िमी है।
5. ग़ुस्ल के कितने फ़र्ज़ हैं?
ग़ुस्ल के 3 फ़र्ज़ हैं: 1. अच्छी तरह कुल्ली करना, 2. नाक की नरम हड्डी तक पानी पहुंचाना, और 3. पूरे बदन पर इस तरह पानी बहाना कि एक बाल बराबर जगह भी सूखी न रहे।