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सूरह लहब इन हिंदी (Surah Lahab in Hindi) | अरबी मतन, हिंदी तर्जुमा, अबू लहब का अंजाम व फ़ज़ीलत

By Mariya Ansari •

पवित्र क़ुरआन मजीद की 111वीं सूरह सूरह लहब (Surah Al-Masad) है। यह क़ुरआन करीम के 30 (अम्मा पारा) में स्थित है और इसमें कुल 5 आयतें हैं। सूरह लहब (सूरह मसद) में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कट्टर दुश्मन और चचा अबू लहब और उसकी दुष्ट पत्नी उम्मे जमील की दुनिया व आख़िरत में दर्दनाक हलाकत और रुसवाई की क़ुरआनी पेशीनगोई की गई है, जो अक्षरशः सत्य साबित हुई।

मुसलमानों के लिए इस सूरह को सही उच्चारण और तर्जुमे के साथ समझना बेहद ज़रूरी है क्योंकि यह रोज़मर्रा की पाँचों वक़्त की नमाज़ों में कसरत से पढ़ी जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण सूरतों में से एक है। इस विस्तृत लेख में सूरह लहब का शुद्ध अरबी मतन, आसान हिंदी उच्चारण, शब्द-दर-शब्द तर्जुमा, शान-ए-नुज़ूल, सहीह हदीस के हवाले, फ़ज़ीलत व नमाज़ में पढ़ने का सुन्नत तरीक़ा पूरी तफ़्सील के साथ पेश किया गया है।

मुख़्तसर ख़ुलासा: सूरह लहब (सूरह मसद) में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के कट्टर दुश्मन और चचा अबू लहब और उसकी दुष्ट पत्नी उम्मे जमील की दुनिया व आख़िरत में दर्दनाक हलाकत और रुसवाई की क़ुरआनी पेशीनगोई की गई है, जो अक्षरशः सत्य साबित हुई।

सूरह लहब का संक्षिप्त परिचय (Overview Table)

विवरण (Aspect) प्रामाणिक जानकारी (Details)
सूरह संख्या (Surah Number) 111
पारा (Juz) 30 (अम्मा पारा)
कुल आयतें (Total Verses) 5 आयतें
कुल रुकूअ (Ruku) 1 रुकूअ
शब्द व अक्षर संख्या 23 कलिमात और 81 हुरूफ़
मक़ाम-ए-नुज़ूल (Classification) मक्की सूरह

सूरह लहब अरबी मतन, हिंदी उच्चारण व तर्जुमा (आयत दर आयत)

नीचे सूरह लहब की सभी आयतों का स्पष्ट अरबी मतन, आसान हिंदी उच्चारण (Transliteration) और अर्थ दिया गया है ताकि आप इसे सही तरीक़े से याद कर सकें:

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

हिंदी उच्चारण: बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

तर्जुमा: अल्लाह के नाम से शुरू जो निहायत मेहरबान और हमेशा रहम फ़रमाने वाला है।

आयत 1

تَبَّتْ يَدَا أَبِي لَهَبٍ وَتَبَّ ﴿١﴾

हिंदी उच्चारण: तब्बत यदा अबी लहबिव-वतब्ब।

हिंदी तर्जुमा: टूट गए अबू लहब के दोनों हाथ और वह ख़ुद भी तबाह व बर्बाद हो गया।

आयत 2

مَا أَغْنَىٰ عَنْهُ مَالُهُ وَمَا كَسَبَ ﴿٢﴾

हिंदी उच्चारण: मा अग़्ना अन्हु मालुहू वमा कसब।

हिंदी तर्जुमा: न उसका माल उसके किसी काम आया और न वह दौलत जो उसने कमाई।

आयत 3

سَيَصْلَىٰ نَارًا ذَاتَ لَهَبٍ ﴿٣﴾

हिंदी उच्चारण: सयस्ला नारन ज़ात लहब।

हिंदी तर्जुमा: अनक़रीब वह भड़कती हुई शोलों वाली आग में दाख़िल होगा।

आयत 4

وَامْرَأَتُهُ حَمَّالَةَ الْحَطَبِ ﴿٤﴾

हिंदी उच्चारण: वम-र-अतुहू हम्मालतल-हत़ब।

हिंदी तर्जुमा: और उसकी बीवी भी (जहन्नम में जाएगी), जो लकड़ियां (कांटे) ढोने वाली है।

आयत 5

فِي جِيدِهَا حَبْلٌ مِّن مَّسَدٍ ﴿٥﴾

हिंदी उच्चारण: फ़ी जीदिहा हब्लुम्-मिम्-मसद।

हिंदी तर्जुमा: उसकी गर्दन में बटी हुई खजूर की छाल (या लोहे) का रस्सा होगा।

सूरह लहब का शब्द-दर-शब्द अर्थ (Word-by-Word Meaning)

अरबी भाषा की गहराई और क़ुरआनी अल्फ़ाज़ के सही मफ़हूम को समझने के लिए प्रत्येक शब्द का अर्थ नीचे दी गई तालिका में देखें:

अरबी शब्द (Arabic) हिंदी उच्चारण शाब्दिक अर्थ (Hindi Meaning)
تَبَّتْ तब्बत टूट गए / बर्बाद हो गए
يَدَا यदा दोनों हाथ
أَبِي لَهَبٍ अबी लहब अबू लहब के
وَتَبَّ वतब्ब और वह तबाह हुआ
مَا أَغْنَىٰ मा अग़्ना काम नहीं आया
عَنْهُ अन्हु उसके
مَالُهُ मालुहू उसका माल
وَمَا كَسَبَ वमा कसब और जो उसने कमाया
سَيَصْلَىٰ सयस्ला जल्द वह दाख़िल होगा
نَارًا नारन आग में
ذَاتَ لَهَبٍ ज़ात लहब शोलों वाली / लपटों वाली
وَامْرَأَتُهُ वम-र-अतुहू और उसकी औरत (बीवी)
حَمَّالَةَ हम्मालता ढोने वाली / उठाने वाली
الْحَطَبِ अल्-हत़ब ईंधन / कांटे
فِي جِيدِهَا फ़ी जीदिहा उसकी गर्दन में
حَبْلٌ हब्लुन रस्सा होगा
مِّن مَّسَدٍ मिम्-मसद बटी हुई छाल (मसद) का

सूरह लहब का शान-ए-नुज़ूल (पृष्ठभूमि व अवतरण का कारण)

सहीह बुख़ारी (हदीस 4770) के अनुसार, जब आयत ‘व अन्ज़िर अशीरतक़ल अक़रबीन’ नाज़िल हुई, तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम कोह-ए-सफ़ा (सफ़ा पहाड़ी) पर चढ़े और आवाज़ लगाई: ‘या सबाहा!’ मक्का के तमाम क़बीले जमा हो गए। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: ‘अगर मैं कहूँ कि इस पहाड़ी के पीछे एक दुश्मन फ़ौज है जो तुम पर हमला करने वाली है, तो क्या तुम सच मानोगे?’ सबने कहा: ‘हाँ, हमने आपको हमेशा सच्चा पाया है।’ फिर आपने फ़रमाया: ‘तो सुनो! मैं तुम्हें अल्लाह के सख्त अज़ाब से डराने वाला नबी हूँ।’ इस पर आपके सगे चचा अबू लहब ने गुस्ताख़ी करते हुए कहा: ‘तब्बल-लक सायरल यौम, अलिहाज़ा जमाअ़्तना?’ (सत्यानाश हो तेरा सारा दिन, क्या तूने हमें इसीलिए जमा किया था?)। इस बदज़ुबानी के जवाब में अल्लाह तआला ने यह सूरह नाज़िल फ़रमाई और अबू लहब की हलाकत का ऐलान किया।

सूरह लहब की फ़ज़ीलत व रूहानी बरकत
सूरह लहब की तिलावत से मोमिन के दिल में ईमान की ताज़गी और रूहानी सुकून हासिल होता है।

सूरह लहब की फ़ज़ीलत पर प्रामाणिक सहीह अहादीस

हदीस की किताबों में सूरह लहब की असीम फ़ज़ीलतें दर्ज हैं:

सहीह बुख़ारी (हदीस 4972) – कोह-ए-सफ़ा की पुकार

सूरह लहब का ऐतिहासिक संदर्भ सहीह बुख़ारी में विस्तार से दर्ज है, जो इस्लाम की शुरुआती दावत और विरोधियों के हश्र का प्रामाणिक दस्तावेज़ है।

क़ुरआन का ज़िंदा मोजिज़ा (वैज्ञानिक व ऐतिहासिक चमत्कार)

इस सूरह में क़ुरआन ने अबू लहब और उसकी बीवी के काफ़िर रहते हुए मरने की साफ़ भविष्यवाणी की थी। अबू लहब इस सूरह के नुज़ूल के बाद 10 साल से ज़्यादा ज़िंदा रहा। अगर वह केवल दिखावे के लिए भी कह देता कि ‘मैं मुसलमान हो गया हूँ’, तो क़ुरआन की बात ग़लत साबित हो जाती। लेकिन वह ज़िद में कुफ़्र पर ही मरा, जो क़ुरआन की हक़्क़ानियत का खुला सबूत है।

अबू लहब की दर्दनाक मौत

जंग-ए-बद्र की हार की ख़बर सुनकर अबू लहब को एक ख़तरनाक छूत की बीमारी (प्लेग/नासूर) हुई। उसके अपने बेटों ने भी सड़ांध के डर से तीन दिन तक उसकी लाश को हाथ नहीं लगाया। अंत में दूर से पत्थर फेंक कर उसे गड्ढे में दबाया गया।

सूरह लहब पढ़ने के रूहानी व व्यावहारिक फ़ायदे

इस पवित्र सूरह की नियमित तिलावत से हासिल होने वाले प्रमुख आध्यात्मिक लाभ निम्नलिखित हैं:

  • नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान में गुस्ताख़ी करने वालों का खौफ़नाक अंजाम समझना।
  • दौलत, खानदान और नसब पर घमंड करने से बचना, क्योंकि अबू लहब रसूल का सगा चचा होकर भी जहन्नमी हुआ।
  • क़ुरआन करीम की सच्चाई और उसके द्वारा की गई भविष्यवाणियों पर ईमान पुख़्ता होना।
  • दीन के रास्ते में आने वाली तकलीफ़ों पर सब्र करना और ज़ालिमों की बद्दुआ से महफ़ूज़ रहना।

नमाज़ में सूरह लहब पढ़ने का मसनून तरीक़ा व नियम

सूरह लहब को नमाज़ की किसी भी रकात में सूरह फ़ातिहा के बाद पढ़ा जा सकता है। यह क़ुरआन करीम की एक मुस्तहकम सूरह है।

क़ुरआन मजीद की प्रमुख सूरतों के विस्तृत लेख

Frequently Asked Questions (FAQs)

1. अबू लहब कौन था?

अबू लहब का असली नाम अब्दुल उज़्ज़ा बिन अब्दुल मुत्तलिब था। वह रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का सगा चचा था, लेकिन इस्लाम और नबी का सबसे बड़ा दुश्मन साबित हुआ।

2. उसे ‘अबू लहब’ क्यों कहा जाता था?

‘लहब’ का मतलब आग की शोला या लपट होता है। उसका चेहरा बहुत सुर्ख़ (लाल) और चमकदार था, इसलिए लोग उसे अबू लहब कहते थे। क़ुरआन ने इस नाम का इस्तेमाल यह बताने के लिए किया कि वह शोलों वाली आग का ही हक़दार है।

3. अबू लहब की बीवी को ‘लकड़ियां ढोने वाली’ क्यों कहा गया?

अबू लहब की बीवी उम्मे जमील रात के अंधेरे में जंगल से कांटेदार झाड़ियां लाती थी और नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के आने-जाने के रास्ते में बिछा देती थी ताकि आपको तकलीफ़ पहुँचे।

4. सूरह लहब में कुल कितनी आयतें हैं?

सूरह लहब में कुल 5 आयतें, 23 शब्द और 81 अक्षर हैं। यह 30वें पारे में मौजूद है।

5. ‘हब्लुम मिम मसद’ (حَبْلٌ مِّن مَّسَدٍ) का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है ‘खजूर की बटी हुई सख्त छाल या लोहे का रस्सा’। जहन्नम में उसकी गर्दन में यह रस्सा डालकर उसे खींचा जाएगा।

6. सूरह लहब से मोमिन को क्या सबक मिलता है?

सबक यह मिलता है कि अल्लाह के नबी की नाफ़रमानी और गुस्ताख़ी करने वाले का कोई माल, नसब या रिश्तेदारी उसे अल्लाह के अज़ाब से नहीं बचा सकती।

Mariya Ansari
लेखक के बारे में

Mariya Ansari

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