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सूरह क़द्र इन हिंदी (Surah Qadr in Hindi) | अरबी मतन, हिंदी तर्जुमा, शब-ए-क़द्र व फ़ज़ीलत

By Mariya Ansari •

पवित्र क़ुरआन मजीद की 97वीं सूरह सूरह क़द्र (Surah Al-Qadr) है। यह क़ुरआन करीम के 30 (अम्मा पारा) में स्थित है और इसमें कुल 5 आयतें हैं। सूरह क़द्र में क़ुरआन मजीद के नुज़ूल की मुबारक रात ‘लैलतुल क़द्र’ (शब-ए-क़द्र) की असीम महिमा और फ़ज़ीलत का बयान है। अल्लाह तआला ने इस एक रात की इबादत को एक हज़ार महीनों (83 साल 4 महीने) की मुसलसल इबादत से भी बेहतर और अफ़ज़ल क़रार दिया है।

मुसलमानों के लिए इस सूरह को सही उच्चारण और तर्जुमे के साथ समझना बेहद ज़रूरी है क्योंकि यह रोज़मर्रा की पाँचों वक़्त की नमाज़ों में कसरत से पढ़ी जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण सूरतों में से एक है। इस विस्तृत लेख में सूरह क़द्र का शुद्ध अरबी मतन, आसान हिंदी उच्चारण, शब्द-दर-शब्द तर्जुमा, शान-ए-नुज़ूल, सहीह हदीस के हवाले, फ़ज़ीलत व नमाज़ में पढ़ने का सुन्नत तरीक़ा पूरी तफ़्सील के साथ पेश किया गया है।

मुख़्तसर ख़ुलासा: सूरह क़द्र में क़ुरआन मजीद के नुज़ूल की मुबारक रात ‘लैलतुल क़द्र’ (शब-ए-क़द्र) की असीम महिमा और फ़ज़ीलत का बयान है। अल्लाह तआला ने इस एक रात की इबादत को एक हज़ार महीनों (83 साल 4 महीने) की मुसलसल इबादत से भी बेहतर और अफ़ज़ल क़रार दिया है।

सूरह क़द्र का संक्षिप्त परिचय (Overview Table)

विवरण (Aspect) प्रामाणिक जानकारी (Details)
सूरह संख्या (Surah Number) 97
पारा (Juz) 30 (अम्मा पारा)
कुल आयतें (Total Verses) 5 आयतें
कुल रुकूअ (Ruku) 1 रुकूअ
शब्द व अक्षर संख्या 30 कलिमात और 114 हुरूफ़
मक़ाम-ए-नुज़ूल (Classification) मक्की सूरह (बाज़ के नज़दीक मदनी)

सूरह क़द्र अरबी मतन, हिंदी उच्चारण व तर्जुमा (आयत दर आयत)

नीचे सूरह क़द्र की सभी आयतों का स्पष्ट अरबी मतन, आसान हिंदी उच्चारण (Transliteration) और अर्थ दिया गया है ताकि आप इसे सही तरीक़े से याद कर सकें:

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

हिंदी उच्चारण: बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

तर्जुमा: अल्लाह के नाम से शुरू जो निहायत मेहरबान और हमेशा रहम फ़रमाने वाला है।

आयत 1

إِنَّا أَنزَلْنَاهُ فِي لَيْلَةِ الْقَدْرِ ﴿١﴾

हिंदी उच्चारण: इन्ना अनज़लनाहु फ़ी लैलतिल-क़द्र।

हिंदी तर्जुमा: बेशक हमने इस (क़ुरआन) को शब-ए-क़द्र (क़द्र वाली मुबारक रात) में नाज़िल फ़रमाया है।

आयत 2

وَمَا أَدْرَاكَ مَا لَيْلَةُ الْقَدْرِ ﴿٢﴾

हिंदी उच्चारण: वमा अदराका मा लैलतुल-क़द्र।

हिंदी तर्जुमा: और आपको क्या मालूम कि शब-ए-क़द्र क्या है?

आयत 3

لَيْلَةُ الْقَدْرِ خَيْرٌ مِّنْ أَلْفِ شَهْرٍ ﴿٣﴾

हिंदी उच्चारण: लैलतुल-क़द्रि ख़ैरुम्-मिन् अल्फ़ि शहर।

हिंदी तर्जुमा: शब-ए-क़द्र (की इबादत) एक हज़ार महीनों (की इबादत) से बेहतर है।

आयत 4

تَنَزَّلُ الْمَلَائِكَةُ وَالرُّوحُ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِم مِّن كُلِّ أَمْرٍ ﴿٤﴾

हिंदी उच्चारण: तनज़्ज़लुल-मला-इकतु वर-रूहू फ़ीहा बि-इज़्नि रब्बिहिम् मिन् कुल्लि अम्र।

हिंदी तर्जुमा: उसमें फ़रिश्ते और रूह (हज़रत जिब्रील) अपने रब के हुक्म से हर अम्र (हुक्म व ख़ैर) के साथ उतरते हैं।

आयत 5

سَلَامٌ هِيَ حَتَّىٰ مَطْلَعِ الْفَجْرِ ﴿٥﴾

हिंदी उच्चारण: सलामुन् हिया हत्ता मत़लइल-फ़ज्र।

हिंदी तर्जुमा: वह रात सरासर सलामती (अमन व रहमत) है, फ़ज्र के तुलूअ होने तक।

सूरह क़द्र का शब्द-दर-शब्द अर्थ (Word-by-Word Meaning)

अरबी भाषा की गहराई और क़ुरआनी अल्फ़ाज़ के सही मफ़हूम को समझने के लिए प्रत्येक शब्द का अर्थ नीचे दी गई तालिका में देखें:

अरबी शब्द (Arabic) हिंदी उच्चारण शाब्दिक अर्थ (Hindi Meaning)
إِنَّا इन्ना बेशक हमने
أَنزَلْنَاهُ अनज़लनाहु उतारा इसे (क़ुरआन को)
فِي फ़ी में
لَيْلَةِ लैलति रात
الْقَدْرِ अल्-क़द्रि क़द्र (महिमा/फ़ैसले) वाली
وَمَا वमा और क्या
أَدْرَاكَ अदराका आपको मालूम कराया
مَا मा क्या है
خَيْرٌ ख़ैरुन बेहतर है
مِّنْ मिन् से
أَلْفِ अल्फ़ि एक हज़ार
شَهْرٍ शहरिन महीने
تَنَزَّلُ तनज़्ज़लु उतरते हैं
الْمَلَائِكَةُ अल्-मलाइका फ़रिश्ते
وَالرُّوحُ वर-रूह और रूह (जिब्रील अलै.)
بِإِذْنِ बि-इज़्नि हुक्म व इजाज़त से
رَبِّهِم रब्बिहिम् अपने रब की
مِّن كُلِّ أَمْرٍ मिन् कुल्लि अम्र हर हुक्म व मामले के साथ
سَلَامٌ सलामुन सलामती व शांति
حَتَّىٰ हत्ता यहाँ तक कि
مَطْلَعِ الْفَجْرِ मत़लइल-फ़ज्र फ़ज्र के उदय होने तक

सूरह क़द्र का शान-ए-नुज़ूल (पृष्ठभूमि व अवतरण का कारण)

हदीस की रिवायतों में आता है कि नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के सामने पिछली उम्मतों के लोगों की लंबी उम्रों (सैकड़ों साल) का ज़िक्र किया गया, जिससे वे बहुत ज़्यादा इबादत कर पाते थे। आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को अपनी उम्मत की छोटी उम्रों (60-70 साल) का ख़याल आया कि मेरी उम्मत पिछली उम्मतों के बराबर सवाब कैसे हासिल कर सकेगी? तब अल्लाह तआला ने अपने नबी और उनकी उम्मत पर एहसान फ़रमाते हुए सूरह क़द्र नाज़िल फ़रमाई और यह मुबारक रात अता की, जिसकी एक रात की इबादत 1,000 महीनों (83 साल से ज़्यादा) की इबादत से बढ़कर है।

सूरह क़द्र की फ़ज़ीलत व रूहानी बरकत
सूरह क़द्र की तिलावत से मोमिन के दिल में ईमान की ताज़गी और रूहानी सुकून हासिल होता है।

सूरह क़द्र की फ़ज़ीलत पर प्रामाणिक सहीह अहादीस

हदीस की किताबों में सूरह क़द्र की असीम फ़ज़ीलतें दर्ज हैं:

सहीह बुख़ारी (हदीस 1901) – गुनाहों की मुकम्मल मग़फ़िरत

रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: ‘जिसने शब-ए-क़द्र में ईमान और सवाब की नीयत के साथ क़ियाम (इबादत) किया, उसके पिछले तमाम गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।’

सहीह बुख़ारी (हदीस 2017) – आख़िरी अशरे की ताक़ रातें

नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: ‘शब-ए-क़द्र को रमज़ान के आख़िरी अशरे की ताक़ रातों (21, 23, 25, 27 और 29वीं रात) में तलाश करो।’

सुनन इब्ने माजा (हदीस 3850) – शब-ए-क़द्र की ख़ास दुआ

हज़रत आयशा रज़ियल्लाहु अन्हा ने पूछा: ‘ऐ अल्लाह के रसूल! अगर मुझे मालूम हो जाए कि कौन सी रात शब-ए-क़द्र है, तो मैं क्या दुआ माँगूँ?’ आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: ‘कहो: अल्लाहुम्मा इन्नका अफ़ुव्वुन तुहिब्बुल अफ़्वा फ़ाफ़ु अन्नी’ (ऐ अल्लाह! तू माफ़ करने वाला है, माफ़ी को पसंद करता है, अतः मुझे माफ़ फ़रमा दे)।

सूरह क़द्र पढ़ने के रूहानी व व्यावहारिक फ़ायदे

इस पवित्र सूरह की नियमित तिलावत से हासिल होने वाले प्रमुख आध्यात्मिक लाभ निम्नलिखित हैं:

  • एक रात की इबादत में 83 वर्ष और 4 महीने से अधिक का सवाब हासिल होना।
  • अल्लाह की तरफ़ से रहमत के फ़रिश्तों की ज़ियारत और सलामती की दुआएं मिलना।
  • साल भर के रिज़्क़, उम्र और तक़दीर के अच्छे फ़ैसलों का मुक़र्रर होना।
  • गुनाहों की माफ़ी और जहन्नम की आग से हमेशा के लिए आज़ादी।

नमाज़ में सूरह क़द्र पढ़ने का मसनून तरीक़ा व नियम

रमज़ानुल मुबारक के आख़िरी अशरे में और विशेषकर तरावीह व शब-ए-क़द्र की नफ़्ल नमाज़ों में सूरह क़द्र की तिलावत करना बेहद मुस्तहब है। आम नमाज़ों में भी सूरह फ़ातिहा के बाद इसे पढ़ा जाता है।

क़ुरआन मजीद की प्रमुख सूरतों के विस्तृत लेख

Frequently Asked Questions (FAQs)

1. शब-ए-क़द्र को एक हज़ार महीनों से बेहतर क्यों कहा गया है?

क्योंकि इस रात में क़ुरआन मजीद लोह-ए-महफ़ूज़ से आसमान-ए-दुनिया पर नाज़िल हुआ। अल्लाह तआला ने इस रात को ऐसी अज़ीम बरकत बख्शी कि इसमें किया गया एक नेक अमल 1,000 महीने (तकरीबन 83 साल 4 माह) के लगातार आमाल से ज़्यादा वज़नी है।

2. सूरह क़द्र में ‘रूह’ (الرُّوحُ) से कौन मुराद हैं?

मुफ़स्सरीन के सर्वसम्मत राय के अनुसार सूरह क़द्र में ‘रूह’ से मुराद हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम हैं। फ़रिश्तों के सरदार होने के नाते उनका नाम विशेष रूप से अलग ज़िक्र किया गया।

3. सूरह क़द्र किस पारे में है?

सूरह क़द्र क़ुरआन मजीद के 30वें पारे (अम्मा पारा) में है और इसका सूरह नंबर 97 है।

4. शब-ए-क़द्र कब आती है?

शब-ए-क़द्र रमज़ानुल मुबारक के अंतिम दस दिनों (आख़िरी अशरे) की ताक़ रातों यानी 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं या 29वीं शब में से कोई एक होती है। अधिकांश उलेमा 27वीं रात को अत्यधिक संभावित मानते हैं।

5. सूरह क़द्र में कुल कितनी आयतें हैं?

सूरह क़द्र में कुल 5 आयतें, 30 शब्द और 114 अक्षर हैं।

6. क्या सूरह क़द्र केवल रमज़ान में पढ़ी जा सकती है?

नहीं, सूरह क़द्र को साल के किसी भी दिन और किसी भी नमाज़ में तिलावत किया जा सकता है। रमज़ान में इसका एहतिमाम और ज़्यादा बढ़ जाता है।

Mariya Ansari
लेखक के बारे में

Mariya Ansari

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