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सूरह काफ़िरून इन हिंदी (Surah Kafirun in Hindi) | अरबी मतन, हिंदी तर्जुमा, शिर्क से बेज़ारी व फ़ज़ीलत

By Mariya Ansari •

पवित्र क़ुरआन मजीद की 109वीं सूरह सूरह काफ़िरून (Surah Al-Kafirun) है। यह क़ुरआन करीम के 30 (अम्मा पारा) में स्थित है और इसमें कुल 6 आयतें हैं। सूरह काफ़िरून इस्लाम और कुफ़्र के बीच स्पष्ट विभाजक रेखा खींचने वाली सूरह है। इसमें रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुशरिकीन के इस प्रस्ताव को सिरे से ख़ारिज कर दिया कि एक साल तुम हमारे देवताओं की पूजा करो और एक साल हम तुम्हारे रब की इबादत करेंगे। हदीस में इसे एक-चौथाई क़ुरआन (1/4 Quran) के बराबर सवाब वाली सूरह बताया गया है।

मुसलमानों के लिए इस सूरह को सही उच्चारण और तर्जुमे के साथ समझना बेहद ज़रूरी है क्योंकि यह रोज़मर्रा की पाँचों वक़्त की नमाज़ों में कसरत से पढ़ी जाने वाली सबसे महत्वपूर्ण सूरतों में से एक है। इस विस्तृत लेख में सूरह काफ़िरून का शुद्ध अरबी मतन, आसान हिंदी उच्चारण, शब्द-दर-शब्द तर्जुमा, शान-ए-नुज़ूल, सहीह हदीस के हवाले, फ़ज़ीलत व नमाज़ में पढ़ने का सुन्नत तरीक़ा पूरी तफ़्सील के साथ पेश किया गया है।

मुख़्तसर ख़ुलासा: सूरह काफ़िरून इस्लाम और कुफ़्र के बीच स्पष्ट विभाजक रेखा खींचने वाली सूरह है। इसमें रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने मुशरिकीन के इस प्रस्ताव को सिरे से ख़ारिज कर दिया कि एक साल तुम हमारे देवताओं की पूजा करो और एक साल हम तुम्हारे रब की इबादत करेंगे। हदीस में इसे एक-चौथाई क़ुरआन (1/4 Quran) के बराबर सवाब वाली सूरह बताया गया है।

सूरह काफ़िरून का संक्षिप्त परिचय (Overview Table)

विवरण (Aspect) प्रामाणिक जानकारी (Details)
सूरह संख्या (Surah Number) 109
पारा (Juz) 30 (अम्मा पारा)
कुल आयतें (Total Verses) 6 आयतें
कुल रुकूअ (Ruku) 1 रुकूअ
शब्द व अक्षर संख्या 27 कलिमात और 99 हुरूफ़
मक़ाम-ए-नुज़ूल (Classification) मक्की सूरह

सूरह काफ़िरून अरबी मतन, हिंदी उच्चारण व तर्जुमा (आयत दर आयत)

नीचे सूरह काफ़िरून की सभी आयतों का स्पष्ट अरबी मतन, आसान हिंदी उच्चारण (Transliteration) और अर्थ दिया गया है ताकि आप इसे सही तरीक़े से याद कर सकें:

بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ

हिंदी उच्चारण: बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम

तर्जुमा: अल्लाह के नाम से शुरू जो निहायत मेहरबान और हमेशा रहम फ़रमाने वाला है।

आयत 1

قُلْ يَا أَيُّهَا الْكَافِرُونَ ﴿١﴾

हिंदी उच्चारण: क़ुल या अय्युहल-काफ़िरून।

हिंदी तर्जुमा: (ऐ नबी!) आप कह दीजिए कि ऐ काफ़िरो!

आयत 2

لَا أَعْبُدُ مَا تَعْبُدُونَ ﴿٢﴾

हिंदी उच्चारण: ला आ’बुदु मा ता’बुदून।

हिंदी तर्जुमा: मैं उनकी इबादत (पूजा) नहीं करता जिनकी तुम इबादत करते हो।

आयत 3

وَلَا أَنتُمْ عَابِدُونَ مَا أَعْبُدُ ﴿٣﴾

हिंदी उच्चारण: वला अन्तुम् आ’बिदूना मा आ’बुद।

हिंदी तर्जुमा: और न तुम उसकी इबादत करने वाले हो जिसकी मैं इबादत करता हूँ।

आयत 4

وَلَا أَنَا عَابِدٌ مَّا عَبادتُّمْ ﴿٤﴾

हिंदी उच्चारण: वला अना आ’बिदुम्-मा अबात्तुम।

हिंदी तर्जुमा: और न मैं उनकी इबादत करने वाला हूँ जिनकी तुमने इबादत की है।

आयत 5

وَلَا أَنتُمْ عَابِدُونَ مَا أَعْبُدُ ﴿٥﴾

हिंदी उच्चारण: वला अन्तुम् आ’बिदूना मा आ’बुद।

हिंदी तर्जुमा: और न तुम उसकी इबादत करने वाले हो जिसकी मैं इबादत करता हूँ।

आयत 6

لَكُمْ دِينُكُمْ وَلِيَ دِينِ ﴿٦﴾

हिंदी उच्चारण: लकुम् दीनुकुम् वलिया दीन।

हिंदी तर्जुमा: तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन (धर्म) है और मेरे लिए मेरा दीन है।

सूरह काफ़िरून का शब्द-दर-शब्द अर्थ (Word-by-Word Meaning)

अरबी भाषा की गहराई और क़ुरआनी अल्फ़ाज़ के सही मफ़हूम को समझने के लिए प्रत्येक शब्द का अर्थ नीचे दी गई तालिका में देखें:

अरबी शब्द (Arabic) हिंदी उच्चारण शाब्दिक अर्थ (Hindi Meaning)
قُلْ क़ुल कह दीजिए / फ़रमाइए
يَا أَيُّهَا या अय्युहा ऐ लोगो
الْكَافِرُونَ अल्-काफ़िरून काफ़िरो / सत्य को झुठलाने वालो
لَا أَعْبُدُ ला आ’बुदु नहीं मैं इबादत करता
مَا تَعْبُدُونَ मा ता’बुदून जिसकी तुम इबादत करते हो
وَلَا أَنتُمْ वला अन्तुम् और न तुम
عَابِدُونَ आ’बिदून इबादत करने वाले हो
مَا أَعْبُدُ मा आ’बुद जिसकी मैं इबादत करता हूँ
وَلَا أَنَا वला अना और न मैं
عَابِدٌ आ’बिदुन इबादत करने वाला
مَّا عَبادتُّمْ मा अबात्तुम जिसकी तुमने इबादत की
لَكُمْ लकुम् तुम्हारे लिए
دِينُكُمْ दीनुकुम् तुम्हारा दीन (धर्म)
وَلِيَ वलिया और मेरे लिए
دِينِ दीन मेरा दीन

सूरह काफ़िरून का शान-ए-नुज़ूल (पृष्ठभूमि व अवतरण का कारण)

तफ़्सीर इब्ने कसीर के अनुसार, मक्का के बड़े मुशरिकीन (वलीद बिन मुग़ीरा, आस बिन वाइल, उमैया बिन ख़लफ़ आदि) रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम के पास आए और एक सुलह का प्रस्ताव रखा: ‘ऐ मुहम्मद! हम एक साल आपके माबूद (अल्लाह) की इबादत करेंगे, और एक साल आप हमारे माबूदों (लात और उज़्ज़ा) की इबादत करें। इस तरह हम दोनों एक दूसरे के दीन में शरीक हो जाएंगे।’ तब अल्लाह तआला ने यह सूरह नाज़िल फ़रमाई और मुशरिकीन के इस शिर्क से भरपूर समझौते को हमेशा के लिए ठुकरा दिया।

सूरह काफ़िरून की फ़ज़ीलत व रूहानी बरकत
सूरह काफ़िरून की तिलावत से मोमिन के दिल में ईमान की ताज़गी और रूहानी सुकून हासिल होता है।

सूरह काफ़िरून की फ़ज़ीलत पर प्रामाणिक सहीह अहादीस

हदीस की किताबों में सूरह काफ़िरून की असीम फ़ज़ीलतें दर्ज हैं:

जामेअ तिर्मिज़ी (हदीस 2893) – एक-चौथाई क़ुरआन का सवाब

हज़रत अनस बिन मालिक रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: ‘सूरह काफ़िरून (قُلْ يَا أَيُّهَا الْكَافِرُونَ) एक-चौथाई क़ुरआन (1/4 Quran) के बराबर है।’

सहीह मुस्लिम (हदीस 726) – फ़ज्र व मग़रिब की सुन्नतें

हज़रत अबू हुरैरा रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम फ़ज्र की दो रकात सुन्नत में सूरह काफ़िरून और सूरह इख़्लास की तिलावत फ़रमाते थे। इसी तरह मग़रिब के बाद की 2 रकात सुन्नत और तवाफ़ के बाद की 2 रकात नमाज़ में भी इन दोनों सूरतों को पढ़ना सुन्नत है।

सुनन अबी दाऊद (हदीस 5055) – शिर्क से बरी होने का अमल

नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हज़रत नौफ़ल रज़ियल्लाहु अन्हु को ताकीद फ़रमाई: ‘रात को सोते समय सूरह काफ़िरून पढ़कर सोया करो, बेशक यह सूरह शिर्क से बरी (आज़ाद) करने वाली है।’

सूरह काफ़िरून पढ़ने के रूहानी व व्यावहारिक फ़ायदे

इस पवित्र सूरह की नियमित तिलावत से हासिल होने वाले प्रमुख आध्यात्मिक लाभ निम्नलिखित हैं:

  • ईमान की हिफ़ाज़त होना और दिल से शिर्क, रियाकारी व मुनाफ़िक़त का खात्मा होना।
  • रात को सोते वक़्त पढ़ने से कुफ़्र और बे-ईमानी की मौत से पनाह मिलना।
  • दैनिक जीवन में 4 बार पढ़ने से पूरे क़ुरआन मजीद की तिलावत का असीम सवाब मिलना।
  • सच्चाई पर डटे रहने की ताक़त और बातिल ताक़तों के दबाव से आज़ादी मिलना।

नमाज़ में सूरह काफ़िरून पढ़ने का मसनून तरीक़ा व नियम

फ़ज्र की दो रकात सुन्नत में पहली रकात में सूरह काफ़िरून और दूसरी रकात में सूरह इख़्लास पढ़ना सुन्नत-ए-मुअक्कदा है। इसी प्रकार मग़रिब की दो सुन्नतों में, तवाफ़ की 2 रकातों में और वित्र की नमाज़ की दूसरी रकात में भी इसे पढ़ना नबी करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से साबित है।

क़ुरआन मजीद की प्रमुख सूरतों के विस्तृत लेख

Frequently Asked Questions (FAQs)

1. सूरह काफ़िरून को शिर्क से बेज़ारी की सूरह क्यों कहते हैं?

क्योंकि इस सूरह में साफ़ और दो-टूक लफ़्ज़ों में शिर्क (अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहराने) और ग़ैर-अल्लाह की इबादत का पूर्ण खंडन किया गया है।

2. ‘लकुम दीनुकुम वलिया दीन’ का क्या मतलब है?

इसका अर्थ है: ‘तुम्हारे लिए तुम्हारा दीन (शिर्क व कुफ़्र) और मेरे लिए मेरा दीन (तौहीद व इस्लाम)’। इसका मतलब यह है कि ईमान और शिर्क के बीच कोई समझौता या मिलावट संभव नहीं है।

3. सूरह काफ़िरून रात को सोते समय पढ़ने की क्या फ़ज़ीलत है?

हदीस (अबू दाऊद 5055) के अनुसार जो व्यक्ति रात को सोते समय सूरह काफ़िरून पढ़ता है, वह शिर्क से बरी हो जाता है और ईमान पर उसकी हिफ़ाज़त होती है।

4. सूरह काफ़िरून में कुछ आयतें दोहराई क्यों गई हैं?

अरबी बल़ाग़त (वक्तृता) के अनुसार, आयत 2 व 3 में वर्तमान समय की बेज़ारी बयान हुई है, जबकि आयत 4 व 5 में भविष्य की बात कही गई है कि न मैं कभी तुम्हारे बुतों की इबादत करूँगा और न तुम अल्लाह के मुख़्लिस बंदे बनोगे। यह ताकीद और पक्के इरादे को दर्शाता है।

5. सूरह काफ़िरून का सूरह नंबर क्या है?

यह क़ुरआन मजीद की 109वीं सूरह है और 30वें पारे (अम्मा पारा) में स्थित है।

6. क्या सूरह काफ़िरून नफ़्ल नमाज़ों में पढ़ी जा सकती है?

हाँ, तहज्जुद, चाश्त, इशराक़ और किसी भी नफ़्ल नमाज़ में सूरह काफ़िरून पढ़ी जा सकती है।

Mariya Ansari
लेखक के बारे में

Mariya Ansari

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