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Wazu Ka Tarika in Hindi Step by Step | वज़ू करने का सही तरीक़ा, फ़राइज़, सुन्नतें और दुआ

By Mariya Ansari •

नमाज़ इस्लाम का दूसरा सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ (Pillar) है, और किसी भी नमाज़ की क़बूलियत के लिए सबसे पहली शर्त पाकीज़गी यानी वज़ू (Wazu / Wudu) है। रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया कि वज़ू नमाज़ की कुंजी (चाबी) है, और बिना पाकी के कोई नमाज़ अल्लाह के दरबार में क़बूल नहीं होती। हर मुसलमान के लिए वज़ू का सही और सुन्नत तरीक़ा जानना अनिवार्य है, ताकि इबादत का पूरा सवाब हासिल हो सके। इस विस्तृत और मुकम्मल गाइड में आप जानेंगे कि Wazu Ka Tarika in Hindi Step by Step क्या है, वज़ू के 4 फ़राइज़ कौन-कौन से हैं, वज़ू की 13 सुन्नतें, शुरू और बाद की मसनून दुआएं, और वज़ू किन चीज़ों से टूट जाता है।

हदीस-ए-रसूल: हज़रत अबू मालिक अशअरी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया: “अत्तहूरु शतरुल ईमान” यानी पाकीज़गी और स्वच्छता आधा ईमान है। (सहीह मुस्लिम: 223)

विषय (Category) संक्षिप्त विवरण (Summary Details)
वज़ू की शरई हैसियत नमाज़, तवाफ़-ए-काबा और क़ुरआन करीम को छूने के लिए फ़र्ज़ (अनिवार्य शर्त)
वज़ू के फ़राइज़ (Farz Acts) कुल 4 फ़राइज़ (चेहरा धोना, कोहनियों समेत हाथ, सर का मसह, टखनों समेत पैर धोना)
वज़ू की सुन्नतें (Sunnah Acts) 13 अहम सुन्नतें (नीयत, बिस्मिल्लाह, मिस्वाक, तरतीब, 3-3 बार धोना आदि)
क़ुरआन में आदेश सूरह अल-माइदा (5), आयत नंबर 6
वज़ू के बाद का सवाब गुनाहों का धुलना और जन्नत के 8 दरवाजों का खुलना (सहीह मुस्लिम: 234)

क़ुरआन करीम में वज़ू का हुक्म (Surah Al-Ma’idah 5:6)

अल्लाह तआला ने पवित्र क़ुरआन के 6ठे पारे में, सूरह अल-माइदा की आयत 6 में मोमिनों को नमाज़ से पहले वज़ू करने का सीधा और स्पष्ट हुक्म फ़रमाया है:

يَا أَيُّهَا الَّذِينَ آمَنُوا إِذَا قُمْتُمْ إِلَى الصَّلَاةِ فَاغْسِلُوا وُجُوهَكُمْ وَأَيْدِيَكُمْ إِلَى الْمَرَافِقِ وَامْسَحُوا بِرُءُوسِكُمْ وَأَرْجُلَكُمْ إِلَى الْكَعْبَيْنِ

हिंदी उच्चारण: या अय्युहल-लज़ीना आमनू इज़ा क़ुमतुम इलस-सलाति फ़ग़सिलू वुजूहकुम व ऐदियकुम इलल-मराफ़िक़ि वम्सहू बिरुऊसिकुम व अर्जु़लकुम इलल-का’बैन।

हिंदी तर्जुमा: “ऐ ईमान वालो! जब तुम नमाज़ के लिए उठो, तो अपने चेहरों को और अपने हाथों को कोहनियों तक धो लो, और अपने सरों का मसह करो, और अपने पैरों को टखनों तक धो लो।” (सूरह अल-माइदा: 6)

वज़ू के 4 फ़राइज़ (The 4 Obligatory Acts of Wazu)

फ़र्ज़ उन कामों को कहा जाता है जिनका अदा करना हर हाल में ज़रूरी होता है। अगर वज़ू के दौरान इन 4 फ़राइज़ में से कोई एक भी छूट जाए, या एक बाल बराबर जगह भी सूखी रह जाए, तो वज़ू बिल्कुल नहीं होगा और उसके बिना पढ़ी गई नमाज़ भी अदा नहीं होगी:

  1. एक बार पूरा चेहरा धोना: माथे के बालों की शुरुआत से लेकर ठोड़ी के नीचे तक, और एक कान की लौ (Ear lobe) से दूसरे कान की लौ तक पूरा चेहरा एक बार अच्छी तरह धोना फ़र्ज़ है (तीन बार धोना सुन्नत है)।
  2. दोनों हाथों को कोहनियों समेत धोना: उंगलियों के पोरों से शुरू करके दोनों हाथों को कोहनियों (Elbows) तक पूरा धोना फ़र्ज़ है।
  3. चौथाई (1/4) सर का मसह करना: अपने भीगे हुए हाथों से पूरे सर के कम से कम एक चौथाई हिस्से पर हाथ फेरना फ़र्ज़ है (पूरे सर का मसह करना सुन्नत है)।
  4. दोनों पैरों को टखनों समेत धोना: दोनों पैरों को उंगलियों से लेकर दोनों तरफ़ उभरे हुए टखनों (Ankles) समेत पूरा धोना फ़र्ज़ है।

वज़ू की 13 मुख्य सुन्नतें (Sunnahs of Wazu)

सुन्नत वह तरीक़ा है जिस पर हमारे प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने हमेशा अमल किया। सुन्नत के मुताबिक़ वज़ू करने से वज़ू मुकम्मल होता है और अज़ीम सवाब मिलता है:

  • दिल में वज़ू की नीयत करना।
  • वज़ू शुरू करने से पहले ‘बिस्मिल्लाहिर-रहमानिर-रहीम’ पढ़ना।
  • दोनों हाथों को गट्टों (कलाइयों) तक तीन बार धोना।
  • मिस्वाक करना (अगर मिस्वाक न हो तो उंगली से दांत साफ़ करना)।
  • दाहिने हाथ से तीन बार कुल्ली करना।
  • तीन बार नाक में पानी चढ़ाना और बाएं हाथ से नाक साफ़ करना।
  • दाढ़ी के बालों का ख़िलाल करना (अगर दाढ़ी घनी हो)।
  • हाथ और पैरों की उंगलियों का ख़िलाल करना।
  • हर अंग को तीन-तीन बार धोना।
  • एक बार पूरे सर का मसह करना।
  • सर के साथ कानों का मसह करना।
  • तरतीब (क्रम) से वज़ू करना (यानी जो अंग पहले धोना है उसे पहले ही धोना)।
  • पै दर पै वज़ू करना (यानी एक अंग सूखने से पहले दूसरा अंग धो लेना)।

वज़ू करने का मुकम्मल सुन्नत तरीक़ा (Step by Step Guide)

नीचे वज़ू करने का क़दम-दर-क़दम सही इस्लामी तरीक़ा दिया गया है। जब भी आप नमाज़ के लिए वज़ू करें, तो इन 8 चरणों का ध्यान रखें:

स्टेप 1: नीयत और बिस्मिल्लाह पढ़ना

साफ़ और पाक जगह पर क़िबला की तरफ़ मुंह करके बैठें (यदि मुमकिन हो)। दिल में नीयत करें: “मैं नापाकी दूर करने और अल्लाह की रज़ा के लिए नमाज़ की ख़ातिर वज़ू कर रहा हूँ।” फिर बिस्मिल्लाह पढ़ें:

بِسْمِ اللَّهِ وَالْحَمْدُ لِلَّهِ
उच्चारण: बिस्मिल्लाहि वल-हम्दु लिल्लाह (अल्लाह के नाम से शुरू और तमाम तारीफ़ें अल्लाह ही के लिए हैं)।

स्टेप 2: दोनों हाथों को कलाइयों तक धोना

पहले दाहिने हाथ को कलाई (गट्टे) तक तीन बार अच्छी तरह धोएं, फिर बाएं हाथ को कलाई तक तीन बार धोएं। उंगलियों के दरमियान ख़िलाल करें ताकि कोई जगह सूखी न रहे।

स्टेप 3: मिस्वाक करना और तीन बार कुल्ली करना

दाहिने हाथ में पानी लेकर तीन बार मुंह में डालें और अच्छी तरह कुल्ली करें ताकि दांतों के बीच फंसा हुआ खाना निकल जाए। मिस्वाक करना अफ़ज़ल है। अगर रोज़ा न हो तो हलक़ तक गरगरा करें, लेकिन रोज़े की हालत में गरगरा न करें ताकि पानी हलक़ में न जाए।

स्टेप 4: तीन बार नाक में पानी डालना और साफ़ करना

दाहिने हाथ की अंजलि में पानी लेकर तीन बार नाक की नरम हड्डी तक पानी चढ़ाएं। फिर बाएं हाथ की छोटी उंगली और अंगूठे की मदद से नाक को अच्छी तरह झाड़कर साफ़ करें।

स्टेप 5: तीन बार पूरा चेहरा धोना

दोनों हाथों में पानी लेकर माथे के बालों के उगने की जगह से लेकर ठोड़ी के निचले सिरे तक और एक कान की लौ से दूसरे कान की लौ तक पूरा चेहरा तीन बार धोएं। पानी को चेहरे पर ज़ोर से थपथपाने के बजाय नरमी से बहाएं। अगर दाढ़ी घनी हो तो उंगलियों को अंदर डालकर दाढ़ी का ख़िलाल करें।

स्टेप 6: दोनों हाथों को कोहनियों समेत धोना

पहले दाहिने हाथ को उंगलियों से लेकर कोहनी समेत तीन बार धोएं। फिर बाएं हाथ को उंगलियों से लेकर कोहनी समेत तीन बार धोएं। ध्यान रखें कि कोहनी के पीछे का हिस्सा अक्सर सूखा रह जाता है, इसलिए हाथ फेरकर सुनिश्चित करें कि पानी हर जगह पहुंच गया है।

स्टेप 7: सर, कान और गर्दन का मसह करना

हाथों को नए पानी से तर करें। दोनों हाथों की तीन-तीन बीच वाली उंगलियों को माथे के बालों पर रखकर पीछे गुद्दी तक ले जाएं, फिर हथेलियों को पीछे से आगे की तरफ़ लाएं। इसके बाद शहादत की उंगली से कानों के अंदरूनी हिस्से का और अंगूठे से कानों के बाहरी हिस्से का मसह करें। फिर उंगलियों की पीठ से गर्दन की दोनों तरफ़ का मसह करें (गले का मसह करना मकरूह है)। मसह केवल एक बार किया जाता है।

स्टेप 8: दोनों पैरों को टखनों समेत धोना

पहले दाहिने पैर को उंगलियों से शुरू करके टखनों (Ghutno ke niche wali haddi) समेत तीन बार धोएं। बाएं हाथ की छोटी उंगली से पैर की उंगलियों के बीच ख़िलाल करें (दाहिने पैर की छोटी उंगली से शुरू करके अंगूठे तक)। फिर इसी तरह बाएं पैर को टखने समेत तीन बार धोएं और पैर की उंगलियों का ख़िलाल करें। एड़ियों और तलवों को अच्छी तरह रगड़ें ताकि कोई जगह सूखी न रहे।

वज़ू के बाद की मसनून दुआएं (Duas After Wazu)

वज़ू पूरा करने के बाद आसमान की तरफ़ रुख़ करके कलिमा-ए-शहादत और मसनून दुआ पढ़ना बेहद फ़ज़ीलत वाला अमल है। हदीस में आता है कि जो व्यक्ति वज़ू के बाद यह दुआ पढ़ता है, उसके लिए जन्नत के आठों दरवाज़े खोल दिए जाते हैं:

أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلَٰهَ إِلَّا اللَّهُ وَحْدَهُ لَا شَرِيكَ لَهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ

हिंदी उच्चारण: अश्हदु अल-ला इलाहा इल्लल्लाहु वहदहू ला शरीका लहू व अश्हदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुह।

हिंदी तर्जुमा: मैं गवाही देता हूँ कि अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई साझीदार नहीं, और मैं गवाही देता हूँ कि मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) उसके बंदे और रसूल हैं। (सहीह मुस्लिम: 234)

اللَّهُمَّ اجْعَلْنِي مِنَ التَّوَّابِينَ وَاجْعَلْنِي مِنَ الْمُتَطَهِّرِينَ

हिंदी उच्चारण: अल्लाहुम्मज-‘अलनी मिनत-तव्वाबीना वज-‘अलनी मिनल-मुततह्हिरीन।

हिंदी तर्जुमा: ऐ अल्लाह! मुझे बहुत तौबा करने वालों में शामिल फ़रमा और मुझे ख़ूब पाक-साफ़ रहने वालों में शामिल फ़रमा। (जामेअ तिर्मिज़ी: 55)

वज़ू तोड़ने वाली चीज़ें (नवाक़िज़-ए-वज़ू)

शरीअत में नवाक़िज़-ए-वज़ू उन बातों को कहते हैं जिनके होने से वज़ू टूट जाता है और दोबारा वज़ू करना ज़रूरी हो जाता है:

  • पेशाब या पाख़ाने के रास्ते से किसी चीज़ का निकलना: हवा (गैस) ख़ारिज होना, पेशाब या पाख़ाना करना।
  • ख़ून या पीप का बहना: जिस्म के किसी भी हिस्से से ख़ून, पीप या ज़र्द पानी का निकलकर ऐसी जगह बह जाना जिसका वज़ू या ग़ुस्ल में धोना वाजिब है।
  • मुंह भर कर उल्टी (क़ै) होना: अगर उल्टी मुंह भरकर हो जिसमें खाना या पित्त निकले तो वज़ू टूट जाता है।
  • टेक लगाकर या लेटकर सो जाना: किसी तकिए, दीवार या ज़मीन पर इस तरह टेक लगाकर सो जाना कि अगर सहारा हटा लिया जाए तो इंसान गिर पड़े।
  • बेहोशी या पागलपन: बेहोश हो जाना, नशा छा जाना या अक़्ल का जाता रहना।
  • नमाज़ में क़हक़हा लगाकर हंसना: बालिग़ इंसान का रुकू और सजदे वाली नमाज़ के दौरान इतनी ज़ोर से हंसना कि पास वाला आवाज़ सुन ले (इससे नमाज़ और वज़ू दोनों टूट जाते हैं)।

वज़ू में पानी की बचत और मकरूहात

इस्लाम में पानी की क़द्र करने और फ़िज़ूलख़र्ची से बचने का सख्त हुक्म दिया गया है। नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया कि अगर तुम बहती हुई नहर के किनारे भी बैठे हो, तब भी वज़ू में ज़रूरत से ज़्यादा पानी खर्च मत करो।

  • ज़रूरत से ज़्यादा पानी बहाना मकरूह है।
  • अंगों को तीन बार से ज़्यादा बिना ज़रूरत धोना मकरूह है।
  • चेहरे पर ज़ोर से पानी थपथपाना मकरूह है।
  • वज़ू के दौरान दुनियावी और फ़िज़ूल बातें करना मकरूह है।
  • गले का मसह करना बिदअत और मकरूह है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. वज़ू में कुल कितने फ़र्ज़ होते हैं?

वज़ू में कुल 4 फ़र्ज़ होते हैं: एक बार पूरा चेहरा धोना, दोनों हाथों को कोहनियों समेत धोना, चौथाई सर का मसह करना, और दोनों पैरों को टखनों समेत धोना। इनमें से कोई एक भी छूट जाए तो वज़ू नहीं होता।

2. क्या वज़ू के दौरान बात करने से वज़ू टूट जाता है?

वज़ू के दौरान बात करने से वज़ू टूटता नहीं है, लेकिन बिना ज़रूरत दुनियावी बातें करना मकरूह है। वज़ू के दौरान ध्यान अल्लाह की तरफ़ और ज़बान पर बिस्मिल्लाह व दुआएं होनी चाहिए।

3. क्या नेल पॉलिश या वैसलीन लगे होने पर वज़ू हो जाता है?

नेल पॉलिश या पेंट जैसी चीज़ें जो नाखूनों पर परत (layer) बना लेती हैं और पानी को खाल तक पहुंचने से रोकती हैं, उनके रहते वज़ू नहीं होता। वज़ू से पहले उन्हें साफ़ करना ज़रूरी है। मेंहदी का सिर्फ़ रंग होता है, इसलिए मेंहदी से वज़ू हो जाता है।

4. क्या एक वज़ू से कई वक़्त की नमाज़ पढ़ सकते हैं?

हाँ, जब तक वज़ू न टूटे, तब तक एक ही वज़ू से जितनी चाहें फ़र्ज़ और नफ़्ल नमाज़ें पढ़ी जा सकती हैं। हालांकि हर नमाज़ के लिए नया वज़ू करना मुस्तहब और ज़्यादा सवाब का काम है।

5. वज़ू के बाद कौन सी दुआ पढ़नी चाहिए?

वज़ू के बाद कलिमा-ए-शहादत (अश्हदु अल-ला इलाहा इल्लल्लाहु…) और ‘अल्लाहुम्मज-‘अलनी मिनत-तव्वाबीना वज-‘अलनी मिनल-मुततह्हिरीन’ पढ़ना सुन्नत है। इससे जन्नत के आठों दरवाज़े खुल जाते हैं।

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लेखक के बारे में

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