दिन भर की पांच फ़र्ज़ नमाज़ों में आख़िरी और बेहद बरकत वाली नमाज़ ईशा की नमाज़ (Isha Ki Namaz) है। रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया कि अगर लोगों को ईशा और फ़ज्र की नमाज़ की फ़ज़ीलत व सवाब का इल्म हो जाए, तो वे घिसटते हुए (घुटनों के बल चलकर) भी मस्जिद में हाज़िर हों (सहीह बुख़ारी: 657)। बहुत से लोग ईशा की नमाज़ पढ़ते वक़्त इस बात को लेकर उलझन में रहते हैं कि ईशा की नमाज़ की नियत कैसे करते हैं (Isha Ki Namaz Ki Niyat Kaise Kare), कुल कितनी रकात होती हैं, और क्या नियत अरबी में बोलना ज़रूरी है?
इस विस्तृत लेख में हम ईशा की कुल 17 रकात (सुन्नत, फ़र्ज़, नफ़्ल और 3 रकात वित्र वाजिब) की नियत हिंदी, रोमन इंग्लिश और अरबी में तफ़सील से सीखेंगे। साथ ही अकेले नमाज़ पढ़ने और इमाम के पीछे जमाअत में नमाज़ अदा करने की सही नियत व तरीक़ा जानेंगे। अगर आप मुकम्मल अरकान सीखना चाहते हैं, तो हमारा विस्तृत गाइड नमाज़ पढ़ने का तरीका स्टेप बाय स्टेप भी देख सकते हैं।
नियत का शरीअत में सही मतलब
नियत दिल के पक्के इरादे का नाम है। जब आप दिल में यह इरादा कर लेते हैं कि मैं आज की ईशा की नमाज़ अल्लाह के वास्ते अदा कर रहा/रही हूँ, तो आपकी नियत हो जाती है। ज़बान से बोलकर नीयत कहना फ़र्ज़ या वाजिब नहीं बल्कि मुस्तहब (बेहतर) है ताकि दिल का इरादा ज़बान से भी ज़ाहिर हो जाए और शैतानी वस्वसे दूर हो सकें।
ईशा की नमाज़ में कुल कितनी रकात होती हैं? (Isha Namaz Rakat)
ईशा की नमाज़ में कुल 17 रकात होती हैं। इन्हें तरतीबवार (सिलसिलेवार) इस तरह अदा किया जाता है:
| क्र.सं. | नमाज़ का प्रकार (Type) | रकात | शरीअत में दर्जा / हुक्म |
|---|---|---|---|
| 1 | सुन्नत (फ़र्ज़ से पहले) | 4 रकात | सुन्नत-ए-ग़ैर मोअक्कदा (पढ़ना सवाब है, छूटने पर गुनाह नहीं) |
| 2 | फ़र्ज़ | 4 रकात | फ़र्ज़-ए-ऐन (सबसे अहम, छोड़ना सख्त हराम व गुनाह) |
| 3 | सुन्नत (फ़र्ज़ के बाद) | 2 रकात | सुन्नत-ए-मोअक्कदा (हुज़ूर ﷺ हमेशा पढ़ते थे, पढ़ना ज़रूरी) |
| 4 | नफ़्ल | 2 रकात | नफ़्ल (अतिरिक्त सवाब के लिए) |
| 5 | वित्र | 3 रकात | वाजिब (पढ़ना लाज़िम है, क़ज़ा वाजिब होती है) |
| 6 | नफ़्ल (वित्र के बाद) | 2 रकात | नफ़्ल (बैठकर पढ़ना भी हदीस से साबित है) |
ज़रूरी नोट: अगर किसी के पास वक़्त कम हो या कोई बीमारी व मजबूरी हो, तो ईशा की कम से कम 9 रकात (4 फ़र्ज़ + 2 सुन्नत मोअक्कदा + 3 वित्र वाजिब) पढ़ना लाज़िमी है।

ईशा की नमाज़ की नियत हिंदी में (Step by Step Niyat)
ईशा की नमाज़ में हर हिस्से की नियत अलग-अलग की जाती है। नीचे हर नमाज़ की साफ़ हिंदी नियत दी गई है जिसे आप दिल में दोहरा सकते हैं:
1. ईशा की 4 रकात सुन्नत की नियत (फ़र्ज़ से पहले)
हिंदी में नियत: “नियत की मैंने 4 रकात नमाज़ सुन्नत, ईशा की, वास्ते अल्लाह तआला के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर।”
Roman English: Niyat ki maine char rakat namaz sunnat, Isha ki, waaste Allah Ta’ala ke, rukh mera Kaaba sharif ki taraf, Allahu Akbar.
2. ईशा की 4 रकात फ़र्ज़ की नियत – अकेले पढ़ने वाले के लिए (मुनफ़रिद)
हिंदी में नियत: “नियत की मैंने 4 रकात नमाज़ फ़र्ज़, ईशा की, वास्ते अल्लाह तआला के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर।”
Roman English: Niyat ki maine char rakat namaz farz, Isha ki, waaste Allah Ta’ala ke, rukh mera Kaaba sharif ki taraf, Allahu Akbar.
3. ईशा की 4 रकात फ़र्ज़ की नियत – इमाम के पीछे (मुक़्तदी)
हिंदी में नियत: “नियत की मैंने 4 रकात नमाज़ फ़र्ज़, ईशा की, वास्ते अल्लाह तआला के, पीछे इस इमाम के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर।”
Roman English: Niyat ki maine char rakat namaz farz, Isha ki, waaste Allah Ta’ala ke, peeche is Imam ke, rukh mera Kaaba sharif ki taraf, Allahu Akbar.
4. ईशा की 2 रकात सुन्नत मोअक्कदा की नियत (फ़र्ज़ के बाद)
हिंदी में नियत: “नियत की मैंने 2 रकात नमाज़ सुन्नत (मोअक्कदा), ईशा की, वास्ते अल्लाह तआला के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर।”
Roman English: Niyat ki maine do rakat namaz sunnat, Isha ki, waaste Allah Ta’ala ke, rukh mera Kaaba sharif ki taraf, Allahu Akbar.
5. ईशा की 2 रकात नफ़्ल की नियत
हिंदी में नियत: “नियत की मैंने 2 रकात नमाज़ नफ़्ल, ईशा की, वास्ते अल्लाह तआला के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर।”
Roman English: Niyat ki maine do rakat namaz nafl, Isha ki, waaste Allah Ta’ala ke, rukh mera Kaaba sharif ki taraf, Allahu Akbar.
6. ईशा की 3 रकात वित्र वाजिब की नियत (Witr Ki Niyat)
हिंदी में नियत: “नियत की मैंने 3 रकात नमाज़ वित्र वाजिब, ईशा की, वास्ते अल्लाह तआला के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर।”
Roman English: Niyat ki maine teen rakat namaz witr wajib, Isha ki, waaste Allah Ta’ala ke, rukh mera Kaaba sharif ki taraf, Allahu Akbar.
7. वित्र के बाद 2 रकात आख़िरी नफ़्ल की नियत
हिंदी में नियत: “नियत की मैंने 2 रकात नमाज़ नफ़्ल, वास्ते अल्लाह तआला के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर।”
ईशा की नमाज़ की नियत अरबी में (Isha Namaz Niyat in Arabic)
जो लोग अरबी में नियत पढ़ना चाहते हैं, उनके लिए एराब (ह़रकात) सहित अरबी अल्फ़ाज़ और उनका हिंदी उच्चारण नीचे दिया गया है:
ईशा के 4 रकात फ़र्ज़ की अरबी नियत
نَوَيْتُ أَنْ أُصَلِّيَ لِلَّهِ تَعَالَى أَرْبَعَ رَكَعَاتِ صَلَاةِ الْعِشَاءِ فَرْضَ اللَّهِ تَعَالَى، مُتَوَجِّهًا إِلَى جِهَةِ الْكَعْبَةِ الشَّرِيفَةِ، اللَّهُ أَكْبَرُ
हिंदी उच्चारण: “नवैतु अन उसल्लिया लिल्लाहि तआला अर्बआ रकाति सलातिल-इशाई फर्दल्लाहि तआला, मुतवज्जिहन इला जिहतिल काबतिश शरीफति, अल्लाहु अकबर।”
तर्जुमा: मैंने नियत की कि अल्लाह तआला के वास्ते चार रकात ईशा की फ़र्ज़ नमाज़ पढूँ, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर।
3 रकात वित्र वाजिब की अरबी नियत
نَوَيْتُ أَنْ أُصَلِّيَ لِلَّهِ تَعَالَى ثَلَاثَ رَكَعَاتِ صَلَاةِ الْوِتْرِ وَاجِبًا لِلَّهِ تَعَالَى، مُتَوَجِّهًا إِلَى جِهَةِ الْكَعْبَةِ الشَّرِيفَةِ، اللَّهُ أَكْبَرُ
हिंदी उच्चारण: “नवैतु अन उसल्लिया लिल्लाहि तआला सलासा रकाति सलातिल-वित्री वाजिबन लिल्लाहि तआला, मुतवज्जिहन इला जिहतिल काबतिश शरीफति, अल्लाहु अकबर।”
तर्जुमा: मैंने नियत की अल्लाह तआला के वास्ते तीन रकात नमाज़ वित्र वाजिब पढ़ने की, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़, अल्लाहु अकबर।
3 रकात वित्र वाजिब और दुआ-ए-क़ुनूत का सही तरीक़ा
ईशा की नमाज़ में वित्र की नमाज़ बेहद ख़ास होती है क्योंकि इसमें तीसरी रकात में दुआ-ए-क़ुनूत (Dua e Qunoot) पढ़ी जाती है। इसका आसान तरीक़ा इस प्रकार है:
- पहली व दूसरी रकात: आम नमाज़ की तरह सूरह फ़ातिहा और कोई सूरह (जैसे सूरह इख़लास या सूरह अल-फ़लक़) पढ़ें। दूसरी रकात के बाद क़ादा में बैठकर सिर्फ़ अत्तहिय्यात (Attahiyat) पढ़ें और तीसरी रकात के लिए खड़े हो जाएं।
- तीसरी रकात में क़िरअत: तीसरी रकात में सूरह फ़ातिहा पढ़ें और उसके साथ कोई दूसरी सूरह (जैसे सूरह नास) मिलाएं।
- तकबीर-ए-क़ुनूत: क़िरअत मुकम्मल करने के बाद रुकूअ में जाने के बजाय ‘अल्लाहु अकबर’ कहते हुए अपने दोनों हाथ कानों तक उठाएं (जैसे नमाज़ शुरू करते वक़्त उठाते हैं), और दोबारा नाफ़ के नीचे हाथ बांध लें।
- दुआ-ए-क़ुनूत पढ़ना: हाथ बांधकर आहिस्ता आवाज़ में दुआ-ए-क़ुनूत पढ़ें: “अल्लाहुम्मा इन्ना नस्तईनुका व नस्तग़फ़िरुका…”
- रुकूअ व सज्दा: दुआ-ए-क़ुनूत मुकम्मल करके अल्लाहु अकबर कहते हुए रुकूअ में जाएं, फिर दो सज्दे करें, क़ादा-ए-अख़ीरा में अत्तहिय्यात, दुरूद शरीफ़ व दुआ-ए-मासूरा पढ़कर दोनों तरफ़ सलाम फेर दें।

अगर दुआ-ए-क़ुनूत याद न हो तो क्या करें?
अगर किसी को दुआ-ए-क़ुनूत याद न हो, तो वह जब तक याद न हो जाए तब तक यह दुआ पढ़ सकता है:
“रब्बना आतिना फ़िद्दुन्या हसनतंव-वफ़िल आख़िरति हसनतंव-वकिना अज़ाबन्नार”
या तीन बार “अल्लाहुम्मग़फ़िर ली” (ऐ अल्लाह मेरी मग़फ़िरत फ़रमा) कह ले, नमाज़ सही हो जाएगी। लेकिन दुआ-ए-क़ुनूत याद करने की पूरी कोशिश करनी चाहिए।
ईशा की नमाज़ का सही वक़्त (Isha Namaz Time)
ईशा की नमाज़ का वक़्त मग़रिब का वक़्त ख़त्म होने पर शुरू होता है, यानी जब मग़रिब की लाली व सफ़ेदी (शफ़क़-ए-अब्यज़) आसमान से ग़ायब हो जाती है। यह वक़्त सुबह सादिक़ (फ़ज्र की आज़ान) होने तक बाक़ी रहता है।
- मुस्तहब व अफ़ज़ल वक़्त: रात के पहले तिहाई हिस्से (रात 10 से 11 बजे तक) में ईशा पढ़ना मुस्तहब है।
- मकरूह वक़्त: बिना किसी शरई उज़्र के आधी रात के बाद तक ईशा की नमाज़ में ताख़ीर (देरी) करना मकरूह-ए-तंजीही है।
- तहज्जुद के साथ वित्र: जो शख़्स रात के आख़िरी हिस्से में तहज्जुद की नमाज़ (Tahajjud Namaz) पढ़ने का पाबंद हो, उसके लिए मुस्तहब है कि वह वित्र की नमाज़ को तहज्जुद के बाद अदा करे।
औरतों (ख़वातीन) के लिए ईशा की नमाज़ के नियम
ख़वातीन के लिए ईशा की नमाज़ की रकात, नियत और दुआ-ए-क़ुनूत बिल्कुल वही है जो मर्दों के लिए है। सिर्फ़ कुछ जिस्मानी हरकतों में शरीअत का पर्दा और फ़र्क़ है:
- हाथ उठाना: औरतें तकबीर-ए-तहरीमा और तकबीर-ए-क़ुनूत के वक़्त अपने हाथ कानों तक नहीं उठाएंगी, बल्कि चादर या दुपट्टे के अंदर से सिर्फ़ कंधों तक उठाएंगी।
- हाथ बांधना: औरतें अपने हाथ नाफ़ के नीचे नहीं बल्कि सीने पर बांधेंगी।
- सज्दा व क़ादा: औरतें सिमटकर सज्दा करेंगी (पेट रानों से मिला रहेगा) और क़ादा में दोनों पांव दाईं तरफ़ निकाल कर ज़मीन पर बैठेंगी (तवर्रुक)।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. ईशा की नमाज़ में कुल कितनी रकात होती हैं?
ईशा की नमाज़ में कुल 17 रकात होती हैं: 4 रकात सुन्नत (ग़ैर-मोअक्कदा), 4 रकात फ़र्ज़, 2 रकात सुन्नत (मोअक्कदा), 2 रकात नफ़्ल, 3 रकात वित्र वाजिब और 2 रकात नफ़्ल।
2. क्या ईशा की नमाज़ की नियत अरबी में बोलना ज़रूरी है?
नहीं, नियत दिल के इरादे का नाम है। आप अपनी मातृभाषा (हिंदी, उर्दू या जो भी ज़बान जानते हों) में दिल से इरादा कर सकते हैं या ज़बान से कह सकते हैं। अरबी में बोलना कोई शर्त या ज़रूरी नहीं है।
3. अगर वित्र में दुआ-ए-क़ुनूत याद न हो तो क्या पढ़ें?
अगर दुआ-ए-क़ुनूत याद न हो तो आप ‘रब्बना आतिना फिद्दुन्या हसनतंव-वफ़िल आख़िरति हसनतंव-वकिना अज़ाबन्नार’ या तीन बार ‘अल्लाहुम्मग़फ़िर ली’ पढ़ सकते हैं।
4. वक़्त कम होने पर ईशा की कम से कम कितनी रकात पढ़ना ज़रूरी है?
अगर वक़्त बहुत कम हो या मजबूरी हो तो कम से कम 9 रकात (4 रकात फ़र्ज़ + 2 रकात सुन्नत मोअक्कदा + 3 रकात वित्र वाजिब) पढ़ना लाज़िम है। फ़र्ज़ और वित्र छोड़ना गुनाह है।
5. ईशा की नमाज़ कब तक पढ़ सकते हैं?
ईशा की नमाज़ का वक़्त सुबह सादिक़ (फ़ज्र की आज़ान होने) तक रहता है। लेकिन आधी रात से पहले-पहले पढ़ लेना मुस्तहब है, बिना वजह देर करना मकरूह है।