तरावीह की नमाज़ (Taraweeh Ki Namaz) रमज़ानुल मुबारक के मुक़द्दस महीने की सबसे अज़ीम और बा-बरकत इबादतों में से एक है। रमज़ान की हर रात ईशा की नमाज़ के बाद तरावीह पढ़ना रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) की सुन्नते मुअक्कदा है। हदीस शरीफ़ में आता है कि नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया: “जिसने रमज़ान की रातों में ईमान और सवाब की नीयत से क़ियाम (नमाज़-ए-तरावीह) किया, उसके पिछले तमाम गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।” (सहीह बुख़ारी व सहीह मुस्लिम)। इस मुकम्मल गाइड में हम तरावीह की नमाज़ की नियत (Taraweeh Ki Namaz Ki Niyat Hindi), अरबी और हिंदी अल्फ़ाज़, 20 रकअत की तरतीब, क़दम-दर-क़दम नमाज़ का तरीका, तरावीह की तस्बीह (दुआ) और महिलाओं के लिए घर पर तरावीह पढ़ने के नियम विस्तार से जानेंगे।
ज़रूरी शरई हुक्म: तरावीह की नमाज़ सुन्नते मुअक्कदा अलल-किफ़ाया (सुन्नत-ए-मुअक्कदा) है। पुरुषों के लिए इसे मस्जिद में बा-जमात अदा करना सुन्नत-ए-किफ़ाया है, जबकि ख्वातीन (महिलाओं) के लिए अपने घरों में तनहा पढ़ना अफ़ज़ल और बाइस-ए-सवाब है। तरावीह हर दो-दो रकअत की नीयत के साथ कुल 20 रकअत पढ़ी जाती है।
तरावीह की नमाज़ की नियत कैसे करें? (Niyat Ka Tarika)
इस्लाम में किसी भी नमाज़ के लिए सबसे पहली बुनियादी शर्त नीयत (Niyat) है। नीयत असल में दिल के पक्के इरादे का नाम है। यदि किसी व्यक्ति के दिल में यह बात साफ़ है कि वह ईशा के वक़्त अल्लाह की रज़ा के लिए तरावीह की दो रकअत सुन्नत नमाज़ अदा कर रहा है, तो उसकी नीयत दुरुस्त हो जाती है। लेकिन दिल के इरादे के साथ ज़बान से नीयत के अल्फ़ाज़ अदा कर लेना मुस्तहब और बेहतर माना गया है ताकि दिल और दिमाग़ पूरी तरह नमाज़ की तरफ़ मुतवज्जा हो सकें।
1. जमात के साथ तरावीह की नियत (इमाम के पीछे)
यदि आप मस्जिद में इमाम के पीछे तरावीह पढ़ रहे हैं, तो हिंदी में नीयत इस प्रकार करें:
तरावीह की नीयत हिंदी में (बा-जमात):
“नीयत की मैंने 2 रकअत नमाज़ तरावीह की, सुन्नत रसूलुल्लाह की, वास्ते अल्लाह तआला के, पीछे इस इमाम के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”
2. अकेले तरावीह की नियत (तनहा / घर पर)
यदि कोई मर्द किसी मजबूरी से मस्जिद न जा सके या घर पर अकेले तरावीह पढ़ रहा हो (तथा सभी महिलाओं के लिए घर पर), तो नीयत इस प्रकार होगी:
तरावीह की नीयत हिंदी में (अकेले / तनहा):
“नीयत की मैंने 2 रकअत नमाज़ तरावीह की, सुन्नत रसूलुल्लाह की, वास्ते अल्लाह तआला के, रुख़ मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”
3. तरावीह की नियत अरबी में (Taraweeh Niyat in Arabic)
जो लोग अरबी ज़बान में नीयत पढ़ना चाहें, उनके लिए अरबी अल्फ़ाज़ और हिंदी उच्चारण नीचे दिया गया है:
نَوَيْتُ أَنْ أُصَلِّيَ لِلّٰهِ تَعَالَى رَكْعَتَيْ صَلَاةِ التَّرَاوِيحِ سُنَّةَ رَسُولِ اللهِ تَعَالَى مُتَوَجِّهًا إِلَى جِهَةِ الْكَعْبَةِ الشَّرِيفَةِ، اللهُ أَكْبَرُ
हिंदी उच्चारण (Transliteration): नवैतु अन उसल्लिया लिल्लाहि तआला रकअतै सलातित तरावीहि सुन्नता रसूलिल्लाहि तआला (मुक़्तदियन बिहाज़ल इमामि) मुतवज्जिहन इला जिहतिल काबतिश शरीफति, अल्लाहु अकबर।
नोट: यदि इमाम के पीछे पढ़ रहे हों, तो कोष्ठक वाले शब्द (मुक़्तदियन बिहाज़ल इमामि) भी शामिल करें।
तरावीह की नमाज़ का मुकम्मल चार्ट (रकात व तरतीब)
अहले सुन्नत वल जमाअत (ख़ासकर चारों इमामों—इमाम अबू हनीफ़ा, इमाम शाफ़ई, इमाम मालिक और इमाम अहमद बिन हम्बल) के नज़दीक रमज़ानुल मुबारक में तरावीह की कुल 20 रकअत पढ़ना सुन्नत है। अमीरुल मोमिनीन हज़रत उमर फ़ारूक़ (रज़ियल्लाहु अन्हु) के दौरे खिलाफ़त में सहाबा-ए-किराम का इज्माअ (सहमति) 20 रकअत तरावीह पर हुआ और आज तक मस्जिदुल हराम (मक्का) और मस्जिदे नबवी (मदीना मुनव्वरा) में 20 रकअत तरावीह ही अदा की जाती है।
ईशा और तरावीह की नमाज़ की मुकम्मल तरतीब नीचे टेबल में स्पष्ट की गई है:
| नमाज़ का नाम | रकअत संख्या | नमाज़ की किस्म | अदा करने का तरीका |
|---|---|---|---|
| ईशा के फ़र्ज़ | 4 रकअत | फ़र्ज़ | बा-जमात अदा करें |
| ईशा की सुन्नत | 2 रकअत | सुन्नत मुअक्कदा | अकेले अदा करें |
| तरावीह की नमाज़ | 20 रकअत | सुन्नत मुअक्कदा | 2-2 रकअत करके 10 सलाम फेरें |
| वित्र नमाज़ | 3 रकअत | वाजिब | दुआ-ए-क़ुनूत के साथ बा-जमात |
| नफ़्ल नमाज़ | 2 रकअत | नफ़्ल | अकेले अदा करें (वैकल्पिक) |
तरावीह की नमाज़ पढ़ने का क़दम-दर-क़दम तरीका (Step-by-Step)
तरावीह की नमाज़ का तरीका आम दो रकअत नमाज़ जैसा ही होता है। हर दो रकअत पर सलाम फेरा जाता है। नीचे दो रकअत तरावीह का चरणबद्ध विवरण दिया गया है:
- तकबीरे तहरीमा: सबसे पहले वुज़ू की हालत में क़िब्ला रुख़ खड़े होकर 2 रकअत तरावीह की नीयत करें। दोनों हाथों को कानों की लौ तक उठाकर “अल्लाहु अकबर” कहें और नाफ़ के नीचे हाथ बाँध लें (दायां हाथ बाएं हाथ पर रखें)।
- सना (सुब्हानकल्लाहुम्मा): हाथ बाँधने के बाद चुपचाप सना पढ़ें: “सुब्हानकल्लाहुम्मा व बिहम्दिका व तबारकस्मुका व तआला जद्दुका व ला इलाहा गैरुक।”
- ताउज़ व तस्मिया: इसके बाद “अऊज़ु बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम” और “बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम” पढ़ें। (यदि इमाम के पीछे हों, तो सना के बाद ख़ामोश रहें और इमाम की क़िराअत सुनें)।
- सूरह फ़ातिहा व सूरह मिलाना: सूरह फ़ातिहा (अल्हम्दु शरीफ़) पढ़ें और उसके बाद क़ुरआन करीम की कोई भी सूरह या कम से कम 3 छोटी आयतें पढ़ें।
- रुकू करना: “अल्लाहु अकबर” कहते हुए रुकू में जाएं। दोनों घुटनों को हाथों से पकड़ें और कम से कम 3 बार “सुब्हाना रब्बियल अज़ीम” कहें।
- क़ौमा (सीधे खड़े होना): “समिअल्लाहु लिमन हमिदह” कहते हुए बिल्कुल सीधे खड़े हो जाएं और कहें “रब्बना लकल हम्द।”
- दो सज्दे: “अल्लाहु अकबर” कहते हुए ज़मीन पर सज्दे में जाएं। पहले घुटने, फिर हाथ, फिर नाक और पेशानी ज़मीन पर रखें। 3 बार “सुब्हाना रब्बियल आला” कहें। फिर बैठकर दूसरा सज्दा भी इसी तरह अदा करें।
- दूसरी रकअत: दूसरे सज्दे से “अल्लाहु अकबर” कहते हुए सीधे दूसरी रकअत के लिए खड़े हो जाएं। दूसरी रकअत में सना नहीं पढ़ी जाती, सीधे बिस्मिल्लाह, सूरह फ़ातिहा और कोई दूसरी सूरह पढ़ी जाएगी।
- क़ादा (बैठक): दूसरी रकअत के दोनों सज्दों के बाद बैठ जाएं (क़ादा-ए-अख़ीरा)। इसमें अत्तहिय्यात (तशह्हुद) पढ़ें, इसके बाद दुरूदे इब्राहीमी पढ़ें, फिर कोई दुआए मासूरा (जैसे: रब्बिजअलनी मुक़ीमस सलाती…) पढ़ें।
- सलाम फेरना: पहले सीधे कंधे की तरफ़ “अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह” कहते हुए चेहरा फेरें, फिर उल्टे कंधे की तरफ़ “अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह” कहकर दो रकअत मुकम्मल करें।
इसी प्रकार दो-दो रकअत करके कुल 10 मर्तबा सलाम फेरा जाता है, जिससे तरावीह की 20 रकअतें पूरी हो जाती हैं।

तरावीह की दुआ / तस्बीह (Taraweeh Ki Tasbih in Hindi & Arabic)
अरबी ज़बान में ‘तरावीह’ का लफ़्ज़ी मायना ‘राहत या आराम देना’ होता है। इसीलिए हर चार रकअत (दो सलाम) मुकम्मल होने के बाद थोड़ी देर बैठना (वक़्फ़ा करना) मुस्तहब है, जिसे तरवीहा (Tarweehah) कहा जाता है। इस वक़्फ़े के दौरान खामोश बैठना, अल्लाह का ज़िक्र करना, दुरूद शरीफ़ पढ़ना या मशहूर तरावीह की तस्बीह (Taraweeh Ki Dua) पढ़ना बेहद बा-बरकत माना गया है।
तरावीह की तस्बीह अरबी में:
سُبْحَانَ ذِي الْمُلْكِ وَالْمَلَكُوتِ، سُبْحَانَ ذِي الْعِزَّةِ وَالْعَظَمَةِ وَالْهَيْبَةِ وَالْقُدْرَةِ وَالْكِبْرِيَاءِ وَالْجَبَرُوتِ، سُبْحَانَ الْمَلِكِ الْحَيِّ الَّذِي لَا يَنَامُ وَلَا يَمُوتُ، سُبُّوحٌ قُدُّوسٌ رَبُّنَا وَرَبُّ الْمَلَائِكَةِ وَالرُّوحِ، لَا إِلٰهَ إِلَّا اللهُ نَسْتَغْفِرُ اللهَ، نَسْأَلُكَ الْجَنَّةَ وَنَعُوذُ بِكَ مِنَ النَّارِ
हिंदी उच्चारण (Transliteration):
सुब्हाना ज़िल मुल्कि वल मलकूत, सुब्हाना ज़िल इज़्ज़ति वल अज़मति वल हयबति वल क़ुदरति वल किबरियाइ वल जबरूत, सुब्हानल मलिकिल हय्यिल लज़ी ला यनामु वला यमूत, सुब्बूहुन क़ुद्दूसुन रब्बुना व रब्बुल मलाइकति वर्रूह, ला इलाहा इल्लल्लाहु नस्तग़फिरुल्लाह, नसअलुकल जन्नता व नऊज़ु बिका मिनन्नार।
हिंदी अनुवाद (Meaning in Hindi):
“पाक है वह (अल्लाह) जो ज़मीन और आसमान की सल्तनत का मालिक है। पाक है वह जो इज़्ज़त, बुज़ुर्गी, दबदबा, क़ुदरत, बड़ाई और ग़लबा रखने वाला है। पाक है वह ज़िंदा बादशाह जिसे न कभी नींद आती है और न कभी मौत। वह बेहद पाक और मुक़द्दस है, हमारा रब और फ़रिश्तों व जिब्रील (अलैहिस्सलाम) का रब। अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, हम अल्लाह से माफ़ी मांगते हैं, ऐ अल्लाह! हम तुझसे जन्नत का सवाल करते हैं और दोज़ख़ की आग से तेरी पनाह चाहते हैं।”
औरतों के लिए घर पर तरावीह की नमाज़ का तरीका
इस्लामी शरीअत में महिलाओं के लिए तरावीह की नमाज़ घर के अंदर तन्हाई में पढ़ना सबसे उत्तम और पसंदीदा अमल है। महिलाओं को तरावीह पढ़ने के लिए निम्नलिखित बातों का ध्यान रखना चाहिए:
- वक़्त: ईशा के 4 फ़र्ज़ और 2 सुन्नत अदा करने के बाद ही तरावीह की नमाज़ शुरू करें।
- सूरह तरावीह का आसान तरीका: यदि पूरा क़ुरआन हिफ़्ज़ न हो, तो क़ुरआन के आख़िरी पारे की 10 छोटी सूरहें (सूरह फ़ील यानी अलम तरह कैफ़ा से लेकर सूरह नास तक) दो बार पढ़कर 20 रकअतें बहुत आसानी से पूरी की जा सकती हैं। पहली 10 रकअतों में एक-एक सूरह पढ़ें और अगली 10 रकअतों में उन्हीं सूरहों को दोबारा दोहरा लें।
- वित्र की नमाज़: 20 रकअत तरावीह मुकम्मल होने के बाद 3 रकअत वित्र की नमाज़ दुआ-ए-क़ुनूत के साथ अदा करें।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क्या तरावीह की नमाज़ में हर 2 रकअत पर अलग से नीयत करनी होगी?
हाँ, चूँकि तरावीह हर दो रकअत पर सलाम फेरकर पढ़ी जाती है, इसलिए हर दो रकअत शुरू करते समय दिल में तरावीह की दो रकअत की नीयत होना ज़रूरी है। ज़बान से भी हर बार नीयत दोहरा लेना बेहतर है।
2. क्या तरावीह की तस्बीह पढ़ना फ़र्ज़ या लाज़िमी है?
नहीं, तरावीह की तस्बीह (सुब्हाना ज़िल मुल्कि…) पढ़ना मुस्तहब है, फ़र्ज़ या वाजिब नहीं। यदि किसी को यह तस्बीह याद न हो, तो वह सुब्हानल्लाह, अल्हम्दुलिल्लाह, अल्लाहु अकबर, तीसरा कलमा या दुरूद शरीफ़ भी पढ़ सकता है। ख़ामोश बैठना भी दुरुस्त है।
3. तरावीह की कुल कितनी रकअतें सुन्नत हैं?
चारों इमामों (हनफ़ी, शाफ़ई, मालिकी, हम्बली) और सहाबा-ए-किराम के इज्माअ के मुताबिक तरावीह की कुल 20 रकअतें सुन्नत-ए-मुअक्कदा हैं। हरम शरीफ़ (मक्का व मदीना) में भी सदियों से 20 रकअत ही पढ़ी जाती रही है।
4. क्या वित्र की नमाज़ तरावीह से पहले पढ़ी जा सकती है?
सुन्नत और अफ़ज़ल तरीका यही है कि वित्र की नमाज़ तरावीह की 20 रकअतें मुकम्मल होने के बाद पढ़ी जाए। हालांकि यदि किसी ने पहले वित्र पढ़ लिया, तो भी नमाज़ हो जाएगी और बाद में तरावीह पढ़ी जा सकती है।
5. अगर किसी दिन तरावीह छूट जाए तो क्या उसकी क़ज़ा होगी?
नहीं, तरावीह की नमाज़ सुन्नत है, इसलिए अगर किसी वजह से छूट जाए तो उसकी कोई क़ज़ा नहीं होती। लेकिन रमज़ान की अज़ीम रात में इस सुन्नत को जानबूझकर छोड़ना बड़े सवाब से महरूम रहने का सबब बनता है।