क़ुरआन मजीद (The Holy Quran / قرآن مجید) अल्लाह तआला की वह मुक़द्दस आसमानी किताब है जो इंसानियत की हिदायत और रहनुमाई के लिए आख़िरी नबी हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (ﷺ) पर नाज़िल फ़रमाई गई। क़ुरआन करीम सिर्फ़ तिलावत की किताब नहीं, बल्कि जीने का मुकम्मल ज़ाब्ता-ए-हयात (Code of Life) है। हर मुसलमान और दीनी तालिब-ए-इल्म के लिए क़ुरआन शरीफ़ के बुनियादी ढांचे, इसकी तक्सीम और आंकड़ों को जानना बेहद ज़रूरी है।
अक्सर लोग इंटरनेट पर सर्च करते हैं कि क़ुरआन शरीफ़ में कितने पारे हैं (Quran me kitne para hai), कुल कितनी सूरह हैं, आयतों और सज्दों की तादाद क्या है, और मक्की व मदनी सूरतों में क्या फ़र्क़ है। इस मुकम्मल और प्रामाणिक गाइड में हमने क़ुरआन करीम के तमाम बुनियादी आदाद व शुमार, 30 पारों के नाम, 14 सज्दों की तफ़सील और अज़ीम फ़ज़ाइल को आसान हिंदी में पेश किया है।
क़ुरआन मजीद के बुनियादी आंकड़े: एक नज़र में (Quick Facts)
1. क़ुरआन शरीफ़ में कितने पारे हैं और इनके नाम क्या हैं? (30 Paras List)
क़ुरआन करीम में कुल 30 पारे होते हैं। अरबी ज़बान में पारे को ‘जुज़’ (Juz / جزء) और फ़ारसी व उर्दू में ‘सिपारा’ (सी = तीस, पारा = हिस्सा) कहा जाता है। क़ुरआन को 30 बराबर हिस्सों में इसलिए बांटा गया ताकि मुसलमान एक माह (ख़ासकर माहे रमज़ान) में रोज़ाना एक पारा तिलावत करके पूरा क़ुरआन आसानी से मुकम्मल कर सकें।
हर पारे का नाम उसके पहले लफ़्ज़ (शुरुआती कलिमे) के नाम पर रखा गया है। नीचे सभी 30 पारों के नंबर और नाम की पूरी सूची दी गई है:
| पारा नं. | पारे का नाम (हिंदी) | अरबी नाम (Arabic) | शामिल सूरह (Surahs Included) |
|---|---|---|---|
| 1 | अलिफ़ लाम मीम | الم | सूरह अल-फ़ातिहा (1) से सूरह अल-बक़रह (141) |
| 2 | सयक़ूल | سَيَقُولُ | सूरह अल-बक़रह (142 – 252) |
| 3 | तिल्कर-रुसुल | تِلْكَ الرُّسُلُ | सूरह अल-बक़रह (253) से सूरह आले इमरान (92) |
| 4 | लन तनालू | لَنْ تَنَالُوا | सूरह आले इमरान (93) से सूरह अन-निसा (23) |
| 5 | वल-मुहसनातु | وَالْمُحْصَنَاتُ | सूरह अन-निसा (24 – 147) |
| 6 | ला युहिब्बुल्लाह | لَا يُحِبُّ اللَّهُ | सूरह अन-निसा (148) से सूरह अल-माइदा (81) |
| 7 | व-इज़ा समिऊ | وَإِذَا سَمِعُوا | सूरह अल-माइदा (82) से सूरह अल-अनआम (110) |
| 8 | वलौ अन्नना | وَلَوْ أَنَّنَا | सूरह अल-अनआम (111) से सूरह अल-आराफ़ (87) |
| 9 | क़ालल-मलउ | قَالَ الْمَلَأُ | सूरह अल-आराफ़ (88) से सूरह अल-अनफ़ाल (40) |
| 10 | वा’लमू | وَاعْلَمُوا | सूरह अल-अनफ़ाल (41) से सूरह अत-तौबा (92) |
| 11 | या’तज़िरून | يَعْتَذِرُونَ | सूरह अत-तौबा (93) से सूरह हूद (5) |
| 12 | वमा मिन दाब्बतिन | وَمَا مِنْ دَابَّةٍ | सूरह हूद (6) से सूरह यूसुफ़ (52) |
| 13 | वमा उबरी-उ | وَمَا أُبَرِّئُ | सूरह यूसुफ़ (53) से सूरह इब्राहीम (52) |
| 14 | रुबमा | رُبَمَا | सूरह अल-हिज्र (1) से सूरह अन-नहल (128) |
| 15 | सुब्हानल्लज़ी | سُبْحَانَ الَّذِي | सूरह अल-इसरा (1) से सूरह अल-कहफ़ (74) |
| 16 | क़ाल अलम | قَالَ أَلَمْ | सूरह अल-कहफ़ (75) से सूरह ता-हा (135) |
| 17 | इक़्तरबा | اقْتَرَبَ | सूरह अल-अंबिया (1) से सूरह अल-हज्ज (78) |
| 18 | क़द अफ़्लहा | قَدْ أَفْلَحَ | सूरह अल-मोमिनून (1) से सूरह अल-फ़ुरक़ान (20) |
| 19 | वक़ालल्लज़ीना | وَقَالَ الَّذِينَ | सूरह अल-फ़ुरक़ान (21) से सूरह अन-नम्ल (55) |
| 20 | अम्मन ख़लक़ा | أَمَّنْ خَلَقَ | सूरह अन-नम्ल (56) से सूरह अल-अनकबूत (45) |
| 21 | उत्लु मा ऊहिया | اتْلُ مَا أُوحِيَ | सूरह अल-अनकबूत (46) से सूरह अल-अहज़ाब (30) |
| 22 | वमय-यक़्नुत | وَمَنْ يَقْنُتْ | सूरह अल-अहज़ाब (31) से सूरह यासीन (27) |
| 23 | वमा लिया | وَمَا لِيَ | सूरह यासीन (28) से सूरह अज़-ज़ुमर (31) |
| 24 | फ़मन अज़लमु | فَمَنْ أَظْلَمُ | सूरह अज़-ज़ुमर (32) से सूरह फ़ुस्स़िलत (46) |
| 25 | इलैहि युरद्दु | إِلَيْهِ يُرَدُّ | सूरह फ़ुस्स़िलत (47) से सूरह अल-जासिया (37) |
| 26 | हा-मीम | حم | सूरह अल-अहक़ाफ़ (1) से सूरह अज़-ज़ारियात (30) |
| 27 | क़ाल फ़मा ख़त्बुकुम | قَالَ فَمَا خَطْبُكُمْ | सूरह अज़-ज़ारियात (31) से सूरह अल-हदीद (29) |
| 28 | क़द समिअल्लाह | قَدْ سَمِعَ اللَّهُ | सूरह अल-मुजादला (1) से सूरह अत्तहरीम (12) |
| 29 | तबारकल्लज़ी | تَبَارَكَ الَّذِي | सूरह अल-मुल्क (1) से सूरह अल-मुरसलात (50) |
| 30 | अम्म (अम्मा पारा) | عَمَّ يَتَسَاءَلُونَ | सूरह अन-नबा (1) से सूरह अन-नास (114) |

2. क़ुरआन करीम में कुल कितनी सूरह हैं? (मक्की व मदनी का फ़र्क़)
क़ुरआन मजीद में कुल 114 सूरह (Chapters) हैं। पहली सूरह ‘सूरह अल-फ़ातिहा’ है और आख़िरी सूरह ‘सूरह अन-नास’ है। नाज़िल होने के मक़ाम और ज़माने के एतबार से इन सूरतों को दो हिस्सों में तक़सीम किया गया है:
- मक्की सूरह (86 सूरह): वह सूरह जो रसूलुल्लाह ﷺ की मदीना मुनव्वरा हिजरत करने से पहले मक्का मुकर्रमा में नाज़िल हुईं। इन सूरतों का मुख्य मौज़ू अक़ीदा-ए-तौहीद, आख़िरत, जन्नत व दोज़ख़ का बयान, अख़लाक़ और पिछले अंबिया-ए-किराम के वाक़यात हैं (जैसे: क़सासुल अंबिया हिंदी में और असहाब-ए-कहफ़ का वाक़या)।
- मदनी सूरह (28 सूरह): वह सूरह जो हिजरत के बाद मदीना मुनव्वरा में नाज़िल हुईं। इनमें इस्लामी शरीअत के अहकाम, नमाज़, रोज़ा, ज़कात, हज, निकाह, मीरास (विरासत), जिहाद और क़ानूनी हुकूक़ व मामलात का तफ़सीली बयान है।
सूरतों से जुड़ी ख़ास मालूमात:
- क़ुरआन की सबसे बड़ी सूरह: सूरह अल-बक़रह (286 आयतें, 40 रुकूअ और तक़रीबन 2.5 पारे)।
- क़ुरआन की सबसे छोटी सूरह: सूरह अल-कौसर (सिर्फ़ 3 आयतें और 10 अल्फ़ाज़)।
- किस सूरह में बिस्मिल्लाह नहीं है: सूरह अत-तौबा (सूरह बराअत) के शुरू में बिस्मिल्लाह नहीं पढ़ी जाती।
- किस सूरह में दो मर्तबा बिस्मिल्लाह आई है: सूरह अन-नम्ल (एक शुरू में और दूसरी आयत 30 में हज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम के ख़त के ज़िक्र के साथ)।
3. क़ुरआन शरीफ़ में कुल कितनी आयतें हैं? (6236 बनाम 6666 की हक़ीक़त)
अवाम में अक्सर यह बात मशहूर है कि क़ुरआन में 6,666 आयतें हैं, लेकिन जब आप मौजूदा छपे हुए मुसहफ़ (क़ुरआन शरीफ़) को खोलकर गिनते हैं तो आयतों की कुल तादाद 6,236 नज़र आती है। इस फ़र्क़ की असल हक़ीक़त क्या है? आइए समझें:
- मुसहफ़ की प्रामाणिक गिनती (कूफ़ी शुमार): हज़रत अली (रज़ियल्लाहु अन्हु) से मनक़ूल रिवायत के मुताबिक़, जिसे इमाम आसिम कूफ़ी ने रिवायत किया (और दुनिया भर के 95% से ज़्यादा मुसहफ़ इसी पर छपते हैं), क़ुरआन में कुल 6,236 आयतें हैं। अगर हर सूरह के शुरू की ‘बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम’ को भी मुस्तक़िल आयत गिना जाए, तो यह तादाद 6,348 हो जाती है।
- 6,666 का शुमार क्यों मशहूर हुआ? क़दीम उलमा और मुफ़स्सिरीन (जैसे अल्लामा ज़मख़शरी और शेख़ सादी) ने क़ुरआन करीम की आयतों को उनके मज़ामीन (विषयों) के ऐतबार से एक तक़रीबी (Round-figure) अंदाज़ा पेश किया था:
1000 आयतें अहकाम (आदेश) • 1000 आयतें वादे (जन्नत व इनाम) • 1000 आयतें वईद (दोज़ख़ की चेतावनी) • 1000 आयतें इबरतनाक मिसालें • 1000 आयतें अंबिया व क़ौमों के क़िस्से • 500 आयतें हलाल व हराम • 100 आयतें तस्बीह व तहलील • 66 आयतें नासिख़ व मन्सूख़ = कुल 6,666।
यानी असल लफ़्ज़ी गिनती 6,236 आयतें ही हैं, और दोनों बातों में कोई तज़ाद (विरोधाभास) नहीं है।
4. क़ुरआन मजीद में कुल कितने सज्दे हैं? (14 सज्दा-ए-तिलावत)
क़ुरआन मजीद की तिलावत करते हुए या सुनते हुए बाज़ ख़ास आयतों पर सज्दा करना वाजिब होता है, जिसे सजदा-ए-तिलावत कहा जाता है। हनफ़ी फ़िक़्ह और अक्सर उम्मत के नज़दीक क़ुरआन करीम में कुल 14 सज्दे हैं।
| सज्दा नं. | सूरह का नाम | पारा नं. | आयत नंबर |
|---|---|---|---|
| 1 | सूरह अल-आराफ़ | पारा 9 | आयत 206 |
| 2 | सूरह अर-रअद | पारा 13 | आयत 15 |
| 3 | सूरह अन-नहल | पारा 14 | आयत 50 |
| 4 | सूरह बनी इसराइल (अल-इसरा) | पारा 15 | आयत 109 |
| 5 | सूरह मरयम | पारा 16 | आयत 58 |
| 6 | सूरह अल-हज्ज (पहला सज्दा) | पारा 17 | आयत 18 |
| 7 | सूरह अल-फ़ुरक़ान | पारा 19 | आयत 60 |
| 8 | सूरह अन-नम्ल | पारा 19 | आयत 26 |
| 9 | सूरह अस-सजदा | पारा 21 | आयत 15 |
| 10 | सूरह साद | पारा 23 | आयत 24 |
| 11 | सूरह फ़ुस्स़िलत (हा-मीम अस-सजदा) | पारा 24 | आयत 38 |
| 12 | सूरह अन-नज्म | पारा 27 | आयत 62 |
| 13 | सूरह अल-इन्शिक़ाक़ | पारा 30 | आयत 21 |
| 14 | सूरह अल-अलक़ | पारा 30 | आयत 19 |

5. क़ुरआन में 7 मंज़िलें और 540 रुकूअ का क्या मतलब है?
क़ुरआन मजीद के पन्नों पर पारों के अलावा ‘मंज़िल’ और ‘रुकूअ’ (ع) के निशानात भी मिलते हैं:
- 7 मंज़िलें (7 Manzils): सहाबा-ए-किराम का मामूल था कि वे एक हफ़्ते (7 दिनों) में क़ुरआन मुकम्मल करते थे। जुमे के दिन से शुरू करके अगले जुमे तक हर दिन एक मंज़िल पढ़ी जाती थी। इसे याद रखने का मशहूर फ़ॉर्मूला ‘फ़मी बिशौक़िन’ (فمي بشوق) है (यानी सूरह फ़ातिहा, माइदा, यूनुस, बनी इसराइल, शुअरा, साफ़्फ़ात, और क़ाफ़ से शुरू होने वाली मंज़िलें)।
- 540 रुकूअ (Ruku): नमाज़ में एक रकात के अंदर तिलावत के लिए जितनी आयतें मुनासिब होती हैं (जिसके बाद रुकूअ किया जा सके), उसे एक ‘रुकूअ’ कहा जाता है। तरावीह की नमाज़ में 27 रातों में 20-20 रकात (कुल 540 रकात) में हर रकात में एक रुकूअ पढ़कर पूरा क़ुरआन आसानी से मुकम्मल किया जा सकता है।
6. क़ुरआन करीम की तिलावत की अज़ीम फ़ज़ीलत (हदीस के हवाले से)
क़ुरआन मजीद की तिलावत करना अल्लाह तआला के सबसे महबूब आमाल में से है। नबी-ए-करीम ﷺ ने फ़रमाया:
हर हर्फ़ पर 10 नेकियों का सवाब:
हज़रत अब्दुल्लाह बिन मसऊद (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह ﷺ ने फ़रमाया: “जिसने अल्लाह की किताब का एक हर्फ़ पढ़ा, उसके लिए एक नेकी है और एक नेकी दस नेकियों के बराबर होती है। मैं यह नहीं कहता कि ‘अलिफ़-लाम-मीम’ एक हर्फ़ है, बल्कि अलिफ़ एक हर्फ़ है, लाम एक हर्फ़ है और मीम एक हर्फ़ है।” (जामिअ तिर्मिज़ी: 2910)
इसके अलावा सहीह मुस्लिम में फ़रमाया गया कि क़यामत के दिन क़ुरआन अपने पढ़ने वालों के लिए सिफ़ारिश (शफ़ाअत) बनकर सामने आएगा। हर मुसलमान को चाहिए कि वह रोज़ाना क़ुरआन पढ़ने का मामूल बनाए और नमाज़ व दुआओं को दुरुस्त रखे (देखें: दुरुद-ए-इब्राहिमी हिंदी में और नमाज़ पढ़ने का तरीक़ा)।
क़ुरआन व हदीस से जुड़े अन्य अहम लेख
इस्लामी तारीख़, हदीस और क़ुरआनी वाक़यात की मज़ीद मालूमात के लिए हमारे ये मजामीन पढ़ें:
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. क़ुरआन शरीफ़ में कुल कितने पारे होते हैं?
क़ुरआन करीम में कुल 30 पारे (Juz / सिपारे) होते हैं। पहला पारा ‘अलिफ़ लाम मीम’ और 30वां पारा ‘अम्म’ (अम्मा पारा) है।
2. क़ुरआन करीम में कुल कितनी सूरह हैं और मक्की व मदनी कितनी हैं?
क़ुरआन मजीद में कुल 114 सूरह हैं। इनमें से 86 सूरह मक्की हैं (जो हिजरत से पहले मक्का में नाज़िल हुईं) और 28 सूरह मदनी हैं (जो हिजरत के बाद मदीना में नाज़िल हुईं)।
3. क़ुरआन शरीफ़ में कुल कितनी आयतें हैं: 6236 या 6666?
मुसहफ़ में असल आयतों की गिनती 6,236 है (कूफ़ी रिवायत के मुताबिक़)। 6,666 का आंकड़ा उलमा द्वारा मौज़ूआत (अहकाम, वादे, वईद, मिसालें आदि) के आधार पर दिया गया एक तक़रीबी अंदाज़ा है।
4. क़ुरआन मजीद में कुल कितने सज्दे हैं?
क़ुरआन करीम में कुल 14 सज्दा-ए-तिलावत हैं। इन आयतों को पढ़ने या सुनने पर एक सज्दा करना वाजिब होता है।
5. क़ुरआन की सबसे बड़ी और सबसे छोटी सूरह कौन सी है?
क़ुरआन की सबसे बड़ी सूरह ‘सूरह अल-बक़रह’ है जिसमें 286 आयतें और 40 रुकूअ हैं। जबकि सबसे छोटी सूरह ‘सूरह अल-कौसर’ है जिसमें सिर्फ़ 3 आयतें हैं।
6. क़ुरआन शरीफ़ कितने सालों में मुकम्मल नाज़िल हुआ?
क़ुरआन करीम तक़रीबन 22 साल 5 महीने और 14 दिन (मशहूर रिवायत में 23 साल) की मुद्दत में हालात और ज़रूरतों के मुताबिक़ थोड़ा-थोड़ा करके नाज़िल हुआ।