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दुआ ए कुनूत हिंदी में तर्जुमा सहित | Dua E Qunoot In Hindi (अरबी मतन, वितर में पढ़ने का तरीका व फ़ज़ीलत)

By Mariya Ansari •

इस्लाम में इशा की नमाज़ के बाद अदा की जाने वाली 3 रकात नमाज़-ए-वितर को ख़ास मक़ाम हासिल है, क्योंकि वितर की नमाज़ वाजिब है। इस नमाज़ की तीसरी रकात में रुकूअ से पहले एक ख़ास और पुरअसर दुआ पढ़ी जाती है जिसे दुआ ए कुनूत (Dua E Qunoot In Hindi) कहा जाता है। अरबी ज़बान में ‘क़ुनूत’ (قنوت) का लफ़्ज़ी मायना अल्लाह तआला के हुज़ूर आजिज़ होना, फ़रमांबरदारी इख़्तियार करना, ख़ामोशी से दुआ मांगना और इबादत में खड़े रहना है।

अक्सर नए नमाज़ी या वे लोग जिन्हें हाल ही में नमाज़ का शौक़ हुआ है, दुआ-ए-क़ुनूत के लंबे अरबी अल्फ़ाज़ को याद करने में दुश्वारी महसूस करते हैं। कुछ लोग यह नहीं जानते कि अगर वितर में दुआ-ए-क़ुनूत भूल जाएं तो क्या नमाज़ टूट जाती है, या जब तक दुआ याद न हो तब तक कौन-सी आसान दुआ पढ़नी चाहिए। इस मुकम्मल गाइड में हम दुआ ए कुनूत का मुकम्मल अरबी मतन (Arabic Text), आसान हिंदी उच्चारण, लफ़्ज़-ब-लफ़्ज़ हिंदी तर्जुमा (Meaning In Hindi), वितर में इसे पढ़ने का सुन्नत तरीक़ा और शरई मसाइल जानेंगे।

दुआ-ए-क़ुनूत की शरई हैसियत: हनफ़ी फ़िक़्ह के मुताबिक नमाज़-ए-वितर में दुआ-ए-क़ुनूत पढ़ना वाजिब है। अगर कोई शख़्स भूलकर इसे छोड़ दे और रुकूअ में चला जाए, तो उस पर नमाज़ के आख़िर में सज्दा-ए-सहव करना लाज़िम होता है।

दुआ ए कुनूत अरबी मतन (Arabic Text)

दुआ-ए-क़ुनूत का मुकम्मल अरबी मतन सहीह एअराब (ज़ेर, ज़बर, पेश) के साथ यहाँ दिया गया है:

اللّٰهُمَّ إِنَّا نَسْتَعِينُكَ وَنَسْتَغْفِرُكَ وَنُؤْمِنُ بِكَ وَنَتَوَكَّلُ عَلَيْكَ وَنُثْنِي عَلَيْكَ الْخَيْرَ، وَنَشْكُرُكَ وَلَا نَكْفُرُكَ، وَنَخْلَعُ وَنَتْرُكُ مَنْ يَفْجُرُكَ، اللّٰهُمَّ إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَلَكَ نُصَلِّي وَنَسْجُدُ، وَإِلَيْكَ نَسْعَىٰ وَنَحْفِدُ، وَنَرْجُو رَحْمَتَكَ وَنَخْشَىٰ عَذَابَكَ، إِنَّ عَذَابَكَ بِالْكُفَّارِ مُلْحِقٌ

दुआ ए कुनूत हिंदी उच्चारण (Hindi Pronunciation)

जो लोग अरबी पढ़ना नहीं जानते, वे इसे हिंदी हिज्जे की मदद से सहीह तलफ़्फ़ुज़ के साथ याद कर सकते हैं:

“अल्लाहुम्मा इन्ना नस्तई’नुका व नस्तग़्फ़िरुका व नु’मिनु बिका व नतवक्कलू अलैका व नुस्नी अलैकल खैरा, व नश्कुरुका व ला नकफुरुका, व नख़्लउ व नत्रुकु मंय-यफ़्जुरुका। अल्लाहुम्मा इय्याका ना’बुदु व लका नुसल्ली व नस्जुदु, व इलैका नस’आ व नह्फ़िदु, व नर्जू रहमतका व नख़्शा अज़ाबका, इन्ना अज़ाबका बिल-कुफ़्फ़ारि मुल्हिक़।”

दुआ ए कुनूत का मुकम्मल हिंदी तर्जुमा (Meaning In Hindi)

“ऐ अल्लाह! हम तुझ ही से मदद मांगते हैं और तुझ ही से बख़्शिश चाहते हैं, और तुझ पर ईमान लाते हैं, और तुझ ही पर भरोसा रखते हैं, और तेरी बहुत अच्छी तारीफ़ करते हैं, और तेरा शुक्र अदा करते हैं और तेरी नाशुक्री (कुफ़्र) नहीं करते, और हम छोड़ते हैं और अलग करते हैं हर उस शख़्स को जो तेरी नाफ़रमानी करे।

ऐ अल्लाह! हम तेरी ही इबादत करते हैं और तेरे ही लिए नमाज़ पढ़ते और सज्दा करते हैं, और तेरी ही तरफ़ दौड़ते और ख़िदमत के लिए हाज़िर होते हैं, और हम तेरी रहमत के उम्मीदवार हैं और तेरे अज़ाब से डरते हैं, बेशक तेरा अज़ाब काफ़िरों को ही पहुँचने वाला है।”

दुआ ए कुनूत अरबी टेक्स्ट और हिंदी तर्जुमा - Dua E Qunoot Arbi Aur Hindi Tarjuma
दुआ ए कुनूत का मुकम्मल अरबी मतन, हिंदी उच्चारण और आसान तर्जुमा

नमाज़-ए-वितर में दुआ-ए-क़ुनूत पढ़ने का सही तरीक़ा

वितर की तीन रकातों में दुआ-ए-क़ुनूत पढ़ने का मुकम्मल शरई तरीक़ा नीचे तरतीबवार दिया गया है:

  1. पहली 2 रकात: पहली दो रकात आम नमाज़ की तरह अदा करें। दूसरी रकात के सज्दों के बाद क़ाएदा में बैठकर सिर्फ़ अत्तहियात पढ़ें और तीसरी रकात के लिए खड़े हो जाएं।
  2. तीसरी रकात की क़िरअत: खड़े होकर बिस्मिल्लाह पढ़कर सूरह फ़ातिहा पढ़ें, और उसके बाद कोई भी सूरह (जैसे सूरह इख़्लास) पढ़ें।
  3. क़ुनूत की तकबीर (हाथ उठाना): सूरह मुकम्मल करने के बाद रुकूअ में जाने के बजाय सीधे खड़े रहकर दोनों हाथ कानों तक (औरतें सीने तक) उठाएं और “अल्लाहु अकबर” कहें।
  4. हाथ बांधकर क़ुनूत पढ़ना: तकबीर कहकर हाथ दोबारा नाफ़ के नीचे बांध लें और आहिस्ता आवाज़ में दुआ-ए-क़ुनूत पढ़ें।
  5. रुकूअ और सज्दा: दुआ-ए-क़ुनूत मुकम्मल करने के बाद “अल्लाहु अकबर” कहकर रुकूअ में जाएं और आम नमाज़ की तरह रुकूअ व दोनों सज्दे मुकम्मल करें।
  6. आख़िरी क़ाएदा: आख़िरी क़ाएदा में बैठकर अत्तहियात, दुरूद-ए-इब्राहिमी और दुआ-ए-मासूरा पढ़कर दोनों तरफ़ सलाम फेर लें।

अगर दुआ ए कुनूत याद न हो तो क्या पढ़ें?

जब तक आपको पूरी दुआ-ए-क़ुनूत याद न हो, तब तक आप वितर की तीसरी रकात में तकबीर के बाद इनमें से कोई भी आसान दुआ पढ़ सकते हैं:

बदल (Alternative Dua) हिंदी उच्चारण हिंदी तर्जुमा
क़ुरआनी दुआ (अफ़ज़ल) “रब्बना आतिना फ़िद्-दुनिया ह-सनतंव-वफ़िल आख़िरति ह-सनतंव-वक़िना अज़ाबन्-नार।” ऐ हमारे रब! हमें दुनिया में भलाई अता फ़रमा और आख़िरत में भलाई अता फ़रमा और हमें आग के अज़ाब से बचा।
आसान दुआ (3 बार) “अल्लाहुम्मग़फ़िर ली” (3 मर्तबा) ऐ अल्लाह! मेरी मग़फ़िरत फ़रमा (मुझे बख़्श दे)।
तीसरा कलमा या इस्तिग़फ़ार “या रब्बी” (3 बार) या “अस्तग़फ़िरुल्लाह” अल्लाह तआला की हम्द व बख़्शिश की तलब।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. अगर नमाज़ में दुआ ए कुनूत भूल जाएं तो क्या करें?

अगर तीसरी रकात में दुआ-ए-क़ुनूत पढ़ना भूलकर सीधे रुकूअ में चले जाएं, तो दोबारा क़याम में न लौटें बल्कि नमाज़ जारी रखें और आख़िरी क़ाएदा में अत्तहियात के बाद दायें तरफ़ सलाम फेर कर दो ‘सज्दा-ए-सहव’ कर लें। इससे नमाज़ मुकम्मल हो जाएगी।

2. क्या दुआ ए कुनूत सिर्फ वितर की नमाज़ में पढ़ी जाती है?

आम दिनों में दुआ-ए-क़ुनूत सिर्फ़ वितर की नमाज़ में पढ़ी जाती है। अलबत्ता मुसलमानों पर किसी बड़ी आफ़त या मुसीबत (नाज़िला) के वक़्त फ़ज्र की नमाज़ में भी ‘क़ुनूत-ए-नाज़िला’ पढ़ी जाती है।

3. क्या दुआ ए कुनूत ज़ोर से (जहरन) पढ़ी जाती है या आहिस्ता?

दुआ-ए-क़ुनूत को आहिस्ता (सिर्रन) पढ़ना सुन्नत है, चाहे आप अकेले नमाज़ पढ़ रहे हों या इमाम के पीछे।

4. क्या औरतें भी इसी तरह दुआ ए कुनूत पढ़ेंगी?

हाँ, औरतें भी तीसरी रकात में सूरह के बाद अल्लाहु अकबर कहकर हाथ सीने तक उठाएंगी और हाथ बांधकर आहिस्ता आवाज़ में दुआ-ए-क़ुनूत पढ़ेंगी।

Mariya Ansari
लेखक के बारे में

Mariya Ansari

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