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घर में दाखिल होने की दुआ | Ghar Mein Dakhil Hone Ki Dua (अरबी, हिंदी उच्चारण, तर्जुमा और सुन्नत आदाब)

By Mariya Ansari •

इस्लाम एक मुकम्मल जीवन शैली (दीन) है जो इंसान को ज़िंदगी के हर मोड़ पर अल्लाह तआला को याद रखने और उसकी रहमत हासिल करने का तरीका सिखाता है। घर इंसान के लिए अमन, सुकून और पनाह की सबसे अहम जगह होती है। जब कोई मोमिन अपने घर की दहलीज पर कदम रखता है, तो इस्लाम उसे कुछ खास आदाब और मसनून दुआएं पढ़ने का हुक्म देता है। घर में दाखिल होने की दुआ (Ghar Mein Dakhil Hone Ki Dua) पढ़ने से न केवल घर में अल्लाह की बरकत और रहमत नाज़िल होती है, बल्कि शैतान और बुरी ताकतों का घर में दखल पूरी तरह बंद हो जाता है।

इस विस्तृत लेख में हम घर में दाखिल होने की सहीह हदीस से साबित मसनून दुआ, उसका अरबी मतन (Text), हिंदी उच्चारण (Transliteration), हिंदी तर्जुमा, नए घर में दाखिल होने की दुआ और सुन्नत के मुताबिक घर में प्रवेश करने के तमाम जरूरी आदाब को विस्तार से जानेंगे।

घर में दाखिल होने की दुआ (Ghar Mein Dakhil Hone Ki Dua)

हज़रत अबू मालिक अशअरी रज़ियल्लाहु अन्हु से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि जब कोई आदमी अपने घर में दाखिल हो, तो उसे यह दुआ पढ़नी चाहिए:

اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَ الْمَوْلِجِ وَخَيْرَ الْمَخْرَجِ، بِسْمِ اللَّهِ وَلَجْنَا، وَبِسْمِ اللَّهِ خَرَجْنَا، وَعَلَى اللَّهِ رَبِّنَا تَوَكَّلْنَا

हिंदी उच्चारण (Transliteration):

“अल्लाहुम्मा इन्नी असअलोका खैरल मौलिजि व खैरल मखरजि, बिस्मिल्लाहि वलजना, व बिस्मिल्लाहि खरजना, व अला अल्लाहि रब्बिना तवक्कलना।”

हिंदी तर्जुमा (Meaning in Hindi):

“ऐ अल्लाह! मैं तुझसे घर में दाखिल होने की भलाई और घर से बाहर निकलने की भलाई मांगता हूँ। हम अल्लाह के नाम के साथ दाखिल हुए और अल्लाह ही के नाम के साथ निकले, और अपने रब अल्लाह पर हमने भरोसा किया।”

हवाला संदर्भ: सुनन अबू दाऊद (हदीस संख्या: 5096)

दुआ मुकम्मल करने के बाद सुन्नत यह है कि इंसान अपने घर के अहल-ओ-अयाल (परिवार के सदस्यों) को सलाम करे: “अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू”।

घर में दाखिल होते समय बिस्मिल्लाह और सलाम की अहमियत (हदीस)

सहीह मुस्लिम में हज़रत जाबिर बिन अब्दुल्लाह रज़ियल्लाहु अन्हु से एक बहुत ही मशहूर और दिल को झकझोर देने वाली हदीस मरवी है। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया:

“जब कोई आदमी अपने घर में दाखिल होते वक्त और खाना खाते वक्त अल्लाह का नाम लेता है (यानी बिस्मिल्लाह पढ़ता है), तो शैतान अपने साथियों से कहता है: ‘यहाँ तुम्हारे लिए न तो रात गुज़ारने की जगह है और न रात का खाना।’ लेकिन जब वह दाखिल होते वक्त अल्लाह का नाम नहीं लेता, तो शैतान कहता है: ‘तुम्हें रात गुज़ारने का ठिकाना मिल गया।’ और जब वह खाने पर भी अल्लाह का नाम नहीं लेता, तो शैतान कहता है: ‘तुम्हें रात गुज़ारने का ठिकाना भी मिल गया और रात का खाना भी मिल गया।'”

हवाला: सहीह मुस्लिम (हदीस संख्या: 2018)

इस हदीस से साफ मालूम होता है कि सिर्फ बिस्मिल्लाह और दुआ पढ़ने की बरकत से इंसान का घर शैतानी असरत, नहूसत और रात की परेशानियों से महफूज़ हो जाता है।

घर में बरकत, सुकून और रहमत की दुआ - Ghar Me Barkat Ki Dua
मसनून दुआ और सुन्नत आदाब पर अमल करने से घर में अमन, सुकून और बरकत बनी रहती है

घर में दाखिल होने के 6 मुख्य सुन्नत आदाब

नबी-ए-करीम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की सुन्नत पर अमल करना हर मुसलमान के लिए दोनों जहान में कामयाबी का ज़रिया है। घर में दाखिल होते वक्त निम्नलिखित 6 सुन्नत आदाब का ध्यान रखना चाहिए:

  1. दायां पैर (Right Foot) पहले अंदर रखें: प्यारे नबी ﷺ हर पाकीज़ा और पसंदीदा काम की शुरुआत दाएं जानिब से फ़रमाते थे। इसलिए घर की चौखट पार करते समय पहले अपना दायां पैर अंदर रखें।
  2. बिस्मिल्लाह शरीफ पढ़ें: घर के दरवाजे पर कदम रखते ही “बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम” कहें ताकि शैतान बाहर ही रुक जाए।
  3. घर में दाखिल होने की मसनून दुआ पढ़ें: “अल्लाहुम्मा इन्नी असअलोका खैरल मौलिजि…” दुआ का विर्द करें।
  4. घर वालों को सलाम करें: घर में प्रवेश करते ही बुलंद आवाज़ में सलाम कहें। कुरआन मजीद में अल्लाह तआला का फ़रमान है: “जब तुम घरों में दाखिल हो, तो अपने लोगों को सलाम किया करो, जो अल्लाह की तरफ से मुबारक़ और पाकीज़ा दुआ है।” (सूरह अन-नूर, आयत 61).
  5. अगर घर में कोई न हो तो भी सलाम करें: यदि घर बिल्कुल खाली हो, तो सुन्नत तरीका यह है कि आप कहें: “अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस-सालिहीन” (सलामती हो हम पर और अल्लाह के नेक बंदों पर)।
  6. मिस्वाक करना: उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा सिद्दीका रज़ियल्लाहु अन्हा से पूछा गया कि हुज़ूर ﷺ जब घर में तशरीफ़ लाते तो सबसे पहले क्या करते थे? उन्होंने फ़रमाया: “सबसे पहले मिस्वाक फ़रमाते थे।” (सहीह मुस्लिम: 253).

नए घर में दाखिल होने की दुआ (Naye Ghar Mein Dakhil Hone Ki Dua)

जब कोई शख्स नया मकान खरीदता है या नए किराए के मकान में शिफ्ट होता है, तो उसे चाहिए कि वह अल्लाह तआला का शुक्र अदा करे और नज़र-ए-बद व शर्र से बचने की मसनून दुआएं पढ़े:

مَا شَاءَ اللَّهُ لَا قُوَّةَ إِلَّا بِاللَّهِ

हिंदी उच्चारण:

“मा शा अल्लाहु ला कुव्वता इल्ला बिल्लाह”

हिंदी तर्जुमा:

“जो अल्लाह चाहे वही होता है, अल्लाह की मदद के बगैर किसी के पास कोई ताकत नहीं।”

संदर्भ: सूरह अल-कहफ़, आयत 39

इसके साथ ही किसी भी नए मुकाम या नए घर में ठहरते वक्त नबी करीम ﷺ की सिखाई हुई यह हिफाज़त की दुआ ज़रूर पढ़ें:

أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ

उच्चारण: “अऊज़ु बिकलिमातिल्लाहित-ताम्माति मिन शर्रि मा खलक”

तर्जुमा: “मैं अल्लाह के तमाम कामिल कलिमात के ज़रिये उसकी पैदा की हुई हर चीज़ की बुराई से पनाह मांगता हूँ।” (सहीह मुस्लिम: 2708).

नए घर में सूरह अल-बक़रह की तिलावत की सुन्नत

नए घर में जाने के बाद सबसे अफजल अमल सूरह अल-बक़रह की तिलावत करना है। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया: “अपने घरों को क़ब्रिस्तान न बनाओ। बेशक शैतान उस घर से भाग जाता है जिसमें सूरह अल-बक़रह की तिलावत की जाती है।” (सहीह मुस्लिम: 780). इसलिए नए घर में कदम रखने पर सबसे पहले कुरआन मजीद की तिलावत और नफ़ल नमाज़ अदा करके अल्लाह की मदद तलब करनी चाहिए।

संबंधित मसनून दुआएं भी पढ़ें:

घर में दाखिल होने की दुआ पढ़ने के फायदे और फज़ीलत

रोज़ाना घर में दाखिल होते वक्त इस मसनून दुआ और सुन्नत आदाब को अपनाने से जीवन में कई रूहानी और दुनियावी फायदे हासिल होते हैं:

  • शैतान और जिन्नात से सुरक्षा: बिस्मिल्लाह और दुआ पढ़ने वाले घर में शैतान रात नहीं गुज़ार सकता और बेबस होकर लौट जाता है।
  • घर में रिज़्क और बरकत: जब घर में सलाम और अल्लाह का ज़िक्र आम होता है, तो रिज़्क की तंगी दूर होती है और बरकत नाज़िल होती है।
  • पारिवारिक सुख और शांति: जिस घर में दाखिल होते ही सलाम किया जाता है, वहाँ आपसी मुहब्बत, इत्तेफ़ाक और सुकून का माहौल बनता है तथा बेवजह के घरेलू झगड़े खत्म होते हैं।
  • अल्लाह का संरक्षण (हिफाज़त): दुआ के अल्फाज़ “व अला अल्लाहि रब्बिना तवक्कलना” बंदे को हर बुरी नज़र, चोरी और नुकसान से अल्लाह की पनाह में ले आते हैं।
  • सुन्नत पर अमल का सवाब: हर बार घर में कदम रखते समय सुन्नत पर अमल करने से नेकियों का ज़खीरा बढ़ता है।

घर से संबंधित प्रमुख दुआओं की तालिका

अवसर (मौका) दुआ (संक्षिप्त रूप) मुख्य लाभ / संदर्भ
घर में दाखिल होते समय अल्लाहुम्मा इन्नी असअलोका खैरल मौलिजि… शैतान का प्रवेश रुकता है, खैर व बरकत (अबू दाऊद: 5096)
घर से निकलते समय बिस्मिल्लाहि तवक्कल्तु अलल्लाहि ला हवला… रास्ते के खतरों और शैतान से हिफाज़त (तिर्मिज़ी: 3426)
नए मकान में प्रवेश मा शा अल्लाहु ला कुव्वता इल्ला बिल्लाह नज़र-ए-बद से बचाव (सूरह कहफ़: 39)
नुकसान व शर्र से पनाह अऊज़ु बिकलिमातिल्लाहित-ताम्माति… मखलूक के हर शर्र से मुकम्मल हिफाज़त (मुस्लिम: 2708)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. घर में दाखिल होते समय कौन सा पैर पहले रखना चाहिए?

घर में दाखिल होते समय हमेशा अपना दायां पैर (Right Foot) पहले अंदर रखना सुन्नत है। रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम तमाम पाकीज़ा और सम्मानित कामों में दाईं तरफ को तरजीह देते थे।

2. अगर घर बिल्कुल खाली हो तो क्या फिर भी सलाम करना जरूरी है?

हाँ, यदि घर में कोई भी इंसान मौजूद न हो, तब भी सलाम करना मुस्तहब और सुन्नत है। ऐसी स्थिति में यह कहें: “अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस-सालिहीन” (सलामती हो हम पर और अल्लाह के नेक बंदों पर)।

3. अगर घर में दाखिल होने की पूरी दुआ याद न हो तो क्या करें?

अगर पूरी मसनून दुआ याद न हो, तो कम से कम “बिस्मिल्लाह” ज़रूर कहें और घर वालों को “अस्सलामु अलैकुम” कहें। सहीह मुस्लिम की हदीस के मुताबिक सिर्फ बिस्मिल्लाह कहने से भी शैतान का प्रवेश घर में रुक जाता है। बाद में मसनून दुआ भी याद कर लें।

4. नए घर में शिफ्ट होते समय कौन सी सूरह पढ़नी चाहिए?

नए घर में शिफ्ट होते समय सूरह अल-बक़रह की तिलावत करना सबसे अफजल है। हदीस (सहीह मुस्लिम: 780) में आया है कि जिस घर में सूरह अल-बक़रह पढ़ी जाती है, शैतान उस घर से भाग जाता है। इसके अलावा 2 रकात नफ़ल शुक्राना नमाज़ भी अदा करनी चाहिए।

5. घर में दाखिल होने की दुआ और घर से निकलने की दुआ में क्या अंतर है?

घर में दाखिल होते समय “अल्लाहुम्मा इन्नी असअलोका खैरल मौलिजि…” पढ़ी जाती है ताकि घर में बरकत आए और शैतान दूर रहे। जबकि घर से बाहर निकलते समय “बिस्मिल्लाहि तवक्कल्तु अलल्लाहि…” पढ़ी जाती है ताकि बाहर के रास्तों और हादसों से हिफाज़त रहे। दोनों दुआएं एक दूसरे की पूरक हैं।

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