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किन चीज़ों से रोज़ा टूटता है और किनसे नहीं | Roza Todne Wali Cheez in Hindi (रोज़े के मुकम्मल मसाइल)

By Mariya Ansari •

माह-ए-रमज़ान में रोज़ा रखना इस्लाम के बुनियादी 5 अरकान (स्तंभों) में से एक फ़र्ज़ इबादत है। रोज़ा सुबह सादिक़ से लेकर ग़ुरूब-ए-आफ़ताब (सूरज डूबने) तक सिर्फ़ भूख-प्यास बर्दाश्त करने का नाम नहीं है, बल्कि यह तमाम बुराइयों से बचने और नफ़्स पर क़ाबू पाने की रूहानी तरबियत है। रोज़े की हालत में मुसलमानों के ज़हन में रोज़मर्रा की ज़िंदगी को लेकर कई अहम सवाल और संशय पैदा होते हैं—जैसे इंजेक्शन लगवाना, आंख में ड्रॉप डालना, थूक निगलना, मिस्वाक करना या भूलकर कुछ खा लेना। इंटरनेट पर लाखों लोग Roza Todne Wali Cheez in Hindi और किन चीज़ों से रोज़ा टूटता है और किनसे नहीं सर्च करते हैं। इस मुकम्मल और विस्तृत गाइड में आप क़ुरआन व सुन्नत और हनफ़ी फ़िक़्ह के मुताबिक़ रोज़े के तमाम मसाइल, टूटने की वजहें, मकरूहात, और क़ज़ा व कफ़्फ़ारे के नियम आसान हिंदी में जानेंगे।

हदीस-ए-रसूल: हज़रत अबू हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया: “अगर कोई शख़्स रोज़े की हालत में भूल गया और उसने कुछ खा या पी लिया, तो वह अपना रोज़ा पूरा करे; क्योंकि उसे अल्लाह ने खिलाया और पिलाया है।” (सहीह बुख़ारी: 1933 / सहीह मुस्लिम: 1155)

दैनिक कार्य / स्थिति (Action) क्या रोज़ा टूटता है? शरई हुक्म व कैफियत (Ruling)
भूलकर खा या पी लेना नहीं टूटता याद आते ही फ़ौरन रुक जाएं और कुल्ली कर लें, रोज़ा मुकम्मल रहेगा
इंजेक्शन / वैक्सीन / इंसुलिन लेना नहीं टूटता नस (Intravenous) या गोश्त (Intramuscular) में इलाज के लिए दवा लेना जाइज़ है
आंख में सूरमा या ड्रॉप डालना नहीं टूटता चाहे हलक़ में दवा का ज़ायक़ा महसूस हो, रोज़े पर कोई असर नहीं पड़ता
कान में ड्रॉप डालना (अगर पर्दा सही हो) नहीं टूटता आधुनिक मेडिकल व फ़िक़्ही तहक़ीक़ के अनुसार कान से पेट का सीधा रास्ता नहीं है
नाक में ड्रॉप या दवा डालना टूट जाता है अगर दवा हलक़ से नीचे पेट या दिमाग़ तक उतर जाए तो रोज़ा टूट जाता है (क़ज़ा लाज़िम)
मिस्वाक का इस्तेमाल नहीं टूटता ताज़ी या सूखी मिस्वाक किसी भी वक़्त करना सुन्नत है
टूथपेस्ट या मंजन करना मकरूह है अगर ज़रा सा भी पेस्ट हलक़ में चला गया तो रोज़ा टूट जाएगा
थूक या बलग़म निगलना नहीं टूटता मुंह का सामान्य थूक निगलने से रोज़ा नहीं टूटता (बाहर निकाला थूक वापस न लें)
ख़ुदबख़ुद उल्टी (Vomit) आना नहीं टूटता चाहे मुंह भर कर आए, अगर जानबूझकर वापस न निगली जाए तो रोज़ा सही है
जानबूझकर उल्टी करना टूट जाता है अगर उंगली डालकर मुंह भरकर उल्टी की तो रोज़ा टूट जाएगा (सिर्फ़ क़ज़ा लाज़िम)
ब्लड टेस्ट या ख़ून निकलना नहीं टूटता जांच के लिए ख़ून देने या चोट से ख़ून बहने पर रोज़ा नहीं टूटता

1. जिन चीज़ों से रोज़ा टूट जाता है (सिर्फ़ क़ज़ा लाज़िम होती है)

अगर नीचे दी गई चीज़ों में से कोई बात पेश आ जाए, तो रोज़ा टूट जाता है। इसके बदले रमज़ान के बाद सिर्फ़ एक दिन की क़ज़ा रखनी होगी, कफ़्फ़ारा (60 रोज़े) लाज़िम नहीं होगा:

  1. नाक में दवा डालना: अगर नाक के ज़रिए कोई लिक्विड ड्रॉप या दवा हलक़ और दिमाग़ तक पहुंच जाए।
  2. जानबूझकर मुंह भरकर उल्टी करना: अगर किसी ने जानबूझकर हलक़ में उंगली डालकर उल्टी की और वह मुंह भरकर हुई।
  3. वुज़ू में कुल्ली करते वक़्त ग़लती से पानी हलक़ में उतरना: अगर रोज़ा याद था और गरगरा करते या कुल्ली करते वक़्त असावधानी से पानी पेट में चला गया।
  4. दांतों के बीच फंसा खाना निगलना: अगर दांतों में फंसा हुआ चने के दाने के बराबर या उससे बड़ा टुकड़ा निगल लिया।
  5. धुआं या अगरबत्ती का धुआं जानबूझकर अंदर खींचना: अगर किसी ने जानबूझकर सिगरेट, बीड़ी, हुक़्क़ा या लोबान का गाढ़ा धुआं सांस के ज़रिए अंदर खींचा।
  6. वक़्त से पहले इफ़्तार कर लेना: ग़लतफ़हमी या घड़ी ख़राब होने की वजह से यह समझकर इफ़्तार कर लिया कि सूरज डूब चुका है, जबकि अभी वक़्त बाक़ी था।
  7. सेहरी का वक़्त ख़त्म होने के बाद खा लेना: यह सोचकर खाते रहना कि अभी सेहरी का वक़्त है, जबकि सुबह सादिक़ (फ़ज्र की अज़ान) हो चुकी थी।

2. जिन चीज़ों से रोज़ा टूटता है और ‘क़ज़ा व कफ़्फ़ारा’ दोनों लाज़िम होते हैं

कफ़्फ़ारा बहुत सख्त शरई सज़ा है। अगर कोई व्यक्ति बिना किसी मजबूरी या बीमारी के, जानबूझकर रमज़ान के रोज़े की तौहीन करते हुए रोज़ा तोड़ दे, तो उस पर उस रोज़े की क़ज़ा के साथ-साथ कफ़्फ़ारा भी अदा करना फ़र्ज़ हो जाता है:

  • जानबूझकर अपनी मर्ज़ी से खाना खाना या पानी/शरबत पीना (जबकि रोज़ा याद था)।
  • रोज़े की हालत में अपनी बीवी के साथ शारीरिक संबंध (जिमा) स्थापित करना।

रोज़े का कफ़्फ़ारा क्या है?

हदीस-ए-पाक के मुताबिक़ एक रोज़ा जानबूझकर तोड़ने के कफ़्फ़ारे में लगातार 60 दिन (दो महीने) के रोज़े बिना किसी नागे के रखने होते हैं। अगर शारीरिक कमज़ोरी या गंभीर बुढ़ापे के कारण 60 रोज़े रखने की ताक़त न हो, तो 60 मिस्कीनों (ग़रीबों) को दोनों वक़्त भरपेट खाना खिलाना या उसका सदक़ा-ए-फ़ित्र के बराबर अनाज/रक़म देना वाजिब है।

3. जिन चीज़ों से रोज़ा बिल्कुल नहीं टूटता (Modern Medical Doubts)

रोज़मर्रा की ज़िंदगी में बहुत सी ऐसी बातें हैं जिन्हें लोग ग़लतफ़हमी में रोज़ा तोड़ने वाला समझ लेते हैं, जबकि शरीअत में उनसे रोज़ा बिल्कुल महफ़ूज़ रहता है:

  • भूलकर खाना-पीना: अगर रोज़ा याद न रहा और भरपेट खाना खा लिया या पानी पी लिया, तो रोज़ा बिल्कुल नहीं टूटता। याद आते ही तुरंत मुंह साफ़ कर लें।
  • इंसुलिन और इंजेक्शन: शुगर के मरीज़ों के लिए इंसुलिन का टीका, दर्द निवारक इंजेक्शन, या एंटीबायोटिक इंजेक्शन लगवाने से रोज़ा नहीं टूटता; क्योंकि यह सीधे पेट या पाचन तंत्र (Digestive system) तक नहीं पहुंचता।
  • आंख में सूरमा या आई ड्रॉप: आंख में दवा डालने से हलक़ में कड़वापन महसूस हो सकता है, लेकिन हदीस व इज्मा के अनुसार इससे रोज़ा नहीं टूटता।
  • ग्लिसरीन या तेल लगाना: सर में तेल लगाना, दाढ़ी या बालों में खुशबू/इत्र लगाना, या साबुन से नहाना पूरी तरह जाइज़ है।
  • मिस्वाक करना: मिस्वाक करना सुन्नत है। चाहे मिस्वाक सूखी हो या ताज़ा, सुबह हो या दोपहर के बाद, इसका इस्तेमाल जाइज़ है।
  • थूक निगलना: अपने मुंह का सामान्य थूक निगलने से रोज़ा नहीं टूटता। हां, जानबूझकर मुंह में थूक जमा करके निगलना मकरूह है।
  • एहतलाम (Nightfall) होना: रोज़े की हालत में सोते वक़्त अगर स्वप्नदोष हो जाए, तो रोज़ा नहीं टूटता। जाग्रत होकर फ़ौरन ग़ुस्ल कर लेना चाहिए।

4. रोज़े के मकरूहात (जिनसे सवाब घट जाता है)

मकरूह उन कामों को कहते हैं जिनसे रोज़ा टूटता तो नहीं, लेकिन रोज़े की पाकीज़गी और उसका सवाब नष्ट हो जाता है:

  • बिना ज़रूरत किसी चीज़ को चबाना या ज़बान पर रखकर उसका स्वाद चखना।
  • टूथपेस्ट या मंजन से दांत साफ़ करना (क्योंकि इसके हलक़ में उतरने का बहुत ख़तरा होता है)।
  • ग़ीबत (पीठ पीछे बुराई करना), झूठ बोलना, गाली-गलौज करना या लड़ाई-झगड़ा करना। हदीस में फ़रमाया गया कि जो शख़्स झूठ और बुरे आमाल नहीं छोड़ता, अल्लाह को उसके भूखे-प्यासे रहने की कोई ज़रूरत नहीं है। (सहीह बुख़ारी: 1903)।
  • वुज़ू में नाक या मुंह में बहुत ज़्यादा पानी चढ़ाना जिससे पानी अंदर जाने का ख़तरा हो।

रोज़े में ग़लती या भूल होने पर पढ़ी जाने वाली दुआ

अगर रोज़े के दौरान कोई अनजाने में भूल हो जाए या दिल में शक पैदा हो, तो सच्चे दिल से अल्लाह की बारगाह में यह इस्तिग़फ़ार पढ़ना चाहिए:

أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ رَبِّي مِنْ كُلِّ ذَنْبٍ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ

हिंदी उच्चारण: अस्तग़फ़िरुल्लाहा रब्बी मिन कुल्लि ज़म्बिन व अतूबु इलैह।

तर्जुमा: “मैं अपने रब अल्लाह से अपने तमाम गुनाहों और ख़ताओं की माफ़ी मांगता हूँ और उसी की बारगाह में तौबा करता हूँ।”

रमज़ान और रोज़े से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण लेख

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)

1. क्या रोज़े में इंजेक्शन या ड्रिप लगवाने से रोज़ा टूटता है?

इलाज या दर्द के लिए नस या मांस में इंजेक्शन लगवाने से रोज़ा नहीं टूटता। हालांकि अगर ग्लूकोज़ या ताक़त की ड्रिप भूख-प्यास मिटाने के उद्देश्य से चढ़ाई जाए, तो उससे बचना चाहिए क्योंकि यह रोज़े की मूल भावना के ख़िलाफ़ है।

2. क्या टूथपेस्ट करने से रोज़ा टूट जाता है?

रोज़े में टूथपेस्ट का इस्तेमाल करना मकरूह है। अगर पेस्ट का ज़रा सा अंश या झाग हलक़ से नीचे पेट में चला गया, तो रोज़ा टूट जाएगा और क़ज़ा रखनी होगी। इसलिए रोज़े में मिस्वाक का इस्तेमाल सबसे सुरक्षित और सुन्नत है।

3. अगर भूलकर कुछ खा-पी लिया तो क्या रोज़ा टूट जाएगा?

बिल्कुल नहीं। सहीह बुख़ारी और मुस्लिम की हदीस के मुताबिक़ भूलकर खाने-पीने से रोज़ा नहीं टूटता। जैसे ही याद आए, फ़ौरन खाना-पीना रोक दें, मुंह साफ़ करें और रोज़ा पूरा करें।

4. क्या आंख या कान में ड्रॉप डालने से रोज़ा टूटता है?

आंख में दवा या सूरमा लगाने से रोज़ा नहीं टूटता, चाहे उसका स्वाद हलक़ में आए। कान के पर्दे में अगर छेद न हो, तो कान में ड्रॉप डालने से भी रोज़ा नहीं टूटता। लेकिन नाक में ड्रॉप डालने से रोज़ा टूट जाता है क्योंकि नाक का रास्ता सीधे हलक़ से जुड़ा है।

5. क्या उल्टी (Vomit) होने से रोज़ा टूट जाता है?

अगर ख़ुदबख़ुद (बिना इच्छा के) उल्टी आ जाए, तो चाहे वह मुंह भरकर ही क्यों न हो, रोज़ा नहीं टूटता। लेकिन अगर किसी ने जानबूझकर उंगली डालकर मुंह भरकर उल्टी की, तो रोज़ा टूट जाएगा और उसकी सिर्फ़ एक क़ज़ा लाज़िम होगी।

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लेखक के बारे में

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