रमज़ान का रोज़ा मुसलमानों के लिए बहुत अहम इबादत है। रोज़ा रखने से पहले इंसान के दिल में यह इरादा होना चाहिए कि वह अल्लाह की रज़ा के लिए रोज़ा रख रहा है। इसी इरादे को रोज़ा रखने की नीयत कहा जाता है।
बहुत से लोग roza rakhne ki niyat hindi, roza rakhne ki niyat ki dua और roze ki niyat सर्च करते हैं, क्योंकि उन्हें यह समझ नहीं आता कि नीयत कैसे करनी है और क्या इसके लिए कोई खास दुआ पढ़ना जरूरी है। इस लेख में रोज़े की नीयत को बहुत आसान तरीके से समझाया गया है।
दिल में इरादा करें
अल्लाह की रज़ा के लिए आज का रोज़ा रखने का इरादा करें।
सहरी करें
फ़ज्र का समय शुरू होने से पहले सहरी पूरी कर लें।
रोज़ा शुरू करें
नीयत के बाद रोज़े के नियमों का ध्यान रखते हुए दिन पूरा करें।
इसलिए अगर किसी व्यक्ति ने जुबान से कोई खास वाक्य नहीं बोला, लेकिन उसके दिल में रमज़ान का रोज़ा रखने का इरादा था, तो नीयत का असली मकसद मौजूद है।
Roza Rakhne Ki Niyat Ki Dua
इंटरनेट पर roza rakhne ki niyat ki dua भी बहुत ज्यादा खोजी जाती है। लोगों के बीच रोज़े की नीयत के लिए यह अरबी वाक्य भी मशहूर है:
وَبِصَوْمِ غَدٍ نَوَيْتُ مِنْ شَهْرِ رَمَضَانَ
हिंदी में इसे इस तरह पढ़ा जाता है:
व बिसौमि गदिन नवैतु मिन शहरि रमज़ान।
इसका सामान्य अर्थ है कि मैंने रमज़ान के आने वाले दिन का रोज़ा रखने की नीयत की।
लेकिन यहां यह बात समझना जरूरी है कि नीयत का असली संबंध दिल के इरादे से है। किसी खास अरबी वाक्य को पढ़ना ही नीयत होने की शर्त नहीं है। इसलिए इसे याद न होने पर भी अगर आपके दिल में रोज़ा रखने का इरादा है, तो नीयत के अर्थ को लेकर परेशान होने की जरूरत नहीं है।
Roza Rakhne Ki Dua Niyat कैसे करें?
Roza rakhne ki dua niyat को लेकर अक्सर लोग सोचते हैं कि सहरी खाने के बाद कोई लंबी दुआ पढ़नी होगी। असल में इसे इतना मुश्किल बनाने की जरूरत नहीं है।
सहरी करते समय अगर आप जानते हैं कि आप रमज़ान का रोज़ा रखने के लिए खाना खा रहे हैं, तो आपके दिल में रोज़ा रखने का इरादा मौजूद है। चाहें तो अपनी भाषा में भी अल्लाह से कह सकते हैं कि आप उसकी रज़ा के लिए रोज़ा रख रहे हैं।
नीयत का मकसद अल्लाह के लिए इबादत का इरादा करना है, केवल शब्द दोहराना नहीं।
Roza Rakhne Ki Niyat Kaise Kare?
अगर आपका सवाल है कि roza rakhne ki niyat kaise kare, तो इसका तरीका बहुत आसान है। रात में या सहरी के समय दिल में यह तय कर लें कि अगले दिन आपको रमज़ान का रोज़ा रखना है।
सहरी खाएं, रोज़ा रखने का इरादा रखें और फ़ज्र का समय शुरू होने से पहले खाना-पीना बंद कर दें। इसके बाद पूरे दिन रोज़े की हालत में उन कामों से बचें जिनसे रोज़ा प्रभावित होता है।
नीयत को लेकर बेवजह मुश्किल में पड़ने की जरूरत नहीं है। रोज़ा रखने का साफ और पक्का इरादा इसकी बुनियाद है।
सहरी के समय रोज़े की नीयत
सहरी रोज़े की तैयारी का अहम हिस्सा है। जब इंसान सहरी के लिए उठता है और यह जानता है कि वह आज रोज़ा रखेगा, तो यही बात उसके इरादे को स्पष्ट करती है।
इसलिए सहरी करते समय बार-बार यह सोचने की जरूरत नहीं कि नीयत हुई या नहीं। अगर आप रोज़ा रखने के इरादे से सहरी कर रहे हैं, तो आपके दिल में रोज़े का इरादा मौजूद है।
हालांकि रोज़े की नीयत के समय से जुड़े कुछ फ़िक़्ही मसाइल अलग-अलग परिस्थितियों में अलग हो सकते हैं, इसलिए किसी विशेष मामले में अपने भरोसेमंद आलिम से पूछना बेहतर होता है।
Sehri Roza Rakhne Ki Niyat Ki Dua in English
कुछ लोग sehri roza rakhne ki niyat ki dua in english भी खोजते हैं। ऊपर बताई गई मशहूर नीयत को Roman English में इस तरह लिखा जाता है:
Wa bisawmi ghadin nawaitu min shahri Ramadan.
इसका आसान English meaning है:
“I intend to fast tomorrow in the month of Ramadan.”
यह transliteration केवल पढ़ने और समझने में मदद के लिए है। अरबी शब्दों का सही उच्चारण सीखने के लिए किसी जानकार व्यक्ति से सुनना बेहतर रहता है।
Roze Ki Niyat कब करनी चाहिए?
आम तौर पर रमज़ान का रोज़ा रखने वाले व्यक्ति के लिए रात में या सहरी के समय रोज़े का इरादा कर लेना आसान रहता है। इससे यह बात साफ रहती है कि वह अगले दिन रोज़ा रखने वाला है।
Roze ki niyat को आखिरी वक्त तक टालने के बजाय सहरी के समय ही दिल में रोज़ा रखने का इरादा कर लेना बेहतर तरीका है।
क़ज़ा, नफ़्ल और दूसरे प्रकार के रोज़ों में नीयत के समय से जुड़े फ़िक़्ही नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए ऐसी स्थिति में अलग से मसला जानना चाहिए।
अगर सहरी छूट जाए तो क्या करें?
कई बार इंसान देर से सोने या अलार्म न बजने की वजह से सहरी के लिए नहीं उठ पाता। सहरी छूट जाना और नीयत न होना एक ही बात नहीं है।
अगर आपने रात में ही रोज़ा रखने का इरादा कर लिया था और सहरी के लिए नहीं उठ पाए, तो केवल सहरी छूट जाने को नीयत खत्म होना नहीं समझना चाहिए।
अगर नीयत ही नहीं की थी और बाद में जागे, तो अलग परिस्थितियों में फ़िक़्ही हुक्म बदल सकता है। ऐसी स्थिति में किसी योग्य आलिम से सही मसला पूछना बेहतर है।
रोज़ा रखने की नीयत याद न हो तो क्या करें?
अगर आपको कोई अरबी नीयत याद नहीं है तो घबराने की जरूरत नहीं है। दिल में साफ तौर पर यह इरादा रखें कि आप अल्लाह के लिए रोज़ा रख रहे हैं।
रोज़े की नीयत कोई परीक्षा नहीं है जिसमें खास शब्द भूल जाने से सब कुछ खत्म हो जाए। इबादत का इरादा समझना ज्यादा जरूरी है। अगर आप चाहें तो अपनी भाषा में भी कह सकते हैं कि आप अल्लाह की रज़ा के लिए आज का रोज़ा रख रहे हैं।
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