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रमज़ान के तीनों अशरों की दुआ | Ramzan Ke 3 Ashre Ki Dua in Hindi (पहला, दूसरा व तीसरा अशरा)

By Mariya Ansari •

माह-ए-रमज़ान इस्लामी साल का सबसे बरकत, पवित्र और रहमतों से भरपूर महीना है। अल्लाह तआला ने इस मुक़द्दस महीने को अपनी असीम दयालुता से तीन हिस्सों में बांटा है, जिन्हें इस्लामी शब्दावली में ‘तीन अशरे’ (Three Ashras of Ramadan) कहा जाता है। ‘अशरा’ अरबी शब्द ‘अशरह’ से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ ‘दस दिन’ (10 Days) होता है। रमज़ान के इन तीस दिनों में हर दस दिन का एक अलग रूहानी मक़सद और अलग फ़ज़ीलत होती है। पहले दस दिन अल्लाह की रहमत बरसाते हैं, दूसरे दस दिन गुनाहों की मग़फ़िरत (क्षमा) का परवाना लाते हैं, और आख़िरी दस दिन जहन्नम की भड़कती आग से हमेशा के लिए आज़ादी और निजात दिलाते हैं। इस संपूर्ण गाइड में आप जानेंगे कि Ramzan Ke 3 Ashre Ki Dua in Hindi क्या है, तीनों अशरों की मसनून दुआएं अरबी तशकील, हिंदी तलफ़्फ़ुज़, शब्द-दर-शब्द तर्जुमा और हदीस के हवाले से विस्तारपूर्वक।

हदीस-ए-पाक: हज़रत सलमान फ़ारसी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने शाबान के आख़िरी दिन एक ख़ुत्बे में फ़रमाया: “यह ऐसा महीना है जिसका पहला हिस्सा रहमत है, इसका दरमियानी हिस्सा मग़फ़िरत है, और इसका आख़िरी हिस्सा जहन्नम की आग से आज़ादी है।” (सहीह इब्न ख़ुज़ैमा: 1887 / शुअबुल ईमान लिल-बैहक़ी: 3336)

अशरा (Ashra) रमज़ान की तारीख़ (Duration) मक़सद व शीर्षक (Theme) पढ़ी जाने वाली ख़ास मसनून दुआ
पहला अशरा (1st Ashra) 1 से 10 रमज़ान अशरा-ए-रहमत (अल्लाह की दया) रब्बिग़फ़िर वरह़म व अन्ता ख़ैरुर-राहिमीन
दूसरा अशरा (2nd Ashra) 11 से 20 रमज़ान अशरा-ए-मग़फ़िरत (गुनाहों की माफ़ी) अस्तग़फ़िरुल्लाहा रब्बी मिन कुल्लि ज़म्बिन व अतूबु इलैह
तीसरा अशरा (3rd Ashra) 21 से 30 रमज़ान अशरा-ए-निजात (जहन्नम से मुक्ति व शब-ए-क़द्र) अल्लाहुम्मा अजिरनी मिनन-नार

1. रमज़ान के पहले अशरे की दुआ (Pehle Ashre Ki Dua – 1 to 10 Ramzan)

रमज़ान का पहला अशरा रहमत का अशरा कहलाता है। इन शुरुआती 10 दिनों में अल्लाह तआला की रहमतों की बारिश अपने बंदों पर बेहिसाब होती है। जो बंदा इस अशरे में सच्चे दिल से अल्लाह की दया और करम का तलबगार होता है, अल्लाह उसे अपनी ख़ास हिफ़ाज़त और रहमत के साए में ले लेता है। पहले अशरे की सबसे अफ़ज़ल क़ुरआनी दुआ सूरह अल-मोमिनून (आयत: 118) से ली गई है:

رَبِّ اغْفِرْ وَارْحَمْ وَأَنْتَ خَيْرُ الرَّاحِمِينَ

हिंदी उच्चारण (Hindi Pronunciation):

रब्बिग़फ़िर वरह़म व अन्ता ख़ैरुर-राहिमीन।

English Transliteration: Rabbigh-fir war-ham wa Anta khayrur-Raahimeen.

हिंदी तर्जुमा (Meaning): “ऐ मेरे रब! मुझे बख़्श दे, मुझ पर रहम फ़रमा, और तू सबसे बेहतरीन रहम करने वाला है।” (सूरह अल-मोमिनून: 118)

पहले अशरे में क्या करें: इन शुरुआती 10 दिनों में नमाज़ों के बाद, सेहरी व इफ़्तार के समय इस दुआ का कसरत से विर्द करें। साथ ही ग़रीबों, अनाथों और ज़रूरतमंदों पर दया दिखाएं, क्योंकि हदीस में फ़रमाया गया है कि जो ज़मीन वालों पर रहम करता है, आसमान वाला उस पर रहम फ़रमाता है।

2. रमज़ान के दूसरे अशरे की दुआ (Doosre Ashre Ki Dua – 11 to 20 Ramzan)

रमज़ान का दूसरा अशरा 11वें रोज़े से शुरू होकर 20वें रोज़े तक रहता है। इसे मग़फ़िरत (माफ़ी और प्रायश्चित) का अशरा कहा जाता है। इंसान कमज़ोर है और उससे जाने-अनजाने में बहुत से गुनाह हो जाते हैं। यह 10 दिन अल्लाह तआला की बारगाह में अपने पिछले तमाम गुनाहों पर शर्मिंदा होकर रो-रोकर माफ़ी मांगने का सुनहरा अवसर होते हैं:

أَسْتَغْفِرُ اللَّهَ رَبِّي مِنْ كُلِّ ذَنْبٍ وَأَتُوبُ إِلَيْهِ

हिंदी उच्चारण (Hindi Pronunciation):

अस्तग़फ़िरुल्लाहा रब्बी मिन कुल्लि ज़म्बिन व अतूबु इलैह।

English Transliteration: Astaghfirullaha Rabbee min kulli dhambinw-wa atoobu ilayh.

हिंदी तर्जुमा (Meaning): “मैं अल्लाह से अपने तमाम गुनाहों की माफ़ी मांगता हूँ जो मेरा परवरदिगार है, और मैं उसी की तरफ़ तौबा (रुजू) करता हूँ।”

दूसरे अशरे की रूहानी तासीर: इस अशरे में हर नमाज़ के बाद कम से कम 100 मर्तबा इस्तिग़फ़ार की तस्बीह पढ़ें। जब बंदा सच्चे दिल से अपने गुनाहों पर पछताता है, तो अल्लाह तआला उसके बड़े से बड़े गुनाह को भी नेकियों में बदल देता है।

3. रमज़ान के तीसरे अशरे की दुआ (Teesre Ashre Ki Dua – 21 to 30 Ramzan)

रमज़ान का तीसरा अशरा 21वें रोज़े से शुरू होकर ईद के चांद दिखने तक चलता है। इसे अशरा-ए-निजात (जहन्नम की भड़कती आग से हमेशा की मुक्ति) कहा जाता है। यह रमज़ान का सबसे महत्वपूर्ण, अफ़ज़ल और सवाब वाला अशरा है। इसी अशरे में सुन्नत एतेकाफ़ बैठा जाता है और हज़ारों महीनों से अफ़ज़ल रात लैलतुल क़द्र (शब-ए-क़द्र) तलाश की जाती है। तीसरे अशरे में जहन्नम की आग से पनाह मांगने की मुख्य दुआ यह है:

اللَّهُمَّ أَجِرْنِي مِنَ النَّارِ

हिंदी उच्चारण (Hindi Pronunciation):

अल्लाहुम्मा अजिरनी मिनन-नार।

English Transliteration: Allahumma ajirnee minan-Naar.

हिंदी तर्जुमा (Meaning): “ऐ अल्लाह! मुझे दोज़ख़ (जहन्नम की आग) के अज़ाब से बचा ले।” (सुनन अबू दाऊद: 5079)

हदीस शरीफ़ में आता है कि जो बंदा दिन या रात में 7 मर्तबा “अल्लाहुम्मा अजिरनी मिनन-नार” कहता है, तो जहन्नम की आग स्वयं अल्लाह से फ़रियाद करती है कि ‘ऐ अल्लाह! इस बंदे को मुझसे बचा ले और अपने अज़ाब से दूर रख’।

तीसरे अशरे की शब-ए-क़द्र वाली ख़ास दुआ

तीसरे अशरे की ताक़ रातों (21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं शब) में हज़रत आयशा सिद्दीक़ा (रज़ियल्लाहु अन्हा) को रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) द्वारा सिखाई गई यह अज़ीम दुआ कसरत से पढ़नी चाहिए:

اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ كَرِيمٌ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي

उच्चारण: अल्लाहुम्मा इन्नका ‘अफ़ुव्वुन करीमुन तुहिब्बुल ‘अफ़्वा फ़ा’फ़ु ‘अन्नी।

तर्जुमा: “ऐ अल्लाह! बेशक तू बहुत माफ़ करने वाला, बड़ा करम फ़रमाने वाला है और माफ़ करने को पसंद करता है, पस तू मुझे माफ़ फ़रमा दे।” (सुनन तिर्मिज़ी: 3513)

तीनों अशरों में इबादत का सही तरीक़ा और मसनून आदाब

रमज़ान के इन तीनों अशरों का भरपूर फ़ायदा उठाने के लिए इन 5 बुनियादी आदाब पर अमल करना चाहिए:

  1. पाँचों वक़्त की नमाज़ बा-जमाअत: सिर्फ़ रोज़ा रखना काफ़ी नहीं है, बल्कि फ़र्ज़ नमाज़ों को वक़्त पर तकबीर-ए-ऊला के साथ अदा करना हर मोमिन पर लाज़िम है।
  2. क़ुरआन मजीद की तिलावत: रमज़ान क़ुरआन का महीना है। हर अशरे में कम से कम एक पारा या अपनी सहूलत के अनुसार तर्जुमे के साथ क़ुरआन पढ़ें।
  3. तरावीह की नमाज़ का एहतमाम: ईशा की नमाज़ के बाद 20 रकअत तरावीह की नमाज़ जमाअत से पढ़ें और हर 4 रकअत पर मसनून तस्बीह पढ़ें।
  4. सेहरी व इफ़्तार में दुआ: सेहरी ख़त्म होने से 15 मिनट पहले और इफ़्तार से ठीक पहले का समय दुआ की क़बूलियत का होता है, इस वक़्त तीनों अशरों की दुआएं मांगें।
  5. सदक़ा व ख़ैरात: रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) रमज़ान में तेज़ हवा से भी ज़्यादा दिल खोलकर ख़ैरात फ़रमाते थे। हर अशरे में अपनी हैसियत के मुताबिक़ ज़रूरतमंदों की मदद करें।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)

1. क्या तीनों अशरों की दुआएं किसी ख़ास गिनती में पढ़ना ज़रूरी है?

शरीअत में इन दुआओं की कोई निश्चित गिनती मुक़र्रर नहीं है। आप जितना ज़्यादा हो सके (जैसे 33, 70 या 100 बार) उठते-बैठते, चलते-फिरते और नमाज़ों के बाद इन दुआओं को पढ़ सकते हैं।

2. क्या पहले अशरे में दूसरे या तीसरे अशरे की दुआ पढ़ सकते हैं?

जी बिल्कुल, अल्लाह से रहमत, मग़फ़िरत और जहन्नम से पनाह मांगना हर दिन और हर वक़्त जायज़ व मुस्तहब है। अशरों की तक़सीम सिर्फ़ तवज्जोह और रूहानी तरतीब के लिए है, किसी दुआ पर कोई पाबंदी नहीं है।

3. क्या महिलाएं पीरियड्स (माहवारी) के दिनों में ये दुआएं पढ़ सकती हैं?

जी हाँ, महिलाएं नापाकी या माहवारी की हालत में नमाज़ और रोज़ा नहीं रख सकतीं, लेकिन ज़िक्र, इस्तिग़फ़ार, दुरूद शरीफ़ और तीनों अशरों की दुआएं अपनी ज़बान से पढ़ सकती हैं और पूरा सवाब पा सकती हैं।

4. रमज़ान का सबसे अफ़ज़ल अशरा कौन सा है?

रमज़ान का तीसरा अशरा (21 से 30 रमज़ान) सबसे अफ़ज़ल है, क्योंकि इसमें लैलतुल क़द्र (शब-ए-क़द्र) आती है जो हज़ार महीनों की इबादत से बेहतर है, और इसी अशरे में सुन्नत एतेकाफ़ किया जाता है।

5. अगर किसी को अरबी दुआ याद न हो तो क्या वह हिंदी में दुआ मांग सकता है?

बिल्कुल, अल्लाह तआला हर भाषा और दिल के जज़्बात को समझता है। आप अपनी मातृभाषा (हिंदी) में कहें कि ‘ऐ मेरे रब! मुझ पर रहम फ़रमा, मेरे गुनाह माफ़ कर दे और मुझे जहन्नम की आग से बचा ले’।

Mariya Ansari
लेखक के बारे में

Mariya Ansari

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