Quran Guide Quran Guide
QuranGuide.in

शब-ए-क़द्र की दुआ और नमाज़ का तरीक़ा | Shab e Qadr Ki Dua in Hindi (फ़ज़ीलत व इबादत)

By Mariya Ansari •

माह-ए-रमज़ान के आख़िरी अशरे की सबसे बड़ी बरकत और रहमत वाली रात को शब-ए-क़द्र (लैलतुल क़द्र / Laylatul Qadr) कहा जाता है। पवित्र क़ुरआन मजीद की पूरी सूरह (सूरह अल-क़द्र) इस मुक़द्दस रात की शान में नाज़िल हुई है, जिसमें अल्लाह तआला ने साफ़ लफ़्ज़ों में फ़रमाया है कि ‘लैलतुल क़द्र हज़ार महीनों से बेहतर है’। हज़ार महीने लगभग 83 साल और 4 महीने की मुद्दत बनती है, यानी इस एक रात में की गई इबादत, नमाज़ और दुआओं का सवाब इंसान की पूरी ज़िंदगी की इबादतों से कहीं ज़्यादा भारी है। हर मुसलमान रमज़ान के तीसरे अशरे में Shab e Qadr Ki Dua in Hindi और इस रात की नमाज़ का तरीक़ा तलाश करता है। इस विस्तृत गाइड में आप जानेंगे कि शब-ए-क़द्र की ख़ास मसनून दुआ, उसका तर्जुमा, 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं ताक़ रातों में नफ़्ल नमाज़ का तरीक़ा, और इस अज़ीम रात की निशानियां क्या हैं।

क़ुरआन मजीद का फ़रमान: “لَيْلَةُ الْقَدْرِ خَيْرٌ مِّنْ أَلْفِ شَهْرٍ” यानी लैलतुल क़द्र (शब-ए-क़द्र) हज़ार महीनों की इबादत से कहीं बेहतर और अफ़ज़ल है। (सूरह अल-क़द्र: 97:3)

विषय (Category) संक्षिप्त विवरण (Key Details)
तलाश करने की रातें रमज़ान के आख़िरी अशरे की 5 विषम (ताक़) रातें: 21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं शब
शब-ए-क़द्र की ख़ास दुआ अल्लाहुम्मा इन्नका ‘अफ़ुव्वुन करीमुन तुहिब्बुल ‘अफ़्वा फ़ा’फ़ु ‘अन्नी (तिर्मिज़ी: 3513)
इबादत का सवाब 1000 महीनों (83 वर्ष 4 माह) से अधिक निरंतर इबादत का पुण्य
पढ़ी जाने वाली नमाज़ नफ़्ल नमाज़, सलातुल तस्बीह, तहज्जुद, सलातुत तौबा और क़ज़ा-ए-उम्री
फ़रिश्तों का नुज़ूल हज़रत जिब्रील (अलैहि.) के साथ अनगिनत रहमत के फ़रिश्ते सुबह सादिक़ तक ज़मीन पर उतरते हैं

शब-ए-क़द्र की ख़ास मसनून दुआ (Shab e Qadr Ki Dua in Hindi)

उम्मुल मोमिनीन हज़रत आयशा सिद्दीक़ा (रज़ियल्लाहु अन्हा) ने एक बार रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) से अर्ज़ किया: “या रसूलुल्लाह! अगर मुझे यह मालूम हो जाए कि कौन सी रात शब-ए-क़द्र (लैलतुल क़द्र) है, तो मैं उस रात क्या दुआ मांगूं?” नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया कि तुम यह दुआ पढ़ो:

اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ كَرِيمٌ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي

हिंदी उच्चारण (Hindi Pronunciation):

अल्लाहुम्मा इन्नका ‘अफ़ुव्वुन करीमुन तुहिब्बुल ‘अफ़्वा फ़ा’फ़ु ‘अन्नी।

English Transliteration: Allahumma innaka ‘Afuwwun Kareemun tuhibbul-‘afwa fa’fu ‘annee.

हिंदी तर्जुमा (Meaning): “ऐ अल्लाह! बेशक तू बहुत माफ़ करने वाला, बड़ा करम फ़रमाने वाला है और माफ़ करने को पसंद करता है, पस तू मुझे माफ़ फ़रमा दे।” (सुनन तिर्मिज़ी: 3513 / सुनन इब्न माजा: 3850)

इस दुआ के अल्फ़ाज़ में अल्लाह के नाम ‘अल-अफ़ूव’ (العفو) का ज़िक्र है। ‘अफ़्व’ का मतलब केवल गुनाह को माफ़ करना नहीं होता, बल्कि गुनाह के नामोनिशान को रजिस्टर से ऐसे मिटा देना होता है जैसे वह कभी हुआ ही न था। इसलिए यह दुआ दुनिया और आख़िरत दोनों की सबसे बड़ी कामयाबी की कुंजी है।

शब-ए-क़द्र को किन रातों में तलाश करें? (5 ताक़ रातें)

रसूलुल्लाह (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया: “शब-ए-क़द्र को रमज़ान के आख़िरी अशरे की ताक़ (Odd) रातों में तलाश करो।” (सहीह बुख़ारी: 2017)। इस्लामी तारीख़ शाम को सूरज डूबने (मग़रिब) के साथ शुरू होती है। ये 5 मुक़द्दस रातें हैं:

  • 21वीं शब: 20वें रोज़े का सूरज डूबने के बाद आने वाली रात।
  • 23वीं शब: 22वें रोज़े का सूरज डूबने के बाद आने वाली रात।
  • 25वीं शब: 24वें रोज़े का सूरज डूबने के बाद आने वाली रात।
  • 27वीं शब: 26वें रोज़े का सूरज डूबने के बाद आने वाली रात (बहुसंख्यक उलमा और हदीसों के मुताबिक़ 27वीं शब को लैलतुल क़द्र होने की सबसे अधिक संभावना होती है)।
  • 29वीं शब: 28वें रोज़े का सूरज डूबने के बाद आने वाली रात।

शब-ए-क़द्र की नमाज़ का सही तरीक़ा (Step by Step)

शब-ए-क़द्र की कोई अलग से विशेष नमाज़ मुक़र्रर नहीं है, बल्कि इस रात जितनी हो सके 2-2 रकअत करके नफ़्ल नमाज़ें पढ़ी जाती हैं। नफ़्ल नमाज़ पढ़ने का आसान तरीक़ा यह है:

  1. नीयत: दिल में नीयत करें: “मैं 2 रकअत नफ़्ल नमाज़ शब-ए-क़द्र की, वास्ते अल्लाह तआला के, मुंह मेरा काबा शरीफ़ की तरफ़—अल्लाहु अकबर।”
  2. पहली रकअत: सना (सुब्हानकल्लाहुम्मा…) पढ़ें, फिर सूरह फ़ातिहा पढ़ें। सूरह फ़ातिहा के बाद सूरह अल-क़द्र (इन्ना अन्ज़लनाहु…) या जो भी सूरह याद हो (जैसे सूरह इख़लास) 3 बार पढ़ें। रुकूअ और दोनों सज्दे इत्मीनान से अदा करें।
  3. दूसरी रकअत: दूसरी रकअत में भी सूरह फ़ातिहा और कोई सूरह पढ़ें। रुकूअ व दोनों सज्दों के बाद क़ायदे में बैठकर अत्तहियात, दुरूद-ए-इब्राहीमी और दुआ-ए-मासूरा पढ़कर सलाम फेर दें।
  4. सलातुल तस्बीह ज़रूर पढ़ें: इस रात 4 रकअत सलातुल तस्बीह (जिसमें 300 बार तीसरा कलमा पढ़ा जाता है) अदा करना बहुत अज़ीम सवाब का बाइस है।
  5. तहज्जुद की नमाज़: सेहरी खाने से पहले 4, 8 या 12 रकअत तहज्जुद की नमाज़ रो-रोकर अदा करें और अल्लाह से अपने तमाम गुनाहों की माफ़ी मांगें।

शब-ए-क़द्र की रात क्या इबादतें करनी चाहिए?

इस रात को केवल जागने या सोशल मीडिया पर समय बिताने के बजाय इन नेक आमाल में गुज़ारना चाहिए:

  • मसनून दुआ का निरंतर विर्द: चलते-फिरते, बैठते-उठते लगातार “अल्लाहुम्मा इन्नका ‘अफ़ुव्वुन करीमुन तुहिब्बुल ‘अफ़्वा फ़ा’फ़ु ‘अन्नी” पढ़ते रहें।
  • क़ुरआन मजीद की तिलावत: सूरह यासीन, सूरह मुल्क, सूरह रहमान और सूरह वाक़िआ की तिलावत करें।
  • कसरत से तौबा व इस्तिग़फ़ार: ‘अस्तग़फ़िरुल्लाह रब्बी मिन कुल्लि ज़म्बिन व अतूबु इलैह’ और सैय्यदुल इस्तिग़फ़ार का विर्द करें।
  • दुरूद शरीफ़ की कसरत: प्यारे नबी (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) पर कम से कम 100 बार दुरूद-ए-पाक भेजें।
  • रात के आख़िरी हिस्से में रो-रोकर दुआ: अपनी सेहत, ईमान की सलामती, रिज़्क़ की कुशादगी, मां-बाप की मग़फ़िरत और पूरे मुल्क में अमन के लिए दुआ मांगें।

रमज़ान और नमाज़ से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण लेख

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (Frequently Asked Questions)

1. शब-ए-क़द्र की रात कौन सी तारीख़ को होती है?

शब-ए-क़द्र की रात को किसी एक निश्चित तारीख़ में तय नहीं किया गया है। हदीस के मुताबिक़ इसे रमज़ान के आख़िरी अशरे की ताक़ रातों (21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं शब) में तलाश करना चाहिए। अधिकांश उलमा 27वीं शब को सबसे प्रबल मानते हैं।

2. क्या औरतें नापाकी (माहवारी) की हालत में शब-ए-क़द्र का सवाब पा सकती हैं?

जी बिल्कुल, औरतें माहवारी में नमाज़ नहीं पढ़ सकतीं, लेकिन बिस्तर या दस्तरख़्वान पर बैठकर ज़बान से शब-ए-क़द्र की दुआ, इस्तिग़फ़ार, दुरूद शरीफ़ और कलमात का विर्द कर सकती हैं। अल्लाह की रहमत से उन्हें पूरा सवाब मिलेगा।

3. शब-ए-क़द्र की दुआ कितनी बार पढ़नी चाहिए?

इसकी कोई सीमित गिनती नहीं है। सुन्नत यह है कि पूरी रात जब भी मौक़ा मिले (जैसे 100, 300 या 500 बार) दिल की गहराइयों और आजिज़ी के साथ ‘अल्लाहुम्मा इन्नका अफ़ुव्वुन करीमुन…’ पढ़ते रहें।

4. क्या शब-ए-क़द्र में पूरी रात जागना अनिवार्य (फ़र्ज़) है?

पूरी रात जागना फ़र्ज़ नहीं है बल्कि मुस्तहब है। अगर कोई शख़्स ईशा और फ़ज्र की नमाज़ जमाअत से अदा कर ले और बीच में जितनी तौफ़ीक़ हो इबादत करे, तो हदीस के मुताबिक़ उसे भी पूरी रात जागने का सवाब मिल जाता है।

5. शब-ए-क़द्र की सुबह की क्या निशानी होती है?

सहीह मुस्लिम की हदीस के मुताबिक़ शब-ए-क़द्र की रात बहुत पुरसुकून और मध्यम होती है (न ज़्यादा गर्मी, न ज़्यादा सर्दी)। और उसकी सुबह जब सूरज निकलता है तो उसकी किरणें तेज़ नहीं होतीं, बल्कि वह एक तश्तरी (चांदी के थाल) की तरह साफ़ और मंद रोशनी के साथ चमकता है।

Mariya Ansari
लेखक के बारे में

Mariya Ansari

Assalamu Alaikum – I am Mariya Ansari, founder of QuranGuide.in, sharing authentic Islamic knowledge in a simple and clear way. My mission is to help people understand the Qur’an, Hadith, duas, and Islamic teachings with easy-to-read and reliable content. Through QuranGuide.in, I hope to create a helpful platform for anyone looking to learn more about Islam and strengthen their connection with the Qur’an.

लेखक के सभी लेख देखें →