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कसासुल अंबिया हिंदी में | Qasasul Ambiya In Hindi (अंबिया-ए-किराम के मुकद्दस वाकयात, तफ़्सील व नसीहत)

By Mariya Ansari •

पवित्र कुरआन मजीद अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की वह मुकद्दस किताब है जो सिर्फ़ अहकामात (नियमों) का मजमुआ नहीं है, बल्कि इसमें पिछली क़ौमों और अंबिया-ए-किराम (अलैहिमुस्सलाम) के ऐसे ईमान-अफ़रोज़ वाकयात बयान किए गए हैं जो क़यामत तक आने वाले इंसानों के लिए हिदायत, नसीहत और सब्र का ज़रिया हैं। अरबी ज़बान में ‘क़सस’ (Qasas) का मतलब होता है सच्चे क़िस्से या वाकयात, और ‘अंबिया’ पैग़ंबरों की जमा (बहुवचन) है। इसी को इस्लामी तारीख़ में ‘कसासुल अंबिया’ (Qasasul Ambiya In Hindi / Kassul Ambiya Hindi) कहा जाता है।

इस विस्तृत लेख में हम जानेंगे कि कसासुल अंबिया क्या है, कुरआन मजीद में किन-किन नबियों का ज़िक्र आया है, हज़रत आदम (अ.स.) से लेकर हुज़ूर अकरम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ तक के मुकद्दस वाकयात से हमें क्या सबक़ मिलता है, और इन वाकयात को पढ़ने व समझने की शरीअत में क्या अहमियत है।

कुरआन मजीद में वाकयात का मक़सद (सूरह यूसुफ़)

अल्लाह तआला सूरह यूसुफ़ की आख़िरी आयत (111) में इरशाद फरमाता है: “बेशक उनके वाकयात में अक़्ल वालों के लिए बड़ी इबरत (सबक़) है; यह कोई गढ़ी हुई बात नहीं है, बल्कि अपने से पहले की किताबों की तस्दीक़ और हर चीज़ की तफ़्सील है, और ईमान वालों के लिए हिदायत व रहमत है।”

कुरआन मजीद में ज़िक्र किए गए 25 प्रमुख अंबिया-ए-किराम

हदीस शरीफ़ के मुताबिक़ दुनिया में कमोबेश 1 लाख 24 हज़ार पैग़ंबर तशरीफ़ लाए, लेकिन पवित्र कुरआन में नाम लेकर 25 जलीलुल क़द्र अंबिया का ज़िक्र फरमाया गया है:

क्रम नबी का नाम (अलैहिस्सलाम) ख़ास लाक़ब / पहचान अहम मुअजिज़ा या वाक़या
1 हज़रत आदम (अ.स.) सफ़ीउल्लाह (पहले इंसान व नबी) मिट्टी से पैदाइश और फ़रिश्तों का सजदा।
2 हज़रत नूह (अ.स.) नजीउल्लाह (शेख़ुल अंबिया) 950 साल की दावत और अज़ीम कश्ती का तूफ़ान।
3 हज़रत इब्राहीम (अ.स.) ख़लीलुल्लाह (अल्लाह के दोस्त) नमरूद की दहकती आग का बाग़ बन जाना, काबा की तामीर।
4 हज़रत इस्माईल (अ.स.) ज़बीहुल्लाह (अल्लाह की राह में क़ुरबानी) ज़मज़म का चश्मा फूटना और क़ुरबानी की सुन्नत।
5 हज़रत यूसुफ़ (अ.स.) हुस्न व सब्र के पैकर कुएं से मिस्र के तख़्त तक (अहसनुल क़सस)।
6 हज़रत मूसा (अ.स.) कलीमुल्लाह (अल्लाह से कलाम करने वाले) असा (लाठी) का अज़दहा बनना, समंदर चीरना, फ़िरऔन का डूबना।
7 हज़रत यूनुस (अ.स.) ज़ुन्नून (मछली वाले पैग़ंबर) मछली के पेट में 40 दिन तक ज़िंदा रहना और तौबा।
8 हज़रत अय्यूब (अ.स.) सब्र के अज़ीम मिसाल सालों की शदीद बीमारी में भी शुक्र व सब्र।
9 हज़रत ईसा (अ.स.) रूहूल्लाह व कलिमतुल्लाह बिना बाप के पैदाइश, मुर्दों को ज़िंदा करना, आसमान पर उठाया जाना।
10 हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ ख़ातिमुन नबिय्यीन, रहमतुल लिल आलमीन पवित्र कुरआन, वाक़या-ए-मेअराज, शक्कुल क़मर (चांद के दो टुकड़े)।

अहम अंबिया-ए-किराम के मुकद्दस वाकयात का निचोड़

1. हज़रत आदम (अ.स.) और इंसानियत की शुरुआत

अल्लाह तआला ने हज़रत आदम (अ.स.) को मिट्टी से पैदा फरमाया और फ़रिश्तों को हुक्म दिया कि वे आदम को सजदा करें। इब्लीस (शैतान) ने घमंड में आकर सजदा करने से इनकार कर दिया और मर्दूद हो गया। जन्नत में रहने के बाद जब भूलवश ममनूआ (निषिद्ध) दरख़्त का फल खा लिया, तो हज़रत आदम और बीबी हव्वा (अ.स.) ने यह मुबारक़ तौबा की: ‘रब्बना ज़लम्ना अनफ़ुसना व इल-लम तग़्फ़िर लना व तरहम्ना लनकूनन्ना मिनल ख़ासिरीन’। अल्लाह ने उनकी तौबा क़बूल फरमाई और उन्हें ज़मीन पर अपना ख़लीफ़ा बनाया।

2. हज़रत इब्राहीम (अ.स.) की आज़माइशें और तौहीद की दावत

हज़रत इब्राहीम (अ.स.) ने अपने दौर के ज़ालिम बादशाह नमरूद और बुतपरस्त क़ौम के सामने बेख़ौफ़ होकर सिर्फ एक अल्लाह की इबादत का ऐलान किया। जब उन्हें दहकती हुई आग के अलाव में फेंका गया, तो अल्लाह ने आग को हुक्म दिया: ‘या नारु कूनी बरदंव-व सलामन अला इब्राहीम’ (ऐ आग! इब्राहीम पर ठंडी और सलामती वाली बन जा)। बाद में आपने अपने प्यारे बेटे हज़रत इस्माईल (अ.स.) को अल्लाह के हुक्म पर क़ुरबानी के लिए पेश किया, जिसकी याद में आज पूरी दुनिया में ईद-उल-अज़हा मनाई जाती है।

3. हज़रत यूसुफ़ (अ.स.) – अहसनुल क़सस (सबसे बेहतरीन क़िस्सा)

कुरआन मजीद की पूरी एक सूरह (सूरह यूसुफ़) हज़रत यूसुफ़ (अ.स.) के वाक़ये पर नाज़िल हुई है। भाइयों का हसद (जलन), गहरे अंधेरे कुएं में फेंका जाना, मिस्र के बाज़ार में बिकना, बेगुनाही में कई साल क़ैदख़ाने की सज़ा काटना, और फिर अपने पाक दामन व सब्र की बदौलत पूरे मिस्र का अज़ीज़ (शासक) बनना—यह क़िस्सा सिखाता है कि जो अल्लाह पर भरोसा और सब्र करता है, अल्लाह उसे कभी ज़लील नहीं होने देता।

4. हज़रत मूसा (अ.स.) और ज़ालिम फ़िरऔन का अंजाम

फ़िरऔन ने ख़ुदाई का दावा किया और बनी इसराईल के मासूम बच्चों को क़त्ल करवाता रहा। अल्लाह की क़ुदरत देखिए कि उसी फ़िरऔन के महल में हज़रत मूसा (अ.स.) की परवरिश हुई। जब हज़रत मूसा ने तौहीद की दावत दी, तो फ़िरऔन ने झुठला दिया। आख़िरकार अल्लाह ने लाल समंदर (बहर-ए-अहमर) में रास्ता बनाकर हज़रत मूसा और मोमिनों को पार उतारा और फ़िरऔन को उसके लश्कर समेत ग़र्क़ (डूबो) कर दिया।

कसासुल अंबिया से हासिल होने वाले 5 अज़ीम सबक़

  • सिर्फ एक अल्लाह पर तवक्कुल: हर नबी की ज़िंदगी का बुनियादी पैग़ाम तौहीद और हर हाल में अल्लाह पर कामिल भरोसा रहा है।
  • मुसीबतों पर सब्र: दुनिया की कोई भी परेशानी अंबिया की आज़माइशों से बड़ी नहीं हो सकती। सब्र ही आख़िरकार कामयाबी दिलाता है।
  • तकब्बुर (घमंड) की हलाकत: नमरूद, क़ारून और फ़िरऔन की हलाकत यह साबित करती है कि ज़ुल्म और घमंड का अंजाम हमेशा रुसवाई है।
  • दुआ की ताक़त: हज़रत यूनुस की मछली के पेट में मांगी गई दुआ, हज़रत अय्यूब की बीमारी में मांगी गई दुआ दर्शाती है कि अल्लाह हर हाल में अपने बंदे की सुनता है।
  • अंतिम नबी ﷺ की पैरवी: तमाम अंबिया ने आख़िरी नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ की आमद की बशारत दी, जिनकी शरीअत पर चलना ही निजात का रास्ता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. कसासुल अंबिया का क्या अर्थ होता है?

कसासुल अंबिया (Qasasul Ambiya) अरबी लफ़्ज़ है जिसका मतलब होता है ‘अंबिया-ए-किराम (पैग़ंबरों) के सच्चे वाक़यात और क़िस्से’। यह कुरआन मजीद और सहीह अहादीस में बयान किए गए पैग़ंबरों की तारीख़ी दास्तान है।

2. कुरआन मजीद में कुल कितने अंबिया का नाम आया है?

पवित्र कुरआन मजीद में नाम लेकर कुल 25 अंबिया-ए-किराम (अलैहिमुस्सलाम) का ज़िक्र आया है, जिनमें हज़रत आदम (अ.स.) पहले और हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ आख़िरी नबी हैं।

3. कुरआन में किस नबी के वाक़ये को ‘अहसनुल क़सस’ (सबसे ख़ूबसूरत क़िस्सा) कहा गया है?

हज़रत यूसुफ़ (अलैहिस्सलाम) के मुकद्दस वाक़ये को सूरह यूसुफ़ में अल्लाह तआला ने ‘अहसनुल क़सस’ यानी सबसे बेहतरीन और ख़ूबसूरत क़िस्सा फ़रमाया है।

4. कसासुल अंबिया की सबसे मशहूर किताब किसने लिखी है?

इस्लामी इतिहास में सबसे मशहूर कसासुल अंबिया मशहूर मुफ़स्सिर व मुहद्दिस अल्लामा इब्ने कसीर (रह.) की किताब ‘क़ससुल अंबिया’ है, जो उनकी अज़ीम किताब ‘अल-बिदाया वन-निहाया’ का हिस्सा है।

Mariya Ansari
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Mariya Ansari

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