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सहीह बुखारी हिंदी में | Sahih Bukhari Hindi (मुकम्मल हदीस शरीफ, जिल्द व तर्जुमा)

By Mariya Ansari •

इस्लामी शरीअत में पवित्र कुरआन मजीद के बाद सबसे बड़ा, मोअतबर और प्रामाणिक स्रोत हदीस-ए-रसूल ﷺ है। तमाम उम्मत-ए-मुस्लिमा का इस बात पर इज्मा (सहमति) है कि ‘असह्ह-उल-कुतुब बाद किताबिल्लाह’ यानी अल्लाह की किताब कुरआन मजीद के बाद रू-ए-ज़मीन पर सबसे सहीह और मुस्तनद किताब ‘सहीह अल-बुख़ारी’ (Sahih Bukhari In Hindi) है। इसे इमाम मुहम्मद बिन इस्माईल अल-बुख़ारी (रह.) ने 16 साल की मुसलसल मेहनत और हज़ारों मील के सफ़र के बाद मुरत्तब (संकलित) फरमाया था।

आज इंटरनेट पर लाखों हिंदी भाषी मुसलमान Sahih Bukhari Hindi PDF और सहीह बुख़ारी की हदीसों की तलाश करते हैं। इस मक़ाले में हम सहीह बुख़ारी की अहमियत, इमाम बुख़ारी की सवानिह (जीवनी), इसमें मौजूद अबवाब (अध्याय), और रोज़मर्रा ज़िंदगी से जुड़ी मशहूर हदीसों का हिंदी तर्जुमा आसान अल्फ़ाज़ में पेश कर रहे हैं।

सहीह बुख़ारी शरीफ़: एक नज़र में

मुसन्निफ़ (संकलनकर्ता): अमीरुल मोमिनीन फ़िल हदीस इमाम मुहम्मद बिन इस्माईल अल-बुख़ारी (रह.)
पैदाइश: 194 हिजरी (810 ईस्वी), बुख़ारा (मौजूदा उज़्बेकिस्तान)
मुद्दत-ए-तसनीफ़: 16 साल (मक्का मुकर्रमा, मदीना मुनव्वरा व बसरा में संकलन)
कुल हदीसों की तादाद: 7,563 (तकरार के साथ) और लगभग 2,602 (बग़ैर तकरार)
ख़ास बात: इमाम बुख़ारी हर एक हदीस को लिखने से पहले ग़ुस्ल फरमाते और 2 रकात नफ़िल नमाज़ पढ़कर इस्तिख़ारा करते थे।

इमाम बुख़ारी (रह.) का मुख़्तसर तआरुफ़ व तक़वा

इमाम बुख़ारी का नाम मुहम्मद और कुन्नियत अबू अब्दुल्लाह थी। बचपन ही में वालिद का साया सर से उठ गया। आपकी वालिदा बड़ी नेक और इबादतगुज़ार ख़ातून थीं। बचपन में इमाम बुख़ारी की आंखों की बीनाई (रोशनी) चली गई थी, लेकिन वालिदा की रो-रोकर मांगी गई दुआओं की बरकत से अल्लाह ने उनकी बीनाई वापस लौटा दी।

अल्लाह तआला ने इमाम बुख़ारी को बेमिसाल हाफ़िज़े (स्मरण शक्ति) से नवाज़ा था। उन्हें लगभग 6 लाख अहादीस सनद (सूत्र) समेत याद थीं। उन्होंने हदीस जमा करने के लिए शाम, मिस्र, हिजाज़ (मक्का व मदीना), कूफ़ा, और बसरा का लंबा सफ़र पैदल तय किया। जब तक किसी हदीस के तमाम रावी (बयान करने वाले) 100% सच बोलने वाले, तक़वे वाले और ज़हीन साबित नहीं होते थे, वे उस हदीस को अपनी किताब में शामिल नहीं करते थे।

सहीह बुख़ारी के अहम अबवाब (किताबें)

सहीह बुख़ारी में ज़िंदगी के हर शोअबे (पहलू) से मुताल्लिक़ 97 अबवाब (किताबें) मौजूद हैं:

बाब का नाम (अरबी) हिंदी नाम विषय / तफ़्सील
كتاب بدء الوحي किताब बदउल वही वही की शुरुआत, ग़ार-ए-हिरा का वाक़या और नीयत की अहमियत।
كتاب الإيمان किताबुल ईमान ईमान के अरकान, हया, और अल्लाह व रसूल से सच्ची मुहब्बत।
كتاب العلم किताबुल इल्म दीनी तालीम की फ़ज़ीलत, उस्ताद व शागिर्द के आदाब।
كتاب الوضوء والغسل किताबुल वुज़ू व ग़ुस्ल पाकी, तहारत, वुज़ू और ग़ुस्ल के मुकम्मल सुन्नत अहकाम।
كتاب الصلاة किताबुस-सलाह (नमाज़) 5 वक़्त की नमाज़, रकात, जुमा, ईदैन, जनाज़ा और तशह्हुद।
كتاب الأدب والدعوات किताबुल अदब व दुआ अख़लाक़, वालिदैन की खिदमत, मसनून दुआएं और अज़कार।

सहीह बुख़ारी शरीफ़ की 4 मशहूर और बुनियादी हदीसें

1. सहीह बुख़ारी की पहली हदीस (नीयत का फलसफ़ा)

इमाम बुख़ारी ने अपनी किताब का आग़ाज़ इस अज़ीम हदीस से फरमाया है:

إِنَّمَا الأَعْمَالُ بِالنِّيَّاتِ، وَإِنَّمَا لِكُلِّ امْرِئٍ مَا نَوَى

उच्चारण: इन्नमल आमा-लु बिन-निय्यात, व इन्नमा लिकुल्लिम-रिइम-मा नवा।

तर्जुमा: “आमाल (कर्मों) का दारोमदार नीयतों पर है, और हर इंसान को वही मिलेगा जिसकी उसने नीयत की।” (सहीह बुख़ारी, हदीस 1)

2. सच्चा मुसलमान कौन है?

المُسْلِمُ مَنْ سَلِمَ المُسْلِمُونَ مِنْ لِسَانِهِ وَيَدِهِ

उच्चारण: अल-मुस्लिमु मन सलिमल मुस्लिमूना मिल-लिशानिही व यदिह।

तर्जुमा: “मुसलमान वह है जिसकी ज़बान और हाथ (की तकलीफ़) से दूसरे मुसलमान महफ़ूज़ रहें।” (सहीह बुख़ारी, हदीस 10)

3. सबसे बेहतरीन इंसान कौन?

خَيْرُكُمْ مَنْ تَعَلَّمَ الْقُرْآنَ وَعَلَّمَهُ

उच्चारण: खैरुकुम मन तअल्लमल क़ुरआना व अल्लमहु।

तर्जुमा: “तुम में से सबसे बेहतरीन इंसान वह है जो कुरआन सीखे और दूसरों को सिखाए।” (सहीह बुख़ारी, हदीस 5027)

सहीह बुख़ारी हिंदी पीडीएफ (PDF) पढ़ने के आदाब

हदीस-ए-रसूल ﷺ का मुताला करते वक़्त एक मुसलमान को अदब और एहतियात का ख़ास ख़्याल रखना चाहिए:

  • बा-वुज़ू होकर पढ़ना: हदीस शरीफ़ रसूलुल्लाह ﷺ के मुकद्दस फ़रमान हैं, इसलिए इसे बा-वुज़ू होकर अदब के साथ पढ़ना चाहिए।
  • मुस्तनद अनुवाद का चयन: हमेशा उलमा-ए-किराम द्वारा प्रमाणित सहीह बुख़ारी हिंदी तर्जुमे (जैसे दारुस्सलाम या मशहूर मदारिस के तर्जुमे) का अध्ययन करें।
  • बग़ैर इल्म के फतवा न लगाना: हदीस के लफ्जी मानी पढ़कर खुद से शरीअत के अहकाम तय नहीं करने चाहिए, बल्कि उलमा व फ़ुक़हा की शरह (व्याख्या) देखनी चाहिए।
  • दुरूद शरीफ़ का एहतिमाम: जब भी हुज़ूर ﷺ का नाम-ए-मुबारक़ आए तो ज़बान से ‘सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम’ ज़रूर कहें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. सहीह बुख़ारी में कुल कितनी हदीसें हैं?

तकरार (दोहराव) के साथ सहीह बुख़ारी में कुल 7,563 हदीसें हैं। अगर मुकर्रर (दोहराई गई) हदीसों को हटा दिया जाए, तो मुस्तक़िल हदीसों की संख्या लगभग 2,602 है।

2. सहीह बुख़ारी को इतना मोअतबर (प्रामाणिक) क्यों माना जाता है?

इमाम बुख़ारी ने हदीस की सेहत (सच्चाई) परखने के लिए दुनिया के सबसे सख्त तरीन उसूल बनाए। उन्होंने सिर्फ़ उन अहादीस को शामिल किया जिनके तमाम रावी मुत्तक़ी, इंतिहाई सच बोलने वाले, और जिनका आपस में मुलाक़ात का सुबूत मौजूद था।

3. ‘सिहाह सित्ता’ (Sihah Sitta) क्या है?

अहले सुन्नत वल जमाअत के नज़दीक हदीस की 6 सबसे मोअतबर किताबों को सिहाह सित्ता कहा जाता है: 1. सहीह बुख़ारी, 2. सहीह मुस्लिम, 3. सुनन अबू दाऊद, 4. जामिअ तिर्मिज़ी, 5. सुनन नसाई, और 6. सुनन इब्ने माजा। इनमें सहीह बुख़ारी सबसे पहले दर्जे पर है।

4. क्या आम इंसान सीधे सहीह बुख़ारी पढ़कर खुद फ़ैसले कर सकता है?

हदीस शरीफ़ पढ़ना और बरकत हासिल करना हर मुसलमान के लिए सवाब है। लेकिन किसी शरई मसले पर हुक्म लगाने के लिए हदीस के साथ-साथ कुरआन के आम-ख़ास अहकाम और फ़ुक़हा-ए-किराम की तशरीह को समझना ज़रूरी होता है।

Mariya Ansari
लेखक के बारे में

Mariya Ansari

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