कभी-कभी जिंदगी में कोई शख्स हमारे इतना करीब होता है कि हमें लगता है उसके बिना सब कुछ अधूरा है। हम उसकी इज्जत करते हैं, उस पर भरोसा करते हैं और दिल से उसके साथ जुड़े होते हैं। लेकिन जब वही शख्स बार-बार दिल दुखाए, भरोसा तोड़ दे या ऐसा रवैया अपनाए जिसकी हमने उससे उम्मीद नहीं की थी, तो धीरे-धीरे वह दिल से उतरने लगता है।
“जो शख्स मेरे दिल से उतर गया, फिर उसका मेरे सामने होना या न होना एक जैसा हो जाता है।”
ये अल्फाज इंसानी जज्बात को बयान करते हैं, लेकिन इन्हें कुरान की आयत या किसी सहीह हदीस के तौर पर नहीं लेना चाहिए। इस्लाम हमें रिश्तों, मोहब्बत और नाराजगी के मामले में भी इंसाफ और सब्र का रास्ता दिखाता है।
जब कोई दिल से उतर जाए (Jo shakhs mere dil se utar gaya)
किसी का दिल से उतर जाना अक्सर एक दिन में नहीं होता। कभी एक ही शख्स को बार-बार माफ किया जाता है, उसकी गलतियों को नजरअंदाज किया जाता है और रिश्ता बचाने की कोशिश की जाती है। लेकिन जब भरोसा बार-बार टूटता है, तो एक वक्त ऐसा आता है जब इंसान के अंदर पहले जैसी मोहब्बत और अपनापन नहीं रहता।
ऐसे वक्त में दिल में गुस्सा और बदले की भावना रखने के बजाय मामला अल्लाह के हवाले कर देना बेहतर है। हर रिश्ता हमारी मर्जी के मुताबिक नहीं चलता और हर शख्स हमेशा हमारी जिंदगी का हिस्सा बना रहे, यह भी जरूरी नहीं है।
दिल टूटने पर इस्लाम क्या सिखाता है?
इस्लाम इंसान को अपने जज्बात से इनकार करना नहीं सिखाता। दिल का दुखी होना, किसी के चले जाने का गम होना या किसी के रवैये से तकलीफ पहुंचना इंसानी फितरत का हिस्सा है। लेकिन इस्लाम यह जरूर सिखाता है कि किसी की वजह से अपने दिल में नफरत, हसद और बदले को जगह न दी जाए।
अगर किसी ने आपके साथ गलत किया है, तो अल्लाह उससे अच्छी तरह वाकिफ है। हर बार अपनी सफाई देना और हर शख्स को अपनी तकलीफ समझाना जरूरी नहीं होता। कुछ मामले अल्लाह के हवाले कर देना ही दिल के सुकून के लिए बेहतर होता है।
माफ करना और दोबारा भरोसा करना अलग है
किसी को माफ कर देने का मतलब यह जरूरी नहीं कि उस शख्स को दोबारा वही जगह दे दी जाए जो पहले उसके पास थी। माफी दिल को नफरत से बचाने के लिए हो सकती है, जबकि भरोसा दोबारा हासिल करना अलग बात है।
अगर किसी शख्स के रवैये से बार-बार तकलीफ मिल रही हो, तो उससे मुनासिब फासला रखना भी कभी-कभी जरूरी हो जाता है। बस इस फासले को नफरत, बदले या जुल्म में तब्दील नहीं होने देना चाहिए।
अल्लाह दिल का हाल जानता है
कभी इंसान अपनी तकलीफ दूसरों को नहीं समझा पाता। चेहरे पर सब कुछ ठीक नजर आता है, लेकिन दिल के अंदर बहुत कुछ चल रहा होता है। ऐसे वक्त में याद रखना चाहिए कि अल्लाह दिलों के हाल को जानता है।
जिस शख्स के चले जाने या बदल जाने से दिल टूट गया हो, उसी को अपनी पूरी जिंदगी का मकसद बना लेना ठीक नहीं है। इंसान बदल सकते हैं, रिश्ते बदल सकते हैं और हालात भी बदल जाते हैं, लेकिन अल्लाह पर भरोसा मोमिन को मुश्किल वक्त में संभालता है।
जो दिल से उतर गया, उसके लिए नफरत मत रखो
किसी का दिल से उतर जाना और किसी से नफरत करना एक बात नहीं है। हो सकता है आप किसी शख्स से पहले जैसा रिश्ता न रखना चाहें, लेकिन फिर भी उसके लिए बुरा न चाहें।
कभी-कभी खामोशी से पीछे हट जाना, बदला लेने से ज्यादा बेहतर होता है। अपने दिल को नफरत से भरने के बजाय अल्लाह से दुआ करें कि वह आपको सुकून दे, आपके दिल को साफ रखे और जो रिश्ता आपके हक में बेहतर नहीं है, उसके बदले आपको उससे बेहतर अता फरमाए।
जिंदगी में हर शख्स हमेशा साथ रहने के लिए नहीं आता। कुछ लोग हमें मोहब्बत का मतलब समझाते हैं और कुछ हमें यह सिखाकर चले जाते हैं कि अपने दिल, इज्जत और सुकून की हिफाजत करना भी जरूरी है।
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