नमाज़ के दौरान हम कई आयतें, दुआएं और अज़कार पढ़ते हैं। इन्हीं में एक बहुत अहम हिस्सा अत्तहियात है, जिसे तशह्हुद भी कहा जाता है। नमाज़ में बैठने की हालत में इसे पढ़ा जाता है और इसमें अल्लाह तआला की बड़ाई बयान करने के साथ नबी मुहम्मद ﷺ पर सलाम और ईमान की गवाही शामिल होती है।
अत्तहियात क्या है?
अत्तहियात नमाज़ में पढ़ा जाने वाला तशह्हुद है। इसे नमाज़ में बैठने की अवस्था, यानी क़ायदा में पढ़ा जाता है। इसकी शुरुआत “अत्तहिय्यातु लिल्लाहि…” से होती है, इसलिए आम बोलचाल में बहुत से लोग इसे सिर्फ अत्तहियात के नाम से जानते हैं।
इसमें सबसे पहले इस बात का इकरार किया जाता है कि तमाम इबादतें, बंदगी और पाक चीजें अल्लाह के लिए हैं। इसके बाद नबी मुहम्मद ﷺ पर सलाम भेजा जाता है, फिर अल्लाह के नेक बंदों के लिए सलाम कहा जाता है और आखिर में इस बात की गवाही दी जाती है कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं और मुहम्मद ﷺ उसके बंदे और रसूल हैं।
Attahiyat Dua Arabic Mein
अत्तहियात का अरबी पाठ इस प्रकार है:
اَلتَّحِيَّاتُ لِلّٰهِ وَالصَّلَوَاتُ وَالطَّيِّبَاتُ، اَلسَّلَامُ عَلَيْكَ أَيُّهَا النَّبِيُّ وَرَحْمَةُ اللّٰهِ وَبَرَكَاتُهُ، اَلسَّلَامُ عَلَيْنَا وَعَلَىٰ عِبَادِ اللّٰهِ الصَّالِحِينَ، أَشْهَدُ أَنْ لَا إِلٰهَ إِلَّا اللّٰهُ وَأَشْهَدُ أَنَّ مُحَمَّدًا عَبْدُهُ وَرَسُولُهُ
अगर आप अरबी पढ़ सकते हैं तो अत्तहियात को मूल अरबी में ही पढ़ना और याद करना सबसे बेहतर तरीका है। जो लोग अभी अरबी सीख रहे हैं, वे शुरुआत में हिंदी उच्चारण की मदद ले सकते हैं।
अत्तहियात हिंदी में – Attahiyat Hindi Mein
अत्तहियात का हिंदी उच्चारण इस तरह पढ़ा जा सकता है:
अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्सलवातु वत्तय्यिबातु, अस्सलामु अलैका अय्युहन नबिय्यु व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू, अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस्सालिहीन। अशहदु अल्ला इलाहा इल्लल्लाहु, व अशहदु अन्ना मुहम्मदन अब्दुहू व रसूलुहू।
अगर आप इसे पहली बार याद कर रहे हैं तो पूरी अत्तहियात एक साथ याद करने के बजाय छोटे हिस्सों में पढ़ना ज्यादा आसान रहेगा। पहले शुरुआती हिस्सा याद करें, फिर सलाम वाला हिस्सा और आखिर में शहादत वाले शब्द याद करें।
Attahiyat Lillahi Hindi Mein
इसका शुरुआती हिस्सा है:
अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्सलवातु वत्तय्यिबातु।
इसके बाद पढ़ा जाता है:
अस्सलामु अलैका अय्युहन नबिय्यु व रहमतुल्लाहि व बरकातुहू, अस्सलामु अलैना व अला इबादिल्लाहिस्सालिहीन।
इसके आखिर में अल्लाह की तौहीद और नबी मुहम्मद ﷺ की रिसालत की गवाही दी जाती है।
अत्तहियात का हिंदी तर्जुमा
अत्तहियात का मतलब समझना भी जरूरी है, क्योंकि जब हमें नमाज़ में पढ़े जा रहे शब्दों का अर्थ मालूम होता है तो हम उन्हें ज्यादा ध्यान और समझ के साथ पढ़ सकते हैं।
इसका आसान हिंदी अर्थ है कि सभी आदर, इबादतें और पाक चीजें अल्लाह ही के लिए हैं। ऐ नबी! आप पर सलाम हो और अल्लाह की रहमत और बरकतें आप पर हों। हम पर और अल्लाह के नेक बंदों पर भी सलाम हो।
इसके बाद मुसलमान गवाही देता है कि अल्लाह के सिवा कोई इबादत के लायक नहीं है और मुहम्मद ﷺ अल्लाह के बंदे और उसके रसूल हैं।
अत्तहियात का मतलब क्या है?
अत्तहियात में एक मुसलमान अपने ईमान की बहुत बुनियादी बातों को दोहराता है। शुरुआत में वह अल्लाह तआला की बड़ाई और उसकी बंदगी का इकरार करता है। इसके बाद नबी ﷺ पर सलाम पेश करता है और फिर खुद के साथ सभी नेक बंदों के लिए सलाम की दुआ करता है।
अत्तहियात का आखिरी हिस्सा शहादत पर आधारित है। इसमें इंसान इस बात की गवाही देता है कि अल्लाह के अलावा कोई इबादत के लायक नहीं और हज़रत मुहम्मद ﷺ उसके बंदे और रसूल हैं। इस तरह अत्तहियात के अंदर इबादत, सलाम और ईमान की गवाही तीनों बातें एक साथ आ जाती हैं।
नमाज़ में अत्तहियात कब पढ़ी जाती है?
अत्तहियात नमाज़ में बैठने की हालत यानी क़ायदा में पढ़ी जाती है। दो रकअत वाली नमाज़ में दूसरी रकअत के बाद बैठकर तशह्हुद पढ़ा जाता है। तीन या चार रकअत वाली नमाज़ों में भी निर्धारित क़ायदे में अत्तहियात पढ़ी जाती है।
आखिरी क़ायदे में अत्तहियात के बाद आम तौर पर दुरूद-ए-इब्राहीमी और दुआ पढ़ी जाती है, जिसके बाद सलाम फेरकर नमाज़ पूरी की जाती है।
नमाज़ की अलग-अलग रकअत और क़ायदे से जुड़े कुछ मसाइल में फ़िक़्ही विवरण हो सकते हैं, इसलिए किसी खास मस्लक के अनुसार पूरा तरीका सीखने के लिए भरोसेमंद आलिम से मार्गदर्शन लेना बेहतर रहता है।
अत्तहियात के बाद क्या पढ़ना चाहिए?
नमाज़ के आखिरी क़ायदे में अत्तहियात पढ़ने के बाद दुरूद-ए-इब्राहीमी पढ़ा जाता है। इसके बाद दुआ पढ़ी जाती है और फिर दाएं तथा बाएं तरफ सलाम फेरकर नमाज़ पूरी की जाती है।
जो लोग अभी नमाज़ सीख रहे हैं, उनके लिए इस क्रम को समझना काफी मददगार होता है। केवल अत्तहियात याद कर लेना ही काफी नहीं है, बल्कि यह भी मालूम होना चाहिए कि उससे पहले और उसके बाद नमाज़ में क्या पढ़ा जाता है।
Full Attahiyat Hindi Mein कैसे याद करें?
अगर आप Full Attahiyat Hindi Mein याद करना चाहते हैं तो इसे एक ही बार में रटने की कोशिश न करें। शुरुआत के कुछ शब्द रोज पढ़ें और जब वे अच्छी तरह याद हो जाएं तो अगला हिस्सा जोड़ते जाएं। इस तरीके से याद करने पर शब्दों के आपस में मिल जाने की संभावना भी कम रहती है।
अत्तहियात को सुनकर सीखना भी काफी उपयोगी है। किसी भरोसेमंद क़ारी या अच्छे अरबी शिक्षक से सही उच्चारण सुनें और उसी के साथ दोहराएं। हिंदी में लिखा उच्चारण शुरुआत में मदद कर सकता है, लेकिन अरबी के कई अक्षरों की सही आवाज़ हिंदी लिपि में पूरी तरह जाहिर नहीं हो पाती।
इसलिए धीरे-धीरे कोशिश करें कि आप मूल अरबी देखकर अत्तहियात पढ़ना सीख जाएं।
Attahiyat Ki Surat Hindi Mein
बहुत से लोग Google पर “Attahiyat Ki Surat Hindi Mein” भी सर्च करते हैं। यहां एक बात समझ लेना उपयोगी है कि अत्तहियात को आम तौर पर तशह्हुद कहा जाता है। लोग इसकी शुरुआत “अत्तहिय्यातु लिल्लाहि…” से होने की वजह से इसे अत्तहियात के नाम से जानते हैं।
अगर आप इसे नमाज़ के लिए याद कर रहे हैं, तो केवल हिंदी उच्चारण को देखने के बजाय अरबी पाठ, उच्चारण और तर्जुमा तीनों को साथ में पढ़ें। इससे आपको शब्द याद करने के साथ उनका मतलब भी समझ आएगा।
अत्तहियात से जुड़े आम सवाल
अत्तहियात क्या है?
अत्तहियात नमाज़ में बैठकर पढ़ा जाने वाला तशह्हुद है। इसमें अल्लाह की बंदगी का इकरार, नबी मुहम्मद ﷺ पर सलाम और ईमान की गवाही शामिल है।
अत्तहियात की शुरुआत कैसे होती है?
अत्तहियात की शुरुआत “अत्तहिय्यातु लिल्लाहि वस्सलवातु वत्तय्यिबातु” से होती है।
Attahiyat Hindi Mein कैसे पढ़ें?
जो लोग अरबी नहीं पढ़ सकते, वे शुरुआत में हिंदी उच्चारण की मदद से अत्तहियात सीख सकते हैं। लेकिन सही उच्चारण के लिए इसे किसी योग्य व्यक्ति से सुनकर सीखना ज्यादा बेहतर है।
अत्तहियात नमाज़ में कब पढ़ते हैं?
अत्तहियात नमाज़ के क़ायदे यानी बैठने की अवस्था में पढ़ी जाती है। आखिरी क़ायदे में इसके बाद दुरूद और दुआ पढ़ी जाती है।
अत्तहियात के बाद क्या पढ़ते हैं?
आखिरी बैठक में अत्तहियात के बाद दुरूद-ए-इब्राहीमी और उसके बाद दुआ पढ़ी जाती है।
अत्तहियात और तशह्हुद क्या एक ही हैं?
नमाज़ में पढ़े जाने वाले इस पाठ को तशह्हुद कहा जाता है। इसकी शुरुआत “अत्तहिय्यातु…” से होने के कारण इसे आम तौर पर अत्तहियात भी कहा जाता है।
निष्कर्ष
अत्तहियात हिंदी में पढ़ने की सुविधा खास तौर पर उन लोगों के लिए मददगार है जो अभी अरबी पढ़ना सीख रहे हैं। हिंदी उच्चारण से शुरुआत की जा सकती है, लेकिन कोशिश यह होनी चाहिए कि धीरे-धीरे अत्तहियात को मूल अरबी और सही उच्चारण के साथ याद किया जाए।