सूरह अल-फ़ातिहा पवित्र कुरआन की पहली सूरह है। इसमें कुल 7 आयतें हैं और यह मक्की सूरह है। इसे “उम्मुल कुरआन” भी कहा जाता है क्योंकि इसमें पूरे कुरआन का मूल संदेश संक्षेप में बताया गया है।
इस सूरह में अल्लाह की प्रशंसा, उसकी रहमत, केवल उसी की इबादत, उसी से मदद माँगने और सीधा रास्ता पाने की दुआ सिखाई गई है। हर मुसलमान अपनी नमाज़ की हर रकअत में इस सूरह का पाठ करता है।
सूरह अल-फ़ातिहा के मुख्य विषय
- अल्लाह की प्रशंसा
- अल्लाह की रहमत
- क़यामत के दिन पर ईमान
- केवल अल्लाह की इबादत
- केवल उसी से मदद माँगना
- सीधी राह की दुआ
- गुमराही से बचने की प्रार्थना
☪ Surah: Surah Al-Fatiha [01]
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
مَالِكِ يَوْمِ الدِّينِ
إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ
اهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ
صِرَاطَ الَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ
غَيْرِ الْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا الضَّالِّينَ
अल्लाह के नाम से शुरुआत करता हूँ, जो अत्यन्त कृपालु और अत्यन्त दयावान है।
सारी प्रशंसा अल्लाह के लिए है, जो सारे संसारों का पालनहार है।
वह अत्यन्त कृपालु और अत्यन्त दयावान है।
वह बदले (क़यामत) के दिन का मालिक है।
हम केवल तेरी ही इबादत करते हैं और केवल तुझी से मदद माँगते हैं।
हमें सीधा रास्ता दिखा।
उन लोगों का रास्ता जिन पर तूने इनाम किया।
उनका नहीं जिन पर तेरा ग़ज़ब हुआ और न उनका जो भटक गए।
In the name of Allah, the Most Compassionate, the Most Merciful.
All praise is for Allah, Lord of all worlds.
The Most Compassionate, the Most Merciful.
Master of the Day of Judgment.
You alone we worship, and You alone we ask for help.
Guide us to the Straight Path.
The path of those You have blessed.
Not the path of those who earned Your anger, nor of those who went astray.
आयत 1
بِسْمِ اللَّهِ الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
हिंदी अर्थ
अल्लाह के नाम से शुरुआत करता हूँ, जो बहुत मेहरबान और बेहद रहम करने वाला है।
सरल समझ
इस आयत से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हर अच्छे काम की शुरुआत अल्लाह के नाम से करनी चाहिए। इससे बरकत आती है और इंसान अपने काम में अल्लाह की मदद चाहता है।
आयत 2
الْحَمْدُ لِلَّهِ رَبِّ الْعَالَمِينَ
हिंदी अर्थ
सारी तारीफ़ें अल्लाह ही के लिए हैं, जो पूरे संसार का पालनहार है।
सरल समझ
हम जो कुछ भी देखते हैं, सब अल्लाह की बनाई हुई नेमतें हैं। इसलिए असली तारीफ़ और शुक्र उसी का है।
आयत 3
الرَّحْمَٰنِ الرَّحِيمِ
हिंदी अर्थ
वह बहुत मेहरबान और बेहद रहम करने वाला है।
सरल समझ
अल्लाह अपने सभी बंदों पर रहमत करता है। वह हमारी गलतियों को माफ़ करने वाला और हमेशा दया करने वाला है।
आयत 4
مَالِكِ يَوْمِ الدِّينِ
हिंदी अर्थ
वह बदले (क़यामत) के दिन का मालिक है।
सरल समझ
एक दिन ऐसा आएगा जब हर इंसान को अपने अच्छे और बुरे कर्मों का हिसाब देना होगा। उस दिन फैसला केवल अल्लाह करेगा।
आयत 5
إِيَّاكَ نَعْبُدُ وَإِيَّاكَ نَسْتَعِينُ
हिंदी अर्थ
हम केवल तेरी ही इबादत करते हैं और केवल तुझी से मदद माँगते हैं।
सरल समझ
मुसलमान का भरोसा सबसे पहले अल्लाह पर होना चाहिए। इबादत भी उसी की करनी है और दिल से मदद भी उसी से माँगनी है।
आयत 6
اهْدِنَا الصِّرَاطَ الْمُسْتَقِيمَ
हिंदी अर्थ
हमें सीधा रास्ता दिखा।
सरल समझ
हम अल्लाह से दुआ करते हैं कि वह हमें ऐसा रास्ता दिखाए जिससे उसकी खुशी मिले और हम सही जीवन जी सकें।
आयत 7
صِرَاطَ الَّذِينَ أَنْعَمْتَ عَلَيْهِمْ غَيْرِ الْمَغْضُوبِ عَلَيْهِمْ وَلَا الضَّالِّينَ
हिंदी अर्थ
उन लोगों का रास्ता जिन पर तूने इनाम किया, न कि उनका जिन पर तेरा ग़ज़ब हुआ और न उनका जो भटक गए।
सरल समझ
हम अल्लाह से दुआ करते हैं कि हमें नेक लोगों जैसा जीवन जीने की तौफ़ीक़ दे और गलत रास्तों से बचाए।
सूरह अल-फ़ातिहा से मिलने वाली सीख
- हर काम की शुरुआत अल्लाह के नाम से करें।
- हमेशा अल्लाह का शुक्र अदा करें।
- केवल उसी की इबादत करें।
- हर मुश्किल में उसी से मदद माँगें।
- सही रास्ते पर चलने की दुआ करते रहें।
- अच्छे कर्म करें क्योंकि हर कर्म का हिसाब होगा।
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